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updated 4:36 PM UTC, Apr 30, 2017
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बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संरक्षण कार्यक्रम लॉच करेंगी उमा भारती

दिल्ली, केन्‍द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती बुंदेलखंड, मराठवाड़ा, ओडिशा के कालाहांडी, बोलनगीर तथा कोरापुट के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए व्‍यापक जल संरक्षण कार्यक्रम लॉच करेंगी। उमा भारती औपचारिक रूप से कार्यक्रम 28 अप्रैल, 2017 को सागर के बंद्री में लॉच करेंगी।

 

यह घोषणा करते हुए जल संसाधन मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय ने बुंदेलखंड क्षेत्र में भूजल के कृत्रिम रिचार्ज के लिए मास्‍टर प्‍लान बनाया है। उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में लगभग 1100 परकोलेशन (रिसाव) टैंकों, 14000 छोटे चैक डैम/ नाला पुश्‍तों तथा 17000 रिचार्ज शॉफ्ट्स की पहचान की गई है। मध्‍यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में लगभग 2000 परकोलेशन टैंको, 55000 छोटे चैक डैम/ नाला पुश्‍तों तथा 17000 रिचार्ज शॉफ्ट्स की पहचान की गई है। उन्‍होंने कहा कि भूजल खोज के हिस्‍से के रूप में उत्‍तर प्रदेश क्षेत्र के बुंदेलखंड के पांच जिलों-बांदा, हमीरपुर, जालौन, चित्रकूट और माहोबा में 234 कुएं बनाये जाने का प्रस्‍ताव है। मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के छह जिलों में भूजल खोज के लिए 259 कुओं के निर्माण का प्रस्‍ताव है।

 

भारती ने कहा कि उनके मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय भूजल प्रबंधन सुधार योजना के अंतर्गत कई नई पहल की है। इसका उद्देश्‍य दबाव वाले ब्‍लॉकों में भूजल की स्थिति में कारगर सुधार करना, गुण और मात्रा दोनों की दृष्टि से संसाधन को सुनिश्चित करना, भूजल प्रबंधन और संस्‍थागत मजबूती में भागीदारीमूलक दृष्टिकोण अपनाना है। उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 11851 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कवर करने वाले छह जिलों को इस पहल के अंतर्गत विचार के लिए रखा गया है और मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के 8319 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के पांच जिलों को विचार के लिए रखा गया है।

नायडू ने एमएसईएफसी पोर्टल और माईएमएसएमई मोबाइल ऐप किया लांच

दिल्ली, केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने एमएसएमई की राष्ट्रीय बोर्ड की 15 वीं बैठक के अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय दो महत्वपूर्ण पहलों यानि माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज फेसिलिटेशन काउंसिल (एमएसईएफसी) पोर्टल और माईएमएसएमई मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र और राज्य मंत्री हरिभाई पार्थिभाई चौधरी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

 

इस अवसर पर कलराज मिश्र ने कहा कि http://msefc.msme.gov.in पर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल पोर्टल एमएसएमईडी अधिनियम 2006 के विलंबित भुगतान के प्रावधानों को लागू करने में मदद करेगा तथा विलंबित भुगतान के मामलों की निगरानी में भी सहायता करेगा। इस मंच पर पहुंच से सूक्ष्‍म और लघु उद्यमों को विलंबित भुगतान संबंधी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करने में मदद मिलेगी।  दर्ज की गई शिकायतें ई-मेल और एसएमएस के माध्‍यम से संबंध पार्टियों को भेज दी जाएंगी। इससे एमएसएमई मंत्रालय के साथ-साथ संबंधित राज्य सरकार के अधिकारियों को राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर भी हुई प्रगति की निगरानी करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश राज्यों ने पहले ही विलंबित भुगतान के मामलों से संबंधित जानकारी एमएसईएफसी पोर्टल पर अपलोड कर दी है। 31.03.2017 के अनुसार 1660 करोड़ रुपये की राशि के  3690 मामलों पर विभिन्न एमएसईएफसी द्वारा विचार किया जा रहा है। वास्तव में यह ऑनलाइन पोर्टल स्‍टार्ट-अप्‍स की बड़ी मदद करेगा क्‍योंकि विलंबित भुगतान स्‍टार्ट-अप्‍स के लिए सबसे बड़ी समस्‍या है।  

 

