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updated 9:55 AM UTC, Oct 23, 2017
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इंडियन आॅयल के 10 बडे प्रोजेक्ट जिससे यूपी के आएंगे अच्छे दिन

लखनऊ: इण्डियन आॅयल कार्पोरेशन द्वारा प्रदेश के बहुमुखी विकास हेतु लगभग रूपये 20 हजार करोड़ की विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश में शीघ्र स्थापित की जायेंगी  उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने इस बात की जानकारी दी है। राजीव कुमार आज शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में इण्यिन आॅयल कार्पोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह से भेंट वार्ता कर रहे थे। वार्ता के उपरान्त उन्होंने इण्डियन आॅयल कार्पोेरेशन के चेयरमैन द्वारा दिये गये प्रस्तावों के संदर्भ में विस्तार से बताया। शुरु होने वाली योजनाओं में ये योजनाएं हैं।

 

मिर्जापुर में ग्राम चकगम्भीरा के निकट 120 एकड़ क्षेत्रफल में मार्डन आॅयल टर्मिनल स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। यह स्थान चुनार रेलवे स्टेशन से लगभग 04 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसकी परियोजना लागत लगभग रूपये 650 करोड़ है।

 

  1. इण्डियन आॅयल कार्पोेरेशन द्वारा मथुरा रिफाइनरी में बीएस-6 प्रोजेक्ट, आॅक्टामैक्स प्रोजेक्ट एवं ग्रिड पाॅवर को सुविधाजनक बनाने हेतु अवस्थापना विकास का कार्य कराया जायेगा।

 

  1. कानपुर स्थित टीडब्ल्यू गैन्ट्री की रिमाॅडलिंग भी कराये जाने का प्रस्ताव है जिस पर रूपये 32.27 करोड़ का अनुमानित व्यय होगा जो माह नवम्बर, 2017 तक पूर्ण हो जायेगा।

 

  1. कुशीनगर जनपद में नये बाॅटलिंग प्लान्ट की स्थापना की जायेगी जिस पर रूपये 60.14 करोड़ का व्यय आकलित है।

 

  1. कानपुर-बरौनी तक ब्रान्च पाइपलाइन निर्मित कराये जाने का प्रस्ताव है जिस पर उत्तर प्रदेश में लगभग रूपये 75 करोड़ का व्यय संभावित है।

 

  1. इसके अतिरिक्त मथुरा-टूण्डला पाइपलाइन का लखनऊ सहित कानपुर तक विस्तारीकरण का कार्य कराया जायेगा जिस पर रूपये 638 करोड़ का व्यय अनुमानित है।

 

  1. काण्डला-गोरखपुर एलपीजी पाइपलाइन, जिसकी लम्बाई लगभग 2757 किलोमीटर है, के निर्माण पर रूपये 3500 करोड़ का व्यय अनुमानित है।

 

  1. इण्डियन आॅयल कार्पोरेशन द्वारा 2जी इथेनाॅल बायो-रिफाइनरी स्थापित कराई जायेगी जिस पर 800 करोड़ रूपये का परिव्यय संभावित है। इसकी दैनिक क्षमता 100 किलोलीटर होगी।

 

  1. इसके अतिरिक्त वाराणसी में ठोस अपशिष्ट से ईंधन बनाये जाने का एकीकृत संयन्त्र स्थापित किया जायेगा जिस पर रूपये 70 करोड़ का व्यय संभावित है।

 

  1. कई वर्षों से बन्द पड़ी गोरखपुर स्थित उर्वरक कारखाने को इण्डियन आॅयल कार्पोरेशन द्वारा पुनः क्रियाशील कराया जा रहा है जिस पर रूपये 06 हजार करोड़ का परिव्यय संभावित है।

  2. इस प्रकार उत्तर प्रदेश में इण्डियन आॅयल कार्पोेरेशन द्वारा किया जा रहा उपर्युक्त वृहत् निवेश प्रदेश के सर्वांगीण विकास हेतु अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

 

 

इफको व टोकियो मरीन के बीच हुआ 21.64% हिस्सेदारी का करार

दिल्ली, उर्वरक क्षेत्र की विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था, इफको अपने बीमा उद्यम इफको-टोकियो जनरल इंश्योरेंस की 21.64% हिस्सेदारी जापान के संयुक्त उद्यम भागीदार टोकियो मरीन एशिया प्राइवेट लिमिटेड में विनिवेश करने के लिए सहमत हो गया है। साथ ही इंडियन पोटाश लिमिटेड भी अपनी 1.36% हिस्सेदारी टीएम एशिया को बेचेगा। इफको ने यह फैसला भारत सरकार द्वारा बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 49% बढ़ाने के बाद लिया है। इफको टोकियो में 2530 करोड़ रुपये मूल्य की अतिरिक्त 23% हिस्सेदारी के अधिग्रहण के बाद टीएम एशिया की हिस्सेदारी 26% से बढकर 49% हो गई है।

