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updated 3:12 PM UTC, Dec 12, 2017
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ITBP HIGH ALTITUDE FOOTBALL CUP 2017 का समापन

ITBP HIGH ALTITUDE FOOTBALL CUP 2017 का समापन 30 नवंबर को 5वी वाहिनी आईटीबीपी के मैदान में किया गया।समापन मंत्री कोआपरेटिप एवं लद्दाख अफेयर(जम्मू एवं कश्मीर) छिरिंग दार्जे ने किया।इस अवसर पर मंत्री के अलावा स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे। ITBP HIGH ALTITUDE FOOTBALL CUP 2017 का अंतिम मैच ओएसिस फुटबाल क्लब और महाबोधि क्लब के बीच खेला गया जिसमें ओएसिस क्लब ने महाबोधि क्लब को 3-0 से मात दी और टूर्नामेंट को अपने नाम किया।

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भारत में आयोजित यह फुटबाल टूर्नामेंट संसार में सबसे ऊँची जगहों में खेला जाने वाला मैच है।यह मैच 14000 से 11500 फीट की ऊँचाई पर खेला गया मैच है।इस मौके पर लद्दाख के आईटीबीपी के जयपाल यादव,उपमहानिरीक्षक,संजय कोठारी सेनानी, 5वीं वाहिनी,टासी नामग्याल,सेनानी 37वीं वाहिनी,दीपक पांडे, सेक्टर कमांडेंट स्टाफ, एवं सभी अधिकारी मौजूद थे।

इस मौके पर मुख्य अतिथि ने आईटीबीपी को इस खेल के आयोजन और खेलों को प्रोत्साहन देने तथा नवयुवकों को खेल में भाग लेने पर धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि ITBP ने फुटबाल के टैलेंट को खोजा है एंव भविष्य में ITBP द्वारा खोजे गए खिलाडी भारतीय टीम में शामिल होंगे।

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लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों की 40 टीमों ने इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया उद्घाटन मैच यूनाइटेड लद्दाख और ब्लैक याक क्लब के बीच खेला गया था जो की ड्रा हो गया था।इस टूर्नामेंट का आयोजन 20-30 नवंबर के बीच किया गया। इस टूर्नामेंट का उद्देश्य लद्दाख के हाई एल्टीट्यूड में खिलाडियों की प्रतिभा को पहचानना तथा उन खिलाडियों को भारत देश की ओर से खेलने का मौका दिलवाना है। मुख्य अतिथि ने कहा कि लद्दाख में आईटीबीपी खेलों के लिए विशेष काम कर रहा है।

मुख्य अतिथि ने कहा कि आईटीबीपी हरएक दृष्टिकोण से के एक महान रक्षक है।टूर्नामेंट का आयोजन हाई एल्टीट्यूड क्षेत्रों जेसे नुबुरा,मोबलांग,खलसे,लेह आदि में किया गया। इन जगहों पर जहाँ साँस लेना भी दूभर होता है वहाँ पर खिलाडियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 1.5 घंटे का जुझारू मैच खेला।

 

इस टूर्नामेंट में विनर OASIS टीम को 25000 तथा रनर अप टीम को 20000 का ईनाम तथा दितीय तथा तृतीय रनरअप टीम को 8000 तथा 7000 रुपए की प्रोत्साहन राशि दिया गया।इसके अलावा प्रथम 10 टीमों को ट्राॅफी प्रदान की गई तथा टाॅप 16 टीमों को मेडल,जैकेट,कैप,शिनगार्ड,5 फुटबाल,मोमेंटो इत्यादि भी दिए गए। विनर और रनर टीमों को भारत के दौरे का तोहफा भी दिया गया है।

