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updated 1:07 PM UTC, Jan 21, 2017
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टिकट बँटवारे के बाद सपा से नाराज हुए यादव नेता, देंगे इस्तीफा

गौरव शर्मा/सीतापुर, समाजवादी पार्टी में रार थमने का नाम नहीं ले रही है आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के द्वारा प्रदेश में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों के टिकट की लिस्ट जारी किये जाने के बाद एक बार फिर से नया विद्रोह होते दिखाई दे रहा है।

 

सीतापुर जनपद में आज समाजवादी प्रत्यासियो के टिकट वितरण में यादव समाज के किसी भी नेता को टिकट न मिलना चर्चा का विषय बना है।वहीं पार्टी के इस फैसले से नाखुश कई समाजवादी पार्टी के नेता अपने समर्थकों के साथ पार्टी से इस्तीफा देने की तैयारी कर रहे है।

 

नमामि भारत से खास बातचीत में टिकट वितरण से नाखुश समाजवादी नेताओ ने बताया कि टिकट वितरण में यादव समाज की अनदेखी करते हुए जनपद में एक भी यादव नेता को टिकट नहीं दिया गया जिसका हम विरोध करते है और अगर मुख्यमंत्री जी ने जनपद में यादव समाज से किसी को प्रत्यासी को टिकट नहीं दिया तो हम और हमारे सभी साथी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी के पास जाकर समाजवादी पार्टी से अपना इस्तीफा दे देंगे।

 

गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने शुक्रवार को 208 कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी की इस लिस्‍ट के अनुसार 52 मुस्लिम (28%), 50 ओबीसी (24%), 34 सवर्ण (16%), 41 एससी (20%), 27 यादव (13%), मुस्लिम 58 (28%) कैंडिडे्टस को टिकट दिया गया है।

 

द्वितीय चरण में 2.28 करोड़ मतदाता ,जानिए क्या है नामांकन के नियम

लखनऊ, द्वितीय चरण से सम्बन्धित इन क्षेत्रों में लगभग 2,28,57,081(2.28 करोड़) मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिसमंे लगभग 1,23,74,253(1.23 करोड़) पुरूष मतदाता तथा लगभग 1,04,81,760(1.04 करोड़) महिला मतदाता एवं 1,068 थर्ड जेन्डर शामिल हैं। द्वितीय चरण के मतदान के लिये 14,771 मतदान केन्द्रों तथा 23,693 मतदान स्थलों की स्थापना की गयी है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2017 के द्वितीय चरण में 11 जनपदों के 67 विधानसभा क्षेत्रों में नामांकन प्रक्रिया कल दिनांक 20 जनवरी से प्रारम्भ हो रही है। नामांकन प्रक्रिया पूर्वान्ह् 11.00 बजे अधिसूचना जारी होने के तुरन्त बाद से शुरू हो जायेगी।

प्रत्येक कार्य दिवस में नामांकन पत्र 11.00 बजे से 3.00 बजे के मध्य लिये जायंेगे। उन्होंने बताया कि द्वितीय चरण में 67 विधानसभा सीटों़ के निर्वाचन क्षेत्रों में -1-बेहट 2-नकुड़ 3-सहारनपुर नगर 4-सहारनपुर 5-देवबन्द 6-रामपुर मनिहांरन(अ0जा0) 7-गंगोह 17-नज़ीबाबाद 18-नगीना(अ0जा0) 19-बढ़ापुर 20-धामपुर 21-नहटौर(अ0जा0) 22-बिजनौर 23-चाँदपुर 24-नूरपुर 25-कांठ 26-ठाकुरद्वारा 27-मुरादाबाद ग्रामीण 28-मुरादाबाद नगर 29-कुन्दरकी 30-बिलारी 31-चन्दौसी(अ0जा0) 32-असमोली 33-सम्भल 34-स्वार 35-चमरव्वा 36-बिलासपुर 37-रामपुर 38-मिलक(अ0जा0) 39-धनौरा(अ0जा0) 40-नौगांवा सादात 41-अमरोहा 42-हसनपुर 111-गुन्नौर 112-बिसौली(अ0जा0) 113-सहसवान 114-बिल्सी 115-बदायूॅ 116-शेखूपुर 117-दातागंज 118-बहेड़ी 119-मीरगंज 120-भोजीपुरा 121-नवाबगंज 122-फरीदपुर(अ0जा0) 123-बिथरी चैनपुर 124-बरेली 125-बरेली कैन्टोनमेंट 126-आंवला 127-पीलीभीत 128-बरखेड़ा 129-पूरनपुर(अ0जा0) 130-बीसलपुर 131-कटरा 132-जलालाबाद 133-तिलहर 134-पुवायाॅ(अ0जा0) 135-शाहजहांपुर 136-ददरौल 137-पलिया 138-निघासन 139-गोला गोकरननाथ 140-श्रीनगर(अ0जा0) 141-धौरहरा 142-लखीमपुर 143-कस्ता(अ0जा0) तथा 144-मोहम्मदी।