 

इंश्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने टीएम एशिया को हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति दे दी है। वर्ष 2000 में निजी क्षेत्र में बीमा कारोबार की अनुमति मिलने के बाद इफको ने बीमा क्षेत्र में प्रवेश किया। इसका एक मुख्य उद्देश्य भारत के गांव–गांव और घर–घर तक किसानों को बीमा सुविधा का लाभ पहुंचाना था। भारत में फैले इफको के मजबूत नेटवर्क और ब्रांड पहचान से इसे फायदा हुआ और एक मजबूत ब्रांड के रूप में आज इसकी गिनती भारतीय निजी क्षेत्र की सर्वाधिक प्रतिष्ठित बीमा कंपनियों में की जाती है।

 

इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि इस आंशिक हिस्सेदारी की बिक्री से इफको को इफको टोकियो में अपने निवेश के वैल्युएशन का अच्छा अवसर मिला है। इस बिक्री से इफको को अपने कृषि कारोबार को फैलाने तथा भारतीय कृषि क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच किसानों के हितों की रक्षा करने हेतु अपेक्षित पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि ‘भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रण’ संबंधी आईआरडीएआई के दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हुए किए गए इस विनिवेश से इफको टोकियो की कारोबारी गतिविधियों में इफको का नियंत्रण बना रहेगा। टीएम एशिया के मुख्य कार्यकारी आर्थर ली ने कहा कि अतिरिक्त हिस्सेदारी की यह खरीद सतत विकास और लाभ वृद्धि के साथ–साथ उभरते देशों में विकास के अवसरों का लाभ उठाते हुए विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार को बढ़ाने की टोकियो मरीन ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति के अनुरूप है।

 

निरंतर उच्च आर्थिक विकास और मध्यम आय वर्ग के लोगों की संख्या वृद्धि के कारण भारतीय बीमा बाजार के तेजी से बढ़ने का अनुमान है। टोकियो मरीन ग्रुप की दुनियाभर में फैले बीमा कारोबार की जानकारी और व्यापक विशेषज्ञता का उपयोग करके, कंपनी के ग्राहकों को उनकी जरूरत के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद और सेवाएं प्रदान करना इफको टोकियो का लक्ष्य है, ताकि भारतीय गैर–जीवन बीमा क्षेत्र में कंपनी के कारोबार और मुनाफे को और अधिक बढ़ाया जा सके।

जीएसटी : गरीबों के उत्थान में सहायता प्रदान करने का महान साधन

संसद के भव्‍य केंद्रीय कक्ष में वस्‍तु एवं सेवा कर के शुभारम्‍भ के लिए राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा उद्घाटित लघु और संक्षिप्‍त वीडियो में देश के अब तक के सबसे महत्‍वपूर्ण कर सुधार के स्‍पष्‍ट उद्देश्‍य को दर्शाया गया। जीएसटी किस तरह देश के सकल घरेलू उत्‍पाद को प्रोत्‍साहन देगा और व्‍यापार एवं उद्योग के लिए जीवन आसान बनाएगा, इस बारे में अर्थशास्त्रियों और अन्‍य टीकाकारों द्वारा हमें जो बताया जा रहा था, उसके विपरीत शुभारम्‍भ के अवसर पर प्रदर्शित फिल्‍म में आधुनिक कराधान के व्‍यापक पहलु को दिखाया गया, जिसके केंद्र में देश की जनता विशेषकर आर्थिक रूप से वंचित लोग हैं।

 

     30 जून की मध्‍य रात्रि को, जीएसटी का शुभारम्‍भ करने से पहले अपने प्रेरक भाषण में, प्रधानमंत्री ने जीएसटी का उल्‍लेख गरीबों, विशेषकर पूर्वी उत्‍तर प्रदेश और अन्‍य पूर्वी राज्‍यों तथा पूर्वोत्‍तर के गरीबों के जीवन में बदलाव लाने के साधन के तौर पर किया। प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद, ये राज्‍य उन संसाधनों का उपयोग अपने विकास के लिए कर पाने में विफल रहे हैं।

 

