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updated 1:07 PM UTC, Jan 21, 2017
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द्वितीय चरण में 2.28 करोड़ मतदाता ,जानिए क्या है नामांकन के नियम

लखनऊ, द्वितीय चरण से सम्बन्धित इन क्षेत्रों में लगभग 2,28,57,081(2.28 करोड़) मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिसमंे लगभग 1,23,74,253(1.23 करोड़) पुरूष मतदाता तथा लगभग 1,04,81,760(1.04 करोड़) महिला मतदाता एवं 1,068 थर्ड जेन्डर शामिल हैं। द्वितीय चरण के मतदान के लिये 14,771 मतदान केन्द्रों तथा 23,693 मतदान स्थलों की स्थापना की गयी है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2017 के द्वितीय चरण में 11 जनपदों के 67 विधानसभा क्षेत्रों में नामांकन प्रक्रिया कल दिनांक 20 जनवरी से प्रारम्भ हो रही है। नामांकन प्रक्रिया पूर्वान्ह् 11.00 बजे अधिसूचना जारी होने के तुरन्त बाद से शुरू हो जायेगी।

प्रत्येक कार्य दिवस में नामांकन पत्र 11.00 बजे से 3.00 बजे के मध्य लिये जायंेगे। उन्होंने बताया कि द्वितीय चरण में 67 विधानसभा सीटों़ के निर्वाचन क्षेत्रों में -1-बेहट 2-नकुड़ 3-सहारनपुर नगर 4-सहारनपुर 5-देवबन्द 6-रामपुर मनिहांरन(अ0जा0) 7-गंगोह 17-नज़ीबाबाद 18-नगीना(अ0जा0) 19-बढ़ापुर 20-धामपुर 21-नहटौर(अ0जा0) 22-बिजनौर 23-चाँदपुर 24-नूरपुर 25-कांठ 26-ठाकुरद्वारा 27-मुरादाबाद ग्रामीण 28-मुरादाबाद नगर 29-कुन्दरकी 30-बिलारी 31-चन्दौसी(अ0जा0) 32-असमोली 33-सम्भल 34-स्वार 35-चमरव्वा 36-बिलासपुर 37-रामपुर 38-मिलक(अ0जा0) 39-धनौरा(अ0जा0) 40-नौगांवा सादात 41-अमरोहा 42-हसनपुर 111-गुन्नौर 112-बिसौली(अ0जा0) 113-सहसवान 114-बिल्सी 115-बदायूॅ 116-शेखूपुर 117-दातागंज 118-बहेड़ी 119-मीरगंज 120-भोजीपुरा 121-नवाबगंज 122-फरीदपुर(अ0जा0) 123-बिथरी चैनपुर 124-बरेली 125-बरेली कैन्टोनमेंट 126-आंवला 127-पीलीभीत 128-बरखेड़ा 129-पूरनपुर(अ0जा0) 130-बीसलपुर 131-कटरा 132-जलालाबाद 133-तिलहर 134-पुवायाॅ(अ0जा0) 135-शाहजहांपुर 136-ददरौल 137-पलिया 138-निघासन 139-गोला गोकरननाथ 140-श्रीनगर(अ0जा0) 141-धौरहरा 142-लखीमपुर 143-कस्ता(अ0जा0) तथा 144-मोहम्मदी।

इन विधानसभा सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 27 जनवरी तथा, नामांकन पत्रों की जाॅच 30 जनवरी, 2017

नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 01 फरवरी, 2017 है।

दूसरे चरण का मतदान 15 फरवरी, 2017 को होगा। सभी विधानसभा क्षेत्रों में वोटों की गिनती 11 मार्च, 2017 को होगी।

नामांकन दाखिल करने के लिए आर. ओ./ए.आर.ओ. के कार्यालय के 100 मीटर के अन्दर केवल 3 वाहन ले जाये जा सकते हैं।

आर.ओ. के कक्ष में उम्मीदवार सहित केवल 05 व्यक्ति उपस्थित रह सकते हैं इनमें उम्मीदवार के अतिरिक्त अन्य चार व्यक्ति सम्मलित होंगे।

मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्यीय दलों के उम्मीदवारों को एक प्रस्तावक तथा गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों के लिये 10 प्रस्तावकों की आवश्यकता होगी।

उम्मीदवार प्रदेश के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से मतदाता हो सकता है, यदि वह उसी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता नहीं है तो उसे मतदाता सूची का उद्धरण दाखिल करना अपेक्षित होगा।

