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updated 6:22 PM UTC, Mar 26, 2017
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सालो तक खूब फला फूला अवैध खनन का कारोबार .. करने लगे अधिकारी कार्यवाही

अम्बेडकरनगर,  जिले में जहां अधिकारियों व सफ़ेद पोस नेताओ और खनन माफियाओं की मिली भगत से पांच साल अवैध खनन निरंतर जारी रहा है । अब सत्ता पलट होते ही एहि अधिकारी अब कारवाही करते नज़र आ रहे है । मिली भगत और दबंगई से चल रहे अवैध बालू घाट पर छापा मार कर करीब 100 से अधिक ट्रकें और कई बालू निकालने की मशीनों को जब्त किया है ।

अम्बेडकरनगर जिले के टांडा तहसील और आलापुर पुर तहसील से होकर सरयू नदी बहती है । जिस पर खनन माफियायों की नज़र हमेशा बनी रहती है । समाजवादी वादी सरकार में खनन माफिया , नेतायों और अधिकारियों की मिली भगत से सरयू की कोख से सफ़ेद बालू का अवैध खनन अनवरत जारी था ।  इन अवैध खनन में अधिकारियों का एक बड़ा हिस्सा भी लगता था । जिले के अधिकारी खनन माफिया इतने दबंग थे की अधिकारी गलती से एक बालू घाट पर कारवाही कर देते है तो , खनन माफिया कलेक्ट्रेट परिसर में ही खनन अधिकारी को बंधक बना कर गाली गलौच करते है।

 

जिले से होकर बह रही सरयू नदी की कोख से वैसे तो चोरी से अवैध बालू खनन होता रहता है और इसकी सप्लाई पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश तक होती है । सरयू नदी के सफ़ेद बालू की ज्यादा मांग रहती है । जिले के जहांगीर गंज थाना क्षेत्र में खनन माफिया इतने बेखैफ थे की एक दिन में कई सौ ट्रकों में अवैध खनन होता रहता था । इतने बड़े अवैध खनन में माफिया बिना अधिकारियो के मिली भगत से अकेले नहीं कर सकते थे । जिले के कई थानों की फ़ोर्स के साथ अधिकारियों ने छापा मारा कार्यवाही किया है । मौके पर अधिकारियों ने बालू भरे 100 ट्रकों को सीज कर दिया और बालू निकालने वाली कई मशीनों 5 लिफ्टर मशीन और दो जेसीबी मशीन को जप्त किया है । जहां इस कारवाही के बाद खनन माफिया फरार होने में सफल रहे तो वहीं उस इलाके के पुलिस अधिकारी एसओ मिली भगत के चलते निलंबित भी कर दिया है । पर महज चार दिन ही हुए है सत्ता परिवर्तन को और अधिकारियो को मुख्य मंत्री योगी के कड़े रुख को देखते हुए डर सताने लगा है । जो अधिकारी अपनी ऑफिसों में बैठ खनन माफियाओं से अपना हिस्सा लिया करते थे बही अब कारवाही के लिए निकल पड़े है । फिलहाल इतने बड़ी कारवाही बाद अधिकारी किसी खनन माफिया का नाम उजागर करने असमर्थ है ।

 

प्रतिबंधित मीट की दावत में दबिश,बिरयानी ले गई पुलिस

नीरज मिश्रा/पीलीभीत। यूपी के सीएम् की सख्ती के बाद भी पीलीभीत जनपद के पूरनपुर थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित मीट की दावत अरेंज की गई। सूचना पाकर जब पुलिस ने छापा मारा तो दाबत में भगदड़ मच गई। लोग खाना छोड़कर इधर उधर भाग लिए। पुलिस ने मौके से कथित रूप से प्रतिबंधित मीट की बिरियानी बरामद कर मुक़दमा दर्ज कर लिया है। इसी के साथ दावत के आयोजक की तलाश की जा रही है।

 

