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updated 4:51 PM UTC, Feb 19, 2018
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साढ़े नौ मुख्यमंत्री होने से यूपी को नहीं मिल पा रहा नया डीजी--रामगोविंद चौधरी

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ: सीआईएसएफ के महानिदेशक ओपी सिंह का यूपी पुलिस का मुखिया बनाने की घोषणा के 17 दिन बाद भी राज्य को नया डीजी नहीं मिलने से भाजपा सरकार की किरकिरी हो रही है। अब विपक्ष सरकार की चुटकी लेते हुए कह रहा है कि प्रदेश में साढ़े नौ मुख्यमंत्री होने के कारण घोषणा तो हो जाती है लेकिन क्रियान्वयन में पसीने छूट जा रहे हैं।

 

30 दिसंबर को जब राज्य सरकार ने ओपी सिंह को डीजीपी बनाने का ऐलान कर उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से रिलीव करने का पत्र लिखा था। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि इसमें इतनी मुश्किलें आएंगी। नए डीजीपी के नाम का ऐलान हुए एक पखवारा बीत चुका है, लेकिन वह अभी केंद्र से रिलीव नहीं हुए हैं।

 

सूत्रों की मानें तो अब राज्य सरकार नए नाम की तलाश में जुटी है। बताते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगरा लौटने के बाद आज शाम सीएम और प्रमुख सचिव यूपी के नए डीजीपी के नाम को लेकर चर्चा करेंगे। देर शाम यूपी के नए डीजीपी के लिए फाइनल घोषणा कर दी जाएगी।

 

यूपी के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जब डीजीपी के लिए नाम का ऐलान होने के बाद किसी अफसर की 15 दिन बाद भी केंद्र से रिलीविंग नहीं हो पाई है। एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो 30 दिसंबर को ओपी सिंह को रिलीव करने का जो पत्र यूपी सरकार ने केंद्र में भेजा, उसमें दो गलतियां हुईं।

 

एक तो उसमें लिखा गया कि ओपी सिंह को डीजीपी बनाया गया है, इसलिए उन्हें कार्यमुक्त किया जाए। दूसरी गलती यह कि वह पत्र गलत सेक्शन में चला गया। हालांकि, राज्य सरकार ने दूसरे पत्र में दोनों गलतियों में सुधार कर लिया है।

 

जब कि सत्ता से जुड़े सूत्रों की मानें तो ओपी सिंह सीएम की सीधी पसंद नहीं हैं। संगठन के एक बड़े नेता की सिफारिश पर उनके नाम की घोषणा कर दी गई थी। इसीलिए सीएम ने अचानक दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा था। उसी मुलाकात के बाद से ओपी सिंह की रिलीविंग लटक गई। चूंकि घोषणा के तुरंत बाद डीजीपी का नाम बदले जाने से प्रदेश में गलत संदेश जाता। इसलिए रिलीविंग में देरी की जा रही है। ताकि, लंबे समय तक कुर्सी खाली न छोड़ने को आधार बनाकर नए डीजीपी के नाम की घोषणा की जा सके।

 

इस संदर्भ में नेता विरोधी दल रामगोविंद चौधरी ने कहा कि यूपी में साढ़े नौ मुख्यमंत्री हैं इस लिए मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अमल होने में बार-बार फजीहत होती है। जब उनसे पूंछा गया कि कौन-कौन साढ़े नौ मुख्यमंत्री हैं तो उन्होंने कहा कि यह में सदन में बता चुका हूं। भाजपा के लोगों से ही पूंछ लीजिये।

 

 

 

बंधक नाबालिक बच्चों से पुलिस करती रही पूछताछ देखें वीडियो

गौरव शर्मा/सीतापुर। सीतापुर के थाना थानगांव क्षेत्र से पुलिस के सामने दो नाबालिक बच्चों को बांध कर पूछताछ करने का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दो नाबालिक बच्चे जिनकी उम्र 10 वर्ष ओर 12 वर्ष की थी  को कुढ ग्रामीणों ने शक के आधार पर पकड़ कर एक गमछे से एकसाथ बांध दिया और 100 नम्बर डायल करके पुलिस के हवाले कर दिया।

 

मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ भी एकत्र हो गयी थी मौके पर पहुँची पुलिस ने भी कपड़े से बंधे बच्चों को बन्धनमुक्त न कराकर कुर्सियों पर बैठ कर नाबालिकों पर रौब झाड़ते हुए घण्टों तक पूछताछ करती रही। मामले का वीडियो बनता देख पुलिस ने कैमरा बन्द करवाकर नाबालिकों को बंधे हुए आपने साथ थाने ले गयी पुलिस की मौजूदगी में नाबालिकों के साथ इस तरह का व्यवहार जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या यूपी पुलिस के जवानों को ये भी नही पता है कि बच्चों से पूछताछ कैसे की जाती है वो भी तब जब उनकी उम्र -12 साल की हो और किसी भी गंभीर अपराध में वो लिप्त भी न हों सिर्फ शक के आधार पर वर्दी पहने दो मुछटंडे पुलिस वाले बच्चों पर रौब झाडते रहे।

 

मामले में जब थानगांव पुलिस से जानकारी ली गयी तो बताया गया दोनो बच्चे गांव में गरीबी के चलते मूमफली बेचने आये थे और दोनों निर्दोष थे उन्हें शक के आधार पर ग्रामीणों ने बांध कर रक्खा था अब नाबालिकों को उनके माँ बाप के सुपुर्द कर दिया गया है।

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