उम्मीदवार के प्रस्तावक/प्रस्तावकों को उसी क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए, जिस क्षेत्र से उम्मीदवार नामांकन भर रहा है।

राजनैतिक दलों द्वारा खडे़ किये गये उम्मीदवारों को फार्म ए तथा बी दाखिल करना होगा। फार्म ए व बी नामांकन दाखिल करने के अंतिम तिथि को 3.00 बजे तक दाखिल किया जाना आवश्यक है।

शपथ पत्र स्टाम्प पेपर पर नोटैराइज होना चाहिए और उसके सारे कालम भरे होने चाहिये।

इस बार प्रत्याशी के लिये नामांकन प्रपत्र में फोटो लगाना तथा नागरिकता सम्बन्धी घोषणा करना अनिवार्य किया गया है।

प्रत्याशी को आयोग के निर्देशानुसार शपथ पत्र पर नो-डिमाॅड सर्टिफिकेट का प्रमाण पत्र यथा विद्युत, पानी, टेलीफोन व किराया(रेन्ट) के विषय में अनिवार्य रूप से देना होगा।

एक उम्मीदवार द्वारा नामांकन पत्रांे के अधिकतम् चार सेट दाखिल किये जा सकते हंै। सामान्य उम्मीदवारों के लिये जमानत राशि 10 हजार रूपये होगी।  अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवारों के लिये जमानत राशि आधी अर्थात पाॅच हजार रूपये होगी।

उम्मीदवार द्वारा चुनाव व्यय की सीमा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए 28 लाख रूपये निर्धारित की गयी है।

उम्मीदवार द्वारा चुनाव खर्च के लिये 20 हजार रूपये से अधिक का भुगतान चेक/ड्राफ्ट द्वारा ही किया जायेगा।

निर्दलीय उम्मीदवार आयोग द्वारा निर्धारित फ्री सिम्बल्स में से किसी एक चुनाव चिन्ह का चयन कर सकते हैं।

पूरी नामांकन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करायी जायेगी।

उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले सरसरी तौर पर एक बार भरे गये विवरणों को देख लेना चाहिये।

उम्मीदवारों द्वारा दाखिल शपथ पत्र रिटर्निंग आफिसर के कार्यालय में नोटिस बोर्ड एवं वैबसाइट पर प्रदर्शित किये जायंेगे।

 

नामांकन दाखिल करते समय उम्मीदवारों को निर्वाचन व्यय रजिस्टर तथा आयोग के प्रमुख निर्देशों की प्रति उपलब्ध करायी जायेगी।

मत देना, अपना अधिकार, बदले में न लो उपहार

बलरामपुर। प्रतिभाएं किसी की मोहताज नहीं होती है। यह संदेश पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवरिया मुबारकपुर के बच्चों ने मतदाता जागरूकता अभियान के तहत आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में दिया। चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यालय के 70 बच्चों ने प्रतिभाग किया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका अनवरजहां ने बताया कि विजयी प्रतिभागियों को मतदाता दिवस के दिन सम्मानित किया जायेगा।

 

मंगलवार को मतदाता जागरूकता अभियान के तहत श्रीदत्तगंज ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवरिया मुबारकपुर में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यालय के 70 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। विद्यालय के शिक्षक वैभव त्रिपाठी व परवीन हुसैन की देखरेख में आयोजित इस प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपने हुनर का लोहा मनवाया।

 

निर्णायक की भूमिका में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका अनवर जहां व मिथलेश कुमारी ने कक्षा आठ के छात्र अजय कुमार की वोट फार बेटर इंण्डिया को पहला, छात्रा शीलू की वोट फार योर च्वाइस, योर वाइस को दूसरा तथा कक्षा 6 के छात्र रवीन्द्र चैधरी की बनाई गयी जितना हो सके करो मतदान को तीसरे स्थान के लिए चुना। वहीं कक्षा आठ की छात्रा सुमन ने नेशनल वोटर डे, कक्षा छह के रमेश कुमार की वोट फार इण्डिया, रंजना सिंह का मत देना अपना अधिकार, बदले में न लो उपहार को सांत्वना पुरस्कार के लिए चुना।

 