पुलिस ने बताया कि पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव गहलुईया में कल्लू के बेटे की शादी की ख़ुशी में गुरुवार को दावत-ए-वलीमा कार्यक्रम रखा गया था। इसमें मेहमानों के लिए मीट की बिरियानी भी बनाई गई थी। पुलिस को जब सूचना मिली कि बिरियानी में प्रतिबंधित मीट का इस्तेमाल हुआ है। तुरन्त ही प्रभारी कोतवाल एमएस बिष्ट ने कल्लू के घर पर छापा मार दिया। दावत में भगदड़ मच गई,लोग इधर-उधर भाग लिए। पुलिस ने बताया कि दावत का सयोजक कल्लू भी गायब हो गया।

 

पुलिस को मौके से 40 किलो प्रन्धिब न्धित मीट की बिरयानी कब्जे में ले ली। कोतवाल ने बताया कि प्रतिबंधित मीट की बिरियानी तैयार कराने के मामले में आरोपी कल्लू पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। उसकी तलाश तेज़ी से हो रही है।

योगीराज में भी जारी है सामूहिक नकल देखें वीडियों

विवेक कुमार/जौनपुर। प्रदेश में सरकार बदल गई और भाजपा का योगी शासन लागू हो गया है । योगी राज में नए नियम भी लागू होने लगे है  लेकिन  यूपी बोर्ड में चल रहे नकल के  खेल पर कोई नियम लागू होता नही दिख रहा । रोजाना किसी न किसी स्कूल से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही है जिसमे बच्चे धड़ल्ले से नकल करते नजर आ रहे है।

 

ऐसी ही सामूहिक नकल की एक तस्वीर देखने को मिली है जौनपुर के बदलापुर क्षेत्र के  अनारकली यादव इंटर कालेज में जहां आज हाईस्कूल की परीक्षा के दौरान बच्चे किताब लेकर नकल करते नजर आ रहे है । इंटर कालेज में चल रहे इस नकल के खेल पर कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नही है ।

 

लेकिन ये तस्वीरें यूपी बोर्ड और शिक्षा महकमे का मजाक उड़ाती नजर आ रही है। अब देखना ये है कि सीएम योगी के राज में नकल खेल पर कैसे लगाम लगाई जाती है । कहते है कि   पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया लेकिन जो तस्वीर सामने आ रही है उससे तो यही लगता है कि क्या ऐसे ही पढ़ेगा इंडिया ?

अवैध खनन एवं कटान शीघ्र बंद करना सुनिश्चित करें प्रशासन-राकेश सिंह

कन्हैयालाल यादव/बलरामपुर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के पश्चात जिले के भाजपा जिला अध्यक्ष ने प्रशासन को सचेत करते हुए कहा कि भाजपा की प्राथमिकता वाली योजनाओं को सुचारु रुप से संचालित करें तथा जनपद में चल रहे अवैध खनन अवैध कटान तथा खाद्यान्न में व्याप्त भ्रष्टाचार को अविलंब रोक लगाना सुनिश्चित करें अन्यथा इनकी शिकायत ऊपर शासन में की जाएगा

 

गुरुवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष राकेश सिंह तथा नवनिर्वाचित विधायक सदर पलटू राम व तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ला ने भाजपा के एजेंडे में शामिल मुद्दों को शक्ति से अनुपालन करने के लिए जिला प्रशासन को अवगत करते हुए कहा कि भाजपा की प्राथमिकता नकल विहीन परीक्षा तथा जनपद में चल रहे अवैध कटान अवैध खनन तथा पात्रों को उचित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराना प्रशासन सुनिश्चित करें प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया है अधिकारी अपनी मानसिकता बदले उन्होंने कहा कि डायल 100 अवैध खनन की पायलटिंग करना बंद करें और खनन पूरी तरह  बंद होना चाहिए भाजपा पदाधिकारी के अतिरिक्त अन्य किसी व्यक्ति को भाजपा का झंडा लगाने का अधिकार नहीं है


यदि कोई झंडा लगाकर पार्टी का दुरुपयोग करता हुआ पाया जाएगा तो कड़ी कार्यवाही की जाएगी गौ तस्करी तथा अवैध सलाटर शीघ्र बंद कराएं तथा चुनाव के दौरान अन्य पार्टियों के समर्थन में कार्य करने वाले सत्ता आने पर भाजपा विधायकों के पीछे न लगे उन्हें कोई लाभ होने वाला नहीं है वार्ता के दौरान पूर्व जिला अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सिंह उपाध्यक्ष अजय सिंह प्रदीप सिंह विष्णु देव सिंह बृजेंद्र तिवारी मोतीलाल जयसवाल डी पी सिंह तथा आईटी सेल के कार्यकर्ता मौजूद रहे।