     इस पर गौर करते हुए प्रारंभ में यह पूछा जा सकता है कि जीएसटी देश के गरीबों के लिए किस तरह बेहद लाभकारी होगा या क्‍या यह पुराने ‘’ट्रिकल डाउन’’ सिद्धांत की तरह व्‍यापार और उद्योग के जरिए भूमिका निभाने वाला होगा। कुछ हद तक ऐसा हो सकता है, लेकिन जीएसटी का स्‍वरूप उस बात को साकार करना सुनिश्चित करेगा, जो प्रधानमंत्री ने देश के बेहद विशिष्‍ट दर्शकों के समक्ष कही थी। देश की परिपक्‍व राजव्‍यवस्‍था और सहयोगपूर्ण संघवाद ने आखिरकार एक ऐसी प्रणाली प्रदान की है, जो आवश्‍यक तौर पर विनिर्माता केंद्रित न होकर लोक-केंद्रित है।

 

    उत्‍पाद शुल्‍क या अन्‍य शुल्‍कों के विपरीत जीएसटी, जिसमें सात केंद्रीय और आठ राज्‍य कर सम्मिलित हैं’- स्रोत या विनिर्माता आधारित नहीं, बल्कि गंतव्‍य या उपभोक्‍ता केंद्रित है। स्‍पष्‍ट और सरल भाषा में कहें, तो जिन राज्‍यों में उपभोक्‍ताओं की संख्‍या अधिक होगी, उन्‍हें  कराधान में होने वाले लचीलापन के संदर्भ में अपार लाभ प्राप्‍त होगा, जिसे बाद में जनता और राज्‍यों के समग्र आर्थिक विकास के लिए कल्‍याणकारी योजनाओं में लगाया जाएगा। निश्चित तौर पर उत्‍तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा पूर्वोत्‍तर राज्‍य, जहां ज्‍यादा विनिर्माण आधार नहीं है और जिन्‍हें राजस्‍व की हानि हो रही है, उन्‍हें लाभ प्राप्‍त होगा, जबकि विकसित और विनिर्माण केंद्रों को  जीएसटी के प्रारंभ के कम से कम पांच वर्षों के लिए क्षतिपूरित किया जाएगा। राज्‍य में जितने ज्‍यादा उपभोक्‍ता, उतना अधिक कर संग्रह, हालांकि उपभोक्‍ताओं को आर्थिक रूप से अधिकारसम्‍पन्‍न बनाने की जरूरत होगी!

 

   विनिर्माण में महाराष्‍ट्र, गुजरात, तमिलनाडु या कर्नाटक जैसे राज्‍यों के साथ कदमताल नहीं मिला सके इन राज्‍यों में व्‍यापार से वृद्धि को प्रोत्‍साहन प्राप्‍त होगा,  बदले में बड़े पैमाने पर संसाधनों का सृजन होगा, ताकि उन्‍हें फिर से विकास के प्रयासों में लगाया जा सके। ऐसी जीवंतता आगे चलकर घरेलू और वैश्विक दोनों के निवेशकों की विनिर्माण और उससे संबंधित सेवा क्षेत्रों में दिलचस्‍पी का मार्ग प्रशस्‍त होगा, जिससे लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन की संभावनाएं बनेंगी।

 

प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में कहा, ‘’ जीएसटी ऐसी व्‍यवस्‍था है, जो देश के व्यापार में मौजूद अंसंतुलनों को समाप्‍त करेगी। यह देश के निर्यात को भी प्रोत्‍साहन देगी। यह व्‍यवस्‍था के पहले से विकसित राज्‍यों को ही बल नहीं प्रदान करेगी, बल्कि पिछड़े राज्‍यों को भी विकास का अवसर प्रदान करेगी। हमारे राज्‍य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हैं- बिहार, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्‍तर और ओडिशा की ओर देखिए। उन सभी में प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं। जब उन्‍हें एकल कर व्‍यवस्‍था मिलेगी, तो मैं स्‍पष्‍ट रूप से देख सकता हूं कि उनके यहां जो भी कमी है, उसे दूर कर दिया जाएगा और देश की यह कला आगे बढ़ेगी। भारत के समस्‍त राज्‍यों को विकास का समान अवसर प्राप्‍त होगा।‘’

 

‘गंगानगर से लेकर ईटानगर तक’’एक देश-एक कर के अलावा, श्री मोदी के शब्‍दों में कहें, तो इससे आर्थिक लेन-देन के ईमानदार तरीके को प्रोत्‍साहन देते हुए निश्चित तौर पर उद्योग, व्‍यापार और आम आदमी के लिए अलग-अलग तरह से जीवन आसान होगा। इसीलिए जीएसटी को ‘’गुड एंड सिम्‍पल टैक्‍स’’ करार दिया गया है, जो शासन की नई संस्‍कृति लेकर आएगा।

 

