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updated 9:55 AM UTC, Oct 23, 2017
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18 वर्ष से कम की आयु की पत्नी से शारीरिक संबंध बनाना होगा रेप

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता के तहत 15 से 18 साल के बीच की उम्र वाली पत्नी के साथ यौन संबंध एक दंडनीय अपराध होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि महिला एक साल के भीतर इसकी शिकायत दर्ज कराती है तो इसपर रेप का मामला दर्ज हो सकता है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच के समक्ष मामला दर्ज किया गया था।

 

शीर्ष अदालत ने बाल विवाह पर भी चिंता जताते हुए कहा कि सामाजिक न्याय कानून उन भावनाओं के साथ लागू नहीं किए गए हैं जिनके तहत उन्हें लागू किया जाना था। बेंच ने कहा, "आईपीसी के तहत बलात्कार कानून में अपवाद अन्य विधियों के विपरीत है और लड़की की शारीरिक अखंडता का उल्लंघन करता है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से देश भर में बाल विवाह को प्रतिबंधित करने के लिए सक्रिय कदम उठाने को कहा। अक्षय तृतीया के अवसर पर सामूहिक विवाह समारोहों में हजारों छोटी लड़कियों की शादी होने पर भी चिंता व्यक्त की गई। कोर्ट ने कहा 18 वर्ष की लड़की का विवाह करना उसके स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की तरह है।

 

एनजीओ इंडिपेंडेंट थॉट द्वारा की गई याचिका ने धारा 375 आईपीसी (जो कि बलात्कार से संबंधित है) में अपवाद खंड(2) को चुनौती दी है, जो कि 15 वर्ष से कम की पत्नी के साथ किसी संभोग या यौन कृत्य को बलात्कार नहीं मानता है।

 

इसपर कोर्ट ने कहा आईपीसी की धारा 375 का वो प्रावधान असंवैधानिक है जिसमें 15 से 18 वर्ष की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को रेप नहीं होने की बात कही गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने महिला को 26 वें सप्ताह में गर्भपात की मंज़ूरी दी।

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महिला को गंभीर भ्रूण रोगों से पीड़ित भ्रूण रद्द करने के लिए अनुमति दी है, महिला गर्भावस्था के अपने 26 वें सप्ताह में है। बेंच ने मेडिकल बोर्ड और एसएसकेएम अस्पताल की रिपोर्ट को मद्देनज़र रखते हुए यह निर्देश दिया, जिसने इस आधार पर गर्भावस्था को समाप्त करने की सलाह दी कि अगर गर्भावस्था जारी रहती है तो बच्चे के जीवित होने पर माता को गंभीर मानसिक चोट पड़ेगी।

 

महिला और उसके पति ने सर्वोच्च न्यायालय से अपील की थी कि वह अपने भ्रूण के असामान्यताओं के आधार पर गर्भपात करने की अनुमति चाहते हैं। उन्होंने गर्भावस्था के मेडिकल टर्मिनेशन (एमटीपी) अधिनियम की धारा 3(2)(बी) की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी थी जो 20 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद गर्भपात को निषेध करता है। सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा निर्देशित एक सात सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को देखते हुए महिला से कहा था कि वह अपने स्वास्थ्य पर रिपोर्ट की जांच करे और उसे अपनी स्थिति की जानकारी दे।

 

अदालत ने 23 जून को एसएसकेएम अस्पताल के सात डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड की स्थापना का आदेश दिया था। जिसे महिला और उसके 24 सप्ताह के भ्रूण के स्वास्थ्य से संबंधित कुछ पहलुओं का पता लगाना था। इस दंपत्ति ने दलील में, एक रिपोर्ट का सुझाव दिया था जिसमें कहा गया था कि भ्रूण गंभीर असामान्यताओं से पीड़ित है, जिसमें हृदय संबंधी मुद्दे शामिल हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर जन्म की इजाजत होती है, तो बच्चा पहली सर्जरी में भी जीवित नहीं रह सकता है और इसके अलावा भ्रूण मां के लिए घातक साबित हो सकता है।