समाज के लिए आराध्य है माँ कर्माबाई का जीवन-जन्मदिन विशेष

माँ कर्मा आराध्य हमारी, भक्त शिरोमणी मंगलकारी। सेवा, त्याग, भक्ति उद्धारे, जन-जन में माँ अवतारे।।

 

परम् आराध्य साध्वी भक्ति शिरोमणी माॅ कर्माबाई देश-विदेश में आवासित करोड़ो-करोड़ो सर्व साहू तेली समाज की आराध्य देवी कर्माबाई की गौरव गाथा जन-जन के मानस में श्रद्धा भक्ति के भाव से विगत हजारों वर्षो से अंकित चली आ रही है। इतिहास के पन्नों पर उनकी पावन गाथा तथा उसने सम्बन्धित लोकगीत किंवदतिया और आख्यान इस बात के प्रमाण है कि माॅ कर्मबाई कोई काल्पनिक पात्र नहीं है। माॅ कर्माबाई का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी नगर में चैत्र कृष्ण पक्ष के पाप मोेचनी एकादशी संवत् 1073 सन् 1017ई0 को प्रसिद्ध तेल व्यापारी श्री राम साहू जी के घर में हुआ था। दिल्ली मुम्बई रेलमार्ग पर झांसी नगर रेलवे जक्शन जो वीरांगना गौरव महारानी लक्ष्मीबाई का कार्यक्षेत्र रहा है। इस झांसी नगर में भारी संख्या में प्रतिष्ठित राठौर साहू परिवार निवास करते हैं जो विभिन्न व्यवसाय में अग्रसर है। माॅ कर्माबाई बाथरी वंश की थी। श्री राम साहू की बेटी कर्माबाई से साहू वंश और छोटी बेटी धर्माबाई से राठौर वंश चला आ रहा है। इसलिए साहू और राठौर दोनों तैलिकवंशीय समुदाय के वैश्य समाज हैं।

 

जन्म:- पाप मोचनी एकादशी संवत् 1073 सन् 1017ई0

माॅ कर्माबाई का विवाह मध्य प्रदेश के जिला शिवपुरी की तहसील मुख्यालय नरवर के निवासी पद्मा जी साहू के साथ हुआ था उस समय नरवरगढ़ एक स्वतंत्र स्टेट थी, इनकी बहन धर्माबाई का विवाह राजस्थान के नागौर स्टेट के श्री राम सिंह राठौर के साथ हुआ था, जो घांची कहलाते थे। आज भी नागौर सिरोही, पाली, अलवर, जोतपुर, बाडमेर आदि राजस्थान जिलों के लाखों भाई घांची कहलाते हैं। उनके गोत्र भाटी, परिहार, गहलोद, देवड़ा, बौराहना आदि हैं, जो राजस्थान से निकलकर आन्ध्रा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरान्त आदि प्रान्तों में फैल गये हैं।

 