इसके अतिरिक्त रिंकी मौर्या, शुभी पाण्डेय, शशिकिता, मनीष पाण्डेय, ऋतु सिंह, अब्दुल कादिर, शंकर, मनजीत तिवारी, चन्द्रावति आदि के बनाये गये पेन्टिंग की भी सरहना की गई। प्रधानाध्यापिका श्रीमती अनवर जहां ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मताधिकार अपना अधिकार होता है। जिससे हम एक अच्छा नेता चुनकर स्वच्छ समाज की स्थापना कर सकते है। इसलिए अपने आसपास के लोगों को भी मतदान के लिए जागरूक करें। उन्होने बताया कि विजयी प्रतिभागियों को मतदाता दिवस के दिन पुरस्कृत किया जायेगा। इस दौरान रामू वर्मा सहित विद्यालय के छात्र-छात्रायें मौजूद रही।

यूपी के मुख्य सूचना आयुक्त समेत 8 सूचना आयुक्त के RTI ज्ञान पर उठे सवाल !

लखनऊ / 17 जनवरी सूचना का अधिकार यानि कि आरटीआई एक्ट साल 2005 में लागू हुआ था l इस लिहाज से इस एक्ट को लागू हुए 12 साल से अधिक हो गये हैं l यूपी के सूचना आयोग में इस समय 1 मुख्य सूचना आयुक्त समेत 8 सूचना आयुक्त कार्यरत हैं lवर्तमान में इन  सभी 9 सूचना आयुक्तों द्वारा आरटीआई की ट्रेनिंग के लिए गाहे-बगाहे प्रदेश बहार के जिलों के दौरे किये जा रहे है पर इसी बीच लखनऊ के एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा सभी 9 सूचना आयुक्तों के आरटीआई एक्ट ज्ञान पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए इन सभी को बहस के लिए खुली चुनौती दे देने से सूचना आयुक्तों द्वारा दी जा रही आरटीआई ट्रेनिंग सबालों के घेरे में आ गई है l

 

इस समाजसेवी ने बीते 28 दिसम्बर को राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी और 8 सूचना आयुक्तों अरविन्द सिंह बिष्ट, सैयद हैदर अब्बास रिज़वी, पारस नाथ गुप्ता,स्वदेश कुमार,विजय शंकर शर्मा, हाफिज उस्मान,राजकेश्वर सिंह व गजेन्द्र यादव के नाम से अलग-अलग चुनौती पत्र प्राप्त कराते हुए आयुक्तों  द्वारा निस्तारित की गई अपीलों और शिकायतों में से आयुक्तों के द्वारा सबसे उत्कृष्ट माने गये 10 मामलों की पत्रावलियों पर आरटीआई एक्ट के परिपेक्ष्य में  आयुक्तों  द्वारा चुनी गई जगह पर मीडिया के समक्ष खुली इन-कैमरा  समीक्षा कराने के लिए खुली चुनौती दी है l

 

लखनऊ निवासी मानवाधिकार कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने बताया कि 9 सूचना आयुक्तों के नाम अलग-अलग प्रेषित चुनौती पत्रों के माध्यम से उन्होंने आयुक्तों को बताया है कि सूचना के अधिकार की हेल्पलाइन नंबर 8081898081 पर प्राप्त शिकायतों,फीडबैक और उनके  अपने अनुभव के आधार पर संजय को अत्यंत खेद के साथ आयुक्तों को अवगत कराना पड़ रहा है कि आयुक्तों द्वारा  द्वारा अपीलों और शिकायतों की सुनवाइयां यांत्रिक रीति से की जा रही हैं l

 

संजय ने अपने पत्र में आयुक्तों पर अपने प्रशासनिक और न्यायिककल्प आदेशों में  विनिश्चय के कारण अभिलिखित नहीं करने का आरोप लगाने के साथ-साथ सुनवाइयों में विवेकहीन व्यवहार कर  सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 19(8),19(9) और 20 के बाध्यकारी प्राविधानों का अनुपालन नहीं किये जाने का भी आरोप लगाया है lयही नहीं, संजय का कहना है कि आयुक्तों द्वारा अपीलों के विनिश्चय अधिनियम की धारा 19(10) में निर्दिष्ट व्यवस्था के अंतर्गत किसी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार न करके मनमानी रीति से किये जा रहे हैं  l

 

 