इस छात्र ने बनाया बुलेट ट्रेन का लोगो, जानिए क्या है इस लोगो में खास

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार के आधिकारिक पोर्टल 'mygov.in' पर सरकार की लगभग हर योजना के लिए लोगो बनाने का कंपटीशन होता है जिसमें कोई भी हिस्सा लो सकता है इस बार डिजाइन बनाने का के लिए बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट था जिसमें जीत हासिल की है नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद के द्वितीय वर्ष के छात्र 27 वर्षीय चक्रधर आला ने बुलेट ट्रेन के लोगो के लिए आला के द्वारा डिजाइन किए गए लोगो को ज्यूरी ने फाइनल किया है।

 

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना के 'लोगो' (प्रतीक चिह्न) के लिए स्पर्धा में जीत चक्रधर आला इससे पहले सरकार की अन्य 'लोगो' स्पर्धाओं में भाग लिया था लेकिन लगातार 30 बार असफलता का दर्द झेलने के बाद उनका यह लोगो इस बार जीत गया।

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गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार के आधिकारिक पोर्टल 'mygov.in' पर डिजाइन के लिए हर व्यक्ति को आमंत्रित करता है इससे पहले स्वच्छ भारत अभियान, रुपए का लोगो भी ऐसे ही डिजाइन किया गया था। अब चक्रधर का लोगो बुलेट ट्रेन से संबद्ध हर सरकारी दस्तावेज, लेटर हेड और सूचना पत्रों पर दिखेगा जिससे वो काफी उत्साहित हैं।

 

क्या है लोगो की खासियत

चक्रधर आला ने बुलेट ट्रेन के लोगो का विवरण देते हुए बताया कि अगर कोई इसे करीब से देखेगा तो उसे ट्रेन जैसी आकृति नजर आएगी, जिसमें बनाई गई बिंदुएं हर स्टेशन और संबंधित मार्ग को दर्शाती हैं।उनके डिजाइन में देश की इस हाई स्पीड ट्रेन के कई पहलुओं को समाहित किया गया है। यह डिजाइन दिखने में बेहद सरल है लेकिन इसमें गहरे अर्थ छिपे हैं।

 

चीता जहां तेज गति, विश्वसनीयता और भरोसे को दर्शाता है, वहीं इसके शरीर पर उकेरे गए रेल नेटवर्क के साथ वह किसी पारंपरिक ट्रेन का मानचित्र भी प्रदर्शित करता है।

 

मूल रूप से हैदराबाद के रहने वाले चक्रधर के पिता एक नौकरशाह हैं और उनकी माता शहर के स्कूल में प्रधानाध्यापिका हैं। उन्होंने कहा कि 'लोगो' डिजाइन करने के प्रति उनके धुन के कारण दोस्त और परिवार के लोग उन्हें 'लोगोमैन' कहते हैं।

 

जो कभी पढ़ाई में जीरो था, कैसे बना क्रिकेट में हीरो

उन्नाव-भारतीय क्रिकेट टीम के चाइनामेन गेंदबाज  कुलदीप यादव न्यूजीलैंड के खिलाफ क्रिकेट खेलने के लिए कानपुर आए हुए है। कुलदीप यादव  का जन्म यूपी के उन्नाव जनपद  के एक छोटे से गाँव  में हुआ  था। उनके पिता राम सिंह यादव एक बिजनेसमेन है।जो पहले ईंट भट्टी के मालिक थे। उनकी माँ हाउस वाइफ़ है।उनके अलावा उनके परिवार में एक बड़ी बहन है।

 

पेट के लिए लंगर पर, सोने के लिए गुरुद्वारे पर निर्भर रहने वाले ने कैसे बनाया टीमइंडिया में अपनी जगह

 

कुलदीप को और बच्चों की तरह बचपन से क्रिकेट खेलने का  बड़ा क्रेज था।इसलिए वे टीवी  पर  आने वाली किसी भी मैच को मिस नहीं करते थे ।और उनकी पिता की बड़ी तमन्ना थी कि बेटा बड़ा होकर क्रिकेटर बने।इसी कारण उनके पिता ने उन्हें क्रिकेट खेलने की पूरी आजादी दे दी और जरूरत के सारा सामान लाकर देते थे।क्रिकेट से बड़ी इश्क और कड़ी लगन के कारण वे जल्द ही एक बेहतरीन खिलाड़ी बन गए। खासकर वे उनकी शुरुआती पहचान एक बॉलर के रूप में बनी।

