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updated 12:34 PM UTC, Jun 23, 2017
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भूतपूर्व सैनिकों को राह दिखाती एक संस्था -"वाॅरियर्स क्लब"

नयी दिल्ली। जो सैनिक पूरी जवानी देश के दुर्गम इलाकों,बर्फ और पहाड़ो में काटता है और हर तरह के कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा में अपनी प्राणों की आहूति देने को तैयार रहता है वही सैनिक जब अपनी ड्यूडी पूरी कर रिटायर्ड होते है तो उन्हें सामने फिर एक नई परिस्थिती आ जाती है जिसमें वास्तविक जीवन में उसको कई कठिनाईयों का सामना करना पडता है। नई नौकरी ढूंढने से लेकर, बच्चों की शिक्षा,मकान से लेकर हर तरह की समस्या उसके सामने खडी हो जाती है। जो सैनिक रात भर जागकर हमे चैन की नींद सोने देता है उसी का शोषण शुरु हो जाता है। इन्हीं सब चीजों को ध्यान में रखकर दो भूतपूर्व सैनिकों ने मिलकर Warrior 's Club की स्थापना की है।

 

Warrior 's Club  सन 2016 में भूतपूर्व सैनिक प्रदीप शर्मा द्वारा स्थापित किया गया तथा Warrior 's Club भूतपूर्व सैनिकों (NCOs / JCOs ) के लिए लगातार कार्यरत है। इसके संस्थापक प्रदीप शर्मा का मानना है की हमारे देश की सेना में सैनिकों को कई क्षेत्रों (जैसे सुरक्षा, प्रशासन एवं सप्लाई चेन आदि) में उत्तम दर्जे का प्रशिक्षण प्राप्त होता है, हालाँकि सेना से बाहर कल्चरल डिफरेंस की वजह से सैनिकों को नौकरी ढूंढने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इसके अलावा, भूतपूर्व सैनिक सेना से बाहर कम वेतन मिलने की वजह से कई सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।

 

इन सभी बातों को मध्य नज़र रखते हुए प्रदीप शर्मा ने अपने सहयोगी सतीश कुमार के साथ मिल कर Warrior 's Club की स्थापना की, जिसके माध्यम से वे भूतपूर्व सैनिकों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, जिसमे सबसे महत्वपूर्ण, Orientation प्रोग्राम (डिफेन्स टू कॉर्पोरेट) एवं भूतपूर्व सैनिकों को नौकरी दिलवाने में मदद करना है।  इसके अतिरिक्त भी Warrior 's Club , अपने मेंबर्स को कई विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाता है। पिछले एक वर्ष में Warrior 's Club अपने कई मेंबर्स को अच्छी नौकरी दिलवाने में मदद की है।

 

Warrior 's Club भूतपूर्व सैनिकों के परिवार के लोगों का भी ध्यान रखता है और सैनिकों के बच्चों की हाॅयर एजुकेशन के लिए काउंसिलिंग तथा सरकारी नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद करता है। साथ ही भूतपूर्व सैनिकों के परिवार वालों के लिए इनके द्वारा स्थापित अन्य शहरों के Warrior 's Club में रहने खाने की सुविधा भी दी जाती है।

 

 

Warrior 's Club के इन प्रयासों की कई इंडस्ट्री लीडर्स एवं संस्थाओं ने सराहना की है एवं इसे भूतपूर्व सैनिकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। वारियॅर क्लब की लक्ष्य भूतपूर्व सैनिकों में नई चेतना का संचार करना तथा राज्य की नीति से हटकर भूतपूर्व सैनिको को सहयोग प्रदान करते रहना है जिससे बदलते नए परिवेश में सैनिक अपने को समाज में स्थापित कर सकें।

दिव्यांगो को मिला शक्ति सम्मान

 

आज दिनांक 21-05-2017 को उन्नत भारत द्वारा नयी दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया में शारीरिक रूप से अक्षम यानी दिव्यांग व्यक्तियों के लिए दिव्यांग शक्ति सम्मान का आयोजन किया, समारोह में वैसे दिव्यांगों का सम्मान किया गया जो अपने कार्यों से समाज के अन्य दिव्यांगों तथा शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए प्रेरणा श्रोत बनें। बाबु जगजीवन राम राष्ट्रीय प्रतिष्ठान की मदद से कार्यक्रम का आयोजन किया गया, इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता राज्य मंत्री श्री विजय सांपला, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री श्याम जाजू, उन्नत भारत के अध्यक्ष अभिषेक मिश्र, बाबु जगजीवन राम राष्ट्रीय प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष श्री मति स्वाति कुमार और कोषाध्यक्ष श्री संजय निर्मल, पूर्व विधायक विनोद कुमार बिन्नी, विकलांगता अधिकार के मुख्य आयुक्त डॉ. संजय कान्त प्रसाद एवं भाजपा नेता संदीप दुबे उपस्थित थे, सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता राज्य मंत्री श्री विजय सांपला ने सरकार के द्वारा दिव्यांगों के लिए किये कार्यों की जानकारी दी, इस मौके पर कार्यक्रम के आयोजक अभिषेक मिश्र ने बताया की कार्यक्रम का उदेश्य दिव्यांगो को अच्छे कार्यों से लगातार जुड़े रहने की प्रेरणा मिले इसके लिए लगातार इस तरह के आयोजन उन्नत भारत द्वारा किया जाएगा समारोह में सम्मानित हुए दिव्यांगो में शिक्षिका दर्शाना, विकलांग सहारा समिति के कपिल अग्रवाल एवं सोनू भोला, बैंक में कार्यरत एवं अंतर्राष्ट्रीय शूटिंग में रजत पदक विजेता पूजा अग्रवाल, सामाजिक संस्था के लिए रिंकू वर्मा, नमिता भल्ला, नरिन्दर अग्रवाल, नृत्य में प्रमोद, और खेल के क्षेत्र से रवि चौहान, अंशुल, जोगिन्दर सिंह को दिया गयाI

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समर्पित अभिनेता और राजनेता की तरह हमेशा याद किये जाएंगे विनोद खन्ना

महान कलाकार और राजनीतिज्ञ विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को पेशावर (अब पाकिस्तान का भाग) में हुआ था। एक साल बाद 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद विनोद खन्ना का परिवार मुंबई आ गया। विनोद खन्ना एक व्यापारिक पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखते थे। विनोद खन्ना की माँ का नाम कमला और पिता का नाम किशनचंद खन्ना था। विनोद खन्ना के तीन बहनें और एक भाई थे। विनोद खन्ना ने सेंट मैरी स्कूल, मुंबई से दूसरी क्लास तक शिक्षा प्राप्त की और फिर सेंट जेवियर्स हाईस्कूल, दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया। 1957 में, खन्ना परिवार दिल्ली आ गया जहां विनोद खन्ना ने दिल्ली पब्लिक स्कूल, मथुरा रोड से शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद खन्ना परिवार 1960 में मुंबई पुनः लौट आया, लेकिन उन्हें नासिक के पास देओली में बार्न्स स्कूल भेजा गया। अपने बोर्डिंग स्कूल के समय विनोद खन्ना ने सोलवां साल और मुगल-ए-आजम फिल्म देखीं और अभिनय के प्रति उनका प्यार जागा। विनोद खन्ना ने सिडनहैम कॉलेज, मुंबई से वाणिज्य विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। विनोद खन्ना का विवाह 1971 में गीतांजलि से हुआ। जिनसे उनके दो पुत्र हैं, राहुल खन्ना और अक्षय खन्ना। राहुल खन्ना और अक्षय खन्ना दोनों ही बॉलीवुड में सक्रिय हैं। 1985 में विनोद खन्ना का गीतांजलि से तलाक हो गया। इसके बाद विनोद खन्ना ने दूसरा विवाह कविता से 1990 में किया। जिनसे उनका एक पुत्र साक्षी खन्ना और एक पुत्री श्रद्धा खन्ना है।      