    प्रधानमंत्री और राष्‍ट्रपति दोनों ने ही जीएसटी को अमली जामा पहनाने का पूरा श्रेय विभिन्‍न राजनीतिक दलों और केंद्र तथा राज्‍यों की सरकारों को दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’य़ह किसी एक सरकार या दल की सिद्धी नहीं है. ये हम सबके साझे प्रयासों का परिणाम है।‘’ पिछली सरकार में वित्‍त मंत्री के रूप में उत्‍तरोत्‍तर प्रगति के पथ पर अग्रसर जीएसटी की यात्रा में अहम भूमिका निभाने वाले राष्‍ट्रपति ने अपने उद्गार व्‍यक्‍त करते हुए कहा :

 

“कर व्यवस्था का नया युग…… केन्द्र और राज्यों के बीच बनी व्यापक सहमति का परिणाम है। इस सहमति को बनने में केवल समय ही नहीं लगा, बल्कि इसके लिए अथक प्रयास भी करने पड़े। ये प्रयास राजनीतिक दलों की ओर से किए गए जिन्होंने संकीर्ण पक्षपातपूर्ण सोच को दरकिनार कर राष्ट्र हित को तरजीह दी। यह भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और विवेक का प्रमाण है।”

 

    नई कर व्‍यवस्‍था के प्रमुख फायदों में से एक ‘कर पर कर’ के कारण होने वाले व्‍यापक प्रभावों से मुक्‍त होना है। सुदृढ़ आईटी अवसंरचना के माध्‍यम से, इनपुट क्रेडिट की व्‍यवस्‍था यह सुनिश्चित करती है कि वह कर-देयताओं के खिलाफ पारित और समायोजित की जाएं। इससे सिर्फ उपभोक्‍ताओं की मदद होगी। जाने-माने कर विशेषज्ञ श्री बृज भूषण का कहना है, ‘’वस्‍तुओं और सेवाओं के दामों में गिरावट आएगी। पिछली व्‍यवस्‍था में, उत्‍पाद शुल्‍क, सेवा कर,वैट और अन्‍य अप्रत्‍यक्ष करों के लिए क्रेडिट अंतिम वेंडर तक नहीं पहुंचता था। लेकिन जीएसटी में, ऐसा क्रेडिट मूल्‍य श्रृंखला की अंतिम अवस्‍था में आपूर्तिकर्ता तक जाता है, जो बाद में उपभोक्‍ताओं को हस्‍तांतरित होता है।

 

     वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली भी उद्योग जगत को समझाते आ रहे हैं कि वह जीएसटी लागू होने के बाद प्राप्‍त हो रहे किसी भी प्रकार के लाभ को आगे बढ़ाए। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि फायदों को आम नागरिकों तक पहुंचाने के लिए सरकार को लाभ-विरोधी प्राधिकरण के माध्‍यम से संभवत: अपने अधिकारों का इस्‍तेमाल नहीं करना पड़ेगा।

 

    यहां तक कि राष्‍ट्रपति श्री मुखर्जी ने कहा कि प्रारंभिक अवस्‍था में कुछ रुकावटें हो सकती हैं, ये रचनात्‍मक रुकावट होगी। एक बार जब हम इन शुरूआती कठिनाइयों और समायोजन की आरंभिक अवधि को पार कर लेंगे,जीएसटी लोक-केंद्रित, जीवन में बदलाव लाने में सक्षम साबित होगा।

 

 

 

मानसून प्रूफ uPVC दरवाजों और खिडकियों से लीजिए बारिश का मजा

नयी दिल्ली। मानसून ने एक बार फिर से दस्तक दी है और हम सभी बारिश का लुत्फ़ उठा रहें हैं, लेकिन अक्सर जब बारिश का पानी हमारे घरों में घुस जाता है तो हम परेशान होने लगते हैं। इसके कारण कभी कभी ज़बरदस्त नुकसान का कारण बन जाती है। इसकी मरम्मत के लिए तो आपको पैसा खर्च करना ही पड़ता है, साथ ही सीपेज पर पैदा होने वाले फंगस और बैक्टीरिया आपके परिवार के स्वास्थ्य पर भी भारी पड़ते हैं और कई तरह के सांस सम्बन्धी रोगों और संक्रमणों का कारण बन जाते हैं। इस तरह की समस्या आमतौर पर लकड़ी से बने दरवाजों और खिड़कियों के कारण आती है, जिनमें मौजूद अंतराल बारिश के पानी को अंदर आने देते हैं। वहीं एलुमिनियम के खिड़की-दरवाजों की बात करें तो अगर इन्हें ठीक से न लगाया जाए तो बारिश का पानी अंदर आने लगता है। वो दिन बीत गए जब एलुमिनियम के विंडो फ्रेम इस्तेमाल किए जाते थे। समय आ गया है कि आप अपने घर के खिड़की-दरवाज़ों में यूपीवीसी का इस्तेमाल करें।

 