 

कैसे एक चेस प्लेयर ने भारत के लिए अबतकी सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग की

 

कुलदीप यादव ने कानपुर में क्रिकेट  कोच कपिल पांडे के निगरानी  में क्रिकेट की बारीकियों  को सीखा। वैसे कुलदीप  यादव ने क्रिकेट अकादमी को जॉइन फास्ट बॉलर बनने के लिए किया था। पर कोच पांडे ने उन्हें स्पिन के लिए बेहतर पाया। इसीलिए  उन्होंने उसे फास्ट बॉलर से स्पिन बॉलर बना दिया। जिसके बाद से उनकी बॉलिंग जबर्दस्त निखार आया। राष्ट्रीय  स्तर पर जिसके कारण उन्हें जल्द ही फ़र्स्ट क्लास और लिस्ट ए में डेब्यु करने का मौका मिला। जिसे भुनाते हुए फ़र्स्ट क्लास के लिए और रेलवे  के खिलाफ लिस्ट ए के लिए डेब्यु किया।

 

बचपन में बैट लेकर सोने वाला कौन है वो स्टार क्रिकेटर

कुलदीप यादव की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर  अच्छे प्रदर्शन  के उनके खेल में लगातार निखार आता गया। जिसके कारण उन्हें 2012 के अंडर 19 वर्ड कप की टीम में उन्हे चुन लिया गया। इसी वर्ल्ड कप के दौरान  कुलदीप यादव ने  स्कॉटलैंड के खिलाफ हैट्रिक लेकर खुद को टीम में शामिल करने के  फैसले को और खुद को सही साबित कर दिखाया ।उन्होंने इस टूर्नामेंट कुल 14 विकेट लिए, जिसके कारण वे संयुक्त रूप से दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी बने। इसके बाद कुलदीप यादव को  इसका बड़ा इनाम उन्हें जल्द मिला, जब 2012 में आईपीएल टीम मुंबई इंडियंस ने उन्हें अपनी टीम में  जगह दी।जहां वे प्रैक्टिस के दौरान अक्सर सचिन तेंदुलकर जैसे महान बल्लेबाज  को भी अपनी बॉलिंग स्किल से बिट कर देते थे।जिसके लिए सचिन उनकी प्रशंशा भी करते थे।पर ये बदकिशमती ही थी।

प्रैक्टिस मैचों में इतने उम्दा प्रदर्शन  के बावजूद उन्हें एक बार भी डेब्यु करने का मौका नहीं मिला।पर उनकी ख्वाहिस 2012 में  तब पूरी हुई जब आईपीएल टीम कोलकाता नाईट राइडर्स ने66000 डॉलर  में उन्हें खरीद लिया।आईपीएल में वे अपनी छाप छोड़नेमें कामयाब रहे।जिसके कारण चैम्पियस लीग  में सुनील नारायण के सहायक बॉलर के तौर पर टीम में रखा गया। जहां उन्हे जब-जब मौके मिले, वहाँ अपनी बेहतरीन चाइनामेन बॉलिंग स्टाइल से सबको अपने प्रदर्शन से खुश  करने में सफल रहे।उनके इसी असाधरण प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए टीम इंडिया के  चयनकर्ताओं ने उन्हें 2014 में वेस्ट इंडीज के टूर जाने वाली इंडियन क्रिकेट टीम में जगह दे दी। पर किस्मत उनके साथ नहीं  थी,इसलिए खेलने के लिए एक भी मौका नहीं मिला।पर कहते हैं ना  भाग्य से ज्यादा, समय से पहले कुछ नहीं मिलता है। इस कारण कड़ी मेहनत करने के बाद भी कुछ अच्छा फल नहीं मिला रहा था।

 

जो कभी पढ़ाई में जीरो था, कैसे बना क्रिकेट में हीरो

 