 

विनोद खन्ना ने अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत सुनील दत्त की 1968 में आई फिल्म ‘मन का मीत’ से की, जिसे अधूरति सुब्बा राव द्वारा निर्देशित किया गया, इस फिल्म में मुख्य नायक सोम दत्त थे, और विनोद खन्ना को खलनायक की भूमिका मिली। ‘मन का मीत’ फिल्म तमिल फिल्म ‘कुमारी पेन’ की रीमेक थी। अपने कैरियर की शुरुआत में विनोद खन्ना ने 1970 में आई ‘पूरब और पश्चिम’, ‘सच्चा झूठा’, ‘आन मिलो सजना’, और ‘मस्ताना’ 1971 में ‘मेरा गाव मेरा देश’ और एलान में सहायक अभिनेता और खलनायक की भूमिकाएं अदा कीं। विनोद खन्ना उन कुछ अभिनेताओं में से एक थे जिन्हे शुरूआती भूमिकायें सहायक अभिनेता और खलनायक की मिली लेकिन 1971 के बाद विनोद खन्ना को फिल्मों में मुख्य अभिनेता की भूमिकाएं मिलने लगीं।

 

विनोद खन्ना को मुख्य अभिनेता के रूप में पहला ब्रेक शिव कुमार निर्देशित फिल्म ‘हम तुम और वो’ से 2971 में मिला। इसके बाद 1982 तक विनोद खन्ना ने दर्जनों यादगार हिट फिल्में दीं, जिनमें प्रमुख रूप से ‘मेरे अपने’, ‘अचानक’, ‘फरेबी’, ‘हत्यारा’, ‘गद्दार’, ‘आप की खातिर’, ‘राजमहल’, ‘मैं तुलसी तेरे आँगन की’, ‘खूंन की पुकार’, ‘शक’, ‘आरोप’, ‘ताकत’, ‘जेल यात्रा’, ‘दौलत’, ‘आधा दिन आधी रात’, ‘द बर्निंग ट्रैन’, ‘कुर्बानी’ की। इस बीच विनोद खन्ना ने गुजरे जमाने की सभी प्रमुख अभिनेत्रियों, मौसमी चटर्जी, लीना चंदावरकर, विद्या सिन्हा, योगिता बाली, रेखा, नीता मेहता, शबाना आजमी, सायरा बानो, राखी, परवीन बॉबी, रीना रॉय, जीनत अमान इत्यादि के साथ काम किया। 1971 से 1982 के बीच में विनोद खन्ना ने 47 बहुनायक फिल्मों में भी काम किया। जिनमें ‘शंकर शंभू’, ‘चोर सिपाही’, ‘एक और एक ग्यारह’ में शशि कुमार के साथ काम किया। ‘हेरा फेरी’, ‘खून पसीना’, ‘अमर अकबर एंथोनी’, ‘जमीर’, ‘परवरिश’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ में विनोद खन्ना महानायक अमिताभ बच्चन के साथ दिखाई दिए और ‘हाथ की सफाई’ और ‘आखिरी डांकू’ में उन्होंने रणधीर कपूर के साथ सह-भूमिका की। विनोद खन्ना ‘डाकू और जवान’ में सुनील दत्त के साथ दिखाई दिए। उन्होंने एक ‘हसीना दो दीवाने’, ‘एक बेचारा’, ‘परिचय’, ‘इंसान’, ‘अनोखी अदा’ और ‘जन्म कुंडली’ में जितेन्द्र के साथ काम किया। विनोद खन्ना ने ‘रखवाला’, ‘पत्थर और पायल’, ‘द बर्निंग ट्रेन’, ‘बंटवारा’ और ‘फरिश्ते’ में धर्मेंद्र के साथ स्क्रीन साझा की।

 

विनोद खन्ना ने 1882 में आध्यात्मिक गुरु ओशो (रजनीश) के अनुयायी बन गए और 1982-86 तक पांच वर्षों तक फिल्म जगत को छोड़ दिया। इसके बाद विनोद खन्ना ने अपनी दूसरी फिल्मी पारी भी सफलतापूर्वक खेली। पांच साल फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहने के बाद 1987 में विनोद खन्ना ने ‘इन्साफ’ फिल्म के साथ जबरदस्त वापसी की जिसमे उनके विपरीत भूमिका में डिंपल कपाड़िया थीं। वापसी के बाद उन्होंने ‘जुर्म’ और ‘चांदनी’ में रोमांटिक भूमिका निभाई, लेकिन उन्होंने ज्यादातर एक्शन फिल्मों में भूमिका निभाई। 1990 के दशक में, विनोद खन्ना ने  ‘मुक्कदार का बादशाह’, ‘सीआईडी’, ‘जुर्म’, ‘रिहाई’, ‘लेकिन’, और ‘हमशक्ल’ सहित कई फिल्मों में काम किया। इसके साथ ही उन्होंने नए नायकों (ऋषि कपूर, गोविंदा, संजय दत्त, रजनीकांत, सलमान खान, सन्नी देओल) के साथ कई फिल्मों में साझा भूमिकाएं अदा कीं, जिनमें प्रमुख रूप से ‘आखिरी अदालत’, ‘महासंग्राम’, ‘खून का कर्ज’, ‘पुलिस और मुजरिम’, ‘क्षत्रिय’, ‘इंसानियत के देवता’, ‘एक राजा रानी’ और ‘ईना मीना डीका’ थीं। मीनाक्षी शेषाद्रि के साथ विनोद खन्ना की जोड़ी की काफी सराहना की गई और इस जोड़ी ने ‘जुर्म’, ‘महादेव’, ‘पुलिस और मुजरिम’, ‘हमशक्ल’ और ‘सत्यमेव जयते’ जैसी सफल फिल्मों में काम किया।

 

1997 में, उन्होंने ‘हिमालय पुत्र’ में अपने बेटे अक्षय खन्ना को फिल्म इंडस्ट्री में लांच किया, जिसमें उन्होंने भी अभिनय किया। 1999 में, विनोद खन्ना को तीन दशकों से अधिक हिंदी फिल्म उद्योग के लिए उनके योगदान के लिए ‘फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार मिला। उसके बाद भी उन्होंने कई फिल्मों में काम किया। विनोद खन्ना ने ‘दीवानापन’ (2002), ‘रेड अलर्टः द वार विदिन’, ‘वांटेड’ (2009) और ‘दबंग’ (2010) में चरित्र भूमिकाएं निभायीं। एकल नायक के रूप में विनोद खन्ना ने ‘द फेस ऑफ ट्रुथ’ (2005) और पाकिस्तानी फिल्म ‘गॉडफादर’ (2007) में अभिनय किया, साथ ही साथ मल्टी-स्टारर फिल्म ‘रिस्क’ (2007) में भी विनोद खन्ना का काम प्रशंसनीय था। विनोद खन्ना आखिरी बार शाहरुख खान के साथ ‘दिलवाले’ में नजर आये।

 

विनोद खन्ना ने स्मृति ईरानी द्वारा निर्मित धारावाहिक ‘मेरे अपने’ में ‘काशीनाथ’ की भूमिका निभाई जो कि हिंदी चैनल ‘9एक्स’ पर प्रसारित हुआ। 2014 में, उन्होंने ‘कोयलांचल’ में मुख्य भूमिका निभाई, जहां उन्होंने गॉडफादर की भूमिका निभाई जो कि कोयला माफिया का चेहरा था।

