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updated 1:07 PM UTC, Jan 21, 2017
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दूध उत्पादन तेजी से बन रहा किसानों का प्रमुख आर्थिक गतिविधि

केंद्रीय कृषिमंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि गांव के परिवारों में दूध उत्पादन एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि बन गया है और किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए खेती - बाड़ी के साथ इसे भी अपना रहे हैं। सिंह ने यह बात आज कृषि मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की अंतर-सत्रीय बैठक में कही। इस बैठक में राष्ट्रीय डेयरी योजना के कार्यान्वयन परचर्चा हुई।

 

राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश के लगभग 70 मिलियन ग्रामीण परिवार दूध उत्पादन में लगे हुए हैं। छोटे और सीमांत किसान तथा भूमिहीन श्रमिक, व्यक्तिगत रूप से प्रतिदिन लगभग एक से तीन लीटर दूध का उत्पादन कर देश के अधिकांश दूध का उत्पादन करते हैं। भारत के लगभग 78 प्रतिशत किसान, छोटे तथा सीमांत हैं जिनके पास लगभग 75 प्रति‍शत मादा गौ जातीय पशु हैं, परंतु केवल 40 प्रतिशत फार्म भूमि है। दूध, ग्रामीण परिवारों की सकल आय में लगभग एक तिहाई का तथा भूमिहीन लोगों के मामले में उनकी सकल आय के लगभग आधे हिस्से तक का योगदान करता है।

 

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों, 2014-16 से दूध के उत्पादन ने 6.28 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो पिछलेवर्ष की लगभग 4 प्रतिशत की विकास दर से अधिक है तथा 2.2 प्रतिशत के विश्व  विकास औसत के मुकाबले तीन गुना अधिक है। यदि चावल तथा गेहूं दोनों को भी मिला दिया जाए तो भी 2014-15 में 4.92 करोड़ रूपए के सकल मूल्य संवर्धन में दूध का 37 प्रतिशत से भी अधिक का योगदान है। देश में उत्पादित दूध का लगभग 54 प्रतिशत अधिशेष है जिसमें लगभग 38 प्रतिशत संगठित सेक्टर द्वारा हैंडल किया जाता है, जिसमें सहकारिताओं तथा निजी डेयरी संगठनों की बराबर की भागीदारी होती है। सिंह ने बताया कि डेयरी व्यवसाय में महिलाओं की लगभग 70 प्रतिशत भागीदारी है।

 

राधा मोहन सिंह ने कहा कि दूध उत्पादन में वृद्धि करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए यह जरूरी है कि दूध इकट्ठा करने की सुविधाओं में सुधार किया जाए तथा किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए लाभकारी मूल्य दिया जाए। यह तभी संभव है, जब दूध उत्पादकों को बाज़ार से जोड़ने के लिए एक प्रभावी प्रबंधन प्रणाली स्थापित हो।

तमिलनाडु उदय योजना में शामिल होने वाला 21वां राज्य बना

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में उज्ज्वल डिस्कॉम आश्वासन योजना के अंतर्गत बिजली वितरण कंपनी के संचालन और वित्तीय कायाकल्प के लिए  तमिलनाडु सरकार और उसकी बिजली वितरण कंपनी टैनजेडको के साथ सहमति ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर तमिलनाडु के विद्युत मंत्री पी. थंगमणि भी उपस्थित थे। उदय योजना में शामिल होने से तमिलनाडु को ब्याज लागत में बचत करके, एटी तथा सी और ट्रांसमिशन क्षति में कमी करके, ऊर्जा सक्षमता में सक्रिय होकर और कोयला सुधारों के माध्यम से लगभग 11000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होगा। राज्य ने इस अवसर पर सभी के लिए सातों दिन 24 घंटे बिजली देने के दस्तावेज पर भी हस्ताक्षर किया। तमिलनाडु के उदय योजना में शामिल होने के साथ उदय योजना के अतंर्गत देश की बिजली वितरण कंपनियों का 92 प्रतिशत ऋण कवर कर लिया गया है।

 