इन विधानसभा सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 27 जनवरी तथा, नामांकन पत्रों की जाॅच 30 जनवरी, 2017

नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 01 फरवरी, 2017 है।

दूसरे चरण का मतदान 15 फरवरी, 2017 को होगा। सभी विधानसभा क्षेत्रों में वोटों की गिनती 11 मार्च, 2017 को होगी।

नामांकन दाखिल करने के लिए आर. ओ./ए.आर.ओ. के कार्यालय के 100 मीटर के अन्दर केवल 3 वाहन ले जाये जा सकते हैं।

आर.ओ. के कक्ष में उम्मीदवार सहित केवल 05 व्यक्ति उपस्थित रह सकते हैं इनमें उम्मीदवार के अतिरिक्त अन्य चार व्यक्ति सम्मलित होंगे।

मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्यीय दलों के उम्मीदवारों को एक प्रस्तावक तथा गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों के लिये 10 प्रस्तावकों की आवश्यकता होगी।

उम्मीदवार प्रदेश के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से मतदाता हो सकता है, यदि वह उसी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता नहीं है तो उसे मतदाता सूची का उद्धरण दाखिल करना अपेक्षित होगा।

उम्मीदवार के प्रस्तावक/प्रस्तावकों को उसी क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए, जिस क्षेत्र से उम्मीदवार नामांकन भर रहा है।

राजनैतिक दलों द्वारा खडे़ किये गये उम्मीदवारों को फार्म ए तथा बी दाखिल करना होगा। फार्म ए व बी नामांकन दाखिल करने के अंतिम तिथि को 3.00 बजे तक दाखिल किया जाना आवश्यक है।

शपथ पत्र स्टाम्प पेपर पर नोटैराइज होना चाहिए और उसके सारे कालम भरे होने चाहिये।

इस बार प्रत्याशी के लिये नामांकन प्रपत्र में फोटो लगाना तथा नागरिकता सम्बन्धी घोषणा करना अनिवार्य किया गया है।

प्रत्याशी को आयोग के निर्देशानुसार शपथ पत्र पर नो-डिमाॅड सर्टिफिकेट का प्रमाण पत्र यथा विद्युत, पानी, टेलीफोन व किराया(रेन्ट) के विषय में अनिवार्य रूप से देना होगा।

एक उम्मीदवार द्वारा नामांकन पत्रांे के अधिकतम् चार सेट दाखिल किये जा सकते हंै। सामान्य उम्मीदवारों के लिये जमानत राशि 10 हजार रूपये होगी।  अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवारों के लिये जमानत राशि आधी अर्थात पाॅच हजार रूपये होगी।

उम्मीदवार द्वारा चुनाव व्यय की सीमा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए 28 लाख रूपये निर्धारित की गयी है।

उम्मीदवार द्वारा चुनाव खर्च के लिये 20 हजार रूपये से अधिक का भुगतान चेक/ड्राफ्ट द्वारा ही किया जायेगा।

निर्दलीय उम्मीदवार आयोग द्वारा निर्धारित फ्री सिम्बल्स में से किसी एक चुनाव चिन्ह का चयन कर सकते हैं।

पूरी नामांकन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करायी जायेगी।

उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले सरसरी तौर पर एक बार भरे गये विवरणों को देख लेना चाहिये।

उम्मीदवारों द्वारा दाखिल शपथ पत्र रिटर्निंग आफिसर के कार्यालय में नोटिस बोर्ड एवं वैबसाइट पर प्रदर्शित किये जायंेगे।

 

नामांकन दाखिल करते समय उम्मीदवारों को निर्वाचन व्यय रजिस्टर तथा आयोग के प्रमुख निर्देशों की प्रति उपलब्ध करायी जायेगी।

विधान सभा सामान्य निर्वाचन के द्वितीय चरण की अधिसूचना कल

लखनऊ, उत्तर प्रदेश विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2017 के द्वितीय चरण में 11 जनपदों के 67 विधानसभा क्षेत्रों में नामांकन प्रक्रिया कल दिनांक 20 जनवरी से प्रारम्भ हो रही है। नामांकन प्रक्रिया पूर्वान्ह् 11.00 बजे अधिसूचना जारी होने के तुरन्त बाद से शुरू हो जायेगी।