 

विनोद खन्ना ने अपने राजनैतिक कैरियर की शुरुआत भाजपा से की। विनोद खन्ना 1997 में पहली बार पंजाब के गुरदासपुर क्षेत्र से भाजपा की ओर से सांसद चुने गए। इसके बाद 1999 के लोकसभा चुनाव में गुरदासपुर लोकसभा से ही दूसरी बार जीतकर संसद पहुंचे। विनोद खन्ना को 2002 में अटल बिहारी वाजपेई सरकार में संस्कृति और पर्यटन के केंद्रीय मंत्री बनाया गया। 6 महीने के बाद उनका विभाग बदलकर उनको अति महत्वपूर्ण विदेश मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री बना दिया गया। 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने गुरदासपुर लोकसभा सीट से फिर से चुनाव जीता। हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनाव में विनोद खन्ना को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन एक बार फिर 2014 लोकसभा चुनाव में विनोद खन्ना गुरदासपुर लोकसभा से चैथी बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।

 

भारतीय सिनेमा के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ कलाकारों में से एक और अपने वक्त के सबसे खूबसूरत अभिनेताओं में गिने जाने वाले दिग्गज अभिनेता और राजनीतिज्ञ विनोद खन्ना का 27 अप्रैल 2017 को मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में निधन हो गया। 70 वर्षीय विनोद खन्ना कैंसर से पीड़ित थे। भारतीय सिनेमा ने विनोद खन्ना के रूप में एक बेहतरीन अभिनेता खो दिया। महान कलाकार विनोद खन्ना का जाना सम्पूर्ण कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसकी पूर्ति कर पाना नामुमकिन है। विनोद खन्ना का जिंदादिल अभिनय भारत के प्रत्येक नागरिक के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगा। विनोद खन्ना एक समर्पित अभिनेता और राजनेता की तरह हमेशा याद किये जाएंगे। विनोद खन्ना के निधन का समाचार कला प्रेमियों के लिए अत्यंत दुखद है, ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

 

समानता की ओर अग्रसर होती महिलाएं

मंगलयान मिशन और एक साथ लॉंच किए गए 104 उपग्रहों को लेकर भारतीय महिला वैज्ञानिकों के योगदान की  प्रशंसा न केवल भारत द्वारा की जा रही है बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय महिला वैज्ञानिकों की सराहना हो रही है। डॉ. के.सी.थॉमस, एन वलारमती, मिनाल संपथ, अनुराधा टीके, रितू करिधल, मोमिता दत्ता और नंदनी हरिनाथ जैसे वैज्ञानिकों ने हर भारतीय को गौरवान्वित किया है।

 

        इन वैज्ञानिकों की तरह ही अनेक महिलाएं हैं जिन्होंने मिशाल कायम की है। वे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता और ज्ञान के उदाहरण हैं। लेकिन यह आइना का एक पहलू है। यह पहलू शिक्षित, सफल और सशक्त भारतीय महिलाओं की स्थिति की है। दूसरी ओर महिलाओं की बड़ी आबादी आज भी यौनवाद, भेदभाव और दमन झेल रही है। ऐसी महिलाएं जीवन और समाज में अपने उचित स्थान की मांग करने से काफी दूर हैं। ऐसी महिलाएं भारत के संविधान में दिए गए समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14) सहित अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाती। इस स्थिति में एकमात्र रास्ता दोनों पहलुओं के बीच की खाई को पाटना और संतुलन बनाना है। सौभाग्यवश, हम सही रास्ते पर हैं, लैंगिक समानता के सिद्धांतों पर काम कर रहे हैं। कार्यबल तथा निचले स्तर पर राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं के योगदान और भागीदारी से भारत ने 2016 के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट में 21 स्थानों की छलांग लगाई हैं। भारत का स्थान 2016 में 87वां हो गया है जबकि 2015 में भारत 108वें पायदान पर था। शिक्षाप्राप्ति, आर्थिक भागीदारी तथा अवसर, स्वास्थ्य तथा राजनीतिक सशक्तिकरण के कारण यह सुधार हुआ है

(स्रोत : https://reports.weforum.org/global-gender-gap-report-2016/economies/#economy=IND)।

 

विश्व में राजनीतिक सशक्तिकरण के बारे में भारत का स्थान 9वां है। यह बड़ी उपलब्धि होने के साथ-साथ अपने देश द्वारा अपनाए गये लोकतान्त्रिक मॉडल की अंतर्निहित शक्ति का संकेतक करता है। लेकिन दो राय नहीं कि लैंगिक समानता के संबंध में लंबा रास्ता तय करना है और इस रास्ते की सबसे बड़ी बाधा यह है कि हमारा समाज महिला को किस रूप में देखता है। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा सशक्त बनाने वाले हैं लेकिन इऩ प्रावधानों के बारे में उदार और प्रगतिशील चेतना की भारी कमी है। कानूनी चेतना के बावजूद किसी भी सामान्य पुरूष और महिला के लिए न्याय तक पहुंचना और लंबी लड़ाई लड़ना कोई सहज काम नहीं है।

 

इसी तरह लैंगिक असंतुलन तथा लैंगिक भेदभाव के कारण 1961 के बाद से देश की महिला आबादी में कमी आ रही है। यह भारत की विकासगाथा पर एक धब्बा है। इस समस्या के समाधान के लिए यानी महिलाओं की गिरती आबादी की प्रवृति बदलने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा 2015 में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना लाँच की गयी। महिलाओं की कम होती संख्या कहानी के एक भाग को दिखाती है। यह केवल महिलाओं और लड़कियों की निम्न सामाजिक स्थिति का एक लक्षण है, गंभीर लक्षण। यह दिखाता है कि किस तरह भारत में पितृसत्ता का ढांचा अनादर, दुर्व्यवहार, असमानता और भेदभाव से एक महिला के जीवन चक्र को संचालित करता है। ऐसा भेदभाव और बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन सभी वर्गों तथा आबादी की महिलाओं के साथ किया जाता है।

 

आज भी महिलाओं को टी.वी देखने या रेडियो सुनने से रोकने के उदाहरण मिलते हैं। इस तरह के भेदभाव गंभीर या छोटे हो सकते हैं, अपमानजनक हो सकते हैं लेकिन कोई इसके विरोध की आवश्यकता महसूस नहीं करता। स्त्रीद्वेष तथा महिलाओं तथा लडकियों के प्रति हिंसा तेजी से बढ़ रही है।

 

महिला और बाल विकास मंत्रालय का #WeAreEqual  अभियान  

इस स्थिति में महिलाओं और लड़कियों के लिए समानता हासिल करने के लिए जागरूकता, सोच में परिवर्तन तथा सामाजिक और व्यवहारिक परिवर्तन की आवश्यक है। इस प्रक्रिया में पुरूषों और लड़कों के साथ भागीदारी आवश्यक हो जाती है। पुरुष और लड़के हमारे समाज को दर्पण दिखाते हैं और यौनवाद, असमानता और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध लड़ाई में बराबर के सहयोगी हैं।

 

जागरूकता बढ़ाने के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय ने 13 फरवरी को सोशल मीडिया अभियान #WeAreEqual  प्रारंभ किया। इसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, पोष्टिकता और सम्मान के क्षेत्र में महिलाओं को समान अवसर की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह अभियान नारी शक्ति पुरस्कार समारोह सहित 8 मार्च, 2017 को मनाये जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का हिस्सा है। इस अभियान का कहना है “आप और मैं, हम एक हैं। इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर समानता का अपना नारा साझा करें और परिवर्तन में शामिल हों। ”