 

 

याचिका में कहा गया था कि गर्भवती होने के 21वें सप्ताह में असामान्यताओं के बारे में पता चलने के बाद महिला को मानसिक और शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा था। इस याचिका में गर्भावस्था अधिनियम, 1971 (एमटीपी) के मेडिकल टर्मिनेशन की धारा 3(2)(बी) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी जिसमें गर्भपात निर्धारित 20 सप्ताह की सीमा तक सीमित है।

सिंथेटिक चावल की शिकायत पर खाद्य विभाग की छापेमारी शुरू

कन्हैया लाल/बलरामपुर: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में सिंथेटिक चावल बेचे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, चावल के सेवन से बीमार हुए एक शख्स ने इसकी शिकायत जिला अधिकारी से की है, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी ने खाद्य सुरक्षा टीम को संबंधित दुकान पर छापेमारी कर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। डीएम के आदेश पर पीड़ित युवक की निशानदेही पर सिंथेटिक चावल बेचे जाने वाली भगवतीगंज बाजार स्थित दुकान पर छापेमारी की गई और सैंपलिंग शुरू कर दी गई है। इसी दौरान दर्जनों की संख्या में व्यापारी इकठ्ठा हो गए और व्यापारी नेता ताराचंद्र अग्रवाल ने टीम के साथ अभद्रता करते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। आनन-फानन में खाद्य सुरक्षा टीम को सैंपलिंग का सामान लेकर वहां से जैसे-तैसे निकलना पड़ा। बड़ी बात यह है कि जब यह सब कुछ हो रहा था तो कोतवाली नगर की पुलिस मूकदर्शक बनी वहीं खड़ी हुई थी।

 

मामला कोतवाली नगर के भगवतीगंज बाजार का है जहां विशाल गुप्ता नामक शख्स की दुकान से सुशील मिश्रा पुत्र स्व0 जगदीश प्रसाद मिश्रा निवासी पुराबटोला ने 25 किलो चावल "माखन भोग" खरीदा था जिसके 10 दिन के सेवन के बाद वह बीमार हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, 3 दिन बाद जब वह अस्पताल से वापस घर आया तो "तमाम चैनलों पर चल रही असली और नकली चावल पहचान करने की खबर" को देख कर उसे भी शंका हुई और उसने घर में बने चावल को चेक करने के लिए चावल के गोले बनाएं और उसे जमीन पर पटक कर देखने लगा वह गोले चावल के थे लेकिन किसी गेंद से कम नहीं वह रबर की तरह उछल रहे थे। एक भी चावल उसमे अलग नहीं हो रहा था। जिसके बाद सुशील ने जिलाधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर शिकायत दर्ज कराई।

 

जिलाधिकारी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा की टीम को तत्काल मौके पर जाकर संबंधित दुकान पर छापामारी करने व सिंथेटिक चावल के मुख्य स्रोत तक पहुँच कर कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। डीएम के आदेश पर खाद्य सुरक्षा की टीम ने आनन-फानन में भगवती गंज बाजार स्थित विशाल गुप्ता की दुकान पर छापेमारी की और सैंपलिंग शुरू कर दी इसी दौरान दर्जनों की संख्या में व्यापारी इकट्ठा हो गए और उन्होंने अपने व्यापारी नेता ताराचंद्र अग्रवाल को भी मौके पर बुला लिया। ताराचंद्र अग्रवाल ने पहुंचते ही खाद्य सुरक्षा टीम के सदस्यों के साथ अभद्रता शुरू कर दी साथ ही टीम को वहां से चले जाने की बात कही। टीम ने जब इसका विरोध किया तो ताराचंद्र अग्रवाल ने व्यापारियों को एकजुट कर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के दौरान कोतवाली नगर की पुलिस भी वहीँ मौजूद थी लेकिन वह भी मूकदर्शक बनी रही।

