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updated 9:21 AM UTC, Oct 17, 2017
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स्वामी कैलाशानंद की खुली पोल-सरकार के काम दिलाने के एवज में ली BMW

देहरादून : आध्यात्म और राजनीति के घालमेल में अच्छे अच्छे गुरुओं की पोल खुल चुकी है इसी कडी में एक और नाम जुड गया है कैलाशानंद का। अध्यात्मिक गुरु और काली पीठ के महाराज स्वामी कैलाशानंद महाराज के ऊपर देहरादून के एक परिवार ने धोखाधडी का आरोप लगाया है। परिवार का आरोप है कि यूपी सरकार से काम दिलवाने के नाम पर स्वामी कैलाशानंद महाराज ने BMW कार ली लेकिन यूपी सरकार से कोई काम नही दिलवा पाए।

बाबा ने खुद को उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री आजम खाँ और शिवपाल यादव का करीबी बता कर यूपी सरकार से किसी बडे काम का टेंडर दिलवाने की एवज में BMW गाड़ी ली थी। लेकिन न काम हुआ न महाराज अब गाड़ी के पैसे दे रहे हैं और न गाडी वापस कर रहे हैं। उमेश बगिया से 2012 में बाबा ने कार ली थी मगर 2016 तक चार सालों से पीडित परिवार आश्रम और पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट काट कर थक गया है। गाडी लोन पर ली गई थी लिहाजा बैंक वाले पैसे देने का दबाव भी बना रहे थे। पुलिस इस मामले पर पल्ला झाड़ रही है।

दरअसल देहरादून के रेसकोर्स वेले में उमेश बगिया का परिवार रहता है। उमेश का कामकाज ठीक नहीं चल रहा था तभी उमेश के दोस्त ने उनकी मुलाकारत महाराज से करावाई और कहा कि यह यूपी सरकार के वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव के करीबी है और वह उत्तर प्रदेश सरकार से काम दिलवा सकते है इसके एवज में महाराज जी को कुछ देना होगा।

उमेश की मां ने बताया कि काम दिलवाने की बात महाराजजी से हो गई और सात दिनों के अन्दर महाराज के आश्रम में चमचमाती BMW उनके बेटे ने खडी कर दी। पैसे की तंगी के बावजूद भी उमेश ने बाबा को गाड़ी किस्तों पर दिलवाई वो भी इस लिए की अगर महाराज काम दिलवा देते है तो वो आराम से इस गाड़ी के पैसे चुका देगा। लगभग 5 लाख रुपये देकर गाड़ी निकलवा तो ली लेकिन कुछ दिन तक उमेश को कोई काम नहीं मिला।

मां - बाप उमेश की पत्नी और बच्चो के साथ बड़ी मुश्किल से गुजरा कर रहे थे। अचनाक बैक से उनके पास नोटिस आने लगा। बेट उमेश डिप्रेशन में जाने लगा। उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे लिहाजा उनहोंने कैलाशानंद से गाड़ी के पैसे या गाडी दोनों में से कोई एक जीच देने को कहा मगर बाबा जी ने कुछ वापस नहीं किया।

दाने दाने के तरस रहा है यह परिवार

 

गढ़वाल आईजी संजय गुंजियाल से 16 फरवरी 2016 को इस मामले की शिकायत की गई थी लेकिन कोई फायद नहीं हुआ। एक तरफ गाडी की किस्त देने के लिए परिवार ने अपना घर गिरवी रख कर बैंक को पैसे दिए वहीं दूसरी तरफ बाबा कैलाशानंद चुप हैं। गाडी के पेपर उमेश के नाम पर है फिर भी पुलिस कार्यवाई करने में डर रही है।

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