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री टी0 वेंकटेश ने यह जानकारी देते हुए आज यह बताया कि प्रत्येक कार्य दिवस में नामांकन पत्र 11.00 बजे से 3.00 बजे के मध्य लिये जायंेगे। उन्होंने बताया कि द्वितीय चरण में 67 विधानसभा सीटों के निर्वाचन क्षेत्रों में -1-बेहट 2-नकुड़ 3-सहारनपुर नगर 4-सहारनपुर 5-देवबन्द 6-रामपुर मनिहांरन(अ0जा0) 7-गंगोह 17-नज़ीबाबाद 18-नगीना(अ0जा0) 19-बढ़ापुर 20-धामपुर 21-नहटौर(अ0जा0) 22-बिजनौर 23-चाँदपुर 24-नूरपुर 25-कांठ 26-ठाकुरद्वारा 27-मुरादाबाद ग्रामीण 28-मुरादाबाद नगर 29-कुन्दरकी 30-बिलारी 31-चन्दौसी(अ0जा0) 32-असमोली 33-सम्भल 34-स्वार 35-चमरव्वा 36-बिलासपुर 37-रामपुर 38-मिलक(अ0जा0) 39-धनौरा(अ0जा0) 40-नौगांवा सादात 41-अमरोहा 42-हसनपुर 111-गुन्नौर 112-बिसौली(अ0जा0) 113-सहसवान 114-बिल्सी 115-बदायूॅ 116-शेखूपुर 117-दातागंज 118-बहेड़ी 119-मीरगंज 120-भोजीपुरा 121-नवाबगंज 122-फरीदपुर(अ0जा0) 123-बिथरी चैनपुर 124-बरेली 125-बरेली कैन्टोनमेंट 126-आंवला 127-पीलीभीत 128-बरखेड़ा 129-पूरनपुर(अ0जा0) 130-बीसलपुर 131-कटरा 132-जलालाबाद 133-तिलहर 134-पुवायाॅ(अ0जा0) 135-शाहजहांपुर 136-ददरौल 137-पलिया 138-निघासन 139-गोला गोकरननाथ 140-श्रीनगर(अ0जा0) 141-धौरहरा 142-लखीमपुर 143-कस्ता(अ0जा0) तथा 144-मोहम्मदी शामिल है।

उन्होंने बताया कि इन विधानसभा सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 27 जनवरी तथा, नामांकन पत्रों की जाॅच 30 जनवरी, तथा नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 01 फरवरी, 2017 है। दूसरे चरण का मतदान 15 फरवरी, 2017 को होगा। सभी विधानसभा क्षेत्रों में वोटों की गिनती 11 मार्च, 2017 को होगी।

 

द्वितीय चरण से सम्बन्धित इन क्षेत्रों में लगभग 2,28,57,081(2.28 करोड़) मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिसमंे लगभग 1,23,74,253(1.23 करोड़) पुरूष मतदाता तथा लगभग 1,04,81,760(1.04 करोड़) महिला मतदाता एवं 1,068 थर्ड जेन्डर शामिल हैं।

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मत देना, अपना अधिकार, बदले में न लो उपहार

बलरामपुर। प्रतिभाएं किसी की मोहताज नहीं होती है। यह संदेश पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवरिया मुबारकपुर के बच्चों ने मतदाता जागरूकता अभियान के तहत आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में दिया। चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यालय के 70 बच्चों ने प्रतिभाग किया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका अनवरजहां ने बताया कि विजयी प्रतिभागियों को मतदाता दिवस के दिन सम्मानित किया जायेगा।

 

मंगलवार को मतदाता जागरूकता अभियान के तहत श्रीदत्तगंज ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवरिया मुबारकपुर में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यालय के 70 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। विद्यालय के शिक्षक वैभव त्रिपाठी व परवीन हुसैन की देखरेख में आयोजित इस प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपने हुनर का लोहा मनवाया।

 

निर्णायक की भूमिका में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका अनवर जहां व मिथलेश कुमारी ने कक्षा आठ के छात्र अजय कुमार की वोट फार बेटर इंण्डिया को पहला, छात्रा शीलू की वोट फार योर च्वाइस, योर वाइस को दूसरा तथा कक्षा 6 के छात्र रवीन्द्र चैधरी की बनाई गयी जितना हो सके करो मतदान को तीसरे स्थान के लिए चुना। वहीं कक्षा आठ की छात्रा सुमन ने नेशनल वोटर डे, कक्षा छह के रमेश कुमार की वोट फार इण्डिया, रंजना सिंह का मत देना अपना अधिकार, बदले में न लो उपहार को सांत्वना पुरस्कार के लिए चुना।