 

यह अभियान सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो रहा है। इसमें सेलेब्रेटी, खेल जगत के लोग और अभिनेता शामिल हो रहे हैं। लैंगिक समानता के लिए पुरूष और महिला सोशल मीडिया पर #WeAreEqual संदेश पोस्ट कर रहे हैं। लोग अपनी निजी कहानियां बता रहे हैं और लैंगिक रूप से समतामूलक समाज बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। यह अभियान न केवल लैंगिक समानता के महत्व और आवश्यकता का संकेत दे रहा है बल्कि लोगों को परिवर्तन लाने की जिम्मेदारी लेने को भी कह रहा है।

 

महिला और बाल विकास मंत्रालय के संकेत के अनुसार लोकप्रिय अभिनेता आलिया भट्ट और भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली अभियान को समर्थन देंगे। सुपरस्टार अमिताभ बच्चन, पहलवान संग्राम सिंह, ओलंपिक बॉक्सर मैरि कॉम, दियामिर्जा और इसरो वैज्ञानिक के.थेनमोजी सेल्वी, सुभा वरियर तथा मिनाल रोहित ने इस अभियान को अपना समर्थन दिया है। समाज को प्रभावित करने वाले इस तरह के लोग परिवर्तन के लिए प्रेरणा दे सकते हैं।

अभियान के लिए मैरि कॉम ने पोस्ट किया है “मैं चाहती हूं कि हर लड़की को अपने सपनों को पूरा करने की आजादी हो, खेल में उन्हें और अधिक मान्यता दी जाये”।

 

अमिताभ बच्चन ने #WeAreEqual संदेश देते हुए घोषित किया है कि “मेरे निधन पर मेरी संपत्ति, मेरी बेटी और मेरे बेटे के बीच समान रूप से साझा की जाएगी! #genderequality #WeAreEqual.” । कहने की आवश्यकता नहीं की यह संदेश पुरूष और महिलाओं की समान संपत्ति अधिकारों की कारगर वकालत करता है।

 

साधारणजन अपनी निजी कहानियां साझा कर रहे हैं और इस # टैग के साथ अपना संदेश दे रहे हैं। लोगों द्वारा रोजाना महिलाओं के यौनवाद का शिकार होने की बात स्वीकार की जा रही है।

 

निःसंदेह भारत को लैंगिक समानता की लक्ष्य प्राप्ति तथा लैंगिक भेदभाव मुक्त समाज बनाने की अपनी गति जारी रखनी होगी। ऐसा लैंगिक भेदभाव मुक्त समाज जिसमें सभी संसाधनों और अवसरों के मामले में पुरूष और महिलाओं की समान पहुंच होगी। हर प्रयास, हर अभियान और हर पहल मायने रखती है और प्रत्येक हितधारक को इसमें विश्वास रखना होग।

 

-लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं अभी एसओएस चिलड्रेन विलेजेज ऑफ इंडिया की कम्युनिकेशन प्रमुख हैं। लेख में व्‍यक्‍त किए गए विचार उनके निजी विचार हैं।

कभी गुमनाम जिंदगी जी रही केसर देवी, नानू देवी जैसी लाखों महिलायें अब हैं 'पॉवरफुल वुमेन'

स्त्री शक्ति के जरिये परिवार,समाज और राष्ट्र को सशक्त तथा समृद्ध बनाने की राजस्थान की विभिन्न कल्याण योजनाओ से लगभग डेढ करोड़ परिवार की महिलाओ के'पॉवरफुल वुमेंन' बनने की दिशा में एक सकारात्‍मक कदम है। गुमनाम सी अंधेरी जिंदगी जी रही जयपुर की केसर देवी, बीकानेर की नानू देवी  जैसी लाखों महिलाओं को 'भामाशाह योजना' के तहत परिवार की मुखिया बना कर उन्‍हें अधिकार सम्पन्न बनाने से उनके परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

  दरअसल राजस्थान में इन दिनो महिला सशक्तिकरण को लेकर क्रांति हो रही है। प्रदेश की 'भामाशाह योजना' से दूर दराज के गांव, शहर की महिलायें 'पॉवरफुल वुमेंन' बन रही है। इसका अर्थ यह है कि अब लगभग एक करोड़ 30 लाख परिवारों के अहम फैसलों में मुखिया होने के नाते उनकी भूमिका खास बनती जा रही है। इस योजना के तहत आवश्यक जानकारियों के सत्यापन के बाद परिवार की महिला मुखिया के नाम से बहु उद्देशीय भामाशाह परिवार कार्ड बनाया जाता है। जानकारों का मानना है कि देश में महिला और उनके वित्तीय सशक्तीकरण की सबसे बड़ी भामाशाह योजना से राजस्थान में­ महिला आत्मनिर्भरता के एक नये युग का सूत्रपात हो रहा है। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे का यह 'ड्रीम प्रोजेक्ट' है जिसके तहत महिलाओं को परिवार की मुखिया बना सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाले नगद लाभ सीधे उनके बैंक खातों में जमा करवाने और गैर नगद लाभ दिलवाने की अभिनव पहल है। भामाशाह योजना शुरू होने से राजस्थान में युगान्तरकारी परिवर्तन होने जा रहा है। यह योजना देश में अपनी तरह की पहली सीधी लाभ हस्तान्तरण योजना है।

 

खास बात यह है कि भामाशाह योजना में राज्य के सभी परिवार अपना नामांकन करवा सकते हैं। भामाशाह योजना में नामांकन और भामाशाह कार्ड बनवाने को लेकर लोगों में अक्सर यह भ्रान्ति रहती है कि यह सुविधा केवल बीपीएल, बीपीएल महिला या किसी वर्ग विशेष के लिए है, जबकि वास्तविकता में इस योजना में राज्य के सभी परिवार अपना नामांकन करा सकते है। साथ ही यदि नामांकन में­ कोई त्रुटि अथवा अपूर्णता रह जाती है तो उसे संशोधित भी करवाया जा सकता है। इसी प्रकार भामाशाह कार्ड की यह विशेषता है कि यदि कार्ड गुम जाए अथवा चोरी हो जाता है तो भी कोई इसका दुरूपयोग नही कर पाएगा। चूंकि भामाशाह कार्ड बायोमैट्रिक पहचान सहित कोर बैंकिंग सुविधा युक्त है अतः यह पूरी तरह सुरक्षित है और लाभार्थी के खाते में जमा राशि उसके अलावा अन्य किसी के द्वारा निकालना संभव नही है। नामांकित परिवारों को संबंधित ग्राम पंचायत/शहरी निकाय के माध्यम से भामाशाह कार्ड

 

निःशुल्क देने का प्रावधान है। सूत्रो के अनुसार  ऐसे परिवार जिनका भामाशाह योजना में ­ नामांकन होना है अथवा जिन्हे भामाशाह कार्ड जारी नही हुआ है उन परिवारों अथवा सदस्यों को सभी राजकीय सेवाएं आगामी आदेश तक पूर्व की तरह ही मिलती रहें­गी।

 