माॅ कर्माबाई पर अपने पिता की भक्ति भावना और ज्ञान बैराग का बचपन से ही गहन प्रभाव पड़ा था। वे बचपन में ही भक्त मीराबाई की तरह अपने मधुर कंठ से श्रीकृष्ण भक्ति के गीत गुनगुनाया करती थी। उन्हें कृष्ण का बालरूप ही अधिक भाता था इसलिए बालकृष्ण की लीलाओं के मधुर छन्द उनके कंठ से सहज ही प्रवाहित होते रहते थे। उन्हें विवाह करने की स्वप्न में भी इच्छा नहीं थी, किन्तु माता-पिता के आग्रह के कारण इन्हें संसार में भले ही रमना पड़ा, किन्तु उनका मन तो निरन्तर कृष्ण की भक्ति में रमा रहता था। माॅ कर्माबाई के पति का तेल का मुख्य व्यवसाय था। उनके घर में एक साथ कई कोल्हू चलते थे और उनके तेल का व्यवसाय नरवर स्टेट और दूसरे राज्यों तक फैला हुआ था। उनके पति के पास धन की कोई कम नहीं थी इसलिए उनके पति ने तेल के व्यापार को बढ़ाया और तेल को बाहर भेजने के लिए सरलतम पक्के मार्ग की आवश्यकता पड़ी तो उनके पति ने रास्ते में आने वाली नदियों पर कई पुलों का निर्माण कराया। सड़को के किनारे 10-10 मिल के फांसले पर यात्रियों के आरम के लिए सरांय बनवाई। आज भी नरवर शिवपुरी रोड पर एक पुल और दूसर नरवर डबरा रोड पर नरवर से 3 किमी0 की दूरी पर तीसरा पुल वारमती नदी पर बना हुआ है जो वर्षो से माॅ कर्माबाई के पुल नाम से जाने जाते हैं। पुलों और सरायं के निर्माण के कारण माॅ कर्माबाई के परिवार को राजा के द्वेष का पात्र बनना पड़ा। तत्कालीन राज नल के पुत्र ढोला को माॅ कर्माबाई के पति की सम्पन्नता और प्रसिद्धि से जलन होने लगी और उनके तेल के व्यापार को ठप करने का राज दरबार में षडयंत्र रचा गया। माॅ कर्माबाई के पति को राजाज्ञा दी गई कि राजा के सवारी हाथी को असाध्य खुजली का रोग हो गया है जो कड़ुवे तेल में दवा घोल का हाथी को तेल में आकंट डुबाने से ही दूर हो सकता है। इसलिए राज्य के पक्के तालाब को सात दिन में तेल से भरने का फरमान जारी कर दिया गया। प्रयास के बावजूद निर्धारित समय में तालाब नहीं भर सका। समस्त तैलिक समाज के सामने जीवन मरण रोजी-रोटी का प्रश्न खड़ा हो गया। इस अवसर पर माॅ कर्माबाई के पति का चिन्तित होना स्वाभाविक था।  पति की इच्छा जान भक्त कर्माबाई ने प्रभु की याद में अन्तरात्मा की पूरी आवाज लगा दी। तभी भक्त कर्माबाई के कानों में भगवान की वाणी गूंजी और कुण्ड तेल से भर गया नगर में यह बात फैल गई। भक्त कर्माबाई के जयकारों से सारा नगर गूंज गया और समस्त तैलिक समाज को एक महान संकट से छुटकारा मिल गया। माॅ कर्माबाई की ख्याति सारे देश में फैल गई।

 

साहू तेली समाज की आराध्य देवी माँ कर्माबाई का जीवन परिचय

नरवर के सुप्रसिद्ध किले के पूर्व दिशा की ओर उक्त पक्का तालाब आज भी है जो केवल पत्थर की चिनखारी और पट्टियों से बना हुआ है जिनके घाट की सीढ़ियाॅ इस तरह से बनी है कि हाथी भी आराम से तालाब में उतर सकता है। इस तालाब को ‘‘धर्मा तलैया’’ के नाम से जाना जाता है, जो कर्माबाई के धर्म संकट का प्रतीक है। इस धर्मा तलैया में प्रतिवर्ष गणेश प्रतिमाएं विसर्जित की जाती है।

 

ढोला राजा के उक्त कृत्य से क्षुब्ध होकर माॅ कर्माबाई ने नरवर छोड़ने का मन बनाया और पति से निवेदन किया कि हम इस राजा के राज्य में अधिक समय तक न रहें। निर्णय लेने भर की देर थी कि नरवर का अधिकांश तैलिक समाज राजस्थान के नागौर स्टेट के नेतरा कस्बा में रहने चला गया। बाद में राजा ढोला को जब साधु-संतों और नगर के लोगों से माॅ कर्माबाई की कृष्ण भक्ति का चमत्कार ज्ञात हुआ तो वह शर्म और पाश्चाताप करने लगा। राजा ने माॅ कर्माबाई को पुनः नरवर लौटने का निमंत्रण दिया किन्तु माॅ कर्माबाई राजस्थान के नागौर स्टेट के नेतरा कस्बा को ही अपनी कर्मभूमि बनाया। कहते है कि कर्माबाई के नरवरगढ़ को छोड़ने के उपरान्त नरवर के दुर्दिन शुरू हो गये। राज्य में अकाल पड़ा, व्यापार ठप हो गया और प्रजा भूखों मरने लगी। नगरवरगढ़ पर दूसरे राजा ने चढ़ाई की और ढोला राजा को अपदस्थ कर दिया गया।