अनप्लास्टीसाइज़्ड पॉलीविनाईल क्लोराईड यानि यूपीवीसीअनप्लास्टीसाइज़्ड पॉलीविनाईल क्लोराईड यानि यूपीवीसी अनप्लास्टीसाइज़्ड पॉलीविनाईल क्लोराईड यानि यूपीवीसी अनप्लास्टीसाइज़्ड पॉलीविनाईल क्लोराईड यानि यूपीवीसी एक ऐसा पदार्थ है जिसे प्रेसीज़न डाई का इस्तेमाल करते हुए पिघले पीवीसी से बनाया जाता है। इसे फिनिशिंग से पहले तुरन्त ठंडा कर लिया जाता है। इसके मल्टी-फंक्शनल फीचर्स के चलते यूपीवीसी के फ्रेम सबसे अत्याधुनिक तकनीकों में से एक माने जाते हैं। एलुमिनियम फ्रेम से तुलना करें तो यूपीवीसी फ्रेम सस्ते पड़ते हैं। साथ ही वे न तो गलते हैं, न ही इनमें जंग लगता है और न ही इनका रंग फीका पड़ता है। ऐसे में इनके रखरखाव की लागत बेहद कम होती है। ये फ्रेम टिकाउ और तापरोधी एवं ध्वनिरोधी गुणों से युक्त हैं। इतना ही नहीं, ये उच्चस्तरीय सुरक्षा भी देते हैं। यूपीवीसी फ्रेम पर्यावरण के अनुकूल हैं, क्योंकि ये रीसाइकल किए जा सकते हैं।

 

मानसून में खिड़कियों और दरवाजों के आस-पास नमी जमा होती है। इससे एलुमिनियम की खिड़कियों में जंग लगने लगती है, ऐसे में ये कम टिकाउ होती हैं और इनके रखरखाव की लागत भी अधिक आती है। वहीं दूसरी ओर यूपीवीसी विंडो फ्रेम नमी रोधी होते हैं। ये हर मौसम के लिए उपयुक्त हैं। इनकी विशेष संरचना दरवाज़ों और खिड़कियों की भीतरी परतों को बारिश के पानी और हवा से सुरक्षित रखती है।

 

यूपीवीसी के दरवाज़ों और खिड़कियों की स्टाइलिश रेंज में केसमेन्ट, टिल्ट एण्ड टर्न, स्लाइडिंग, लिफ्ट एण्ड स्लिड, टॉप हंग, स्लाइडिंग एण्ड फोल्डिंग शामिल हैं। विंडो मैजिक के बारे मेंविंडो मैजिक के बारे में विंडो मैजिक के बारे में विंडो मैजिक के बारे में उद्योग जगत में सालों के अनुभव के साथ विंडो मैजिक भारत में ‘यूपीवीसी’ को पेश करने वाली पहली कम्पनियों में से एक है। विंडो मैजिक ने अपने टेकनोलोजी पार्टनर प्रोफाइन ग्रुप ऑफ जर्मनी के साथ यूपीवीसी खिड़कियों और दरवाज़ों के क्षेत्र में अत्याधुनिक समाधान पेश किए हैं। कम्पनी विभिन्न ग्लास समाधानों और इन्सेक्ट स्क्रीन्स के साथ विभिन्न रंगों में यूपीवीसी दरवाज़ों और खिड़कियों की व्यापक रेंज उपलब्ध कराती है। विंडो मैजिक में आकर्षक एवं टिकाऊ उत्पादों के निर्माण के लिए अत्याधुनिक तकनीक के साथ सख्त गुणवत्ता जांच प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है।

 

विन्डो मैजिक की uPVC दरवाज़े और खिड़कियां रीसाइकल किए जा सकते हैं। इनमें लैड स्टेबिलाइज़र के बजाए कैल्सियम ज़िंक स्टैबिलाइज़र होता है जिससे उत्पादन के दौरान हानिकर गैसें नहीं निकलती हैं और इसलिए पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाता। यू पीवीसी के पर्यावरण के अनुकूल फीचर्स को देखते हुए कहा जा सकता है विंडो मैजिक अपनी टैगलाईन ‘ग्रीन लाईन’ पर खरा उतरता है।

 

यूपीवीसी ऐसी सामग्री है जिसमें न तो इनमें की तरह जंग लगती है, न ही ये गलती है। यह आपको और आपके परिवार को पूरी तरह से सुरक्षित रखती है। लकड़ी से बने दरवाज़े गल जाते हैं और एलुमिनियम या स्टील के दरवाज़ों में जंग लग जाता है, ये फास्टनर्स के साथ गैल्वेनिक प्रतिक्रिया करते हैं। इन्हें रखरखाव की ज़्यादा ज़रूरत होती है, साथ ही इनके कई अन्य साईड इफेक्ट्स भी हैं। वहीं यूपीवीसी के दरवाजे़ और खिड़कियां हवा, पानी, तेज़ धूप आदि के लिए भी प्रतिरोधी हैं।