 

इसके अतिरिक्त रिंकी मौर्या, शुभी पाण्डेय, शशिकिता, मनीष पाण्डेय, ऋतु सिंह, अब्दुल कादिर, शंकर, मनजीत तिवारी, चन्द्रावति आदि के बनाये गये पेन्टिंग की भी सरहना की गई। प्रधानाध्यापिका श्रीमती अनवर जहां ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मताधिकार अपना अधिकार होता है। जिससे हम एक अच्छा नेता चुनकर स्वच्छ समाज की स्थापना कर सकते है। इसलिए अपने आसपास के लोगों को भी मतदान के लिए जागरूक करें। उन्होने बताया कि विजयी प्रतिभागियों को मतदाता दिवस के दिन पुरस्कृत किया जायेगा। इस दौरान रामू वर्मा सहित विद्यालय के छात्र-छात्रायें मौजूद रही।

अतिपिछड़ों का मिला जिसको साथ, उ0प्र0 की सत्ता उसी के हाथ

उ0प्र0 के जातिगत समीकरण में अतिपिछड़ी जातियों की संख्या कुल जनसंख्या की एक तिहाई से अधिक हैं और यही वर्ग उत्तर प्रदेश में सत्ता संघर्ष में अहम भूमिका निभाता है। अतिपिछड़ा वर्ग जिसकी तरफ हाथ बढ़ाया, उसी पार्टी को उ0प्र0 में सरकार बनाने का अवसर मिला। राम लहर के समय 1991 में भाजपा ने अतिपिछड़ों की ही बदौलत पूर्ण बहुमत की सरकार बनाया और कल्याण सिंह पिछड़ों के नेता के रूप में उभरकर आये। 1993 में सपा, बसपा का गठबंधन बनने के बाद सामाजिक न्याय की एक नई केमेस्ट्री बनी और इस केमेस्ट्री ने भाजपा को पीछे कर दिया। अतिपिछड़ा वर्ग राजनीतिक दलों के लिए मांझी/खेवनहार की भूमिका निभाता है, परन्तु इनकी नईया मझधार में ही फंसी हैं। किसी भी दल ने अतिपिछड़ों को न तो विशेष आरक्षण की व्यवस्था किया और न ही राजनीतिक सम्मान व हिस्सेदारी ही सही ढंग से दिया। उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय के प्रति अतिपिछड़े काफी मुखर हुए हैं और इनके अन्दर राजनीतिक सम्मान की भी भूख जागृत हुयी है। लोक सभा चुनाव के समय भाजपा सामाजिक न्याय मोर्चा व मछुआरा प्रकोष्ठ के माध्यम से पिछड़ों अतिपिछड़ों को जोड़ने का काम की और लोक सभा चुनाव में उसे अप्रत्याशित सफलता दिलाने में अतिपिछड़ों की अहम भूमिका रही। बी0जे0पी0 ने पहली बार यू0पी0 में 80 में 27 सीटों पर पिछड़ों, अतिपिछड़ों को उम्मीदवारी दी।

 

विधान सभा चुनाव-2002 में सपा को 25.37 प्रतिशत, बसपा को 20.06 प्रतिशत , भाजपा को 20.08 प्रतिशत व कांग्रेस को 8.96 प्रतिशत मत मिला था। 2007 में बसपा को 30.43 प्रतिशत, सपा को 25.30 प्रतिशत, भाजपा को 16.97 प्रतिशत, कांग्रेस को 8.61 प्रतिशत तथा विधान सभा चुनाव 2012 में सपा को 29.13 प्रतिशत बसपा को 25.91 प्रतिशत, भाजपा को 15.13 प्रतिशत व कांग्रेस को 11.63 प्रतिशत मत मिला था। लोक सभा चुनाव-2014 में भाजपा को 42.03 प्रतिशत, सपा को 22.06 प्रतिशत व बसपा को 19.95 प्रतिशत तथा कांग्रेस को 7.63 प्रतिशत मत मिला था। 2002, 2007 व 2012 के विधान सभा चुनाव परिणाम को देखा जाय तो स्पष्ट होता है कि 3 से 5 प्रतिशत मतान्तर से ही उत्तर प्रदेश में सरकारें बनती बिगड़ती रहीं हैं। ऐसे में 33.34 प्रतिशत अत्यन्त पिछड़ी निषाद, मल्लाह, केवट, बिन्द, बियार, धीवर, कहार, कुम्हार, राजभर, चौहान, कोयरी, काछी, कुशवाहा, शाक्य, माली, सैनी, तेली, बरई, पाल, गड़ेरिया, विश्वकर्मा, नाई, भुर्जी, बारी आदि की अहम भूमिका है। 17 अतिपिछड़ी जातियों के 16 प्रतिशत से अधिक मत को देखते हुए ही सभी दल अनुसूचित जाति में शामिल करने की वकालत करते रहें हैं और विधान सभा चुनाव 2017 में यहीं 17 अत्यन्त पिछड़ी जातियां राजनीतिक दलों को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभायेंगी।