संजय ने बताया कि संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि आज तक किसी भी आयुक्त ने एक भी अपील या शिकायत का निपटारा अधिनियम के प्राविधानों और अधिनियम की मूल मंशा के अनुसार नहीं किया है और इसीलिये उन्होंने अपने पत्र के माध्यम से सभी 9 सूचना आयुक्तों को खुली चुनौती देते हुए लिखा है कि यदि सूचना आयुक्त संजय के आरोपों को असत्य साबित करना चाहते हैं तो सूचना आयुक्त अपने-अपने द्वारा  निस्तारित की गई अपीलों और शिकायतों में से सूचना औक्तों द्वारा  सबसे उत्कृष्ट माने गये 10 मामलों की पत्रावलियों पर आरटीआई एक्ट के परिपेक्ष्य में  सूचना आयुक्तों द्वारा चुनी गई जगह पर मीडिया के समक्ष संजय के साथ  साथ इन-कैमरा खुली समीक्षा कराने के लिए स्वयं को प्रस्तुत करें और  यदि सूचना आयुक्त  31 जनवरी 2017 तक इस मामले में निर्णय लेकर संजय को अवगत नहीं कराते हैं तो सूचना आयुक्तों की  अक्षमता सिद्ध हो जाने के कारण संजय अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत सूचना आयुक्तों को पदों से हटाने के लिए उच्चतम न्यायालय से कार्यवाही करायेंगे

 


बकौल संजय  अभी तक मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी और 8 सूचना आयुक्तों अरविन्द सिंह बिष्ट, सैयद हैदर अब्बास रिज़वी, पारस नाथ गुप्ता,स्वदेश कुमार,विजय शंकर शर्मा, हाफिज उस्मान,राजकेश्वर सिंह व गजेन्द्र यादव में से किसी भी सूचना आयुक्त ने उनके इस चुनौती पत्र पर किसी भी प्रकार की कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है l

मुश्किल में माया- बसपा की मान्यता रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कल

 

लखनऊ, बहुजन समाज पार्टी द्वारा नोटबंदी के बाद दिल्ली के करोल बाग़ स्थित यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के अपने पार्टी अकाउंट में 02 दिसंबर से 09 दिसंबर 2016 के बीच 104 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा कराये जाने के सम्बन्ध में दायर जनहित याचिका पर कल (18 जनवरी) इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में सुनवाई होगी।

 

याचिकाकर्ता प्रताप चन्द्र की अधिवक्ता डॉ नूतन ठाकुर ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने 29 अगस्त 2014 द्वारा वित्तीय पारदर्शिता सम्बन्धी कई निर्देश पारित किये जिन्हें आयोग ने अपने आदेश दिनांक 19 नवम्बर 2014 द्वारा और अधिक स्पष्ट किया। इन निर्देशों में कहा गया है कि कोई भी राजनैतिक दल उन्हें चंदे में प्राप्त नकद धनराशि को प्राप्ति के 10 कार्यकारी दिवस के अन्दर पार्टी के बैंक अकाउंट में अवश्य ही जमा करा देगा। इन निर्देशों में कहा गया है कि यदि किसी पार्टी ने इन निर्देशों का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ निर्वाचन चिन्ह (आरक्षण एवं बटाई) आर्डर 1968 के प्रस्तर 16ए में पार्टी की मान्यता रद्द करने सहित तमाम कार्यवाही की जा सकती है।

 

डॉ ठाकुर ने कहा कि चूँकि नोटबंदी का आदेश 08 नवम्बर को आया था, अतः इन निर्देशों के अनुसार अधिकतम 20 नवम्बर तक नकद धनराशि बैंक खाते में जमा कर देना चाहिए था पर बसपा ने 2 दिसंबर के बाद 104 करोड़ रुपये जमा कराये, जो सीधे-सीधे इन निर्देशों का उल्लंघन है।

 

अतः याचिका में निर्वाचन आयोग को इन तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए बसपा को नोटिस जारी करते हुए आरोप सही पाए जाने पर निर्वाचन चिन्ह आर्डर के प्रस्तर 16ए के अनुसार कार्यवाही किये जाने की प्रार्थना की गयी है।

स्मार्ट फोन योजना की पंजीयन प्रक्रिया को चुनाव आयोग ने कराया बंद

लखनऊ: 16 जनवरी, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश में विधान सभा सामान्य निर्वाचन की अधिसूचना के अनुक्रम में निर्गत आदर्श आचार संहिता के अनुपालन में राज्य सरकार द्वारा पूर्व में लागू की गयी स्मार्ट फोन योजना के पंजीयन की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया गया है।

 