राज्य सरकार द्वारा भामाशाह योजना में­ आवश्यक बदलाव कर इसे अधिक बड़े रूप में­ और अधिक व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है और इसे प्रधानमंत्री की जन-धन योजना से भी जोड़ा गया है। भामाशाह योजना का उद्देश्य सभी राजकीय योजनाओं के नगद एवं गैर नगद लाभ सीधा पारदर्शी रुप से प्रत्येक लाभार्थी को पहुंचाना है। यह योजना के अंतर्गत राशन कार्ड, पेन्शन, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए छात्रावृत्ति पाने वाले लाभार्थियों को भी सम्मिलित किया जायेगा। यह योजना परिवार को आधार मानकर उनके वित्तीय समावेश के लक्ष्य को पूरा करती है और इसके तहत हर परिवार को भामाशाह कार्ड दिया जाएगा जो उनके बैंक खातों से जुड़े होंगे। यह बैंक खाता परिवार की मुखिया,जो कि महिला होगी के नाम से होगा और वह ही इस खाते की राशि को परिवार के उचित उपयोग में­ कर सकेगी। यह कार्ड बायो-मैट्रिक पहचान सहित कोर बैकिंग को सुनिश्चित करता है। इसके अन्तर्गत, प्रत्येक परिवार का सत्यापन किया जाएगा और पूरे राज्य का एक समग्र डेटाबेस बनाया जाएगा। इसके माध्यम से जाली कार्डों की भी जांच की जाएगी। विभिन्न विभागों द्वारा पात्राता के लिए सभी जनसांख्यिकी और सामाजिक मापदण्डों को भी इसमें सम्मिलित किया जाएगा।

 

आधिकारिक आंकड़ो के अनुसार अब तक राज्य के एक करोड़ 35 लाख परिवारों के 4 करोड़ 62 लाख व्यक्तियों का नामांकन हो चुका है एवं उन्हे बहुउद्देश्यीय भामाशाह परिवार पहचान कार्ड आवंटित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।  इस के तहत बैंक खातों में 4700 करोड़ रूपये का लाभ हस्तातंरित हो चुका है।

 

जयपुर जिले की ग्राम पंचायत जमवारगढ़ की बीपीएल परिवार की बुजुर्ग श्रीमती केसर देवी मानती है भामाशाह कार्ड ने उन्हें एक नई पहचान दी है। अब भामा शाह कार्ड उनके लिये जादुई चिराग बन गया है क्‍योंकि केवल भामाशाह कार्ड के जरिए ही विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्‍त किया जा सकता है। इसी तरह बीकानेर पंचायत समिति की बंबलू ग्राम पंचायत की बैसाखियों के सहारे चलने वाली नानू देवी  मानती है भामाशाह कार्ड उनकी लाठी है, भले ही वह चलने फिरने से लाचार हैं, लेकिन यह कार्ड उन्हें हर काम में सहारा देता है, चाहे वह पेंशन प्राप्‍त करना हो या कोई और कार्य। कार्ड के कारण उनमें नया आत्म विश्वास से भर गया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह सुविधा अटल सेवा केन्द्र तथा ई-मित्र केन्द्रों पर स्थाई रूप से उपलब्ध है। जहां किसी परिवार के सभी सदस्य एक साथ जाकर आधार कार्ड व बैंक खाता संख्या के अलावा आवश्यक जानकारी देकर नामांकन करा सकते हैं। यदि किसी परिवार का बैंक खाता नही हो तो उसे भी ई-मित्र केन्द्र पर खुलवाने की सुविधा उपल्ब्ध है। ई-मित्र केन्द्र या भामाशाह योजना की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन नामांकन भी कराया जा सकता है। नामांकन और कार्ड से संबंधित समस्याओं व शिकायतों के समाधान के लिए भामाशाह का प्रबंधक जिला कलेक्टर और सांख्यिकी अधिकारियों को इसका अधिकारी और उपखंड अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

परिवार का कोई भी सदस्य अगर अपना व्यक्तिगत कार्ड बनवाने का इच्छुक हो तो वह 30 रुपये का शुल्क जमा करवाकर यह कार्ड बनवा सकता है। बीपीएल परिवार की महिला मुखिया को सरकार द्वारा भामाशाह कार्ड बनवाने पर दो किश्तों में 2 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है जो महिला मुखिया के खाते में­ जमा करवा दी जाती है। इसकी पहली किश्त के रुप में­ एक हजार रुपये तथा छः महीने बाद दूसरी किश्त के रुप में लाभार्थी के खाते में एक हजार रुपये डालने का प्रावधान किया गया है।

भामाशाह योजना में पें­शन और छात्रावृति जैसे नगद लाभ तथा राशन सामग्री जैसे गैर नगद लाभों के वितरण की शुरूआत हो चुकी है। परिवारों के नामांकन के बाद सत्यापन और भामाशाह परिवार कार्ड बनने की प्रक्रिया के बीच पें­शन, छात्रावृति व राशन कार्ड से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों के आंकड़ों के साथ भामाशाह के आंकड़ों का मिलान करते हुए इनमें एकरूपता लाई जा रही है। इससे परिवारों के बारे में दर्ज जानकारी से पें­शन, छात्रावृति व राशन सामग्री के पात्र वर्ग को 'नगद और गैर नगद लाभ’ का पारदर्शी तरीके से वितरण सुनिश्चित होगा। भविष्य में­ इस दूरदर्शी योजना में­ विभिन्न विभागों के अलग-अलग लाभ भी जोड़े जाएंगे। सूत्रो के अनुसार दरअसल इस योजना की परिकल्पना श्रीमती राजे ने अपने पिछले शासनकाल वर्ष 2008 में­ 'आधार कार्यक्रम' से बहुत पहले की थी।

मुख्यमंत्री श्रीमती राजे ने दिसम्बर, 2013 में पुनः मुख्यमंत्री बनने के बाद भामाशाह योजना का कार्यान्‍वयन फिर से शुरु करने का निर्णय लिया और इसी क्रम में­ भामाशाह योजना का पुनः शुभारंभ गत वर्ष 15 अगस्त को इतिहास पुरूष महाराणा प्रताप को अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले महान दानवीर भामाशाह की पवित्र धरा मेवाड़ के खुबसूरत शहर उदयपुर में­ हुआ। भामाशाह योजना के प्रभावी कार्यान्‍वयन के लिये भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय-ई-गवर्नेंस का "स्वर्ण पुरस्कार" राजस्थान को प्रदान किया गया था।  सूत्रों के अनुसार अब इस योजना के लाभ व्यापक पैमाने पर नजर आने लगा है।

 

विशेष लेख अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2017

प्राचीन काल से ही भारतीय इतिहास में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। हमें पता है कि वैदिक या उपनिषद् युग में मैत्रेयी, गार्गी और अन्य महिलाओं ने ब्रह्म के ऊपर विचार करने की योग्यता के आधार पर ऋषियों का स्थान प्राप्त किया था। हजारों ब्राह्मणों की उपस्थिति में विदुषी गार्गी ने ब्रह्म के ऊपर शास्त्रार्थ करने की चुनौती याज्ञवल्क्य को दी थी।

 

स्वतंत्रता पूर्व समय में महिलाओं ने शिक्षा और सामाजिक उन्नति के उद्देश्य के लिए नेतृत्व किया था। वर्ष 1950 में भारत दुनिया के ऐसे कुछ देशों में गिना जाता था जिन्होंने अपने नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया था। महिलाओं ने युवा भारत के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। और, आज हम देख रहे हैं कि महिलाएं सरकार, व्यापार, खेल, सशस्त्र बलों और यहां तक कि वास्तविक रॉकेट विज्ञान में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं ने समस्त मानक तोड़ दिये हैं और प्रतिदिन नए-नए मानक स्थापित कर रही हैं।

 