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव अतिपिछड़े ही निर्णायक की भूमिका निभाते आ रहें है। अतिपिछड़ी जातियां जिसकी तरफ मुड़ी, वहीं दल बढ़त बनाने में कामयाब हुआ। भाजपा सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने सामाजिक न्याय समिति 2001 की सिफारिश के अनुसार अन्य पिछड़ी जातियों का 3 उपवर्ग बनाकर 10.49 प्रतिशत यादव, अहिर, ग्वाल को 5 प्रतिशत, कुर्मी, जाट, गूजर, लोधी, सोनार, गोसाई, अरख, कलवार आदि 8 मध्यवर्ती अतिपिछड़ी जातियों को 9 प्रतिशत तथा 33.34 प्रतिशत सर्वाधिक पिछड़ी निषाद, मल्लाह, केवट, बिन्द, धीवर, कहार, गड़ेरिया, राजभर, चौहान, काछी, कोयरी, माली, सैनी, प्रजापति, नाई, बारी, बियार आदि 70 जातियों को 14 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिये परन्तु सपा बसपा के विरोध और राजनाथ मंत्रीमण्डल के ही मंत्री अशोक यादव द्वारा न्याय पालिका में जाने से यह मामला लटक गया।

 

उ0प्र0 के जातिगत सामाजिक समीकरण में यादव-8.60 प्रतिशत, कुर्मी-4.03 प्रतिशत, निषाद(मल्लाह, केवट, बिन्द, मांझी, धीवर, धीमर, कहार, कश्यप, तीयर, गोडि़या, तुरहा, बाथम, रायकवार आदि)-10.25 प्रतिशत, कुशवाहा/मौर्य/शाक्य/सैनी-4.85 प्रतिशत, पाल/बघेल-2.60 प्रतिशत, राजभर-1.32 प्रतिशत, चौहान-1.26 प्रतिशत, लोधी/किसान/खागी-3.60 प्रतिशत, तेली/साहू-1.60 प्रतिशत, बढ़ई/लोहार-2.26 प्रतिशत, नाई/सविता-1.03 प्रतिशत, जाट-1.71 प्रतिशत, गूजर-0.92 प्रतिशत, कुम्हार/प्रजापति-1.84 प्रतिशत, कानू/भुर्जी-0.77 प्रतिशत हैं। हिन्दू अत्यन्त पिछड़ी जातियों में बियार, सोनार, अरख, कन्डेरा, गोसाई, कलवार, कसेरा, ठठेरा, बंजारा, सोनार, बरई, बारी आदि की संख्या-3.46 प्रतिशत है।  

 

सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव ने सामाजिक न्याय समिति-2001 को भविष्य की राजनीति में सपा के लिए खतरनाक समझते हुए निषाद, मल्लाह, केवट, मांझी, बिन्द, धीवर, कहार, कश्यप, गोडि़या, तुरहा, रायकवार, भर, राजभर, प्रजापति, कुम्हार आदि 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिये। उत्तर प्रदेश के जातिगत समीकरण में इन जातियों की संख्या 16.07 प्रतिशत है, जो चुनाव परिणाम की गणित को बदलने में निर्णायक है। इन मतों को अपने पाले में करने के लिए ही अखिलेश यादव की सरकार ने विगत 22 दिसम्बर , 2016 को मझवार, तुरैहा, गोड़, बेलदार, शिल्पकार, पासी, तड़माली जैसी अनुसूचित जाति में शामिल जातियों को परिभाषित कर 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की प्रसुविधा देने का निर्णय लिये, केन्द्र सरकार केा इस बावत प्रस्ताव भेजने के साथ-साथ समाज कल्याण विभाग व कार्मिक अनुभाग से अधिसूचना भी जारी करा दिये। अतिपिछड़ी जातियों के आरक्षण व सामाजिक न्याय के संघर्ष के सूत्र धार चौधरी लौटन राम निषाद ने कहा कि विधान सभा चुनाव-2017 में 17 अत्यन्त पिछड़ी जातियों की अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी क्योंकि सामाजिक समीकरण मंे इनकी संख्या-16.07 प्रतिशत हैं, कारण कि उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन 3-5 प्रतिशत मतों के अन्तर से होता आ रहा है।