उदय योजना के अंतर्गत सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके राज्य सरकार टैनजेडको के 30,420 करोड़ रुपये ऋण का 75 प्रतिशत हिस्सा ले लिया है। इस योजना में शेष ऋण के पुनः मूल्य निर्धारण या स्टेट गारंटीड डिस्कॉम बांड औसत वर्तमान ब्याज दर से 3-4 प्रतिशत कम कूपन दरों पर जारी करने पर तमिलनाडु उधारी में कमी तथा शेष उधारी कर ब्याज दर में कमी से 950 करोड़ रूपये की बचत करेगा।उदय भारत सरकार ने 20 नवम्बर, 2015 को उदय योजना लांच की। इसका उद्देश्य ऋण बोझ से दबी वितरण कंपनियों में वित्तीय स्थायित्व लाना है। तमिलनाडु के इस योजना में शामिल होने के साथ 21 राज्य उदय योजना में शामिल हो गए हैं।

 

 

देश के 91 जलाशयों में 2 फीसदी तक पानी की कमी

05 जनवरी, 2017 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 89.384 बीसीएम जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 57 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 126 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 98 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं।

उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 8.1 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 45 प्रतिशत है।इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 18.35 बीसीएम है, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है। मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धक संग्रहण 30.70 बीसीएम है, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, एपी एवं टीजी कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से बेहतर है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कमतर है।

 

वक्‍फ बोर्ड के रिकार्डों का होगा कप्‍यूटरीकरण

केंद्रीय अल्‍पसंख्‍यक मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने कहा है कि केंद्र, राष्‍ट्रीय वक्‍फ विकास निगम एवं केंद्रीय वक्‍फ परिषद ने एक साथ मिलकर अल्‍पसंख्‍यक समुदायों, विशेष रूप से मुसलमानों के सामाजिक- आर्थिक-शै‍क्षणिक अधिकारिता के लिए वक्‍फ संपत्तियों का उपयोग करने के लिए एक अभियान आरंभ किया है। उन्‍होंने कहा कि अल्‍पसंख्‍यक मामले मंत्रालय मुसलिम समुदायों के कल्‍याण के लिए विभिन्‍न कार्य नीतियों पर कार्य कर रहा है, जिसमें वक्‍फ संपत्तियों की सुरक्षा और विकास शामिल हैं। नकवी ने आज नई दिल्‍ली में अखिल भारतीय वक्‍फ सम्‍मेलन का उद्घाटन करने के दौरान कहा कि कई राज्‍य मुसलमानों की प्रगति के लिए वक्‍फ संपत्तियों के बेहतर उपयोग के लिए आगे आए हैं। ज्‍यादातर राज्‍य अच्‍छा प्रदर्शन कर रहे हैं,लेकिन सभी राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अभी बहुत कुछ किए जाने की आवश्‍यकता है।

 

मंत्री महोदय ने कहा कि सभी राज्‍यों को तीन सदस्‍यीय ट्रिब्‍यूनल का गठन करना चाहिए। नकवी ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं कि देशभर में सभी वक्‍फ बोर्डों और उनके रिकार्डों का कप्‍यूटरीकरण किया जाए और अल्‍पसंख्‍यक मामले मंत्रालय राज्‍य वक्‍फ बोर्डों को सभी संभव सहायता उपलब्‍ध करा रहा है। वक्‍फ बोर्डों और उनकी संपत्तियों का कंप्‍यूटरीकरण वक्‍फ बोर्डों के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद करेगा। उन्‍होंने सभी प्रतिभागियों को यह सुनिश्चित करने के उनके प्रयासों के लिए सराहना की कि उनके प्रभार के तहत सभी औकाफों का समुचित ढंग से रखरखाव हो, उन पर बेहतर नियंत्रण हो, उन्‍होंने आग्रह किया कि ऐसी संपत्तियों से प्राप्‍त आय का उपयोग उन उद्देश्‍यों की प्राप्ति के लिए किया जाए जिनके लिए ऐसे औकाफों का सृजन किया गया था। उन्‍होंने वक्‍फ अधिनियम, पट्टा नियमों, महत्‍वपूर्ण योजनाओं आदि के कार्यान्‍वयन में उनको पूर्ण सहयोग देने का आग्रह किया जिससे न केवल सभी रिकार्डों के कम्‍युटरीकरण में मदद मिलेगी बल्कि इससे वक्‍फ बोर्डों/ मुत्‍तवलियों की आमदनी में भी इजाफा होगा। बैठकों के दौरान अल्‍पसंख्‍यक मामले मंत्रालय, केंद्रीय वक्‍फ परिषद, नवाडको, हरियाणा, कर्नाटक एवं केरल राज्‍य वक्‍फ बोर्डों द्वारा वक्‍फ मुद्दों  पर विस्‍तृत प्रस्‍तुतिकरण किए गए और कार्यसूची के सभी विषयों पर व्‍यापक रूप से विचार-विमर्श किया गया।