नारी शक्ति पुरस्कार 1999 में गठित किया गया था ताकि उन महिलाओं का सम्मान किया जा सके जिन्होंने उम्मीदों से बढ़कर काम किया, बंधे-बंधाये ढर्रे को चुनौती दी और महिला सशक्तिकरण में अविस्मरणीय योगदान किया। भारत सरकार ये पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थानों को प्रदान करती है जिन्होंने महिलाओँ के लिए अभूतपूर्व सेवा की हो। महिला विकास और उन्नयन के क्षेत्र में शानदार योगदान करने के लिए यह पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। इस वर्ष नारी शक्ति पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं और संस्थानों को दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है इस संबंध में बहुत सारे आवेदन प्राप्त हुए थे, जिसके मद्देनजर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने उन उम्मीदवारों का चयन किया है जो सामाजिक उद्यमिता, कला, बागवानी, योग, पर्यावरण संरक्षण, पत्रकारिता, नृत्य, सामाजिक कार्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाई है। महिलाओं ने इन सभी क्षेत्रों में राष्ट्रीय और अंतर्राषट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है तथा पूरी दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि सफलता के लिए लैंगिक सीमा का कोई अस्तित्व नहीं होता। समस्त पुरस्कृत लोग सामाजिक उद्यमिता निर्माण, जैविक खपत को प्रोत्साहन देने और सतत पर्यावरण के निर्माण जैसे नए और उभरते हुए क्षेत्रों में योगदान कर रहे हैं। यह देखना बहुत उत्साहवर्धक है कि इन सभी क्षेत्रों में महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं, जिससे भावी विकास कि रूपरेखा तय होगी।

 

इन पुरस्‍कार विजेताओं ने अंतरिक्ष अनुसंधान, रेलवे, मोटरसाइक्लिंग और पवर्तारोहण जैसे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर महिलाओं से जुड़ी रूढ़ीवादी सोच को चुनौती दी है। इन्‍होंने न केवल चुनौती दी है बल्कि उन क्षेत्रों में उत्‍कृष्‍टता प्राप्ति की है जहां इतिहास में कभी महिलाओं की भागीदारी नहीं देखी गई। इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों, पहली डीजल ट्रेन चालक सुश्री मुमताज काजी, मोटरसाइक्लिस्‍ट सुश्री पल्‍लवी फौजदार और पर्वतारोही सुश्री सुनीता चोकेन ऐसे युवा भारतीयों के लिये एक उदाहरण हैं जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। ये विजेता बदलते वैश्विक भारत की एक अलग तस्‍वीर पेश करते हैं।

सरकार ने उन महिलाओं और संस्‍थानों को सम्‍मानित किया है जो कमजोर और पीडि़त महिलाओं के लिए कार्य कर रहे है और जिन्‍हें हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा देश के सुदूरवर्ती इलाकों में लिंग अनुपात में सुधार के लिए महिलाओं को आर्थिक स्‍वतंत्रता के प्रति प्रोत्‍साहित करने, महिला किसानों के लिए विकास कार्य करने तथा वास्‍तविक विकास के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। छांव फाउण्‍डेशन और शिक्षित रोजगार केन्‍द्र प्रबंधक समिति, साधना महिला संघ जैसे संस्‍थानों तथा डॉ. कल्‍पना शंकर ने अपनी संस्‍था ‘हैंड इन हैंड’ के जरिये समाज में महिलाओं की उन्‍नति के लिए जमीनी स्‍तर पर कार्य किया है।

इन पुरस्‍कार विजेताओं ने यह साबित किया है कि नये विचार अक्‍सर स्थितिजन्‍य बाधाओं को पार कर सकते हैं। वित्तीय अवसरों की कमी का सामना कर रही महिलाओं ने धन जुटाने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया है। प्राकृतिक आपदाओं के बाद उन्‍हें स्‍थानीय लोगों के पुनर्वास के लिए अनूठे तरीके मिल गये हैं। आर्थिक अवसरों की कमी के साथ महिलाओं ने डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था में प्रवेश किया है। पुरस्‍कार विजेताओं में से एक ‘शरन’ की स्‍थापक डॉ. नन्‍दि‍ता शाह का उद्देश्‍य मधुमेह मुक्‍त भारत बनाना है। एक टैक्‍सटाइल डिजाइनर सुश्री कल्‍याणी प्रमोद बालाकृष्‍णन ने पारंपरिक शिल्‍प को बढ़ावा देकर गरीब बुनकरों की मदद की है।

सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जीवन में सुधार लाने के लिए दशकों तक काम किया है। लोगों ने अपने घरों के आराम को छोड़कर लोगों के कल्याण के लिए संघर्ष किया है और उनका साथ दिया है। परिवर्तन धीरे-धीरे आता है लेकिन इन महिलाओं और संस्थानों ने यह साबित कर दिया है कि संगठित प्रयत्नों से सकारात्मक बदलाव आता है। इन लाभार्थियों ने यह साबित किया है कि कोई भी व्यक्ति अगर ठान ले तो कुछ भी संभव है। सुश्री टीयाशा अद्या और सुश्री बानो हरालु ने मत्स्य विडाल के शिकार पर रोक लगाने के लिए संघर्ष किया। सुश्री वी.नानाम्ल ने योग की शिक्षा देने के लिए बेहतरीन योगदान दिया। आज उनके विद्यार्थी देशभर में योग की शिक्षा देने के कार्य में जुटे हुए हैं।

इस वर्ष के नारी शक्ति पुरस्कार ने हमारे देश के एक अलग स्तर को प्रमाणित किया है ये पुरस्कार पाने वाली जीवट महिलाएं अपने समर्पण, विश्वास और प्रेरणा के लिए मिशाल हैं। इन महिलाओँ ने यह साबित किया है कि यदि कोई व्यक्ति सही दिशा में कार्य करे तो लाखों लोगों के जीवन में सुधार लाया जा सकता है। आइए हम लोगों को प्रेरित करें कि वे श्रेष्ठ भारत के लिए जनकल्याण के कार्य जारी रखें।

 -लेखिका महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की सचिव हैं, लेखक में प्रस्तुत उनके विचार निजी हैं

यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता-महिला दिवस की शुभकामनाएं

भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। संस्कृत में एक श्लोक है- 'यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता:। अर्थात्, जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। किंतु वर्तमान में जो हालात दिखाई देते हैं, उसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है। उसे 'भोग की वस्तु' समझकर आदमी 'अपने तरीके' से 'इस्तेमाल' कर रहा है। यह बेहद चिंताजनक बात है। लेकिन हमारी संस्कृति को बनाए रखते हुए नारी का सम्मान कैसे किय जाए, इस पर विचार करना आवश्यक है।

 

माता का हमेशा सम्मान हो

मां अर्थात माता के रूप में नारी, धरती पर अपने सबसे पवित्रतम रूप में है। माता यानी जननी। मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है, क्योंकि ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है। मां देवकी (कृष्ण) तथा मां पार्वती (गणपति/ कार्तिकेय) के संदर्भ में हम देख सकते हैं इसे।

किंतु बदलते समय के हिसाब से संतानों ने अपनी मां को महत्व देना कम कर दिया है। यह चिंताजनक पहलू है। सब धन-लिप्सा व अपने स्वार्थ में डूबते जा रहे हैं। परंतु जन्म देने वाली माता के रूप में नारी का सम्मान अनिवार्य रूप से होना चाहिए, जो वर्तमान में कम हो गया है, यह सवाल आजकल यक्षप्रश्न की तरह चहुंओर पांव पसारता जा रहा है। इस बारे में नई पीढ़ी को आत्मावलोकन करना चाहिए।

 