 

उत्तर प्रदेश में पहली बार पिछड़े वर्ग के 31 सांसद लोकसभा चुनाव-2014 में निर्वाचित हुए। जिसमें समाजवादी पार्टी के 5 यादव सांसदों के साथ भाजपा से 5-5  लोधी, कुर्मी, जाट, 3-3 निषाद/कश्यप व कुशवाहा/सैनी/मौर्य, 2-2 तेली/साहू व गूजर तथा 1 राजभर चुनाव जीते। उत्तर प्रदेश, बिहार में पिछड़ो, अतिपिछड़ों की ताकत को समझते हुए ही लोकसभा चुनाव से पूर्व नरेन्द्र मोदी ने अपने को चुनावी सभाओं में पिछड़ा व अतिपिछड़ा बताते रहे।

उत्तर प्रदेश के जातिगत समीकरण में 20.53 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जातियों व 0.57 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजातियों की है। अनुसूचित जातियों में चमार/जाटव की आबादी 11.46 प्रतिशत व 65 गैर जाटव दलित जातियों की संख्या  9.11 प्रतिशत है। जिसमें पासी-3.27 प्रतिशत, धोबी-1.34 प्रतिशत, कोरी-1.11 प्रतिशत, वाल्मीकि-0.61 प्रतिशत, खटिक-0.38 प्रतिशत, गोड़-0.22 प्रतिशत, धानुक-0.32 प्रतिशत, कोल-0.23 प्रतिशत तथा शेष अन्य दलित जातियां-1.60 प्रतिशत हैं।

 

सामाजिक न्याय समिति-2001 के अनुसार उत्तर प्रदेश की ग्रामीण जनसंख्या में यादव/अहिर-10.49 प्रतिशत, कुर्मी, कलवार, लोधी, जाट, गूजर, सोनार, गोसाई, अरख आदि मध्यवर्ती अतिपिछड़ी जातियां-10.22 प्रतिशत व सर्वाधिक पिछड़ी जातियां-33.34 प्रतिशत थीं।

 

विधान सभा चुनाव-2017 में अतिपिछड़ी व गैर जाटव दलित जातियों की अहम भूमिका रहेगी। इसी बात को ध्यान में रखकर भाजपा ने जगह-जगह पिछड़ा वर्ग सम्मेलन कराया और 4 परिवर्तन यात्रा निकालकर अतिपिछड़ों को अपने पाले में करने की कोशिश किया। गैर जाटव दलित जातियों को अपने पाले में लाने के लिए धम्म चेतना यात्रा निकाल दलितों को रिझाने की योजना बनाई। इस समय दलितों को साथ जोड़ने के लिए कांग्रेस भी दलित सम्मेलन कर रही है, तथा अतिपिछड़ों पर डोरा डालने के लिए महाराष्ट्र के पूर्व सांसद हरि भाऊ राठौर और पूर्व सांसद राजा राम पाल को आगे कर अतिपिछड़ा सम्मेलन कर इनके लिए 22 प्रतिशत कोटे की मांग उठा रहें है। विधान सभा चुनाव की मुनादी फिर गयी है। अब देखना है कि गैर यादव अतिपिछड़े व गैर जाटव दलित किसके पाले में किस प्रतिशत में जाते हैं? सपा जहां यादव-मुस्लिम के साथ अतिपिछड़ों व गैर जाटव जातियों को साधने तो बसपा जाटव-मुस्लिम-ब्राह्मण के साथ-साथ अन्य सवर्ण व अतिपिछड़ी जातियों को साधने में जुटी है। बसपा ने अपने 401 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दिया है। उसने 54 प्रतिशत से अधिक आबादी वाले पिछड़ों को 106, सवर्णों को 113, 19.3 प्रतिशत आबादी वाले मुस्लिमों को 97 व 20.93 प्रतिशत दलितों को 87 टिकट दिया है। 113 सवर्ण उम्मीदवारों में ब्राह्मण-66, राजपूत-36 व भूमिहार, कायस्थ, बनिया व अन्य को 11 टिकट दिया है।

 