आई0टी0 एवं इलेक्ट्राॅनिक्स विभाग के विशेष सचिव सुरेन्द्र विक्रम ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में शासन द्वारा प्रदेश में 10वीं पास 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को निःशुल्क स्मार्ट फोन प्रदान करने की योजना लागू की गयी थी, जिसकी पंजीयन तिथि 31 जनवरी, 2017 तक बढ़ा दी गयी थी। इस आदेश के तहत स्मार्ट फोन योजना के पंजीयन की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया गया है।


विशेष सचिव ने बताया कि इस सम्बन्ध में राज्य के सभी मण्डलायुक्तों तथा जिलाधिकारियों को आज (16 जनवरी, 2017) जारी किये गये शासनादेश के माध्यम से सूचित कर दिया गया है।

अखिलेश मुस्लिम विरोधी-मुलायम

 मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष मुुलायम सिंह यादव ने कहा है कि मुख्यमंत्री और उनके बेटे अखिलेश यादव मुस्लिम विरोधी हैं। उन्होंने कहा, अखिलेश की लिस्ट में मुस्लिम प्रत्याशी कम हैं। जनता के बीच सन्देश गया है कि अखिलेश मुसलमान विरोधी है। अखिलेश ने कई मंत्रियो को बेवजह पार्टी से निकाला। सोमवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए मुलायम ने कहा, अखिलेश मेरी कदर नहीं करता। वह हमारा बेटा है, पर हमें मालूम नहीं था कि वह इस तरह विरोधियों से मिल जाएगा। वह दूसरे (रामगोपाल यादव) के हाथों में खेल रहा हैं।

 

मुलायम ने कहा, रामगोपाल यादव ने पार्टी बर्बाद करने में कोई कसर नही छोड़ी। सिम्बल पर फैसला आज आएगा। सिम्बल चाहे जो भी हो, आप साथ दीजिए। चुनाव आयोग का जो भी फैसला होगा, हम उसे स्वीकार करेंगे। इस बीच कार्यकर्ताओ ने पार्टी बचाओ का नारे लगाने शुरू किए, तो मुलायम ने उन्हें डांट कर चुप कराया। अखिलेश पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए मुलायम ने कहा, मैं पार्टी और साइकिल बचाने की पूरी कोशिश कर रहा हूं। अगर वह नहीं सुनता है तो मैं उसके (अखिलेश) खिलाफ लड़ाई लडूंगा। साइकिल सिम्बल किसे दिया जाए निर्वाचन आयोग के फैसले से पहले मुलायम सिंह ने संकेत दिया कि वे किसी और सिम्बल पर चुनाव लड़ लेंगे। उनके संकेत के बाद यह माना जा रहा है कि अखिलेश खेमे को साइकिल का सिम्बल मिल सकता है।

 

हालांकि इसे आवंटित या फ्रीज करने पर अंतिम फैसला 17 जनवरी तक निर्वाचन आयोग को लेना है। सोमवार को मुलायम सिंह ने कहा कि अखिलेश उनसे बात नहीं करते हैं। पिछली बार मुलाक़ात के लिए वे तब आए जब उन्हें डिम्पल यादव (पत्नी) और बच्चों की कसम दी गई। उन्होंने बात भी नहीं सुनी और एक मिनट में उठकर चले गए। इस सन्दर्भ मंे वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र का कहना है कि अब तो सपा ने बहुत कुछ खो दिया है। बात यहाँ तक पहुंच गयी है कि बच्चों की कसम देने के बाद अगर अखिलेष मुलायम की बात भी नहीं सुनते तो अब सपा के दोनों धडों के अनुकूल विधानसभा चुनाव का परिणाम आयेगा यह बहुत कठिन है।

 

