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updated 9:21 AM UTC, Oct 17, 2017
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बस्ती में पाचो सीटो पर भाजपा ने लहराया परचम

बस्ती। जब से चुनावी रूझान चालू हुआ है तभी से सीटो के आकल का गुणा गणित दलीय व निर्दलीय सभी पार्टिया बराबर का लगा रही थी, और इन राजनीतिक गणितज्ञो पर गौर किया जाय तो सभी के गलो में विजय माला लटकने को बेताब हो रहा था। इस विधान सभा से चुनावी महाभारत युद्ध का नतीजा 11 मार्च को सबके सामने आया।

 

बीजेपी ने बस्ती की पांचो विधानसभा सीटो पर परचम लहरायाए हरैया सीट पर पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह को बीजेपी के अजय सिहं ने 30138 वोटो से हराया।

कप्तानगंज विधानसभा सीट पर पांच बार के बसपा विधायक रामप्रसाद चौधरी को भाजपा के सीपी शुक्ला ने 6827 से हराया।

रुधौली सीट पर पिछली बार के विधायक संजय जायसवाल फिर जीतेए बसपा के राजेन्द्र चौधरी को 21923 वोटो से हराया।

सदर सीट पर तीन बार के बसपा विधायक नंदू चौधरी हारे बीजेपी के दयाराम चौधरी ने सपा को 42546 वोटो से हराया।

 

महादेवा सीट पर भी सपा के मंत्री रहे रामकरन आर्या हारेए बीजेपी प्रत्याशी रवि सोनकर ने बसपा को 25884 वोटो से हराया।

 

क्या अखिलेश राहुल गांधी को बलि का बकरा बनाकर कर देंगे हलाल...?

लखनऊ,उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव आखिरी चरणों में है। सभी सियासी दिग्गज रैलियों को संबोधित कर रहे हैं। यूपी के चुनावों में पहली बार ऐसा हुआ है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरे हैं। राहुल गांधी और अखिलेश यादव की अगुवाई में सपा-कांग्रेस यार बने लेकिन दोनों का साथ कई सवालों को जन्म दे रहा है। पहला सवाल यह कि क्या कांग्रेस खुद अपने आपको को खत्म करना चाहती है। दूसरा यह कि क्या राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने का ख्बाव देखना छोड़ दिया है। अगर ऐसा नहीं है तो राहुल गांधी यूपी चुनावों में बलि का बकरा नहीं बनते।

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव बहुत ही अहम चुनावों में से एक है, क्योंकि यूपी की राजनीति में हर बार कुछ न कुछ नया होता है। 2017 के विधानसभा में सियासी राजनीति अपने चरम पर है। वही इस बार उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने साथ आकर गठबंधन करके नया इतिहास रचा। इस गठबंधन में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी बलि का बकरा बनते नजर आ रहे हैं, क्योंकि अखिलेश जब पिता मुलायम सिंह को झटका दे सकते हैं तो राहुल क्या चीज हैं। अगर आपने गौर किया हो तो देखिएगा जितनी भी अखिलेश-राहुल को साझा रैलियां हुई हैं, उसमे राहुल से ज्यादा अखिलेश बोलते हुए नजर आते हैं। राहुल वही बोलते हैं जो अखिलेश का आदेश होता है।

 

बता दें की राहुल के गठबंधन वाले फैसले से कांग्रेस नाराज है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का कहना है की अगर हम 403 सीटों पर चुनाव लड़ते तो 403 नेता तैयार होते। गठबंधन के बाद अब 100 भी तैयार नही होंगे। उधर सपा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपना गणित लगाते हुए कांग्रेस को साथ जोड़ लिया क्योंकि अखिलेश जानते थे इस बार विधानसभा में कड़ी टक्कर मिलेगी। अगर कांग्रेस को साथ जोड़ लिया जाये तो सीटों में बढोतरी भी होगी और केंद्र के लिये उनका रास्ता भी साफ हो जायेगा।

 

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। राहुल पीएम बनना चाहते हैं और अगर यूपी में अखिलेश दोबारा मुख्यमंत्री बनते हैं, तो भविष्य में प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार बनेगें जो नेता जी नही कर पाए वो बबुआ (अखिलेश ) कर के दिखायेगा।

 