 

 

व्यापारियों के हंगामे को देखकर खाद्य सुरक्षा की टीम ने आनन-फानन में सैंपलिंग की और वहां से बमुश्किल निकल सकी। पूरे मामले पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुशील कुमार मिश्रा ने बताया कि सैम्पलिंग कर ली गई है। सैंपल लैब में टेस्टिंग के लिए भेजे जाएंगे जिसकी रिपोर्ट करीब 40 दिन बाद आएगी रिपोर्ट में सिंथेटिक चावल होने की पुष्टि यदि होती है तो संबंधित दुकानदार के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराया जाएगा। पूरे मामले पर जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि सिंथेटिक चावल बेचे जाने का मामला प्रकाश में आया है मामले में खाद्य सुरक्षा टीम को कार्रवाई के लिए निर्देशित कर दिया गया है टीम द्वारा उसकी सैंपलिंग कर जांच के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के पश्चात टीम द्वारा उचित कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

पीसीवी और जेई का टीकाकरण शत प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण होने तक रहेगा जारी

कन्हैया लाल /बलरामपुर: बच्चों में मृत्यु दर कम करने के लिए निमोनिया जैसी भयानक बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत निमोनिया एवं दिमागी बुखार के टीकाकरण का शुभारंभ तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ला तथा जिला अधिकारी राकेश कुमार मिश्रा ने संयुक्त चिकित्सालय शिशुओं को पीसीवी वैक्सीन का टीका लगा कर किया।

 

कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर ए के सिंघल ने किया मुख्य अतिथि कैलाश नाथ शुक्ला ने सरकार द्वारा संचालित टीकाकरण को शत प्रतिशत लगवाने की अपील करते हुए कहा कि सरकार ने आम जनता के लिए अत्यधिक महंगे और उच्च गुणवत्ता के टीके को निशुल्क सभी सरकारी चिकित्सालयों पर उपलब्ध कराया है जिसके लगवाने से नवजात शिशुओं में निमोनिया और दिमागी बुखार जैसी भयानक बीमारियों से पूर्णतया निजात पाया जा सकता है। जिला महिला चिकित्सालय में स्थापित नवजात शिशुओं के उपचार के लिए कंगारू केयर यूनिट और आधुनिक उपकरण अति पिछड़े इस जनपद के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।

 

जिला अधिकारी राकेश मिश्रा ने बताया कि देश में हर साल निमोनिया की चपेट में आकर 3.5 लाख बच्चे दम तोड़ देते हैं। हर साल 36 लाख बच्चे निमोनिया की चपेट में आते हैं। निमोनिया का सबसे बुरा प्रभाव उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमांचल प्रदेश में देखने को मिल रहा है। बच्चों को निमोनिया के प्रभाव से बचाने के लिए पीसीवी वैक्सीन को उत्तर प्रदेश के 6 जिलों में पहले चरण में नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सिद्धार्थनगर और श्रावस्ती में इस टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। तथा जापानी इंसेफेलाइटिस के बचाव के लिए जे ई का टीकाकरण अभियान शतप्रतिशत पूर्ण होने तक जारी रहेगा।

 

कार्यक्रम में मौजूद नेशनल हेल्थ मिशन की आरती सिंह ने कहा कि अत्यधिक प्रभावित 6 जिलों को चिह्नित किया गया है। बलरामपुर में निमोनिया से बाल मृत्यु दर ज्यादा हैं। आमतौर पर न्यूमोकोकल कांजुगेट वैक्सीन को लगवा कर पांच साल से कम उम्र के बच्चे वाले परिवार निमोनिया की बीमारी के इलाज में होने वाले खर्च और परेशानियों से बच सकते हैं बच्चों को इसके तहत दो प्राइमरी टीके और एक बूस्टर दिया जाएगा।

