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updated 9:55 AM UTC, Oct 23, 2017
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देर रात तक काव्य रस की बही सरिता यादगार बन गया राष्ट्रीय कवि सम्मेलन

गाजियाबाद के अटल चौक-वसुंधरा का राष्ट्रीय कविसम्मेलन-स्व भानुप्रताप शुक्ल स्मृति सम्मान इस बार कई मायनों में बेहद खास रहा। बड़ी तादाद में काव्यप्रेमी सुबह 4 बजे तक बैठे रहे। अटल चौक पर देर रात तक काव्य प्रेमियों के ठहाके गूंजते रहे। अदब की महफिल में गीत गज़लों और देश भक्ति की रचनाओं ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया वहीं हास्य व्यंग की रचनाओं ने सामाजिक विसंगतियों पर जमकर प्रहार किए। डॉ. कुंवर बेचैन ने कहा कि नेक काम में देर ना कीजिए साहिब, देर होती है होती ही चली जाती है।

 

ओज क हिमालय डॉ. हरिओम पंवार ने भगत सिंह को याद करते हुए देशभक्ति से पूर्ण कविता सुनाई। बंदूकों की गोली का उत्तरसदभाव नही होता.हत्त्यारों के लिए अहिंसा का प्रस्ताव नही होता. कोई विषधर कभी शांति के बीज नही बो सकता है और भेड़िया शाकाहारी कभी नही हो सकता है

लोकप्रिय कवि गजेन्द्र सोलंकी ने हिंदी वंदना सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। साथ ही उन्होंने सुनाया कितने दधीचियों ने अस्थियों का दिया दान कितने तपस्वियों का मिला वरदान है। भारत के वासियों तुम्हारे ही हाथों में अब मातु भारती की आन-बान शान है।

कवि डॉ. ध्रुवेन्द्र भदौरिया ने सुनाया..नीर भरी बदली पे मिट गई महादेवी मैं महीयसी के नयनों का नीर होना चाहता हूं। झीनी झीनी बीनी गर चादर मिले कहीं तो राम की कसम मैं कबीर होना चाहता हूं।

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सुपरचित हास्य कवि बृजेश दिवेदी ने जेल पहुंचे बाबा राम रहीम के जेलर के संवाद पर कविता सुनाई। जेलर ने कहा बाबा पहली बार जेल आए, चक्की पीसो और यहां राम नाम कीजिए। बाबा बोले- आप के बताए हुए सारे काम करूं किंतु राधे मां की झप्पी वाला इंतजाम कीजिए।।

 

ओज कवि मनवीर मधुर ने चीन और पाकिस्तान को ललकारते हुए कई छंद सुनाए। आगरा से पधारी कवियत्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने भावपूर्ण गीत सुनाए वहीं मेरठ से पधारी कवियत्री तुषा शर्मा ने श्रृंगार के गीत सुनाए। कानपुर से पधारे विख्यात शायर जौहर कानपुरी और मुजफ्फरनगर से आए शायर खुर्शीद हैदर ने अपने शानदार कलाम पेश किए।  इसके साथ ही कवि चरनजीत  चरन, देव नागर समेत कई कवियों ने काव्यपाठ किया। कार्यक्रम का सफल संचालन अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कवि गजेन्द्र सोलंकी ने किया।

 

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और नगर विधायक अतुल गर्ग थे। कार्यक्रम का सफल संयोजन बीजेपी के पूर्व विधायक रूप चौधरी ने किया। वरिष्ठ गीतकार डॉ. कुंवर बेचैन को स्व. भानु प्रताप शुक्ल स्मृति सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में आए हुए श्रोताओं का आभार पूर्व विधायक रूप चौधरी जी ने किया।

"शंख प्रक्षालन" से कर सकते हैं 11 मीटर लम्बी आहार नाल को पूर्ण शुद्ध

गाजियाबाद,रविवार,13-11-2016 को अखिल भारतीय योग संस्थान के  योग विशेषज्ञ नेत राम जी ने शंखप्रक्षालन योग शिविर का शुभारम्भ ओ३म् की प्रणव ध्वनि व गायत्री मंत्र से किया जिसकी अध्यक्षता श्री के के अरोरा की ने की।श्री नेतराम जी ने साधकों को शंख प्रक्षालन की पाँचों क्रियाएँ ताड़ासन,त्रियकासन,कमरचक्रासन,त्रियक भुजंगासन व् उकड़ुआसन कराये गए जिसका सुन्दर डेमोस्ट्रेशन श्रीमती वीना वोहरा ने किया।शंख प्रक्षालन से पूर्व व बीच -2 में साधकों को सेंधा नमक युक्त आर ओ का गरम पानी पिलाया गया।

 

मंच का कुशल सञ्चालन संस्थान के महामंत्री देवेन्द्र हितकारी ने किया।

 

मुख्य शिक्षक मनमोहन वोहरा ने कहा  की मानव शरीर में अधिकांश रोग,शरीर के मध्य प्रदेश अर्थात पेट के शुद्ध न होने के कारण होते हैं।मानव की 11 मीटर लम्बी आहार नाल को भीतर से पूर्ण शुद्ध करने का सर्वोत्तम उपाय है "शंख प्रक्षालन"है।

 

नेहरू नगर स्थित सरस्वती शिशु मन्दिर के प्रांगण में कराया गया शंखप्रक्षालन

 

श्री वोहरा ने बताया की मानव पेट की 11 मीटर लम्बी आहार नाल की आकृति "शंख" की भांति घुमावदार होती है।उपयुक्त मात्रा में नमक युक्त गर्म जल की मुख के रास्ते से पिलाकर पांच विशेष आसान कराये जाते हैं जिससे यह जल जमे हुये मल को हाइड्रोलिक प्रेशर से धकेलता है।धीरे-2 शौच के रास्ते से पूरा पेट साफ़ हो जाता है।पेट शुद्धि की यही क्रिया शंख प्रक्षालन कहलाती है।शंखप्रक्षालन के बाद उपाध्यक्ष अशोक शास्त्री जी की देख रेख में कुंजल और जल नेती का अभ्यास कराया गया।

 

संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर कृष्ण कुमार अरोरा ने बतया की  यह क्रिया वर्ष में केवल दो बार दीपावली  व होली के उपरान्त कराई जाती है।इस क्रिया के करने से मानव का पेट भीतर से स्वच्छ,रोग रहित,नर्म हो जाता है।

 

महासचिव देवेन्द्र हितकारी जी ने बताया की कब्ज़,एसिडिटी,डायबिटीज़ व उदर रोगियों के लिये यह क्रिया विशेष रूप से लाभ दिलाती है।पूर्ण क्रिया के बाद देशी घी से युक्त मुंग की दाल की खिचड़ी का सेवन कराया गया।

 

श्रीमती वीना वोहरा व् प्रवीण आर्य ने उठ जाग मुसाफिर भोर भई, प्रभु तेरा ओ३म् नाम सब का सहारा है,व ओ३म् का सिमरन किया करो प्रभु के सहारे जिया करो,जो दुनिया का मालिक है नाम उसी का लिया करो,आदि गीतों से समां बांध दिया।

शान्ति पाठ के साथ सभा सम्पन्न हुयी।

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