293 विधानसभा क्षेत्र उतरौला-जानिए क्या है समीकरण

उतरौला, 293 विधानसभा क्षेत्र उतरौला मुस्लिम और कुर्मी बाहुल इस विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश लोग रोजी रोटी के लिए खाड़ी  देशों में रहते हैं सबसे अधिक विदेशी मुद्रा इसी विधानसभा में आती है फिर भी शिक्षा स्वास्थ्य के क्षेत्र के बहुत पीछे हैं रेलखंड इस विधानसभा में अब तक नहीं पहुंची है रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा रेलखंड से जोड़ने का आश्वासन दिया है इस विधानसभा में कुल चार लाख 10 हजार 684 मतदाता है जिसमें दो लाख 27 हजार दो सौ 24 पुरुष 1 लाख 82 हजार 84 महिला मतदाता तथा 12 थर्ड जेंडर के मतदाता है।

 

  • 2012 के चुनाव में 40447 मत पाकर विजय रहे समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आरिफ अनवर हाशमी इस बार फिर सपा के विकास के भरोसे सत्ता में वापसी के प्रयास में हैं।

  • 32 हजार पांच सौ 68 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे भाजपा उम्मीदवार श्यामलाल वर्मा के स्थान पर उनके पुत्र रामप्रताप वर्मा भाजपा उम्मीदवार राजनीति में अपना पैर जमाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

  • 39442 मत पाने वाली बहुजन समाज पार्टी इस प्रवेश अहमद को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

  • 30000 वोट पाने वाली पीस पार्टी अपने प्रदेश अध्यक्ष की परंपरागत सीट पर इस बार धर्मेंद्र गौड़ को मैदान में उतारा है ।

  • कांग्रेस पार्टी गठबंधन धर्म निभाते हुए इस बार समाजवादी पार्टी का समर्थन कर रही है।

  • मोहम्मद निजाम उल उल्लाह खान एआईएमआईएम से ताल ठोंक रहे हैं।

  • ज्ञानचंद वर्मा युवा विकास पार्टी

  • नंदलाल भारतीय सुभाष सेना से अपना भाग आजमा रहे हैं।

  • वही अफरोज ऋषि कुमार पारसी गार्डन दास रामखेलावन श्री राम निर्दल उम्मीदवार के तौर पर मैदान में डटे हुए हैं।

 

सत्ता संघर्ष के दौर में अब तक उतरौला विधानसभा में 1951 मे एस एम शाहिद फकीर ने सूरज लाल गुप्ता को 1957 में अली जर्रार जाफरी मैं सूरज लाल गुप्ता को 1962 में सूरज लाल गुप्ता ने अली सरदार जाफरी को 19 67 में आर यम खान ने सूरज लाल गुप्ता को 19 69 मैं सूरज लाल गुप्ता ने रफी मोहम्मद खान 1974 और 1977 में राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने  इब्ने हसन को लगातार दो बार पराजित कर विधान सभा में प्रतिनिधित्व किया 1980 में मसरूर जाफरी और 1985 में फजरूल वारी बारी निर्दल उम्मीदवार मैं सलीम महबूब कांग्रेस को 1989 और 91 में समीउल्लाह ने बीजेपी उम्मीदवार विश्वनाथ को को पराजित किया 1993 में भाजपा उम्मीदवार विश्वनाथ गुप्ता ने फसी उर रहमान उर्फ़ मुन्नन खा को 1996 में उबैद उर रहमान सपा प्रत्याशी श्यामलाल वर्मा को 2002 में अनवर महमूद सपा प्रत्याशी ने श्यामलाल वर्मा  भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी को पराजित किया 2007 में भाजपा उम्मीदवार श्यामलाल वर्मा ने अनवर महमूद खा को पराजित कर दिया और 2012 में समाजवादी उम्मीदवार आरिफ अनवर हाशमी ने 1005 मतों के अंतर पर अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार धीरेंद्र प्रताप सिंह धीरू को पराजित कर विधानसभा में उतरौला का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

 

उतरौला विधानसभा की जातीय समीकरण पर एक नजर

राजपूत 25,000 ब्राह्मण 35000 वैश्य 25,000 कायस्थ 10,000 कुर्मी 50,000 निषाद 10,000 यादव 25,000 मौर्य 10,000 दलित 55,000 मुस्लिम 1 लाख अन्य 10,000