 

 

 

कंबोडिया में आयोजित होगा ‘भारत महोत्सव’

‘भारत महोत्सव’ 10 जनवरी से लेकर 16 फरवरी, 2017 तक कंबोडिया में आयोजित किया जाएगा। महोत्‍सव के दौरान आयोजित किए जाने वाले विशेष कार्यकमों में ‘रामायण’ पर नाटक का मंचन , राजस्थानी लोक संगीत और नृत्य समूह (नृत्य समूह के साथ-साथ मांगनियार समूह), शास्त्रीय नृत्य शामिल हैं।इस दौरान भगवान बुद्ध के जीवन, शिक्षाओं और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाने के लिए एक बौद्ध महोत्सव भी आयोजित किया जाएगा, जो ‘धम्म दर्शन’ के शीर्षक वाली एक प्रदर्शनी है। इसके साथ ही इस दौरान भारत में बौद्ध धार्मिक, धरोहर स्थलों पर फोटो प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

 इस महोत्‍सव में शिरकत करने वालों को हर तरह का मनभावन अनुभव कराने के लिए एक ‘खाद्य महोत्सव’ भी आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन कंबोडिया के तीन शहरों नॉम पेन्ह, सिएम रीप और बत्‍तामबैंग में किया जाएगा।

 

"बुनकर मित्र", हेल्पलाइन सेवा की हुई शुरूआत

हथकरघा बुनकरों के लिए भारत सरकार की हेल्पलाइन "बुनकर मित्र", ने आज से कामकाज शुरू कर दिया है। इस हेल्पलाइन का केंद्रीयकपड़ा मंत्री स्मृति जुबिन इरानीने  'सुशासन दिवस' के अवसर पर 25 दिसंबर, 2016 को शुभारंभ किया था। कॉल हेल्पलाइन एजेंटों की हाउसिंग वाले कॉल सेंटर के एक अधिकारी के साथ बातचीत करते हुए श्रीमती इरानी ने कहा कि यहहेल्पलाइन प्रौद्योगिकी, युवा और परंपरा का एक महान मिश्रण है। उन्होंने मंत्रालय के पदाधिकारियों से सबसे अधिक शिकायतें प्राप्तहोने वाले मुद्दों पर निगरानी रखने के लिए कहा है, ताकि उसी के अनुसार सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके। श्रीमती इरानी ने विकासआयुक्त (हथकरघा) को बधाई दी और बुनकरों की पूछताछ और शिकायतों का जवाब देने के लिए इस हेल्पलाइन को जिस तरहसमयबद्ध तरीके से डिजाइन किया गया है उसके लिए उनकी सराहना भी की।

 

यह हेल्पलाइन पूरे देश के हथकरघा बुनकरों को कोई पूछताछ करने और मार्गदर्शन प्राप्तकरने के लिए संपर्क का एकल बिंदुउपलब्ध कराती है। इस हेल्पलाइन से टोल फ्री नंबर 1800-208 -9988 डायल करके संपर्क किया जा सकता है। बुनकर देश के किसी भीहिस्से से कितनी भी संख्या में कॉल कर सकते हैं। यह सेवा सप्ताह के सातों दिन प्रातः दस बजे से सायं छह बजे तक हिन्दी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, कन्नड़ और असमिया सात भाषाओं में उपलब्ध है।

भारतीय कौशल विकास सेवा की अधिसूचना जारी

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने भारतीय कौशल विकास सेवा की स्‍थापना की अधिसूचना जारी कर दी है। इस सेवा को कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के प्रशिक्षण निदेशालय के लिए गठित किया गया है। समूह ‘क’ श्रेणी में एक औपचारिक सेवा के गठन के उद्देश्‍य की पहल लगभग दो वर्ष पूर्व की गई थी, जब इस मंत्रालय का गठन किया गया था और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 अक्‍टूबर, 2015 को इसके गठन को अपनी स्‍वीकृति दे दी थी। इस सेवा की अधिसूचना के साथ देश में वर्तमान वैज्ञानिक और औद्योगिक विकास के साथ कौशल पारिस्थितिकी तंत्र के भी मजबूत और आधुनिक होने की उम्‍मीद है।

 