बाजी मार रही हैं लड़कियां

अगर आजकल की लड़कियों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि ये लड़कियां आजकल बहुत बाजी मार रही हैं। इन्हें हर क्षेत्र में हम आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है । विभिन्न परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। किसी समय इन्हें कमजोर समझा जाता था, किंतु इन्होंने अपनी मेहनत और मेधा शक्ति के बल पर हर क्षेत्र में प्रवीणता अर्जित कर ली है। इनकी इस प्रतिभा का सम्मान किया जाना चाहिए। कंधे से कंधा मिलाकर चलती नारी

नारी का सारा जीवन पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में ही बीत जाता है। पहले पिता की छत्रछाया में उसका बचपन बीतता है। पिता के घर में भी उसे घर का कामकाज करना होता है तथा साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखनी होती है। उसका यह क्रम विवाह तक जारी रहता है।

उसे इस दौरान घर के कामकाज के साथ पढ़ाई-लिखाई की दोहरी जिम्मेदारी निभानी होती है, जबकि इस दौरान लड़कों को पढ़ाई-लिखाई के अलावा और कोई काम नहीं रहता है। कुछ नवुयवक तो ठीक से पढ़ाई भी नहीं करते हैं, जबकि उन्हें इसके अलावा और कोई काम ही नहीं रहता है। इस नजरिए से देखा जाए, तो नारी सदैव पुरुष के साथ कंधेसे कंधा मिलाकर तो चलती ही है, बल्कि उनसे भी अधि‍क जिम्मेदारियों का निर्वहन भी करती हैं। नारी इस तरह से भी सम्माननीय है।

विवाह पश्चात

विवाह पश्चात तो महिलाओं पर और भी भारी जिम्मेदारि‍यां आ जाती है। पति, सास-ससुर, देवर-ननद की सेवा के पश्चात उनके पास अपने लिए समय ही नहीं बचता। वे कोल्हू के बैल की मानिंद घर-परिवार में ही खटती रहती हैं। संतान के जन्म के बाद तो उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। घर-परिवार, चौके-चूल्हे में खटने में ही एक आम महिला का जीवन कब बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। कई बार वे अपने अरमानों का भी गला घोंट देती हैं घर-परिवार की खातिर। उन्हें इतना समय भी नहीं मिल पाता है वे अपने लिए भी जिएं। परिवार की खातिर अपना जीवन होम करने में भारतीय महिलाएं सबसे आगे हैं। परिवार के प्रति उनका यह त्याग उन्हें सम्मान का अधि‍कारी बनाता है

 

इतिहास उठाकर देखें तो मां पुतलीबाई ने गांधीजी व जीजाबाई ने शिवाजी महाराज में श्रेष्ठ संस्कारों का बीजारोपण किया था। जिसका ही परिणाम है कि शिवाजी महाराज व गांधीजी को हम आज भी उनके श्रेष्ठ कर्मों के कारण आज भी जानते हैं। इनका व्यक्तित्व विराट व अनुपम है। बेहतर संस्कार देकर बच्चे को समाज में उदाहरण बनाना, नारी ही कर सकती है। अत: नारी सम्माननीय है।

 

अभद्रता की पराकाष्ठ

आजकल महिलाओं के साथ अभद्रता की पराकाष्ठा हो रही है। हम रोज ही अखबारों और न्यूज चैनलों में पढ़ते व देखते हैं, कि महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की गई या सामूहिक बलात्कार किया गया। इसे नैतिक पतन ही कहा जाएगा। शायद ही कोई दिन जाता हो, जब महिलाओं के साथ की गई अभद्रता पर समाचार न हो।

 

क्या कारण है इसका?

प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिन-पर-‍दिन अश्लीलता बढ़ती‍ जा रही है। इसका नवयुवकों के मन-मस्तिष्क पर बहुत ही खराब असर पड़ता है। वे इसके क्रियान्वयन पर विचार करने लगते हैं। परिणाम होता है दिल्ली गैंगरेप जैसा जघन्य व घृणित अपराध। नारी के सम्मान और उसकी अस्मिता की रक्षा के लिए इस पर विचार करना बेहद जरूरी है, साथ ही उसके सम्मान और अस्मिता की रक्षा करना भी जरूरी है।

 

अशालीन वस्त्र भी एक कारण

कतिपय 'आधुनिक' महिलाओं का पहनावा भी शालीन नहीं हुआ करता है। इन वस्त्रों के कारण भी यौन-अपराध बढ़ते जा रहे हैं। इन महिलाओं का सोचना कुछ अलग ढंग का हुआ करता हैं। वे सोचती हैं कि हम आधुनिक हैं। यह विचार उचित नहीं कहा जा सकता है। अपराध होने यह बात उभरकर सामने नहीं आ पाती है कि उनके वस्त्रों के कारण भी यह अपराध प्रेरित हुआ है।

 

‍इतिहास से

देवी अहिल्याबाई होलकर, मदर टेरेसा, इला भट्ट, महादेवी वर्मा, राजकुमारी अमृत कौर, अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी और कस्तूरबा गांधी आदि जैसी कुछ प्रसिद्ध महिलाओं ने अपने मन-वचन व कर्म से सारे जग-संसार में अपना नाम रोशन किया है। कस्तूरबा गांधी ने महात्मा गांधी का बायां हाथ बनकर उनके कंधे से कंधा मिलाकर देश को आजाद करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इंदिरा गांधी ने अपने दृढ़-संकल्प के बल पर भारत व विश्व राजनीति को प्रभावित किया है। उन्हें लौह-महिला यूं ही नहीं कहा जाता है। इंदिरा गांधी ने पिता, पति व एक पुत्र के निधन के बावजूद हौसला नहीं खोया। दृढ़ चट्टान की तरह वे अपने कर्मक्षेत्र में कार्यरत रहीं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगन तो उन्हें 'चतुर महिला' तक कहते थे, क्योंकि इंदिराजी राजनीति के साथ वाक्-चातुर्य में भी माहिर थीं।

 

अंत में..

 

अंत में हम यही कहना ठीक रहेगा कि हम हर महिला का सम्मान करें। अवहेलना, भ्रूण हत्या और नारी की अहमियत न समझने के परिणाम स्वरूप महिलाओं की संख्या, पुरुषों के मुकाबले आधी भी नहीं बची है। इंसान को यह नहीं भूलना चाहिए, कि नारी द्वारा जन्म दिए जाने पर ही वह दुनिया में अस्तित्व बना पाया है और यहां तक पहुंचा है। उसे ठुकराना या अपमान करना सही नहीं है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी, दुर्गा व लक्ष्मी आदि का यथोचित सम्मान दिया गया है अत: उसे उचित सम्मान दिया ही जाना चाहिए, क्योकि ये नारी नही चिंगारी है ये भारत मे सम्मान की अधिकारी है.