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उत्तर प्रदेश मे सपा व बसपा का सूपड़ा साफ गया है -केशव प्रसाद मौर्या

कन्हैयालाल यादव/बलरामपुर प्रदेश अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी केशव प्रसाद मौर्या बुधवार को जनपद के तीन विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया। अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गैसड़ी विधानसभा प्रत्याशी शैलू सिंह,उतरौला विधानसभा प्रत्याशी रामप्रताप वर्मा तथा तुलसीपुर प्रत्याशी कैलाश नाथ शुक्ला के समर्थन में जनसभा को संबोधित कर भारी बहुमत से विजयी बनाने का आवाहन किया।  

 

अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने राजेश्वर मिश्रा प्रत्याशी विधान सभा तुलसीपुर ,डा. अनुराग यादव प्रत्याशी विधान सभा गैसड़ी ,नीरज मौर्या प्रत्याशी विधान सभा तुलसीपुर,रविन्द्र ओझा प्रत्याशी विधान सभा बलरामपुर को पार्टी विरोधी गत विधियों के कारण बाहर का रास्ता दिखाया। सभा को संबोधित करते हुए श्री मौर्या ने कहा की प्रदेश में कांग्रेस, सपा व बसपा का  सुपड़ा साफ गया है प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो किसानों का कर्ज माफ होगा। युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे जिससे उनका भविष्य उज्जवल होगा। पूरे प्रदेश में गो वध व गो वंश तस्करी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।

 

अखिलेश सरकार ने अपने शासन काल में केवल गुण्डा, माफिया एवं भ्रष्टाचारियों को प्रोत्साहन दिया। डायल 100 नंबर पुलिस सेवा सिर्फ गुण्डों की मदद कर रही है। अपराध पर किसी तरह का नियंत्रण नही है। सपा सरकार पूरी तरह किसान विरोधी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस व बसपा की ‌नीतियों को आम जनता के लिए हानिकारक बताते हुए कहा कि प्रदेश की जनता सपा, बसपा व कांग्रेस को पूरी तरह नकार चुकी है और आने वाले विधान सभा चुनाव में इनका सूपड़ा साफ हो जाएगा।

 

केन्द्र की मोदी सरकार को गरीबो, किसानो एवं युवाओं के लिए समर्पित बताते हुए उन्होंने लोगो से गैसड़ी के भाजपा प्रत्याशी शैलेश कुमार ‌सिंह शैलू, तुलसीपुर के प्रत्याशी कैलाश नाथ शुक्ला, बलरामपुर के प्रत्याशी पल्टू राम एवं उतरौला के प्रत्याशी राम प्रताप वर्मा को भारी मतो से विजयी बनाने की अपील की। इस दौरान श्रावस्ती सांसद दद्दन मिश्रा एवं भाजपा जिला अध्यक्ष राकेश सिंह आदि ने भी जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगा। इस अवसर पर विनय प्रकाश त्रिपाठी, सुरेश सिंह ‌शेरा, प्रदीप सिंह, कमलेश सिंह, शिव प्रसाद यादव, जनमेजय सिंह, राजबहादुर यादव, विष्णुदेव गुप्ता, अनूप चंद गुप्ता, राम दयाल यादव, अमरनाथ गुप्ता, मोती लाल जायसवाल व रामपाल यादव सहित तमाम पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

UP Election-2017 कल है चौथे चरण की वोटिंग जानिए कहाँ-कहाँ हैं चुनाव

लखनऊ, उत्तर प्रदेश में चौथे चरण में चुनाव 23 फरवरी को होने हैं। चौथे चरण के चुनाव लिए सभी पार्टियों का प्रचार-प्रसार चरम पर है, सभी पार्टियाँ मतदाताओं को लुभाने के लिये जी जान से जुटी हुई हैं। इस चरण में कुल 53 सीटों के लिए मतदान होगा जिसमे 12 जिलों की 53 सीटों के लिये 680 उम्मीदवार मैदान में हैं। यह उम्मीदवारों में 98 राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, चुनाव मैदान में जहाँ विरासत से राजनीति में आए कुछ प्रत्याशी शामिल हैं, तो वही कुछ इसे प्रत्याशी हैं जो दर्शकों से मतदाताओं की पसंद बने हुए हैं।