इसके अलावा http://my.msme.gov.in पर MyMSME पर मोबाइल ऐप की भी एम वेंकैया नायडू द्वारा शुरूआत की गई है जो एक ही स्‍थान पर एमएसएमई मंत्रालय द्वारा लागू की गई सभी योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है। एमएसएमई इकाइयां हमेशा यह शिकायत रहती थी कि सभी योजनाओं के बारे में जानकारियां एक ही स्थान पर उपलब्ध नहीं हो रही हैं। माईएमएसएमई मोबाइल एप की सहायता से इस मंत्रालय द्वारा लागू की गई सभी योजनाओं के बारे में एकल खिड़की पर जानकारी उपलब्‍ध होगी। एमएसएमई इस एप के माध्यम से मंत्रालय से संबंधित शिकायतों को भी दर्ज करा सकती हैं। प्रधानमंत्री ने सिविल सेवा दिवस समारोह के अवसर पर ई-गवर्नेंस से एम-गवर्नेंस की ओर आगे बढ़ने की जरूरत के बारे में बात की है। इस मोबाइल ऐप ने एमएसएमई सेक्टर को एम-गवर्नेंस के युग में प्रवेश करने के लिए सक्षम बनाया है।

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डाक सेवक के आश्रित परिजनों को अनुकंपा के आधार पर मिलेगी नौकरी

दिल्ली, डाक विभाग ने मौजूदा नियम के तहत ग्रामीण डाक सेवक के आश्रित परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के लिए नई शुरुआत की है। ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी के दौरान मौत होने पर आश्रित को बिना किसी मुश्किल के तय समय के भीतर अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। किसी भी ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी के दौरान बीमारी या किसी दूसरी वजह से मृत्यु होती है तो उसके परिवार के सदस्य कोअनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलेगी। जरूरी हुआ तो आवेदक की ऊपरी उम्र की सीमा में भी छूट दी जाएगी। नई योजना की शुरुआत से ग्रामीण डाक सेवक जो कि समाज के कमजोर और गरीब तबके से आते हैं और किसी अनहोनी की स्थिति में जिनपर अचानक मुश्किल आ जाती है उनके परिजनों को राहत मिलेगी।

 

आश्रितों के निकटतम रिश्तेदारों में भी विस्तार दिया गया है जिसमें शादीशुदा बेटा जो मां-पिता के साथ रह रहा है, ग्रामीण डाक सेवक के निधन के समय अपनी आजीविका के लिए पिता पर पूरी तरह निर्भर हो, तलाकशुदा बेटी जो ग्रामीण डाक सेवक के निधन के समय अपने पिता पर ही पूरी तरह से निर्भर हो, ग्रामीण डाक सेवक की बहू जो निधन के समय उन्हीं पर पूरी तरह से निर्भर हो और ग्रामीण डाक सेवक के एकमात्र बेटे का पहले ही निधन हो चुका हो ऐसे परिवारों के सदस्यों को नौकरी डाक विभाग में दी जाएगी। परिवार के सदस्यों में इसके विस्तार का लक्ष्य हमारे समाज में महिलाओं के सामने उनके पति/परिजन के अचानक निधन से पैदा हुई मुश्किल परिस्थितियों में राहत देना है।

 

अलग सेवा शर्त, सामाजिक और वित्तीय हालात और परिवार में वित्तीय अभाव, ज्यादा समय लेने वाली जटिल प्रक्रिया की वजह से गरीबी के आधार पर परिजनों के मूल्यांकन के पुराने तरीके को बदलकर वर्तमान तरीका लागू किया गया है। आगे से अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आए आवेदन पर पर विचार कर आवेदन प्राप्ति की तारीख से तीन महीने के भीतर इसपर फैसला ले लिया जाएगा। आश्रित को दूर ना जाना पड़े इसके लिए फैसला किया गया है कि ग्रामीण डाक सेवक के आश्रित को अनुकंपा के आधार पर ग्रामीण डाक सेवक की नियुक्ति वही करने की कोशिश की जाएगी जहां उसका परिवार रहता है।

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शहरी गरीबों के लिए एक लाख से अधिक मकानों को मिली मंजूरी

दिल्ली, आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय ने 4200 करोड़ रुपये के निवेश के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी गरीबों के लिए 1,00,537 और मकानों को मंजूरी दी है। इसके साथ ही अब तक कुल मिलाकर 1,00,466 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी गई है। यह शहरी क्षेत्रों में किफायती मकानों के लिए वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2014 तक मंजूर किये गये 32,713 करोड़ रुपये के निवेश से 307 प्रतिशत ज्‍यादा है।