समाजवादी पार्टी का जहां पारम्परिक वोट यादव व बसपा का पारम्परिक वोट दलित है, वहीं भाजपा के पास कोई पारम्परिक वोट बैंक नहीं है। जब-जब अतिपिछड़े भाजपा के साथ जुड़े भाजपा बड़े दल के रूप में उभर कर आयी। पूर्वांचल की 170 विधान सभा क्षेत्रों की उ0प्र0 की सरकार बनाने अहम भूमिका रहती है। 1991 में भाजपा ने पूर्वांचल से 97 सीटें, बसपा ने 2007 में 102 सीटें व विधान सभा चुनाव-2012 में सपा ने 106 सीटें प्राप्त कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल हुये। इसी बात को ध्यान में रखकर भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य (इलाहाबाद) को प्रदेश अध्यक्ष और ओ0बी0सी0 मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद दारा सिंह चौहान (आजमगढ़) को बनाया है। अब देखना होगा कि भाजपा अपनी सूची में कितने अतिपिछड़ों को जगह देती है

 

भाजपा की नईया बिना अतिपिछड़ों के किनारा लगने वाली नहीं है। अतिपिछड़ा वर्ग चिन्तक व 17 अतिपिछड़ी जातियों के आरक्षण संघर्ष के सूत्रधार लौटन राम निषाद ने स्पष्ट तौर पर कहा कि-अतिपिछड़ों का जिसको साथ, यू0पी0 की सत्ता उसी के हाथ। पूर्वांचल में अतिपिछड़ों की संख्या अन्य क्षेत्रों से काफी अधिक है। इस क्षेत्र में अतिपिछड़ों की कुर्मी, निषाद, बिन्द, कोयरी, काछी, राजभर, चौहान आदि प्रमुख जातियां पायी जाती है। पश्चिमी उ0प्र0 व बुन्देलखण्ड में निषाद, कश्यप, लोधी, किसान, जाट, कुर्मी, शाक्य, सैनी, काछी, पाल, बघेल, गूजर का ही तीन चौथाई सीटों पर निर्णायक है जो विधान सभा चुनाव-2017 मंे राजनीतिक दलों के भाग्य का फैसला करेंगी।

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दलबदलुओं की हुई भाजपा, "सिद्धांत" गया तेल लेने

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ, भाजपाई शिखर नेतृत्व जब नाराज कार्यकर्ताओं को मनाना होता है तो मूल्यों से समझौता न करने के कारण पार्टी के आदि पुरुष पं दीनदयाल उपाध्याय श्रेष्ठता की मिशाल देकर समझाते हैं। आश्चर्य तो ये है कि जब टिकट वितरण के लिए बैठते हैं तो खुद ही दीनदयाल जी के सिद्धांतों का चीर हरण करते हैं। पार्टी के वर्तमान भाग्यविधाता यह भूल गये हैं कि दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर बार-बार छला जाने वाला कार्यकर्ता यदि बलराज मधोक बन गया तो पार्टी को सिमटते देर नहीं लगेगी। सादगी और सिद्धांत पर बलिदान हो गये पं जी अपने उत्तराधिकारियों की पैंतरेबाजी से आहत तो होगे, लेकिन अनुयायी इस कुतर्क से खुश हैं कि जो लोग हमारे आदि पुरुष को अपनी फितरत में फंसा कर विजयी होने का दंभ भरते थे आज उन चीटरों के वंशज देश भर में घूम-घूम कर अपनी पीठ की चोट दिखाते फिर रहे हैं।

 

पहली बार पार्टी के प्रादेशिक चुनाव समिति में ही दलबदलुओं का दबदबा बढ़ा।

 

बहुजन समाज पार्टी से आये स्वामीप्रसाद मौर्या, बृजेश पाठक कांग्रेस से आयी रीता बहुगुणा जोशी को शामिल किया गया जिसका परिणाम ये रहा कि सहारनपुर में ७ में से ५ टिकिट दलबदलुओं को दिया गया। बागपत में तीन के तीनों, मुजफ्फरनगर में दो, मेरठ में एक, गाजियाबाद में एक, गौतमबुद्धनगर में दो, लखीमपुरखीरी में ८ में से ६ टिकट दलबदल के धुरंधरों को मिला। घोषणा के पूर्व हरदोई के भाजपाइयों की धड़कन बढ़ी है कि शायद ही जिले में कोई भाजपाई टिकट के मुकाबले में बाहरियों के सामने टिक पायेगा।

 

विषम परिस्थितियों में पार्टी को स्थापित करने वाले दिग्गज बार-बार जीतने वाले नेताओं का टिकट इस लिए काटा जा रहा है कि उनकी उम्र ज्यादा हो गयी है, उनके पास जो जनविश्वास की सम्पदा है उस पर अहंकार की लाठी भारी पड़ रही है। लेकिन एक बार विधानसभा और एक बार लोकसभा जीतने वाले वयोवृद्ध नेता कलराज मिश्र पर यह फार्मूला फेल हो जाता है। क्यों कि उनके पास पार्टी के भीतर समर्थवान जनाधारविहीन आरोपित नेताओं की मजबूत फौज है।