 

भक्त कर्माबाई की आस्था भगवान श्रीकृष्ण पर दृढतर होती चली गई, लेकिन कर्माबाई के पुत्र ताना जी की अल्पायु में ही मृत्यु और थोड़े समय की अस्वस्थता के बाद उनके पति का भी निधन हो गया। सारा तैलिक समाज गहन शोक में डूब गया। भक्त माॅ कर्माबाई बिलखती ही रह गयी और तत्कालीन प्रथा के अनुसार पति की चिता में ही उन्होंने सती होने का संकल्प कर लिया, उसी समय आकाशवाणी हुई कि बेटी यह ठीक नहीं है तुम्हारे गर्भ में शिशु पल रहा है समय का इन्तजार करों मैं तुम्हें जगन्नाथपुरी में दर्शन दूंगा। माॅ कर्माबाई अपने आराध्य श्रीकृष्ण के आदेश का उल्लंघन कैसे कर सकती थी और वह मान गई, किन्तु अब उन्होंने संसार से मुॅह मोड़कर बालकृष्ण की भक्ति में ही अपना सारा समय व्यतीत करने लगी, और समय जाते देर नहीं लगी। तीन-चार वर्ष बच्चे के लालन-पालन में ही व्यतीत हो गये।  माॅ कर्माबाई का मन आकाशवाणी की ओर जाता कि हमारे आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कब होगें और एक दिन अचानक अपने बच्चें को लेकर झांसी अपने माता-पिता के घर आ गयीं और बच्चे की देखभाल के लिए उन्हें सौंप दिया और एक रात्रि को अकेले ही भगवान को भोग लगाने के लिए खिचड़ी लेकर घर निकल पड़ी। भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पैदल ही चलती हुई चली गयीं।माॅ कर्माबाई को अपने शरीर की सुध-बुध नहीं रहीं। चलते-चलते थक कर वे एक वृक्ष की छाया में विश्राम करने लगी और आंख कब लग गई उन्हें पता ही नहीं चला और जब आंख खुली तो माॅ कर्माबाई ने अपने आपको जगन्नाथपुरी में पाया। यह चमत्कार देखकर माॅ कर्माबाई ने भगवान को कृतज्ञता पूर्वक स्मरण किया। भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए माॅ कर्माबाई जब मन्दिर सीढ़ियाँ चढ़ने लगी तो उनकी दीन दशा देखकर मन्दिर के पण्डा पुजारियों ने उन्हें मन्दिर में प्रवेश नहीं करने दिया और धक्का देकर सीढ़ियों से नीचे गिरा दिया जिससे माॅ कर्माबाई वहीं बेहोश हो गई। पुजारियों ने उन्हें समुद्र के किनारे फेकवा दिया। इसी के बाद जगन्नाथ मन्दिर से अचानक मूर्तियाँ विलुप्त हो गई, इससे मन्दिर में हड़कंप मच गया। पुजारियों ने मूर्तियों को ढूढवाना शुरू किया तो पता चला कि समुद्र के किनारे भारी भीड़ है और भगवान श्रीकृष्ण बालरूप में माॅ कर्माबाई की गोद में बैठकर माॅ के हांथो से बड़े प्यार से खिचड़ी खा रहे थे। यह अलौकिक दृश्य देखकर पुजारियों ने लज्जित होकर भगवान से क्षमा याचना की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम लोगों ने इन्हें मन्दिर में प्रवेश नहीं करने दिया इसलिए मैं स्वयं यहाॅ चला आया। इसी के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण ने माॅ कर्माबाई को वरदान दिया कि मैं अब छप्पन प्रकार के भोग से पहले खिचड़ी का ही भोग ग्रहण करूंगा।

 