 

नवीनतम मंजूरी के साथ ही मंत्रालय ने अब तक 34 राज्‍यों, केन्‍द्र शासित प्रदेशों में 2151 शहरों एवं कस्‍बों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक दृष्टि से कमजोर तबकों के लिए 18,75,389 मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है। वहीं, दूसरी ओर 2004-2015 अवधि के दौरान 32,009 करोड़ रुपये के स्‍वीकृत निवेश के साथ 13.80 लाख मकानों को मंजूरी दी गई थी। अब तक स्‍वीकृत किये गये कुल निवेश में 29409 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता, राज्‍य सरकारों की ओर से प्राप्‍त सहायता और लाभार्थियों का अंशदान शामिल है।

 

 

नवीनतम मंजूरी के तहत मध्‍य प्रदेश को 57131 मकान, तमिलनाडु को 24576, मणिपुर को 6231, छत्‍तीसगढ़ को 4898, गुजरात को 4261, असम को 2389, केरल को 643, झारखंड को 331 और दमन एवं दीव को 77 मकान हासिल हुए हैं। कुल 2,66,842 मकानों को दी गई स्‍वीकृति के साथ मध्‍य प्रदेश पहली बार 18,283 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दी गई मंजूरियों के मामले में पहली बार नंबर-1 बना है। तमिलनाडु 9,112 करोड़ रुपये की परियोजना लागत वाले 2,52,532 मकानों के साथ दूसरे नंबर पर है। अब तक जितने मकानों को मंजूरी दी गई हैं, उनमें से 6,89,829 मकानों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है, जबकि 1,00,395 मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है।

नहीं बढेगें कर्मचारियों के वर्किंग ऑवर

दिल्ली, भारत सरकार द्वारा केंद्र सरकार के कर्मचारियों के कार्य घंटों के विस्तार के बारे में चल रही खबरों को संज्ञान में लिया है। मीडिया में यह कहा गया था कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के कामकाजी घंटों में परिवर्तन किया जा रहा है। ऐसा कहा जा रहा था कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सुबह 09.00 बजे से शाम 07.00 बजे तक कार्य करना होगा। यह भी कहा गया था कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की शनिवार की छुट्टी भी खत्म हो जाएगी।

 

इस संबंध में, कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केन्द्र सरकार के विचाराधीन ऐसा कोई ऐसा प्रस्ताव नहीं है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के कामकाजी घंटों के विस्तार और शनिवार की छुट्टी खत्म करने के बारे में मीडिया में चल रही खबरें गलत और निराधार हैं। इस संबंध में कोई मौखिक या अलिखित आदेश जारी नहीं किया गया है।

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रूसा करेगा परियोजनाओं की निगरानी

दिल्ली, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) द्वारा विकसित निधि एवं सुधार ट्रैकर की शुरुआत की। इस अवसर पर बोलते हुए मंत्री जावड़ेकर ने कहा, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है निधि एवं सुधार ट्रैकर रूसा परियोजना की निगरानी करेगा। इसके जरिए किसी भी परियोजना मंज़ूर होने से लेकर सफलतापूर्वक सम्पन्न होने तक सभी चरणों की निगरानी की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, सुधार ट्रैकर राज्यों की उच्च शिक्षा नीतियों, योजनाओं एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के विवरण का रिपोर्ट कार्ड होगा।

 

जावड़ेकर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में जितना अधिक रोमांचक एवं प्रभावशाली समय आज है, उतना रोमांचक समय पहले कभी नहीं रहा। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस एप का उद्देश्य क्लासरूमों की पुनः कल्पना करना, समय और तकनीक के साथ आगे बढ़ना और शिक्षा के क्षेत्र में सभी उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जारी बातचीत में सभी हितधारकों को शामिल करना, और उनके सकारात्मक एवं प्रभावी सुझावों को अत्यधिक महत्व देना है।

 