 

 

कार्यक्रम को मुख्य चिकित्सा अधिकारी घनश्याम सिंह चिकित्सा अधीक्षक संयुक्त चिकित्सालय डॉक्टर एस डी भारती ने संबोधित किया इस अवसर पर डॉक्टर एस के वर्मा डॉक्टर अरविंद डॉक्टर बाजपेई सहित टीकाकरण के लिए लगाई गई ए एन एम आशा बहू स्टाफ नर्स तथा भारी संख्या में नवजात शिशु और  माताएं मौजूद रही।

चुनाव आयोग आज साझा करेगा ईवीएम की कार्यप्रणाली

दिल्ली: देश भर में तमाम विरोधी पार्टियों द्वारा ईवीएम में गड़बड़ी की बात को ग़लत साबित करने को पूर्ण रूप से तैयार है चुनाव आयोग, इसी के संदर्भ में चुनाव आयोग ने जनता के साथ ईवीएम के कार्य करने के तरीक़े को साझा करने का फ़ैसला किया है। 12 मई को चुनाव आयोग की बैठक में यह अहम फ़ैसला लिया गया था। ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के डैमो के बाद चुनाव आयोग के अधिकारी एक प्रेस वार्ता को संबोधित करेंगे।

 

तमाम पार्टियों के ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप को ग़लत साबित करने के लिए चुनाव आयोग खुली चुनौती शूरवात से देता आ रहा है। आज ईवीएम के डैमो के साथ आयोग हैकाथौन की तारीख़ की घोषणा भी करेगा। सूत्रों के अनुसार हैकाथौन जून के पहले सप्ताह में आयोजित कराई जा सकती है।

 

इस हैकाथौन के दौरान तमाम आरोप लगाने वाली पार्टियों को ईवीएम में गड़बड़ी करने का मौक़ा दिया जाएगा। हैकाथौन के दौरान आरोप लगाने वाली पार्टियाँ किसी भी हैकर की मदद लेकर ईवीएम में गड़बड़ी करने की कोशिश कर सकती है। चुनाव आयोग का मानना है ईवीएम की विश्वसनीयता पर किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए।


ईवीएम में गड़बड़ी की बात सबसे पहले उत्तर प्रदेश चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद बसपा सुप्रीमों मायावती ने कही थी, उसके बाद कई अन्य पार्टियों ने उनके सुर से सुर मिलाए और ईवीएम में गड़बड़ी की बात कही।

पतंजलि आयुर्वेदिक रिसर्च इंस्टिट्यूट का उद्घाटन करने पहुँचे पीएम

हरिद्वार: बुधवार सुबह केदारनाथ के दर्शन और पूजा अर्चना के बाद पीएम मोदी हरिद्वार में स्थित पतंजलि आयुर्वेदिक रिसर्च इंस्टिट्यूट पहुँचे जहाँ उनके स्वागत में योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण मौजूद थे। दरसल पीएम मोदी पतंजलि आयुर्वेदिक रिसर्च  इंस्टिट्यूट का उद्घाटन करने पहुँचे थे।

 

हरिद्वार में रामदेव और मोदी दोनों एक दूसरे की तारीफ़ करते नज़र आए जहाँ एक ओर रामदेव ने पीएम मोदी को ‘राष्ट्र ऋषि’ की उपाधि से नवाज़ा तो दूसरी ओर मोदी ने रामदेव को योग को दुनिया के सामने एक आंदोलन की तरह पेश करने के लिए धन्यवाद दिया। रामदेव ने कहा, मोदी देश के लिए एक महानायक की तरह काम करते है, वे अमीर ग़रीब, छोटा-बड़ा किसी में कोई फ़र्क़ नहीं देखते है और वे देश को तरक़्क़ी की ओर अग्रसर करने का काम करते नज़र आ रहें हैं।