समुद्र के तट पर रहकर माॅ कर्माबाई प्रतिदिन अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण को खिचड़ी का ही भोग लगाती थी। मन्दिर से भगवान श्री जगन्नाथ के विलुप्त होने के पश्चात् उनके मुख में माॅ कर्माबाई द्वारा खिलाई गई खिचड़ी के कण को देखकर सभी ने माॅ कर्माबाई की अनन्य भक्ति साधना को स्वीकार किया तभी से माॅ कर्माबाई की खिचड़ी का प्रथम भोग भगवान जगन्नाथ को समर्पित किया जाता है। जगन्नाथपुरी में खिचड़ी का प्रसाद माल-पुआ के साथ भक्तों में वितरित किया जाता है और प्रत्येक गरीब-अमीर, देशी-विदेशी दर्शनार्थी इस भात का प्रसाद खाकर अलौकिक आनन्द का लाभ उठाते हैं और मन्दिर में पोथली में बिक रहे चावल को खरीदकर अपने घरों में लाते हैं, क्योंकि मान्यता है कि विवाह व अन्य शुभ अवसरों पर बन रहे भोजन में उक्त चावल को डाल देने से भोजन कम नहीं पड़ता। इसीलिए यह कहावत प्रसिद्ध है कि ‘‘माॅ कर्मा का भात, जगत पसारे हांथ’’।


माॅ कर्माबाई जगन्नाथपुरी में समुद्र के किनारे ही रहकर काफी समय तक अपने आराध्य बालकृष्ण को खिचड़ी का भोग अपने हांथों से खिलाती रहीं और उनकी बाल लीलाओं का आनन्द साक्षात माँ यशोदा की तरह लेती रहीं। संवत् 1121 चैत्र शुक्ल पक्ष एकम् (सन् 1064) को पंच भौतिक शरीर को त्याग कर परमात्मा में विलीन हो गई। कहते है कि जिस कुटिया में माॅ कर्माबाई ने अपनी अपने शरीर का त्याग किया था उसके आस-पास एक बालक छः माह तक रो-रोकर माँ से खिचड़ी की पुकार लगाता देखा व सुना गया। हमें अपनी आराध्य माॅ कर्माबाई के जीवन से आत्मबल, निर्भीकता, साहस, पुरूषार्थ, समानता और राष्ट्रभावना की शिक्षा मिलती है। वे अन्याय के आगे कभी झुकी नहीं। उन्होंने संसार के हर दुःख-सुख को स्वीकारा और डट कर उसका मुकाबला किया। गृहस्थ जीवन पूर्ण सम्पन्नता के साथ जी कर नारी जाति का सम्मान बढ़ाया। अपनी भक्ति से साक्षात् श्रीकृष्ण के दर्शन किये और अपनी गोद में लेकर बालकृष्ण को अपने हाथों खिचड़ी खिलाई।

मिर्जापुर जिले में भी सड़कों एंटी रोमियो स्क्वायड मजनुओं की धर पकड़ तेज

रामकुमार मिर्जापुर,योगी सरकार के फरमान के बाद मिर्जापुर जिले में भी सड़कों पर  आज उतरी पुलिस की  एंटी रोमियो स्क्वायड की टीम से मचा हड़कंप। टीम ने स्कूल और  कालेज के सामने चेकिंग लगा कर मजनुओं की  धर पकड़ कर रही है ।

शहर में केबी कालेज के पास एंटी रोमियो स्क्वायड टीम की  प्रभारी गीता राय के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल के साथ सड़कों पर उतरी और चेकिंग किया।इस दौरान संदिग्ध लोगो को रोक कर चेकिंग की गयी। टीम के लोग एक वैन भी साथ लेकर चल रहे है जो  मजनुओं को  पकड़ने के बाद  उसी में बैठकर थाने ले जाया जाएगा।

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हालकि चेकिंग के दौरान कोई भी मंजनू हाथ नहीं लगा मगर इस टीम को देख लड़कियों ने जरूर राहत की साँस ली। टीम की चेकिंग के दौरान पहुची एक लड़की का कहना था कि अब देख कर लग रहा है कि कुछ होगा  क्यों की पहले की सरकार से लग ही नहीं रहा था कि कुछ होगा। पुलिस को देख सुरक्षित महसूस करती है। वही इस अभियान पर पुलिस अधिकारी सिओ सीटी बृजेश त्रिपाठी का कहना है कि,एंटी रोमियो टीम के दो दस्तो का गठन कर कालेज के सामने चेकिंग कराई जा रही है। यह संदेश देने की कोशिश की गयी है कि महिलाओं से छेड़ खानी करने वाला बचेगा नहीं ।