 

 

आज भारत में लांच होंगे नोकिया के ये धमाकेदार एंड्राएड फोन जानिए क्या है कीमत

नयी दिल्ली। नोकिया ब्रांड के संरक्षक एचएमडी ग्लोबल, आज भारत में नोकिया 6, नोकिया 5 और नोकिया 3 एंड्रॉइड स्मार्टफोन्स का लांच करने के लिए तैयार है। पिछले महीने भारत में नोकिया 3310 लॉन्च के बाद, नोकिया 6, नोकिया 5 और नोकिया 3 बजट वाले स्मार्टफोन का मंगलवार दोपहर नई दिल्ली में एक समारोह में अनावरण किया जाएगा, जहां भारत में इसकी कीमत के बारे में घोषणा की जाएगी। गौरतलब है कि नोकिया 3, नोकिया 5, और नोकिया 6 एंड्रॉइड स्मार्टफोन्स को विश्वभर में लांच करने की घोषणा एमडब्ल्यूसी 2017 में वर्ष की शुरुआत में बार्सिलोना में किया गया था।

 

नोकिया 3, नोकिया 5, भारत में नोकिया 6 की कीमत

यह अफवाह है कि भारत में नोकिया 6 का मूल्य रु।5,000 और रु 16,000 जबकि नोकिया 5 की लागत लगभग रू12,000। नोकिया 3, जो की सबसे सस्ता होगा की कीमत 9, 000 हो सकती है। निश्चित तौर यह कीमतें पूरी तरह से अनआँफिसियल हैं। लेकिन आज लॉन्च के साथ कुछ ही घंटों में आधिकारिक कीमतों का खुलीसा हो जाएगा।

 

नोकिया 6 की विशेषताएं

नोकिया 6, में कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास

5.5 इंच की फुल-एचडी 2.5 D स्क्रीन

फिंगरप्रिंट सेंसर शामिल है।

नोकिया 6 एंड्रॉइड 7.0 नोगाट पर चलता है

इसमें 3 जीबी रैम

स्नैपड्रैगन 430 प्रोसेसर है।

हैंडसेट 32 जीबी इनबिल्ट स्टोरेज के साथ आ जाएगा, और इसे 128 जीबी तक माइक्रोएसडी कार्ड सपोर्ट करेगा

3000 एमएएच बैटरी

नोकिया 6 एक 16-मेगापिक्सेल रियर कैमरा है, जबकि फ्रंट कैमरा का रिज़ॉल्यूशन 8 मेगापिक्सेल है।

कंपनी ने नोकिया 6 आर्टे ब्लैक विशेष संस्करण मॉडल की भी घोषणा है जिसमें 64 जीबी के इंटरनल स्टोरेज के साथ, 4 जीबी रैम के साथ चमकदार ब्लैक बॉडी है।

 

 

नोकिया 5 की विशेषताएं

यह 5.2 इंच के एचडी डिस्प्ले और एंड्रॉइड 7.1.1 नोगाट के साथ आता है।

नोकिया 5 को 2 जीबी रैम

स्नैपड्रेगन 430 प्रोसेसर

16 जीबी इनबिल्ट स्टोरेज के साथ आता है। (128 जीबी तक बढा सकते हैं)

13 मेगापिक्सेल रेयरऔर 8 मेगापिक्सेल फ्रंट कैमरा।

माइक्रो-यूएसबी 2.0,पोर्ट

3000 एमएएच बैटरी,

4 जी एलटीई सपोर्ट।

 

नोकिया 3 की विशेषताएं

नोकिया 5 में 5 इंच का एचडी डिस्प्ले,

एंड्रॉइड 7.0 नोगाट,

1.3GHz क्वाड-कोर मीडियाटेक 6737 एसओसी प्रोसेसर

16 जीबी इंटरनल स्टोरेज, 128 जीबी माइक्रोएसडी

 

 

TOPS ग्रुप का होम सर्विसेज मोबाइल एप्प "CHEEP" लांच

नई दिल्ली। सिक्योरिटी सर्विस देने वाले सबसे बड़े ग्रुप, टॉप्स ग्रुप को घर-घर में पहचाना जाने वाला नाम बनाने के बाद ग्रुप चेयरमेन डॉ. दीवान राहुल नंदा ने अब कंज्यूमर-टू-कंज्यूमर क्षेत्र में कदम रखा है। उन्होंने एक ऑन-डिमांड होम सर्विसेज मार्केट प्लेस ऐप ‘चीप’ लॉन्च किया। ‘चीप’ एक ही जगह सभी समाधान उपलब्ध कराता है। यह उपभोक्ताओं और घरेलू सेवाएं देने वाले पेशेवर लोगों को एक ही तकनीक संचालित प्लेटफॉर्म पर लाता है, जिससे इस ऐप को उपयोग करने वाले एक बटन दबाकर कोई भी घरेलू सेवा प्राप्त कर सकते हैं।

