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updated 9:21 AM UTC, Oct 17, 2017
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मिर्जापुर पहुँची "लाईफलाइन एक्सप्रेस",ट्रेन नही चलता फिरता हाँस्पिटल है ये

रामकुमार सिंह/मिर्जापुर। प्रदेश  में पहली बार पहुची लाईफ लाइन एक्सप्रेस ट्रेन आज मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर पहुँची। इस ट्रेन का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने किया। जिले में पहली बार पहुची इस ट्रेन के माध्यम से मरीजों का इलाज किया जाएगा।इसके लिए पूरी ट्रेन को हाईटेक अस्पताल में बदल दिया गया है। ट्रेन के अंदर विश्व की सभी आधुनिकतम सुविधायें मुहैया कराई गई हैं जिसके माध्यम से मरीजो का इलाज किया जाएगा।

 

ट्रेन के सात डब्बो को चलता फिरता अस्पताल बनाया गया है। जिले में यह ट्रेन 21 दिन रहेगी। ट्रेन  मिर्जापुर  रेलवे स्टेसन पर 29 अगस्त से 18 सितम्बर तक मौजूद रहेगा। इस दौरान कोई भी इस लाईफ लाइन ट्रेन की सुविधा का लाभ उठा सकता है। इसके लिए जिला अस्पताल को सेंटर बनाया गया है।जहाँ  पर  मरीजो का  रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। इसके बाद जाँच कर मरीज को लाइफ लाइन ट्रेन में इलाज के लिए भेजा जाएगा।

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इस ट्रेन में  डॉक्टर और नर्स के अलावा इलाज के लिए आधुनिक चिकित्सा के  उपकरण भी मौजूद हैं।ट्रेन के अंदर ही आपरेसन थियेटर बनाया गया है जिसमे मरीजों का आपरेशन होना है।आज रेलवे स्टेशन पर इस लाइफ लाइन ट्रेन का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने किया इस दौरान जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने जिले के लोगो से इस सुबिधा का भरपूर लाभ उठाने की अपील किया।

"लाईफलाइन एक्सप्रेस" ट्रेन में हुई कैंसर की सर्जरी

मुंबई, लाईफलाइन एक्सप्रेस में भारत के पहले कैंसर सर्जरी को अंजाम दिया गया। इस सर्जरी को अंजाम दिया विश्व के जाने माने कैंसर रोग विशेषज्ञ डाॅक्टर पंकज चतुर्वेदी और उनकी टीम ने। यह अपनी तरीके का बिल्कुल अलग आॅपरेशन था क्योंकि कैंसर के पेसेंट की सर्जरी में कई तरीके के विशेष सामान और डायग्नाॅस्टिक की जरुरत होती है।6 दिसंबर को ही 25 साल पहले लकडी के डिब्बों से शुरु हुई लाईफ लाइन एक्सप्रेस में 2 डिब्बे कैंसर के इलाज के लिए जोडे गए थे।

 

इम्पैक्ट इंडिया फाउंडेशन रेलवे तथा स्वास्थ्य मंत्रालय से हाथ मिला कर मुहिम के तौर पर लाइफ लाइन एक्सप्रेस चलाई है। लाइफ लाइन एक्सप्रेस नाम की इस गाड़ी में कैंसर और परिवार-नियोजन सेवा के लिए नए डिब्बे जोड़े गए हैं। यह चलता-फिरता अस्पताल देश के दूरदराज के इलाकों में पहुंचता है। रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक, अब तक लाइफ लाइन एक्सप्रेस से छोटी-बड़ी मिलाकर दस हजार सर्जरी की गई। करीब 20 से 25 दिन एक इलाके में रुक कर मरीजों का इलाज करता है। अब से पहले मोतियाबिंद व दूसरी छोटी-मोटी बीमारियों की सर्जरी की जाती रही है। ट्रेन में विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सों और नकनीकी कर्मचारियों के अलावा सफाई कर्मियों का पूरा दल मौजूद है।

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