 

53 सीटों पर चुनाव के लिए 6 राष्ट्रीय पार्टियां, पांच क्षेत्रीय पार्टियां और 87 गैर मान्यता प्राप्त पार्टियां हैं, इसके आलावा 200 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। जिले के हिसाब से उम्मीदवारों की संख्या इस प्रकार है- इलाहाबाद की 12 विधानसभा की सीटों के लिए 181 उम्मीदवार, प्रतापगढ़ की सात सीटों के लिए 87 उम्मीदवार, फ़तेहपुर की छह सीटों के लिए 72 उम्मीदवार, बाँदा जिले की चार सीटों के लिए 52 उम्मीदवार, चित्रकूट की दो सीटों के लिए 26 उम्मीदवार, हमीरपुर की दो सीटों के लिए 18 उम्मीदवार, झांशी की चार सीटों के लिए 53 उम्मीदवार, जालौन की तीन सीटों के लिए 30 उम्मीदवार, कौशांबी की तीन सीटों के लिए 41  उम्मीदवार, ललितपुर की दी सीटों के लिए 24 उम्मीदवार, महोबा की दो सीटों के लिए 21 उम्मीदवार और रायबरेली की छह सीटों पर 75 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

 

चौथे चरण में कुल 19487 मतदान केंद्र पर कुल 18435563 मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। चौथे चरण में बीजेपी और सहयोगी दल के 54 प्रत्याशी हैं, बसपा के 53 प्रत्याशी हैं सपा के 33 और कांग्रेस के 25 प्रत्याशी हैं। विधानसभा की 21 सीटें संवेदनशील हैं, संवेदनशील सीटें वो होती हैं, जिसमे तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों ने अपने ऊपर दर्ज अपराधिक मामले घोषित कर रखे हों। उत्तर प्रदेश के किसी भी क्षेत्र के मुकाबले इस क्षेत्र में हमेशा से सबसे ज्यादा वोट डाले जाते हैं।   

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301गौरा विधान सभा में भाजपा को ब्राम्हणोंं की उपेक्षा पड रही भारी

श्यामलाल शुक्ल/गोंडा, गोंडा की ब्राम्हण बाहूल्य मतदाताओं वाली विधानसभा गौरा में किसी दल ने ब्राह्मण प्रत्याशी नहीं दिया। माना जाय तो गौरा में जातिवार ब्रहमण 15 प्रतिशत मुस्लिम 18प्रतिशत, कुर्मी 16प्रतिशत, दलित 19प्रतिशत, अहिर 06 प्रतिशत, क्षत्रिय 07प्रतिशत व अन्य पिछडा वर्ग 19प्रतिशत के लगभग मतदाता हैं। भाजपा पिछले सालों से पुराने भा ज पा नेता रमाकांत तिवारी दिनेश शुक्ला बैभव पांडे पूर्व प्रमुख बाबूराम यादव को टिकट देने के नाम पर खूब दौडाया सभी ने लाखों में जेब ढीली किया, अन्त में बसपा से आये प्रभात कुमार वर्मा को टिकट देकर ब्रम्हणों व यादव को निराश कर दिया। स पा से चुनाव लड रहे रामप्रताप सिंह भी भाजपा छोडकर आये नेता हैं।

 

माना जाय तो प्रभात गौरा में सवर्ण विरोधी नेता रहे इनके द्वारा सार्वजनिक मंचों पर ब्रम्हणों को पानी पी पी कर अपमानित करने का अनुभव है अब टिकट के बाद भाजपा को  इस क्षेत्र में अपने परम्परागत मतदाताओं को रिझाने के लिए ढूंढ ढूंढ कर पार्टी के ब्रम्हणण चेहरों को लाकर डैमेज कंट्रोल करने में लगी है लेकिन सारा प्रयास बेअसर दिख रहा है।

 