पतंजलि आयुर्वेदिक रिसर्च इंस्टिट्यूट देश का सबसे बड़ा आयुर्वेदिक रिसर्च इंस्टिट्यूट है, यह लगभग दो सौ करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। इस इंस्टिट्यूट में देश के 200 वैज्ञानिक अलग अलग जड़ीबूटियों पर रिसर्च करेंगे, रामदेव ने रिसर्च इंस्टिट्यूट के साथ हर्बल गार्डन का निर्माण भी करवाया है।

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जाने कैसे, घर बैठे बेझिझक मँगवा सकते है कंडोम

दिल्ली: भारत और दुनियाभर में ऐड्स से लड़ने की मुहीम चलाने वाले एनजीओ ऐड्स हेल्थ केयर फ़ाउंडेशन (एएचएफ) ने अपनी दसवीं सालगीरा पर भारत में ऐड्स के ख़िलाफ़ एक बड़ा क़दम उठाते हुए घर-घर कंडोम पहुँचने का फैसला किया है। एक सर्वे के मुताबिक़ भारतीय कंडोम ख़रीदने तथा उसके बारे में बात करने से कतराते हैं, यहाँ तक की भारत में कंडोम एक वर्जना के रूप में देखा जाता रहा है।

 

भारत, दुनिया में ऐड्स से ग्रसित आबादी वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है, यूएनऐड्स रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में भारत में कुल 21लाख लोग एचआइवी पॉज़िटिव है। भारत में 2016 में कुल 68 हज़ार लोगों कि मौत का कारण ऐड्स बना था। हालाँकि ऐड्स से मरने वालों की संख्या में साल दर साल गिरावट आ रही है।

 

ऐड्स हेल्थ केयर फ़ाउंडेशन ने फ्री कंडोम स्टोर्स के लॉंच के दौरान इसे अपने आपमें एक बड़ी पहल बताया है। भारत एएचएफ प्रमुख डॉ.वी सेम प्रसाद ने बताया एनजीओ ने कंडोम डिलीवरी की शुरूआत 26 अप्रैल से करदी है।


अब कॉल या ई-मेलघर ज़रिए घर बैठे फ्री कंडोम डिलीवरी पाई जा सकती हैं। कंडोम, टोल फ्री नम्बर 1800 102 8102 पर कॉल करके या फिर This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. पर मेल भेजकर पाया जा सकता है।

ड्रग इंस्पेक्टर ने मारा छापा,सामने आया हैरान कर देने वाला सच

राघवेंद्र सिंह/बस्ती- ड्रग इंस्पेक्टर अनीता कुरील ने टीम के साथ शहर के दवा मेडिकल स्टोरो पर मारा छापा

 

नवयुग मेडिकल सेंटर और अमोघ नर्सिंग होम के अंदर चल रहे मेडिकल स्टोरो पर छापा

 

छापे के बाद मेडिकल स्टोर चलाने वाले दुकानदारो मे मची खलबली, शिकायत पर हुई कार्यवाही

 

जांच मे भारी अनियमित्ता पाई गई, दवा के नाम पर टैक्स घोटाला भी करते पाये गये दुकानदार

 

दोनो सेंटरो पर की गई मेडिकल दवाएं सील, प्रतिबंधित दवाओ का नही मिला कोई रिकार्ड

 

ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा पूछे जाने पर फार्मासिस्ट दवाओ को खुद दिखा नही पाये, डिग्री के सहारे चला रहे काम।आ

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बारिश से बचाव कार्य बाधित, भूकंप में मरने वालों की संख्या 3,218 हुई

नेपाल में आए भीषण भूकंप में मरने वालों की संख्या आज 3,200 पार कर गई, जबकि 6,000 से ज्यादा लोग घायल हैं। इस बीच, बारिश और ताजा झटकों के कारण मकानों और इमारतों के मलबे के ढेर के नीचे दबे जीवित लोगों को निकालने के प्रयास भी बाधित हो रहे हैं।

गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन खंड के प्रमुख रामेश्वर डांगल ने कहा, मृतकों की संख्या 3,218 पहुंच चुकी है और 6,500 से ज्यादा लोग घायल हैं। अधिकारियों ने कहा कि भारतीय दूतावास के एक कर्मचारी की बेटी समेत पांच भारतीय इस भूकंप में मारे गए लोगों में शामिल हैं।

बिजली न होने की वजह से काठमांडू शहर कोई भूतिया शहर मालूम होता है। वहां भारी बारिश हो रही है। इस स्थिति के चलते हवाईअड्डे को बंद करना पड़ा और अफरातफरी के इस माहौल के बीच अपने घर जाने के लिए बेताब विदेशी पर्यटक यहां फंसे हैं। हजारों लोगों को बारिश से बचने के लिए शहर की सड़कों पर लगाए गए प्लास्टिक से बने अस्थायी तंबुओं में रात गुजारनी पड़ी।

नेपाली टाइम्स के संपादक कुंदा दीक्षित ने ट्वीट किया, अभी भी बारिश हो रही है, जो कि स्थिति को और खराब बनाती है। इसमें तसल्ली सिर्फ इतनी है कि इससे कुछ शरणस्थलियों पर पानी का संकट कम हो सकेगा। उन्होंने कहा कि नेपाल को तत्काल ही तंबुओं और दवाओं की जरूरत है।

भूकंप के मुख्य झटकों के बाद कल आए शक्तिशाली झटकों के कारण पीड़ित लोगों के बीच दहशत मच गई थी और माउंट एवरेस्ट पर हिमस्खलन हो गया था। इस कारण 22 लोगों की मौत हो गई थी। शनिवार के भूकंप के मुख्य झटकों के बाद भी झटकों का सिलसिला जारी रहा और कल 6.7 तीव्रता और उसके बाद फिर 6.5 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। इसके कारण खौफजदा लोग निकलकर खुले स्थानों पर आ गए थे।

शनिवार को आए 7.9 तीव्रता के भूकंप के कारण भारी तबाही हुई है। ताजा भूकंप के झटकों के डर के कारण लोग ठंड से भरी रात में खुले इलाके में रह रहे हैं। अकेली काठमांडू घाटी में ही 1,053 लोगों के मारे जाने की खबर है। बचे हुए लोगों की जांच जारी होने के कारण अधिकारियों को इस संख्या के बढ़ने की आशंका है। मृतकों के अंतिम संस्कार सामूहिक रूप से किए गए और मृतकों की संख्या में दिनभर वृद्धि होती रही।

बीते 80 से भी ज्यादा वर्षों में देश के इतिहास में आए अब तक के सबसे भीषण भूकंप को देखते हुए नेपाल ने आपातस्थिति की घोषणा कर दी है और भारतीय बचाव दलों समेत अंतरराष्ट्रीय बचाव दल नेपाल पहुंच चुके हैं। भारत ने बचाव और पुनर्वास के एक बड़े प्रयास के तहत 13 सैन्य विमान तैनात किए हैं, जिनमें अस्पताल सुविधाएं, दवाएं, कंबल और 50 टन पानी एवं अन्य सामग्री है।

भारत ने राष्ट्रीय आपदा राहत बल के 700 से ज्यादा आपदा राहत विशेषज्ञों को तैनात किया है। एक वरिष्ठ स्तरीय अंतरमंत्रालयी दल नेपाल का दौरा करके यह आकलन करेगा कि भारत किस तरह राहत अभियानों में बेहतर सहयोग कर सकता है। बचावकर्मी मलबे के ढेर में फंसे जीवित लोगों की खोज हाथों से भी कर रहे हैं और भारी उपकरणों से भी। ताजा झटकों, तूफानों और पर्वतीय श्रृंखलाओं पर हिमपात के कारण बचाव कार्य बाधित हो रहे हैं।

