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updated 3:12 PM UTC, Dec 12, 2017
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एंटीबायोटिक्स का अंधाधुंध इस्तेमाल एक वैश्विक खतरा

एंटीबायोटिक्स का अंधाधुंध इस्तेमाल एक वैश्विक खतरा नमामि भारत

लखनऊ, एस जी पी जी आई के माइक्रोबायलोजी विभाग के द्वारा एंटीबायोटिक्स के बेतहाशा उपयोग के दुस्प्रभाव पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें बताया गया कि मानव शरीर पर एंटी बायोटिक्स का रेजिस्टेंट होने का गम्भीर खतरा बढता जा रहा है, देश और बिदेशों के दिग्गज माइक्रोबायलोजिस्ट ने 2050 तक एंटीबायोटिक के प्रभाव हीन होने की आशंका जता कर मानव समाज पर गम्भीर संकट के बारे में आगाह किया। लखनऊ में हुए दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ प्रोफेसर यू सी चतुर्वेदी ने किया । प्रोफेसर चतुर्वेदी ने कहा कि विश्व के सभी देशों पर एन्टीमाइ्ककोबियल रेसिस्टेन्स का खतरा बढता जा रहा है तथा इस विषय पर सरकारों चिकित्सकों और जन सामान्य को जागरूकता लाने की जरुरत है।
 दूसरे दिन एस जी पी जी आई लखनऊ के माइक्रोबाइलोजी बिभाग के प्रोफेसर के.एन प्रसाद ने  मुख्य अतिथि प्रोफेसर बरौनिया एस जी पी जी आई ळखनऊ के अध्यक्षता में बोलते हुए कहा कि कोई एंटीबाइटिक खाने से पहले जांच करायें चिकित्सक की राय पर ही लें, मनमाने तरीके से एंटीबाइटिक शरीर के लिए फायदेमंद बैक्टीरिया को मार देती है हाई एंटीबाइटिक एक समय पर अन्य सभी दवाओं का असर भी समाप्त कर देती है। इसलिए बिना जरुरत और अच्छे डाँक्टर के सलाह के किसी भी प्रकार का एंटीबायोटिक प्रयोग नही करना चाहिए।
   स्पेन से आए हुए माइक्रोबाइलोजिस्ट डा ब्रूनो ने कहा कि अगर समय रहते लोग एंटीबाइटिक प्रयोग पर सावधान नही हुए तो भविष्य में सभी दवाओं पर रेजिस्टेन्स का खतरा होना निश्चित है । शिकागो से आए माइक्रोबाइलोजिस्ट डा प्रवीण पटेल  ने कहा कि एंटीबाइटिक्स का पूरा कोर्स लें, दवायें बीच में न छोडें, साफ सफाई रखें, बची दवा किसी को न दें, न खुले आसमान के नीचे फेंकें।
  डा शीतल बर्मा ( असि. प्रोफेसर, के जी एम यू लखनऊ) जो इस क्षेत्र मे विश्व स्वास्थ्य संगठन, एन सी डी सी के साथ कार्य कर रही है उन्होने सरकारी अस्पतलों में साधनों का अभाव बताया, डा. वर्मा ने कहा कि क्षेत्र के हिसाब से एंटीबाइटिक्स पोलिसी बनाकर पी एच सी/सी एच सी /जिलाचिकित्सालयों /प्राइवेट डाक्टरों कैमिस्टों के साथ साथ जनता में जागरूकता लाकर जांच के बाद कम से कम एंटीबाइटिक लेंने की जरुरत बताई। उन्होंने चेन्नई डिकलरेशन मे कुछ दवाओं के प्रतिबंध की बात उठने की बात भी बताई। उनहोंने कहा कि किसी भी दशा में ब्राड स्पेक्ट्रम एंटीबाइटिक कोई प्रयोग न करे ।
डा़ आशुतोष पाठक एस जी पी जी आई लखनऊ ने बताया कि इस मामले में चिकित्सकों का भी जागरुक होना भी जरुरी है, चिकित्सक जल्दी में बिना जरुरत एंटीबाइटिक देते है बिना पैथालोजी जांच के दवा देने से फायदे से ज्यादा नुकसान भी हो सकता है। हम रेफरल सेन्टर होने के नाते हर साल सेमीनार करके मीडिया माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे है।

Last modified onThursday, 03 March 2016 18:56

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