हितधारक केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा जारी धन के बारे में बारीकी से पूर्ण विवरण प्राप्त कर सकता है। समय बताने वाली मुहर किसी भी परियोजना के कार्य एवं उसकी प्रगति के बारे में जानकारी देते हैं, इससे किसी भी परियोजना की ज़मीनी हकीकत का चित्र हमारे सामने प्रदर्शित होता है। ट्रैकिंग प्रणाली इस एप की आत्मा है, और प्रत्येक पहल को एक अलग आईडी नंबर दिया गया है। इससे इस बारे में पूरी जानकारी मिलती है कि किस प्रकार कोई विचार पैदा हुआ और किन-किन चरणों से होते हुए उसका पूर्ण विकास हुआ।

 

 

मिलावट के खिलाफ सरकार सख्त, बोतलबंद पानी की भी होगी जांच

केंद्रीय उपभोक्ता खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि सरकार बोतलबंद पानी में मिलावट रोकने के उपाय पर कार्य कर रही है। पासवान ने कहा कि उपभोक्ता मामला विभाग ने एफएसएसएआई से कम लागत की जांच मशीन बनाने का अनुरोध किया है ताकि ये मशीन विभिन्न खाद्य उत्पादों में मिलावट रोकने में उपयोगी हो सकें। रामविलास पासवान आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन, एनएक्सी में केंद्रीय उपभोक्ता सरंक्षण परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।

 

पासवान ने बताया कि उपभोक्ता मामला विभाग अगले तीन महीनों में 6 क्षेत्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन लांच करेंगा। क्षेत्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन स्थापित करने के लिए राज्य सरकारों से आवश्यक समर्थन देने का अनुरोध किया गया है। पासवान ने बताया कि विभाग राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा स्वयंसेवी उपभोक्ता संगठनों को शामिल करके 15 अगस्त, 2017 से 24 दिसंबर, 2017 तक उपभोक्ता जागरूगता यात्रा आयोजित करेगा।

 

परिषद की बैठक में मिलावट रोकने की चुनौतियों, व्यवस्था लागू करने की मशीनरी बनाने और जांच, संरचना, प्रशिक्षण और सभी हित धारकों के क्षमता सृजन के उपायों पर चर्चा की गई। होटलों तथा रेस्तराओं द्वारा सेवा शुल्क वसूलने, खाने की बर्बादी को लेकर जागरूकता बढ़ाने तथा एमआरपी से कम कीमत पर सामग्री बेचने की कानूनी गतिविधियों, जागरूक ग्राहक केंद्र आदि के बारे में सदस्यों से सुझाव मांगे गए। एफएसएसएआई, डीआईएस सहित केंद्र सरकार की नियामक एजेंसियों के अधिकारियों तथा राज्य सरकारों के अधिकारियों और स्वंय सेवी उपभोक्ता संगठनों के सदस्यों ने बैठक में भाग लिया।

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टैक्सियों में अनिवार्य होगा जीपीएस पैनिक सिस्टम

दिल्ली, टैक्सी सेवाओं का लाभ लेने वाली महिलाओं की सुरक्षा के बारे में महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा सिफारिश किए गए सुरक्षा उपायों को नई टैक्सी नीति के दिशा-निर्देशों में शामिल किया गया है। महिला और बाल विकासमंत्री मेनका संजय गांधी ने इन उपायों की सिफारिश सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा शिपिंग मंत्रालय से की थी।

 

नई टैक्सी नीति के सिफारिशों में कहा गया है कि टैक्सियों में अनिवार्य रूप से जीपीएस पैनिक उपकरण लगे होने चाहिए, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए टैक्सी में सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, वाहन के फोटो और पंजीकरण संख्या के साथ चालक का पहचान पत्र भी टैक्सी में प्रमुखता से लगाया जाना चाहिए, टैक्सी ऑपरेटरों/ड्राइवरों द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने पर उनसे कानून के अनुसार कड़ाई से निपटा जाना चाहिए और यात्रियों की इच्छा पर ही सीट साझा की जानी चाहिए।

 

सोशल मीडिया पर मेनका गांधी को टैक्सियों में महिलाओं के यौन उत्पीड़न के कई मामलों के बारे में सूचित किये जाने को देखते हुये ये सिफारिशें की गयी थीं। महिलाओं ने ट्विटर और फेसबुक पर अपनी मुश्किलें साझा की थीं। इसके बाद महिला और बाल विकास मंत्री ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए रेडियो टैक्सी सेवा प्रदाताओं के साथ बैठक की। उस बैठक के आधार पर मंत्री महोदया ने सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को उनके मंत्रालय द्वारा तैयार किये जा रहे नियामक दिशा-निर्देशों में आवश्यक सुरक्षा उपायों को शामिल करने के लिए पत्र लिखा था।