पहले बिहार के एक ब्रम्हण नेता को लाकर मसकनवा में सभा कराई गई फिर आज भोजपुरिया गायक से नेता बने मनोज तिवारी ने आकर भाजपा के लिए वोट मांगा। स्थानीय सांसद जिनका इस क्षेत्र में खासा प्रभाव माना जा रहा था वो भी बेअसर साबित हुए। गौरा में भाजपा को सपा के राम प्रताप पहले भाजपा का होने के नाते नुकसान पहुचा रहे हैं। वहीं कांग्रेस के तरूण पटेल कुर्मी बिरादरी में भाजपा प्रत्याशी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। भाजपा का टिकट न मिलने से बागी हुए बैभव पांडे भी रालोद से मैदान में आकर बची बचाई कसर निकालेंगे तो गौरा विधान सभा में निर्दल प्रत्याशी कुंवर बिक्रम सिंह सपा से टिकट न मिलने पर अपने परिवार सहित गाँव गाँव राज घराने का होने सब के सुख दुख में खडे रहकर साथ रहने की मार्मिक अपील के साथ वोट मांग रहे हैं। जिससे राज घराने का होने के नाते काफी असर है।

 

गौरा में राष्टीय दलों की सक्रिय राजनीति में रहनेवालों को टिकट न देकर बडे नेताओं दलबदलुओं व शिफारिसी टिकट के चलते गाँव गाँव निराशा हाथ लग रही है। ब स पा प्रत्याशी अपने जातिगत समीकरण दलित मुस्लिम के सहारे मन ही मन लड्डू खा रहा है कि जीत पक्की है। लेकिन मतदाता सारे दलों का समीकरण बिगाड कर कोई चौंकाने वाला परिणाम चाहता है जिससे कि आगे चलकर राजनैतिक दलों के टिकट वितरण में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा न हो।


भोजपुरिया गायक मनोज तिवारी भाजपा के प्रति ब्राहम्णो का खासकर इस सीट पर आक्रोश रोक पाने में नाकामयाब रहें इसलिए भाजपा अब कलराज मिश्रा को भी लाने की योजना बना रही हैं अब देखना हैकि पांचवें चरण में यहां के 311876 मतदाता किस पर मुहर लगाते हैं इतनी कोशिशों के बाद भा ज पा के पुराने लोग अपने घरों पर बैठे हैं और हर हाल में पार्टी व कार्यकर्ता के बीच अराजकता फैलानेवाले पार्टी के अच्छे दिनों में साथ आनेवालों को हरहाल में सबक सिखाने का लोगों में कौतूहल परवान चढ रहा है।

275 विधानसभा क्षेत्र अयोध्या-क्या बीजेपी को इस बार मिलेगें राम ?

अयोध्या, 2012 में यहां सपा का परचम लहाराया था। तेजनारायण पांडे उर्फ पवन पांडे ने। जब 1991 से 2012 तक लगातार विधायक रहे भाजपा के दिग्गज नेता लल्लू सिंह को पटखनी दी थी। यह उस चुनाव की बहुत बड़ी घटना थी। इसकी दो वजह थी- पहला लल्लू सिंह पार्टी के कद्दावर नेता है। वे पिछले 25 साल से अयोध्या सीट पर काबिज थे। दूसरा भाजपा के राजनीति की धुरी यही इलाका रहा है। यहां की सीट गवाना, वह भी उस पार्टी से जिसे रामविरोधी कहा जाता है, छोटी बात नहीं थी। वहां टहलने-घूमने पर मालूम चला की हालात ज्यादा नहीं बदले है।

 

कहा जा रहा है कि रामविरोधी पार्टी के प्रत्याशी और निवर्तमान मंत्री पवन पांड़े मजबूत स्थिति में है। हालांकि इसकी बड़ी वजह सपा-कांग्रेस का गठबंधन है। लोगों की राय है कि इस बार फिर पवन पांड़े सीट निकाल लेगे। वे आगे कहते हैं  कि अगर गठबंधन न हुआ होता तो पवन पांड़े सीट हार जाते। उनके कामकाज के बारे में पूछने पर मालूम चला कि ठीक-ठीक काम किया है। मगर वैसा नहीं की वे जीत जाते।

 