आईएसडीएस एक समूह ‘क’ सेवा होगी जिसमें यूपीएससी के द्वारा आयोजित कराई गई भारतीय अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा के माध्‍यम से नियुक्ति होगी। यह युवा और प्रतिभाशाली प्रशासकों को कौशल विकास की दिशा में आकर्षित करने का एक प्रयास है। चयनित अभियंताओं के द्वारा प्राप्‍त ज्ञान कौशल विकास के साथ-साथ योजनाओं के कुशल और प्रभावी कार्यान्‍वयन के लिए सरकार की पहल को नये प्रोत्‍साहन देंगे। आने वाले वर्षों में मंत्रालय प्रशिक्षित कुशल प्रशासकों के कार्यबल के निर्माण में सक्षम होगा, जिनके माध्‍यम से कुशल युवाओं की वृद्धि के लक्ष्‍य को प्राप्‍त किया जा सकेगा। प्रशासित प्रशिक्षण भारतीयों को कौशल युक्‍त बनाने की बड़ी चुनौती का सामना करने में सर्वोपरि है। प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व में कौशल विकास को इस आशा के साथ प्राथमिकता के तौर पर लिया गया है कि कौशल भारत अभियान न सिर्फ भारत में बल्कि अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी व्‍यापक मानव संसाधन की आपूर्ति करेगा। 2022 तक 500 मिलियन लोगों को कुशल बनाने के लक्ष्‍य को पूरा करने की दिशा में यह एक महत्‍वपूर्ण कदम है।

 

प्रशिक्षण निदेशालय में 578 मॉडयूलों को शामिल करते हुए मॉडयूलर रोजगार योग्‍य कौशल के लिए कौशल विकास पहल योजना, एसडीआईएस) और 259 व्‍यवसायों को शामिल करते हुए शिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एटीएस), 126 व्‍यवसायों को शामिल करते हुए शिल्‍पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) जैसी विभिन्‍न योजनाओं का कार्यान्‍वयन शामिल है। प्रशिक्षण निदेशालय राष्‍ट्रीय व्‍यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीटी) के अंतर्गत परीक्षाओं का आयोजन करता है और प्रमाण पत्र भी प्रदान करता है। इसके अलावा यह देश भर में फैले अपने विभिन्‍न क्षेत्रीय संस्‍थानों के माध्‍यम से आधुनिक कौशल प्रशिक्षण, पर्यवेक्षी प्रशिक्षण, कर्मचारी प्रशिक्षण का भी आयोजन करता है।

 

भारतीय कौशल विकास सेवा में अखिल भारतीय स्‍तर पर 263 पद होंगे। इस कैडर में तीन पद वरिष्‍ठ प्रशासनिक ग्रेड के, 28 पद कनिष्‍ठ प्रशासनिक ग्रेड के, 120 पद वरिष्‍ठ टाइम स्केल और 112 पद कनिष्‍ठ टाइम स्‍केल के होंगे। कैडर प्रशिक्षण अकादमी राष्‍ट्रीय कौशल विकास संस्‍थान होगी।      

प्रदर्शन आवास परियोजना का गृहमंत्री ने किया शिलान्यास

लखनऊ,गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए लखनऊ, उत्तर प्रदेश, में प्रदर्शन आवास परियोजना का शिलान्यास किया। इस मौके पर श्री सिंह ने कहा कि निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद का यह प्रोजेक्ट एक आदर्श हाउसिंग प्रोजेक्ट है जिसमें पर्यावरण अनुकूल सामग्री व नवीन तकनीक के सहयोग से गरीबों के लिए घर बनाए जाएंगे। भारत सरकार की आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय की संस्था निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद द्वारा लखनऊ स्थित औरंगाबाद जागीर, तहसील सरोजनी नगर में 40 घरों का निर्माण किया जाएगा। इन घरों के निर्माण के लिए राज्य शहरी विकास प्राधिकरण (सूडा), उत्तर प्रदेश सरकार ने 40 घरों के निर्माण हेतु जमीन का चयन किया है।

 

प्रत्येक घर का क्षेत्रफल 380 वर्ग फुट होगा। इसमे प्रत्येक घर में दो कमरे, रसोई, स्नानघर तथा शौचालय की सुविधा होगी। प्रदर्शन आवास परियोजना के अंतर्गत निर्मित घरों में आवश्यक सुविधाएं जैसे जल आपूर्ति की लाइनें, ट्यूब वेल का निर्माण, जल-मल निष्पादन, बरसाती पानी की निकासी के लिए नालियां, कंक्रीट की सड़क, इंटरलाक टाइल की पगडंडी, चाहरदीवारी व बाहरी विद्युतीकरण जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी। इस प्रदर्शन आवास परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 360 लाख रूपए आएगी। उल्लेखनीय है कि बी.एम.टी.पी.सी देश के विभिन्न भागों में भवन निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी की पहचान, मूल्यांकन, मानकीकरण एवं जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है।