 

महिला यात्री टैक्सियों में सुरक्षा के संबंध में श्रीमती मेनका गांधी को सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी परेशानियां बताती हैं। महिला और बाल विकास मंत्री ने #HelpMeWCD नाम से हैशटैग शुरू किया है। इस परउत्‍पीड़न, हिंसा झेल रही कोई भी महिला या बच्चा ट्वीट कर सीधे अपनी समस्‍या बता सकता है।  

 

 

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मालवीय समिति ने सरकार को सौंपा गंगा अधिनियम का प्रारूप

दिल्ली,  गंगा अधिनियम का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित मालवीय समिति ने अपनी रिपोर्ट नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती को सौंपी। रिपोर्ट स्‍वीकार करते हुए भारती ने इसे एक ‘ऐतिहासिक क्षण’ करार दिया और कहा कि ‘मैं इसे स्‍वीकार करते हुए बहुत रोमांचित हूं।’ उन्‍होंने कहा कि मोदी सरकार सभी संबंधित पक्षों से इस पर व्‍यापक विचार विमर्श के बाद इसे शीघ्र ही कानून का रूप देगी। उमा भारती ने अपने मंत्रालय के सचिव को निर्देश दिया कि वे इस रिपोर्ट का बारीकी से अध्‍ययन करने के लिए तत्‍काल एक उच्‍च स्‍तरीय समिति का गठन करें और यह समिति जल्‍द से जल्‍द अपनी रिपोर्ट दे।

 

समिति के अध्‍यक्ष न्‍यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने कहा कि यह एक बड़ी महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी थी जिसे समिति के सदस्‍यों ने बखूबी निभाया। उन्‍होंने कहा कि इस कार्य में उन्‍हें केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय और राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन का भरपूर सहयोग मिला। समिति ने अपनी रिपोर्ट में गंगा की निर्मलता एवं अविरलता को सुनिश्‍चित करने के लिए पर्याप्‍त प्रावधान किए हैं। रिपोर्ट में गंगा के संसाधनों का उपयोग करने के बारे में जिम्‍मेदारी एवं जवाबदेही तय करने के बारे में कई कड़े प्रावधानों का उल्‍लेख है। समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन के पास पूर्व में उपलब्‍ध कानूनी प्रारूपों का भी अध्‍ययन किया।

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भारत सरकार ने अनावश्‍यक 24 श्रम कानून नियमों को किया रद्द

सरकार ने विभिन्‍न प्रतिष्‍ठानों द्वारा श्रम कानूनों और नियमों के परिपालन को सहज बनाने के लिए अभियान शुरू किया है। निश्चित श्रम कानून नियमों 2017 के अंतर्गत फॉर्मों और रिपोर्टों को तर्क संगत बनाने से आवेदनों तथा रिपोर्टों की संख्‍या 3 अधिनियमों और उनके नियमों के अंतर्गत कम होकर 36 से 12 हो गई है। कुल 24 श्रम कानून नियमों को हटाया गया है। इस अभियान का उद्देश्‍य उपायोगकर्ता के लिए फॉर्मों और रिपोर्टों को समझने में सहज बनाना है। इससे प्रयास, लागत में बचत होगी और विभिन्‍न प्रतिष्‍ठानों के अनुपालन बोझ में कमी आयेगी। 2013-14 में  केन्‍द्रीय सांख्‍यकी कार्यालय की छठी आर्थिक गणना के अनुसार कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में लगभग 5.85 करोड़ प्रतिष्‍ठान हैं।

 

विभिन्‍न श्रम कानूनों के तहत फॉर्म भरने की आवश्‍यकता की समीक्षा में पाया गया कि तीन अधिनियमों और उनके अंतर्गत बने कानूनों के 36 फॉर्म अनावश्‍यक थे। इसलिए श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा परस्‍पर रूप से जुड़ें फॉर्मों को समाप्‍त करने और फॉर्मों की संख्‍या कम करने का अभियान चलाया। 9 फरवरी 2017 को फॉर्मों तथा रिपोर्टों की संख्‍या घटाने के आशय की अधिसूचना पब्लिक डोमेन में आई और इस बारे में आपत्तियों और सुझावों को सभी हितधारकों से मांगा गया।

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