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि वे अच्छी स्थिति में भाजपा की वजह से है। भाजपा ने वहां से वेद प्रकाश गुप्ता को उतारा है। इनको लेकर भाजपा में ही विरोध है जो जगजाहिर है। वे बसपा से भाजपा में आए हैं । संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनसे बेहतर लोग स्थानीय इकाई में मौजूद है। इसके बाद भी पार्टी ने समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करके बाहरी नेता को टिकट दिया। उनका अयोध्या में कोई जनाधार नहीं है। संगठन के लोगों का मानना है कि पार्टी ने पवन पांड़े के सामने एक कमजोर उम्मीदवार उतारा है। कहा जा रहा है कि वहां पर मुख्य मुकाबला सपा और बसपा के बीच है। 2012 के चुनाव में सपा के पवन पांडे को 55262 वोट मिले थे वहीं बीजेपी के लल्लू सिंह को 49857 वोट मिले थे।

कुल 3 लाख मतदाताओं में यहाँ 60 हजार दलित,50 हजार मुस्लिम मतदाता हैं जो निर्णायक भूमिका में हैं।

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156 विधान सभा क्षेत्रों में अतिपिछड़ी जातियों की हैं निर्णायक भूमिका

विधान सभा चुनाव-2017 के महासमर के चैथे से सातवे चरण के चुनाव में सत्ता की प्रबल दावेदार भाजपा महागठबंधन, सपा-कांग्रेस गठबंधन व बसपा की गंगा जमुना के दोआब, घाघरा, राप्ती, केन, बेतवा, गोमती, कर्मनासा, सई, तमसा, सरयू आदि नदियों के बेसिन में असल परीक्षा होगी। नदियों के इन दोआबों में राजनीतिक दलों के भाग्य का असली परीक्षा होती है। पूर्वांचल की 170 कानपुर क्षेत्र की 6़9 व बुन्देलखण्ड की 19 विधान सभा क्षेत्रों में चैथे चरण के रूप में 19 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 4 मार्च व 8 मार्च को चुनाव होना है। इन क्षेत्रों की 156 विधान सभा क्षेत्रों में निषाद, कश्यप, बिन्द, कोयरी, काछी, पाल, बघेल, राजभर, चैहान, विश्वकर्मा, प्रजापति जैसी अतिपिछड़ी जातियां निर्णायक हैं।

 

उत्तर प्रदेश के बदलते हालात में सत्ता की प्रबल दावेदार भाजपा-अपना दल-भासपा, कांग्रेस-सपा व बसपा के मध्य जबरदस्त संघर्ष होना है। बुलन्देलखण्ड में बसपा का प्रदर्शन विगत चुनावों में बेहतर रहता रहा है। परन्तु इस बार भाजपा व सपा-कांग्रेस गठबंधन इनसे आगे निकलने की कवायद में जुड़े हैं। विगत विधान सभा चुनाव-2012 में सपा को पूर्वांचल की 170 सीटों में से 106 सीटें मिली थी। जबकि बुलन्देलखण्ड से उसे मात्र 4 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। विधान सभा चुनाव-2012 में पूर्वांचल की 106 सीटों में सपा सरकार के गठन में किंग मेकर की भूमिका निभाते हुए पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सहयोग किया। 2007 के विधान सभा चुनाव में बसपा को पूर्वांचल से 102 सीटें तथा राम लहर में भाजपा को 97 सीटें मिली थी और इन सीटों के साथ बसपा व भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकारे बनी थी। पूर्वांचल में वहीं दल आगे रहता हैं जिसे अतिपिछड़ों का भरपूर सहायोग मिलता है। सामाजिक चिन्तक लौटन राम निषाद ने कहा कि मुलायम सरकार से नाराज 17 अतिपिछड़ी जातियों के साथ-साथ अन्य अतिपिछड़ी जातियों ने विकल्प के तौर पर बसपा को चुना था और मायावती सरकार से नाराजगी व 17 अतिपिछडी जातियों ने अनुसूचित जाति आरक्षण के सवाल पर सपा को एक जुट हो समर्थन दिया और अखिलेश सरकार द्वारा इन जातियों को अनुसूचित जाति आरक्षण देने की पहल से एक बार फिर ये जातियां सपा के पाले में जा सकती हैं।

 