 

 

‘चीप’ के संस्थापक एवं ग्रुप चेयरमेन डॉ. नंदा ने कहा कि इस ऐप का उद्देश्य आपकी ऊंगलियों के इशारे पर सही और सुरक्षित सेवाएं प्रदान करना और यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की परेशानी ना हो। चीप भारत के 7 शहरों में उपलब्ध है और मध्य-अगस्त तक हम देश के 20 शहरों में संचालन करने लगेंगे। हमारा विजन ‘चीप’ को दुनिया भर में ले जाना है।

भारत सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था ना रहा! जाने वजह

दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मोदी सरकार के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, अपने 3 साल के कार्यकाल पूरा कर अपने मंत्रालय की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला । वित्तमंत्री ने विकास पर गतिरोध का प्रमुख कारक दुनिया भर में जारी आर्थिक मंदी को ठहराया है। उन्होंने कहा कि 7-8% विकास बहुत उचित है, उन्होंने स्पष्ट किया कि जनवरी से मार्च के तीन महीनों में जीडीपी विकास दर 6.1% की वृद्धि के लिए वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं साथ ही कहा, मुझे विश्वास है, वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में 7 से 8% विकास जो की भारत में सामान्य है, वह उचित वृद्धि भी है।

 

उन्होंने कहा हमें सरकार बनाने से पहले ख़राब अर्थ व्यवस्था का सामना करना पड़ा था, अर्थ व्यवस्था का ढाँचा इतना ख़राब था की विदेशी भारत में निवेश करने से कतराते थे। बुधवार को जारी जीडीपी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मार्च तिमाही में विकास दर घटकर 6.1% हो गया और यह 2016-17 के दौरान तीन वर्षों में सबसे कम था।

 

चुनौतियों का जिक्र करते हुए, जेटली ने बैंकिंग क्षेत्र में खराब ऋण के मुद्दे और निजी क्षेत्र के निवेश को शुरू करने की बात कही। जेटली के मुताबिक़ जब जेटली ने 2014 में पदभार संभाला था, तो भारत सरकार को कई आर्थिक लड़ाई लड़नी थी। नीतिगत पक्षाघात से, एक वैश्विक मंदी के कारण जो कि उच्च मुद्रास्फीति के लिए देश के तट पर पहुंच गया था। उन्होंने निर्णायक नीति बनाने, काले धन पर कार्रवाई करने और सरकारी नियमों को बदलकर भ्रष्टाचार की जांच के रूप में महत्वपूर्ण पहलुओं को सूचीबद्ध किया।

 

जेटली ने कहा, नोट बंदी के बाद हम एक नया सामान्य स्थापित कर चुके हैं, नोट बंदी के बाद लोग डिजिटल ट्रांजैक्शन करने लगे हैं साथ हाई पहले के मुक़ाबले ज़्यादा कर भरने लगे है।

 

 

भारत का सफल एलईडी व्‍यवसाय मॉडल अपनाएगा ब्रिटेन

दिल्‍ली,केन्‍द्रीय विद्युत मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के, ऊर्जा मंत्री ग्रेग क्‍लार्क ने आज साझा रूप में भारत-ब्रिटेन संवाद विकास के लिए ऊर्जा की अध्‍यक्षता की। गोयल और क्‍लार्क ने भारत की ऊर्जा क्षेत्र में ब्रिटेन की जारी वचनबद्धता का स्‍वागत किया। 4 अप्रैल, 2017 को दोनों देशों ने संयुक्‍त कोष में 120 मिलियन पाउन्‍ड के निवेश की पुष्टि की थी। इसका उद्देश्‍य 500 मिलियन पाउन्‍ड जुटाना है। यह घोषणा की गई थी कि कोष का फोकस भारत के तेजी से बढ़ रहे ऊर्जा और नवीकरणी ऊर्जा बाजार में निवेश पर होगा।

 

दोनों मंत्रियों ने एनर्जी इफिशियंसी सर्विसिज लिमिटेड के कदमों की सराहना की। ईईएसएल ने 7 मिलियन पाउन्‍ड के निवेश से ऊर्जा बचत करने वाली परियोजनाओं में संचालन शुरू किया। परियोजनाएं पिछले दो साल से अधिक समय से चल रही हैं और लाभ प्राप्‍त हो रहा है। दोनों देशों के मंत्रियों ने सफल एलईडी व्‍यवसाय मॉडल के भारत के सफल मॉडल को ब्रिटेन में उतरने में दिलचस्‍पी दिखाई।