नाव हादसा- मुकम्मल आपदा प्रबंधन की दरकार

बिहार सरकार का सरकारी पतंगोत्सव आयोजन हादसे में तब्दील हो गया। इसमें सीधे तौर पर आपदा कुप्रबंधन की नाकामी सामने आ रही है। बिहार में आपदा कुप्रबंधन के चलते गंगा नदी में नौका के डूबने से कई लोगों की जलसमाधी बन गई। यह सब भीड़ प्रबंधन की नाकामी के चलते हुआ। प्रशासन की नाकामी के कारण एक साथ दो हादसों को जन्म हुआ। पहला हादसा पटना में हुआ जहां लोगों की जलसमाधी बन गई, वहीं कुछ घंटों के बाद दूसरा हादसा बंगाल के 24 परगना में हुआ जिसमें कई लोग भगदड़ में कुचलकर मर गए। धार्मिक स्थलों पर ऐसे मौत के तांड़व सिर्फ प्रशासन की लचर व्यवस्था के कारण होते हैं। फौरी तौर पर हमारी सरकारें आपदा प्रबंधन-भीड़ प्रबंधन को कितना भी दुरूस्त करने की बात कहती रहें, लेकिन हादसों के वक्त इनके तमाल कागजी इंतेजामात सफेद हाथी साबित होते हैं। इनकी तैयारियां सिर्फ कागजों में सरकर को दिखाने भर के लिए ही होती है। हमारा आपदा प्रबंधन बहुत कमजोर है। हादसों के वक्त इनसे अच्छा काम तो बहारी लोग करते हैं।

उत्सव स्थलों पर हादसे होने का सिलसिला लगातार जारी हैं। देश में हर साल कहीं न कहीं हादसे होते रहते हैं। पटना के एनआईटी घाट के पास 14 जनवरी को लोगों से भरी एक नाव गंगा नदी में डूब गई। इसमें तकरीबन दो दर्जन से ज्यादा लोगों की जलसमाधी बन गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक गंगा नदी से 25 शव निकाले गए हैं। कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसा तब हुआ जब मकर संक्रांति के मौके पर गंगा पार पतंगबाजी हो रही थी। उसे देखने के लिए उत्सव में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया था जिस कारण वहां भारी भीड़ एकत्र हो गई। उत्सव स्थल तक पहुंचने का मुख्य साधन नौका थी। प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। यहां तक वहां पुलिस की भी तैनाती नहीं की गई थी। नौका को संचालन भी कुछ निजी लोग कर रहे थे। सभी नाव जर्जर हालात में थी। बावजूद इसके नाव वाले क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठा रहे थे। उन्हें रोकने वाला प्रशासनिक अमला नहीं था।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त व्यवस्था न होने के वजह से पूर्व में हुई इस तरह की घटनाओं की एक बार फिर पुनरावर्ती हो गई। सभी हादसों की तरह इस बार भी मुआवजा देकर मामले को शांत कराया जा रहा है। खानापूर्ति हो रही है। जांच के आदेश दिए जा रहे हैं। तमाम तरह की बातें? सवाल उठता है कि क्या यह सब भविष्य में होने वाले हादसों को रोकने का विकल्प है, शायद नहीं? हादसों पर अंकुश लगाने पर क्यों कोई कारगर नीति नहीं अपनाई जाती? हादसे रोकने का विकल्प क्यों नहीं खोजा जाता। पटना हादसे को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि नाव हादसे में जो भी दोषी होंगे, सरकार उन्हें नहीं बख्शेगी। इस बावत उन्होंने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी की है। करीब दो-तीन घंटे तक चली बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि प्रकाश पर्व और कालचक्र पूजा के सफल आयोजन के बाद मकर संक्रांति पर इस आयोजन में आखिर चूक कहां रह गयी? जिस पर किसी अधिकारी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सभी शांत बैठे थे। दरअसल उनकी चुप्पी उनकी नाकामी बयां कर रही थी। हादसे के करीब चैबीस घंटे के बाद मुख्यमंत्री राहत और बचाव की समीक्षा की और हादसे की जांच जल्द पूरा करने का अधिकारियों को निर्देश दिया है। यह सब उसके बाद किया जा रहा है जब सब कुछ खत्म हो चुका है।

धार्मिक स्थलों को लेकर हमेशा एक सवाल उठता है कि किसी भी उत्सव पर एकत्र होने वाली भीड़ को हमारा प्रशासन क्यों मैनेज नहीं कर पाता। हमेशा भीड़ प्रबंधन की नाकाफी सामने आती है। रविवार को पश्चिम बंगाल के 24 परगना रोड के गंगासागर में भगदड़ मचने से करीब नौ तीर्थयात्रियों की मौत हो गयी जबकि तमाम लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वहां भी प्रशासन की नााकमी सामने आई है। हादसा गंगासागर के कचुबेड़िया लॉन्च घाट पर हुआ। पांच नंबर जेटी पर शाम के करीब साढे चार बजे लॉन्च का इंतजार कर रही भीड़ के सामने जैसे ही एक स्टीमर पहुंचा, उसमें सवार होने की जल्दबाजी में वहां भगदड़ मच गयी। धक्का-मुक्की में कुछ लोग गिर गये और उनके ऊपर से लोग भागने लगे। जबकि वहां कुछ पुलिसकर्मी भी खड़े थे, रोकने के वजह तमाशबीन बने हुए थे। शायद उनको इस बात का इल्म नहीं रहा होगा कि यह स्थिति कुछ देर में हादसे में तब्दील हो जाएगी।