 

विधानसभा चुनाव में लगातार ७ बार के विजेता दादा श्यामदेवराय चौधरी के भाग्य विधाता वह लोग बन गये हैं जो विधानसभा चुनाओं में अपनी जमानत भी नहीं बचा पाये हैं। श्यामदेवराय चौधरी की चर्चा इस लिए ज्यादा प्रासंगिक है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्षेत्र के विधायक हैं। टिकिट घोषित होने से पहले राधामोहन दास अग्रवाल जैसे तेजतर्रार और ईमानदार, जनप्रिय नेता की धड़कन इस लिए बढ़ जाती है कि उनके भाग्य का फैसला वह लोग करते हैं जो एक सिमित काकश के अंग बन कर काम करते हैं।

 

भाजपा ने जो पहली सूची जारी किया है उसमें अब तक १२ ब्राह्मण,३२ क्षत्रीय और जाट, दो भूमिहार, १० वैश्य,२५ अनुसूचित और ८० पिछड़ा वर्ग के लोगों को उतारा है!१४९ की सूची में ५ पूर्व सांसद,३३ वर्तमान विधायक जिनमें ३० बाहरी हैं को प्रत्याशी बनाया गया है! इस सूची से नाराज एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि दलबदलू कहते होंगे कि जब रात है ऐसी मतवाली तो सुबह का आलम क्या होगा?

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बीजेपी की पहली सूची में ब्राहमण और बनियों की उपेक्षा,जानिए किस जाति के कितने कैंडिडेट

नयी दिल्ली,अगडी जातियों की पार्टी मानी जाने वाली पार्टी ने यूपी चुनावों के लिए अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 149 लोगों का टिकट फाईनल किया गया है आपको जानकर हैरानी होगी की ब्राह्मण बनिया और राजपूत की पार्टी मानी जाने वाली बीजेपी ने अपनी पहली लिस्ट में अब तक १२ ब्राह्मण,३२ क्षत्रीय और जाट, दो भूमिहार, १० वैश्य,२५ अनुसूचित और ८० पिछड़ा वर्ग के लोगों को उतारा है!१४९ की सूची में ५ पूर्व सांसद,३३ वर्तमान विधायक जिनमें ३० बाहरी हैं को प्रत्याशी बनाया गया है!

 

दलबदलुओं की हुई भाजपा, "सिद्धांत" गया तेल लेने

कुल मिलाकर इस बार बीजेपी अपनी पिछडा और दलित की राजनीति पर कायम है। बीजेपी की पहली सूची को देखकर तो यही कहा जा सकता है कि ब्राहमण और बनियों के वोटों में अब कोई खास दिलचस्पी नही है हालांकि ये जातियाँ बीजेपी की परंपरागत वोट बैंक मानी जाती रही हैं।

बीजेपी की पहली सूची में ब्राहमण और बनियों की उपेक्षा,जानिए किस जाति के कितने कैंडिडेट

 

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यूपी चुनाव से पहले बरस रहा है काला धन

मनोज श्रीवास्तव /लखनऊ। विधानसभा चुनाव की अधिसूचना क्या जारी हुई यूपी में रुपयों की बरसात शुरू हो गयी। पुलिस महानिदेशक के जनसमपर्क अधिकारी राहुल श्रीवास्तव के अनुसार चेकिंग के दौरान पुलिस ने प्रदेश के पांच स्थानों से करोड़ों रूपये बरामद किये। गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में एक चार पहिया गाड़ी से लगभग तीन करोड़ तीस लाख रूपये बरामद हुए।


रूपये के साथ गाड़ी में सवार पांच लोगों को पुलिस ने पकड़ा है। पकड़े गए लोगों ने रुपए को बैंक का पैसा बताया लेकिन जाँच -पड़ताल में सिद्ध नहीं कर पाए। मुरादाबाद के कुंदरकी क्षेत्र में एक वहां से एक करोड़ दस लाख रुपया मिला। जाँच -पड़ताल में पुलिस को सही जवाब नहीं मिला तो पुलिस ने पैसों के साथ चल रहे दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। देवरिया में रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के इत्तमपुर टोल नाक पर चेकिंग के दौरान एक कर से एक करोड़ के नोट बरामद किये। एटा के कासगंज में भी एक व्यक्ति की गाड़ी से दस लाख की बरामदगी हुई। मुजफ्फरनगर के खतौली में हाइवे पर एक कर से सत्ताइस लाख बरामद हुआ। सभी मामलों में पुलिस ने आयकर विभाग के अधिकारियों को बुला कर कारवाही आगे बढ़ा दी।  

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