 

भारत और ब्रिटेन ने जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के महत्‍व को स्‍वीकार किया और विभिन्‍न स्रोतों से वित्‍त एकत्रित करने तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्‍प्रभाव को मिटाने के महत्‍व को स्‍वीकार किया। दोनों देशों ने जी-20 ग्रीन फाइनेंस स्‍टडी ग्रुप के कार्य का स्‍वागत किया। यह ग्रुप ग्रीन फाइनेंस को प्रोत्‍साहित करता है और ग्रीन फाइनेंस के अन्‍य रूपों में ग्रीन बांड जारी करने को प्रोत्‍साहन देता है

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फिर लौट आया नोकिया 3310 जानिए क्या हैं नये फीचर और कीमत

नोकिया ने अपने 17 साल पुराने सबसे पाॅपुलर मोबाइल को मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस मेंलाॅच किया है। जी हाँ  Nokia 3310 लॉन्च कर दिया गया है।इस मोबाइल का डिजाइन पहले से ज्यादा अच्छा और स्मूथ है साथ ही देखने में ज्यादा खूबसूरत है।हाँ फील औपको पुरानी वाली ही मिलेगी।Nokia 3310 चार नए कलर वैरिएंट में मिलेगा,वॉर्म रेड और यलो जिसमें ग्लॉस फिनिश है. जबकि डार्क ब्लू और ग्रे है कलर वाला हैंडसेट मैट फिनिश है।

 

ज्यादा मेमोरी

पूरी तरह से फीचर फोन में कंपनी ने वो सबकुछ है जो पुराने 3310 में था। चाहे सांप वाला गेम हो या फिर दमदार मजबूती इसकी स्क्रीन चमकदार सूरज की रौशनी में भी देखी जा सकेगी और साइज 2.4 इंच कर्व्ड है।इसकी इंटरनल मेमोरी 16GB है जिसे माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए 32GB के बढ़ाया जा सकता है.

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बैटरी बैकअप दमदार

इस फोन को ज्यादा चार्ज करने की जरुरत नहीं होगी, क्योंकि इसका है. कंपनी का दावा है कि इस फोन में 24 घंटे का टॉक टाइम देने वाली बैटरी है जबकि महीने भर का स्टैंडबाइ बैअकप है।

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वही पुराना स्नेक गेम

कलर स्क्रीन में कलर स्नेक गेम मिलेगा। पहले वाली स्क्रीन ब्लैक थी। कलर स्क्रीन और भी बेहतर होगा। इसके अलावा इसमें नया यूजर इंटरफेस है और 2G कॉलिंग और टेक्सटिंग के कनेक्टिविटी दी गई है। इसमें एफएम रेडियो के साथ एमपी3 प्लेयर भी दिया गया है.

वही पुरानी कीमत

भारत में इसकी कीमत कितनी होगी वो फिलहाल तय नही है लेकिन अगर  49 यूरो को रुपये में तब्दील करें तो 3,448 रुपये कीमत पडती है।

सिर्फ 849 रुपये में लें हवाई यात्रा का आनंद

इंडियन एयर लाइन्स अपने घरेलू यात्रियों के लिए बंपर ऑफर लेकर आयी है। Air India यह ऑफर नये साल पर यात्रियों को लुभाने के लिए लायी है। यात्री अब एयर इंडिया के जरिए सिर्फ 849 रुपये में हवाई सफर का आनंद ले सकते हैं। इसके लिए एयर इंडिया आज से ही बुकिंग सेवा की शुरुआत कर दी है, जो इस साल के आखिरी यानी 31 दिसंबर तक चलेगा। एयर इंडिया के अलावे गो एयर 999 रुपये में औऱ एयर एशिया 917 रुपये में यह बंपर ऑफर लेकर आया है।

अगर आप देश के अंदर किसी खास जगह पर घूमने का प्लान बना रहे हैं,तो इस ऑफर का लाभ उठा सकते हैं। इतना ही नहीं अगर आप देश के अंदर किसी खास जगह से होली में अपने घर आना चाहते हैं तो 31 दिसंबर तक एयर इंडिया के इस ऑफर का फायदा उठा सकते हैं। आप कम खर्च कर हवाई यात्रा के जरिये अपने घर आ सकते हैं,या फिर किसी खास जगह घूमने जा सकते हैं।

बताया जा रहा है कि इकोनॉमी क्लास में एक तरफ की यात्रा के लिए सिर्फ 849 रुपये देना होगा। 27 दिसंबर से 31 दिसंबर के बीच टिकट बुकिंग पर ये ऑफर मान्य होगा। साथ ही यात्रा की अवधि 15 जनवरी से 30 अप्रैल के बीच का होना जरूरी है।

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