गर्भवती महिलाओं को 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन

भारत सरकार मानव विकास के लिए पोषण के रूप में विशेष तौर पर सर्वाधिक कमजोर समुदायों में प्रत्‍येक महिला की इष्‍टतम पोषण स्थिति को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह गर्भावस्‍था और स्‍तनपान दोनों की अवधि के दौरान अधिक महत्‍वपूर्ण है। एक महिला के पोषण की स्थिति और उसके स्‍वास्‍थ्‍य प्रभावों के साथ-साथ उसके शिशु के स्‍वास्‍थ्‍य और विकास के लिए भी महत्‍वपूर्ण है। एक कुपोषित महिला अधिकांश तौर पर एक कम वजन वाले बच्‍चे को जन्‍म देती है। जब इस कुपोषण का प्रारंभ गर्भाशय से होता है तो विशेष रूप से इसका प्रभाव महिला के सम्‍पूर्ण जीवन चक्र पर पड़ता है। आर्थिक और सामाजिक दवाब के कारण बहुत सी महिलाओं को अपनी गर्भावस्‍था के अंतिम दिनों तक परिवार के लिए आजीविका कमानी पड़ती है।

उपर्युक्‍त मुद्दों के समाधान के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 4 (बी) के प्रावधानों के अनुसार गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लाभ हेतु सशर्त नकद हस्‍तांतरण योजना मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम का गठन किया गया था। इस योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को नकद प्रोत्‍साहन प्रदान किया जाता है। इस योजना में प्रसव से पूर्व और पश्‍चात आराम, गर्भधारण और स्‍तनपान की अ‍वधि में स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण स्थिति में सुधार एवं जन्‍म के छह महीनों के दौरान बच्‍चे को स्‍तनपान कराना बच्‍चे के विकास के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है।गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्‍म के लिए तीन किस्‍तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन देय है। नकद हस्‍तांतरण को डीबीटी मोड में व्‍यक्तिगत बैंक/डाकघर खाते से जुड़े आधार के माध्‍यम से किया जायेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 31 दिसम्‍बर, 2016 को राष्‍ट्र को दिये गये अपने संबोधन में सभी जिलों में मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम के अखिल भारतीय विस्‍तार की घोषणा की थी और यह 1 जनवरी 2017 से लागू है। इससे करीब 51.70 लाख लाभार्थियों को प्रतिवर्ष लाभ मिलने की उम्‍मीद है। इस योजना के कार्यान्‍वयन और निगरानी के लिए विस्‍तृत दिशा निर्देश शीघ्र ही जारी किये जायेंगे।   

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खेल महासंघों के कामकाज में सुधार लाने के लिए समिति का गठन

भारतीय ओलम्‍पिक संघ के प्रकरण को देखते हुए युवा मामले और खेल राज्‍य मंत्री विजय गोयल ने राष्‍ट्रीय खेल विकास संहिता और खेल महासंघों के कामकाज में सुधार लाने के लिए सुझाव देने के उद्देश्‍य से खेल सचिव की अध्‍यक्षता में एक समिति के गठन का निर्णय लिया है। यह समिति एक माह में अपनी रिपोर्ट देगी।

अभी हाल में मंत्रालय ने पहले ही राष्‍ट्रीय खेल महासंघों विभिन्‍न राज्‍यों के खेल मंत्रियों और सचिवों, ओलंपिक खिलाड़ियों, अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्‍कार विजेताओं, भारतीय खेल प्राधिकरण के फील्‍ड अधिकारियों जैसे विभिन्‍न हितधारकों के साथ सुशासन और पारदर्शिता के मुद्दों पर बैठकों का आयोजन किया है।

यह नई समिति इन बैठकों में दिए गए सुझावों और विचारों के आधार पर मौजूदा राष्‍ट्रीय खेल विकास संहिता में सुधार लाने के बारे में सुझाव देगी और अपनी रिपोर्ट एक माह में प्रस्‍तुत करेगी। इससे देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेल निकाय जन आकांक्षाओं के अनुसार काम कर सकेंगे।

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