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खेत में मिली नवजात बच्ची, बच्ची चाइल्ड प्रोटेक्शन होम में सुरक्षित

गोंडा, गेहूं के खेत में एक नवजात बच्ची लावारिश मिलने से हड़कम्प मच गया। बच्ची की आवाज़ सुनकर पास में काम कर रही महिलाएं चौंक उठीं। शहर की एक समाज सेविका के द्वारा अब यह बच्ची बाल शिशु गृह पहुंच गयी है । आत्मा को झिंझोड़ देने वाली ये खबर उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से है। यहां के मनकापुर कोतवाली क्षेत्र में बैरीपुरवा रामनाथ गॉव में एक किसान के गेहूं के खेत में फूल सी नवजात बच्ची के किलकारियों ने पूरे क्षेत्र में हड़कम्प मचा दिया। पुलिस इस मामले में जहां नवजात के माता-पिता का पता लगाने में जुट गयी है 

 

गोंडा के बालशिशु गृह की सेविकाओं की गोद में सुकून से साँसे ले रही ये नवजात बच्ची मात्र दो दिन पूर्व जन्मी है। ज़िले के मनकापुर क्षेत्र के गॉव बैरीपुरवा में एक गेंहूँ के खेत में ये फूल सी नवजात बच्ची रोते हुए मिली है। बच्ची को शहर की समाज सेविका रूचि मोदी ने गोंडा चाइल्ड प्रोटेक्शन होम के बाल शिशु गृह के सुपुर्द कर दिया है। अब यहां के संचालक उपेंद्र श्रीवास्तव व पुलिस इस उम्मीद पर हाथ पैर मार रहे हैं कि किसी तरह इसके माता पिता का पता चल जाए जिससे मासूम को उनके सुपुर्द किया जा सके। ऐसा न हो पाने पर शिशुगृह प्रबंधन मासूम को एडॉप्शन प्रक्रिया में डालेगा।

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डीएम ने अधिकारियों को स्वच्छता की दिलाई शपथ

सोनभद्र। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक मुख्य विकास अधिकारी , जिला पंचायत राज अधिकारी ने विकास खंड रॉबर्ट्सगंज व चतरा के सभी ग्राम प्रधान पंचायत सचिव सहायक विकास अधिकारी पंचायत खंड विकास अधिकारी के ओ डी एफ के समीक्षा में प्रमुख सचिव गृह से आये स्वच्छता शपथ दिलायी गयी।और सभी को अपने गांव को 3 माह के अन्दर अपने गांव को खुले में शौच मुक्त कराये और जिस प्रकार से ओ डी एफ़ के लिए निगरानी टीम चल रहा था पुनः उसको सुरु किया जाय । बैठक शुरू होते ही जिलाधिकारी ने सभी को हाथ उठा कर सपथ दिलाया और कहा कि अब समय आ गया है कि कोई मानव लोटा लेकर बहार शौच करने न जाए क्योंकी खुले में शौच करना गन्दगी फ़ैलाने से हम ही बीमार होते है।

जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक दशा में सभी गांव में प्राथमिकता के आधार पर शौचालय बनाये जाय और शौचालय का निर्माण लाभार्थी ही कराये, शौचालय के मानक का पूरा ध्यान दिया जाय।सभी प्रधानों ने यह अस्वाशन दिया की हम पूरी तरह से अपने गांव को साफ व ओ डी एफ कर के गांव को खुले में शौच मुक्त करेंगे। बैठक में शुसील पांडेय स्टेट समन्वयक अनिल केशरी डी पी सी किरण सिंह,रवि उपाध्याय, प्रधान संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोपी नाथ गिरी,ब्लॉक रॉबर्ट्सगंज व छात्र के प्रधान संघ के अध्यक्ष, 17 ओ डी एफ़ गांव के प्रधान को उनके नाम पट्टिका लगा कर अलग स्थान दिया गया था।

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