पटना के गंगातट पर आयोजित पतंगउड़ान कार्यक्रम के दौरान फैली अव्यवस्था में दर्जर्नों लोगों की मौते व कई लोगों के घायल होने की दुर्घटना के लिए पूर्णरूप से प्रशासनिक व पुलिस व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इस लचर अव्यवस्था में शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी ही चाहिए। भीड़ वाली जगहों पर इस तरह के मामले होते रहते हैं लेकिन फिर भी प्रशासनिक अमला कोई सबक नहीं लेता। हादसों के बाद कोई भी जिम्मेवारी नहीं लेता। हादसों में मरने वालों  और घायलों को मुआवजा देकर मामले को ठंडा कर दिया जाता है। और जांच के नाम पर ठोंग किया जाता है। बिहार में कुछ जगहों पर आज भी नौका द्वारा आया-जाता है। आवाजाही के लिए सुगमता की दरकार है। जब तक लोग एक दूसरे जगहों पर आसानी से आ-जा नहीं सकेंगे। तब तक विकास के हर एक दावे झूठे लगेंगे।

भीड़ से उत्पन होने वाले हादसों को रोकने के लिए कुछ साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व की भगदड़ से हुई घटनाओं को संज्ञान में लेकर सभी राज्यों को दिशा-निर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से साफ कहा है कि उनको एक बात यह ठीक से समझ लेना चाहिए कि अगर किसी जगह बीस-पच्चीस हजार लोग जमा हों तो वहां भगदड़ या हादसे की आशंका लगातार बनी रहती है। वहां पहले से ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लेना चाहिए। सवाल उठना लाजमी है कि सारे तथ्यों को जानने के बावजूद भी राज्य सरकारों ने भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजाम में इतनी पापरवाही क्यों की? भारत के कई शहरों में विभिन्न अवसरों पर राजनैतिक दलों की सभाएं, रैलियां या फिर धार्मिक स्थलों पर आयोजनों में भगदड़ की घटनाएं होती रहती है। बावजूद प्रशासनिक लापरवाही नए रूप में सामने आ जाती हैं।  

पटना के गंगाघाट पर जहां हादसा हुआ है। उस जगह शाम चार बजे के बाद नाव नहीं चलाने का आदेश है। इसके बावजूद भी नाव का संचालन जारी रहा है। सवाल उठता है कि नाव परिचालन चार बजे के बाद नहीं होगी, इसकी घोषणा हुई थी या नहीं और अगर हुई तो किसके कहने पर। इसमें किस अफसर का क्या रोल था, उन्होंने उसका पालन किया या नहीं? तमाम ऐसे पहलू हैं जिन पर गहनता से जांच करनी चाहिए। घटना से पहले भीड़ को एकत्र करने के लिए लोकल प्रशासन ने आयोजन को लेकर अधिकारियों व निजी नाव संचालनकर्ता के बीच कोई माइक्रो प्लानिंग हुई थी या नहीं? सभी जाचं का विषय हैं। नाव हादसे की लचर व्यवस्था को लालू यादव ने भी नीतीश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि इतने बड़े आयोजन के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को समुचित व्यवस्था भी करनी चाहिए थी। पतंगोत्सव सरकार का आयोजन था तो इंतजाम भी उसी तरह का होना चाहिए था। उन्होंने दोषियों पर सख्त कर्रवाई करने की वकालत की है।  

भगदड़ से दुर्घटनाओं के विभिन्न पहलुओं पर जब तक तटस्थता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक उन्हें पूरी तरह से रोका नहीं जा सकेगा। हिंदुस्तान में आबादी के बढने के साथ ही धार्मिक आडंबर व दिखावे का जोर भी बढ़ा है। धर्म के महिमामंडन में कई बार उसकी मूल भावना को ही उपेक्षित किया जाता है और धर्म के जरिए अन्य लाभ लेने की भावना बलवती दिखाई देती है। सरकार व प्रशासन सभी को पता होता है कि धर्मिक स्थलों पर भारी भीड़ होगी। तो भीड़ को रोकने के लिए भीड़ प्रबंधन पर तटस्थता से पहले ही विचार कर उचित रणनीति बना लेनी चाहिए। पर, ऐसा नहीं किया जाता। सब भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। हादसों के बाद कुछ समय के लिए सर्तकता शुरू हो जाती है लेकिन समय बीतने के बाद फिर से सब कुछ भुला दिया जाता है। भविष्य में ऐसे हादसे जन्म न लें, इसके लिए ठोस नीति अपनाने की दरकार है। सिर्फ मुआवजा को विकल्प नहीं समझना चाहिए।