 

नेत्रम आई फाउंडेशन के न्यू आई सेंटर का शुभारम्भ

नेत्रम आई फाउंडेशन के न्यू आई सेंटर का शुभारम्भ स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ जगदीश प्रसाद के द्वारा ( I-1791, C R Park, New Delhi-110019) में किया गया। इस मौके पर नेत्रम आई फाउंडेशन की सचिव डॉ अंचल गुप्ता, अध्यक्ष संदीप सहगल और कोषाध्यक्ष सत्तन शर्मा के नेतृत्व में शुभारम्भ किया गया। जिसे स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ जगदीश प्रसाद ने हरी झंडी दिखाया इस अवसर पर नगर निगम पार्षद वीरेंदर कसना, श्री दीपक सिंह (कल्चर एम्बेसडर ऑफ़ गवर्नमेंट ऑफ़ सेय्चेल्लेस), मिस पौलिने फेरारी (कल्चर आत्ताचे, एम्बेसी ऑफ़ रयूप्लीक ऑफ़ सेय्चेल्लेस) आदि मौजूद थे।

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डॉ जगदीश प्रसाद ने नेत्रम आय फाउंडेशन के रौशनी (नेत्र जाँच वाहन) प्रोजेक्ट के बारे में बताया की इस योजना से गरीब बच्चों को लाभ मिलेगा। यह बहुत ही अच्छी पहल है और साथ ही नेत्र दान का भी बहुत लोगों संकल्प लिया। नगर निगम पार्षद जी ने भी अपनी नेत्र दान करने का संकल्प लिया और नेत्रम आई फाउंडेशन के द्वारा हर महीने दिल्ली / एनसीआर में नि:शुल्क नेत्र जाँच का शिविर लगाया जाता है, जिस से जनता को बहुत लाभ मिलता है।



अब यू पी में प्रशांत का ‘काम बोलता है’

समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश की सभाओं का अंदाज कुछ बदला बदला सा है। भैय्याजी अपनी सभाओं में विरोधियों पर तलवार नहीं तान रहे, बल्कि बड़ी सहजता से अपने ऊपर हो रहे हमलों का जवाब दे रहे हैं। दरअसल ये एक पूरी रणनीति के तहत किया जा रहा है, जिससे अखिलेश को इन चुनावों में जीत दिलायी जा सके।

पीएम मोदी और सीएम अखिलेश सीधे आमने सामने है और उनका ये टकराव दिलचस्प बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के इन चुनावों में एक ओर पीएम मोदी अखिलेश पर हमला  कर रहे हैं तो अखिलेश पलटवार की जगह आरोपों का जवाब दे रहे हैं। सवालों जवाबों के इस टकराव के बीच प्रदेश की राजनीति का एजेंडा तय किया जा रहा है। इस रणनीति के तहत अखिलेश को मोदी पर तीखा हमला करने से भी मना किया गया है।

प्रशांत का प्लान

कांग्रेस और सपा दोनों के लिए पीके की ही टीम पूरी जी-जान से जुटी है। इस गठबंधन को शुरू कराने से लेकर इसे चलाने तक की रणनीति का हर हिस्सा तैयार करने की ज़िम्मेदारी पीके की ही है। प्रशांत अपनी पुरानी 2014 के लोकसभा चुनाव वाली पॉलिसी पर ही काम कर रहे हैं। इसी पॉलिसी को उन्होंने बिहार में नीतीश के लिए भी अपनाया था। प्रशांत चाहते हैं कि, उनका नेता हर हाल और किसी भी सूरत में राजनीति के केंद्र बिंदु में ही रहे। इसके लिए टीम ऑफ़ प्रशांत अपनी रणनीति को कुछ घंटे पहले अपडेट करती है। फिर उसे अखिलेश तक पहुंचाया जाता है, जिसे अखिलेश चुनावी सभा में अपने खास अंदाज में पेश करते हैं। जैसे कि हाल ही में मोदी ने अखिलेश पर ताबड़-तोड़ हमले किये। जिसमें उन्होंने समाजवादी के चुनावी नारे 'काम बोलता है' को 'कारनामा बोलता है' कहकर संबोधित किया।

इसी तरह से बिखरा कुनबा और दो कुनबों के मिलन वाले पीएम के बयान को भी अखिलेश ने बड़ी ही सादगी से पेश किया है। इसी तरह से खराब क़ानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी सीएम ने आंकड़ों को सबके सामने रखा। अपने काम का हिसाब देते हुए अखिलेश ये भी नहीं कि बचकर निकलते हों वो जाते जाते अपनी बड़ी प्रतिद्वंदी पार्टी बीजेपी पर व्यंग हमला कर ही जाते हैं।अखिलेश को प्रशांत ने माया पर हमला करने से भी रोक रखा है। जिससे दलित-मुस्लिम की सहानुभूति माया को न मिल सके। मायावती इसी बात से तिलमिला कर अपनी हर रैली में मुस्लिमों को अपनी तरफ खींचने की पूरी कोशिश करती है। माया पर हमला न करने की एक वजह ये भी है कि नतीजे अगर त्रिशंकू विधानसभा के रहते हैं तो बसपा से गठबंधन करके बीजेपी को सत्ता से दूर रखा जा सके।

रणनिति अखिलेश की जीत का ख़ास मंत्र

इस पूरे काम के पीछे कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पूरी टीम काम कर रही है। इस टीम ने मोदी की हर रणनीति पर पैनी नज़र रखी हुई है। किस तरह से पीएम के भाषण पर अखिलेश को जवाब देना है। कौनसा मुद्दा किस तरह सामने लाना है, टीम पीके इस पर पूरी तरह से लगी है। मोदी के हर हमले का जवाब हल्के चुटीले अंदाज में देने की सलाह अखिलेश को दी गई है। जिससे मोदी की टीम ज़्यादा आक्रमकता के साथ अखिलेश और उनके काम पर हमला न कर सके।

पीके की रणनीति को ग़ौर किया जाए तो बिजली, श्मशान, कब्रिस्तान जैसे मुद्दों पर युवा सीएम ने आपा खोकर आक्रमक होने की जगह पीएम को मज़ाकिया अंदाज में जवाब दिया। जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने बिजली का मुद्दा छेड़ा तो समाजवादी सोशल टीम ने तुरंत ईद-दिवाली के दौरान बिजली सप्लाई के आंकडे़ें सोशल साइट पर डाल दिये। अखिलेश को पूरी तरह से विकासवादी राजनीति पर फोकस करने को कहा गया है।

महाशिवरात्रि पर पूरी होगी हर मनोकामना अगर करेंगे इन मंत्रों का जाप

आज महाशिवरात्रि का महापर्व है इस दिन व्रत करने से और पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। देश के शिवालयों में तैयारियां जोरों से शुरू हो चुकी हैं, इस दिन जो भगवान शिव की पूजा करते हैं उन्हें ग्रहों से होने वाली दिक्कतों तथा भूत-प्रेत और मानसिक पीड़ा जैसे कष्ट दूर होते हैं। जानिए क्या है पूजा करने के विधि बतातें हैं किस तरह से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

 

भगवान शिव की पूजा करने के लिए सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरें, ऊपर से बेलपत्र धतूरे का फल और चावल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें। इस दिन शिव पुराण का पाठ करना तथा सुनना चाहिए। शिव पुराण के अनुसार जो लोग चार पहर की पूजा करते हैं, उन्हें शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती है। इस पूजा में शिव का बार-बार रुद्राभिषेक होता है शिव पुराण में शिवरात्रि को दिन-रात पूजा के बारे में कहा गया है।

 

अगर आप चार प्रहर का पूजन करते हैं तो आपको नमः शिवाय (शिव पंचाक्षर) का जाप करना चाहिए। रूद्र, उग्र, पशुपति, सर्व, भव, भीम, ईशान और महान इन आठ नाम से फुल आर्पित करते हुए, शिव की आरती और परिक्रमा करें। अगर आप व्रत नही रखते हैं तो आप सामान्य पूजा भी कर सकते हैं, जिसमे शिवलिंग को दूध मधु और पवित्र गंगा जल से स्नान कराएँ शिव को बेलपत्र स्पर्श कराकर धूपबत्ती और दीपक जलाएं। इस से सभी कष्ट दूर होंगे आपकी मनोकामना पूरी होगी।

 

इन दो मंत्रो का करें जाप    

     

महामृत्युञ्जय मंत्र-

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

 

शिव वंदना

ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम्।

वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं, वन्दे पशूनां पतिम्।।

वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं, वन्दे मुकुन्दप्रियम्।

वन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं, वन्दे शिवंशंकरम्।।

 

नमामि भारत की तरफ से आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें।

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