स्थानीय लोग और पर्यटक जीवित बचे लोगों को निकालने के लिए मलबे में खोज में जुटे रहे। जब लोग जीवित पाए जाते तो वहां मौजूद लोगों में हर्ष की लहर दौड़ जाती। हालांकि अधिकतर शव ही बाहर निकाले गए। नेपाल के कई अन्य इलाकों की तरह काठमांडू इस आपदा के कारण हुई तबाही से निपटने की एक भारी चुनौती का सामना कर रहा है। राजधानी में पूरी-पूरी सड़कों और चौराहों पर मलबा पड़ा है। इस शहर की जनसंख्या लगभग तीस लाख है।

SC ने शोभा को जारी नोटिस पर लगाई रोक

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायलय ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लेखिका शोभा डे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के नोटिस पर आज रोक लगा दी. अध्यक्ष ने प्राइम टाइम में मल्टी प्लेक्स में मराठी फिल्मों की स्क्रीनिंग को अनिवार्य बनाए जाने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर ट्वीट करने को लेकर यह नोटिस जारी किया था.

न्यायाधीश दीपक मिसरा और प्रफुल्ल सी पंत की पीठ ने डे की याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी किया और आठ सप्ताह के भीतर जवाब मांगा.
 
सोशलाइट और स्तंभकार शोभा डे ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नोटिस जारी किए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. यह आदेश शिवसेना के एक विधायक द्वारा डे के खिलाफ यह आरोप लगाते हुए शिकायत किए जाने पर जारी किया गया था. विधायक ने शिकायत की थी कि डे के ट्वीट ने मराठी भाषा और मराठी भाषी लोगों का अपमान किया है. 
 
वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुंदरम ने डे का पक्ष रखते हुए कहा,' टिप्पणियां सरकार के फैसले के खिलाफ की गयी थीं और यह विधानसभा के किसी विशेषाधिकार का उल्लंघन नहीं है.' उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने विभिन्न फैसलों में विधानसभा के विशेषाधिकार की व्याख्या की है और लेखिका ने इनमें से किसी का उल्लंघन नहीं किया है.    
 
इस महीने की शुरुआत में , विधानसभा के मुख्य सचिव अनंत कल्से ने डे को नोटिस जारी कर उनसे यह बताने को कहा था कि वह सरकार के फैसले के खिलाफ अपने ट्वीट की व्याख्या करें.  शिवसेना विधायक प्रताप सरनिक द्वारा विधानसभा में शोभा डे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लए जाने के बाद यह नोटिस जारी किया था. शोभा डे ने ट्वीट किया था,' देवेन्द्र 'फतवेवाला' फडणवीस एक बार फिर ऐसा कर रहे हैं. गौमांस से लेकर फिल्मों तक. यह वह महाराष्ट्र नहीं है जिसे हम सब प्यार करते हैं. नको नको. ये सब रोको.'
 
शोभा डे ने ट्वीट किया था कि यह और कुछ नहीं बल्कि गुंडागर्दी है. उन्होंने लिखा, 'मुझे मराठी फिल्में बहुत पसंद हैं. देवेन्द्र फडणवीस, यह फैसला मुझे करने दो कि मैं इन फिल्मों को कब और कहां देखूं. यह और कुछ नहीं बल्कि दादागिरी है.' इस ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए शिवसेना विधायक ने शोभा डे पर 'मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और मराठी भाषी लोगों की भावनाओं का अपमान करने' का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया था.
 
विशेषाधिकार प्रस्ताव के नोटिस पर डे ने ट्वीट किया, 'अब माफी की मांग रखते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस. मुझे अपने मराठी होने पर गर्व है और मैं मराठी फिल्मों से प्यार करती हूं. हमेशा करती हूं और हमेशा करती रहूंगी.' डे की टिप्पणियों से गुस्साए शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने दक्षिणी मुंबई में उनके घर के बाहर प्रदर्शन भी किया था
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