प्रशासन के अलावा सरकारों को पता है कि अधिकतर घटनाएं भीड़ प्रबंधन न होने का कारण हैं। भीड़ प्रबंधन को लेकर हम आज भी दशकों पीछे हैं। इस क्षेत्र में आज तक कोई कारगर नीति नहीं अपनाई गई। और न ही कोई योजना बनाई गई। जो भी योजनाएं बनती हैं वह कागजों तक ही सीमित रहती हैं। धरातल पर सब शून्य? घटना के कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसे ही हो जाता है। बिहार-बंगाल की घटना से सबब लेने की जरूरत है। क्योंकि हर किसी की जिंदगी अनमोल होती है उसे दांव पर लगाने का हमें कोई हक नहीं। आवाम की सुरक्षा सरकारों की पहली जिम्मेदारी होती है। उसे हलके में नहीं लेना चाहिए। उम्मीद की जानी चाहिए कि बिहार सरकार व बंगाल सरकार इन हादसों से कुछ सबक लेंगी। भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए ठोस नीति अपनाई जाएगी।

 

-लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

 

बम बनाने के अवैध कारखाने का भंडाफोड़

गोंडा, उत्तर प्रदेश प्रदेश की गोंडा पुलिस ने आज एक ऐतिहासिक खुलासा किया है। भारी मात्रा में विस्फोटकों, बम बनाने की सामग्रियों एवं उपकरणों के साथ गोंडा पुलिस की क्राइम ब्रांच पुलिस ने कटरा बाजार थाना पुलिस के सहयोग से मोहमदपुर गॉव निवासी इमरान नामक एक शातिर शख्स को गिरफ्तार किया। इमरान इसी गॉव में अपने आटा चक्की पर ये बम बनाता था और इन्हें आपराधिक तत्वों को बेचने का काम करता था। बरामद 1135 ज़िंदा बमों व लगभग 10 हज़ार बम बनाने वाले बड़े पैमाने पर बरामद विस्फोटकों का इस्तेमाल अगले माह ज़िले में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान अशांति फैलाने व मतदाताओं और प्रत्याशियों में दहशत फैलाने के लिए होना था।

 

चुनाव की घोषणा होते ही मतदाताओं व प्रत्याशियों में दहशत फैलाने व मतदान में अशांति कायम करने के लिए आपराधिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं और उनको ताकत प्रदान करने के लिए अवैध असलहों, बमों, विस्फोटकों व शराब फैक्ट्री चालकों व कारोबारियों की जंहा सक्रियता बढ़ जाती है । इसी के तहत जिले एसपी सुधीर सिंह के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए क्राइम ब्रांच की टीम ने कटरा पुलिस के सहयोग से विस्फोटकों व बमों की यह ऐतिहासिक बरामदगी कर इन्हें बनाकर बेंचने वाले इमरान नमक शख्स को गिरफ्तार कर ऐतिहासिक सफलता दर्ज की है। विस्फोटकों व बमों की इतनी बड़ी बरामदगी गोंडा में कभी नहीं हुयी। मोहमदपुर गांव निवासी इमरान नमक शख्स इसी गॉव में आटा चक्की चलता है और इसी आंटा चक्की पर यह इतने बड़े - बड़े हज़ारों जिंदा देशी बेम बनाकर आपराधिक तत्वों को बेंचता है। जंहा इन बमों का प्रयोग चुनाव को प्रभावित करने व मतदान में अशांति फैलाने के लिए होना था वंही इन्हें बनाने के लिए खतरनाक विस्फोटकों और अन्य सामग्रियों को अपने लाइसेंसी चाचा हाफिज से खरीदता था। इसके चाचा हाफिज का लाइसेंस भी समाप्त हो चुका है इसलिए हाफिज पुलिस की गिरफ्त से फरार हो गया।

 

      

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