19 फरवरी को जिन क्षेत्रों में मतदान होना हैं, वे गंगा, जमुना, चम्बल बेसीन, गोमती, घाघरा, सई नदी के किनारे की विधान सभायें हैं। जिनमें से आधा क्षेत्र मुलायम सिंह यादव परिवार के प्रभाव वाले क्षेत्र हैं। 23 फरवरी को गंगा, यमुना, चम्बल, केन बेतवा नदियों के क्षेत्रों में चुनाव होना जिसमें निषाद जातियों की काफी निर्णायक स्थिति है। गंगा के किनारे फर्रूखाबाद, कन्नौज, कानपुर, उन्नाव, फतेहपुर, रायबरेली, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, भदोही, मिर्जापुर, इलाहाबाद, चन्दौली, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया व जमुना के किनारे औरैया, इटावा, जालौन, हमीरपुर, बांदा, इलाहाबाद, के क्षेत्र आते हैं। इसी तरह गोमती के किनारे सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, जौनपुर, राप्ती के किनारे गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, संतकबीरनगर और घाघरा के दोनो पार अम्बेडकर नगर, आजमगढ़, बाराबंकी, बस्ती, बलिया, बहराईच, देवरिया, फैजाबाद, गोरखपुर, संतकबीरनगर, सीतापुर, गोण्डा जनपद की विधान सभायें जिसके किनारे निषाद मछुआरा जातियों की बड़ी संख्या निषाद करती है। चम्बल के क्षेत्र में इटावा जालौन, सई के किनारे उन्नाव, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, जौनपुर, केन बेतवा के किनारे हमीरपुर, बांदा की विधान सभायें अवस्थित है।

 

आगामी दिनों में जिन विधान सभा क्षेत्रों में विधान सभा चुनाव होना है वे गंगा, जमुना, बेतवा, घाघरा, सरयू, केन, चम्बल, कर्मनासा, गांगी, मगई, छोटी सरयू, गोेमती, कनहर, सोन, रिहन्द, आमीन, सई, गन्डक, देशो, राप्ती, तमसा, टोंस, भैसही, व्यास, बेशो आदि नदियों के किनारे अधिकांश विधान सभा क्षेत्र अवस्थित है। जहां निषाद, मछुआरा, केवट, बिन्द, मल्लाह, कश्यप, राजभर, चैहान, कुशवाहा, मौर्य, काछी, कोयरी, गड़ेरिया, बियार, कुम्हार आदि अतिपिछड़ी जातियां बड़ी संख्या में पाई जाती है। जिसमें मिर्जापुर, इलाहाबाद, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फर्रूखाबाद, औरैया, उन्नाव, गाजीपुर, भदोही, चन्दौली, गोरखपुर, संतकबीरनगर, फैजाबाद, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, महाराजगंज, आजमगढ़, बलिया, बहराईच, गोण्डा, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, अम्बेडकर नगर में अतिपिछड़ों में सबसे अधिक संख्या-निषाद, मल्लाह, केवट, बिन्द, जातियों की है। गाजीपुर, बलिया, मऊ आजमगढ़, देवरिया, कुशीनगर, चन्दौली में राजभर, चैहान जातियां कई विधान सभाओं में निर्णायक है। कुशवाहा मौर्य गाजीपुर, बांदा, फतेहपुर, इलाहाबाद, अम्बेडकरनगर, सोनभद्र, देवरिया, कुशीनगर, फर्रूखाबाद, झांसी की 20-22 विधान सभा क्षेत्रों में निर्णायक है। दबंग पिछड़ी जातियों में गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, जौनपुर, चन्दौली, फैजाबाद, देवरिया, में यादव, मिर्जापुर, इलाहाबाद, गोण्ड़ा, बाराबंकी, प्रतापगढ़, महाराजगंज, गोरखपुर, बस्ती, फैजाबाद, अम्बेडकरनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, कुशीनगर, कानपुर, फतेहपुर, चित्रकूट, बांदा में कुर्मी व मैनपुरी, इटावा, औरैया, फर्रूखाबाद, कन्नौज, उन्नाव, फतेहपुर, रायबरेली, जालौन, हमीरपुर, महोबा की दो दर्जन विधान सभा क्षेत्रों में किसान, लोधी जाति निर्णायक स्थिति में हैं। सामाजिक चिन्तक लौटन राम निषाद ने कहा कि आगामी चरणों में जो चुनाव होना है उसमें निषाद राज के वंशजों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी और निषाद राज के वंशज ही राजनीतिक दलों के भाग्य का फैसला करेंगे। देखना होगा कि केवट, निषाद किसकी नईया को पार लगाते हैं।

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