लेकिन 2017 में भाग्य उनके साथ है। इस कारण 25 मार्च 2017को खेले गए बार्डर-गावस्कर कीअंतिम मैच में 68 रन देकर ऑस्ट्रेलिया के 4 अहम विकेट चटकाकर पूरे कंगारुओ को 300 रन पर ढेर कर दिया था।

 

रो-रो फेरी सेवा और परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स पर उसका प्रभाव

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने द्वारा दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी एवं अत्याधुनिक रो-रो परियोजना का उद्घाटन सौराष्ट्र के भावनगर जिले में घोगा से दक्षिण गुजरात में भरूच जिले के दहेज को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण अध्याय का शुभारंभ हुआ है। हजीरा परियोजना के दूसरे चरण की शुरूआत भारत के परिवहन क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव का सूचक है। इस जलमार्ग की पूरी क्षमता का दोहन करने से लोगों, वस्तुओं और वाहनों की आवाजाही को एक बड़ी रफ्तार मिलेगी। माल ढुलाई के लिए समय और लागत की बचत का भारत के विनिर्माण एवं निर्यात क्षेत्र पर लाभकारी असर पड़ेगा। अब तक सौराष्ट्र के घोगा से दक्षिण गुजरात के दहेज तक जाने के लिए 360 किलोमीटर की सड़क यात्रा करनी पड़ती थी। इसे तय करने में लगभग 8 घंटे का समय लगता था। समुद्री मार्ग से यह दूरी अब मात्र 31 किलोमीटर रह गई है।

 

भारत में लगभग 14,500 किलोमीटर नौगम्य अंतर्देशीय जलमार्ग और करीब 7,517 किलोमीटर समुद्र तट है जिन्‍हें परिवहन को सुगम बनाने के उद्देश्‍य से प्रभावी तौर पर विकसित किया जा रहा है। इससे सड़क एवं रेल नेटवर्क पर भीड़भार कम करने में मदद मिलेगी और क्षेत्रों के समग्र आर्थिक विकास को कई गुना बढ़ाया जा सकेगा। समुद्र तटीय नौवहन और अंतर्देशीय जल परिवहन के ईंधन कुशल, पर्यावरण के अनुकूल एवं कम लागत वाले साधन हैं, विशेष रूप से थोक वस्तुओं के लिए। मालवाहक जहाजों से उत्‍सर्जन 32-36 ग्राम कार्बन डाईऑक्‍साइड प्रति टन-किलोमीटर तक होता है जबकि सड़क परिवहन के भारी वाहनों के मामले में यह 51-91 ग्राम कार्बन डाइऑक्‍साइड प्रति टन-किलोमीटर के दायरे में होता है। इसके अलावा सड़क परिवहन की औसत लागत 1.5 रुपये प्रति टन-किलोमीटर और रेलवे के लिए यह 1.0 रुपये प्रति टन-किलोमीटर है जबकि जलमार्ग के लिए यह महज 25 से 30 पैसे प्रति टन-किलोमीटर होगी। एक लीटर ईंधन से सड़क परिवहन के जरिये 24 टन-किलोमीटर और रेल परिवहन के जरिये 85 टन-किलोमीटर माल की ढुलाई हो सकती है जबकि जलमार्ग के जरिये इससे अधिकतम 105 टन-किलोमीटर तक माल की ढुलाई की जा सकती है। इन आंकड़ों से इस बात को बल मिलता है कि भूतल परिवहन के मुकाबले जलमार्ग परिवहन का कहीं अधिक किफायती एवं पर्यावरण के अनुकूल माध्‍यम है। यदि लॉजिस्टिक्‍स लागत को जीडीपी के 14 प्रतिशत से घटाकर 9 प्रतिशत तक घटा दी गई तो देश को प्रति वर्ष 50 बिलियन डॉलर की बचत हो सकती है। माल ढुलाई की लागत कम होने पर उत्‍पादों के मूल्‍य में भी गिरावट आएगी।

 

भारत में कुल नौगम्‍य अंतर्देशीय जलमार्गों में से करीब 5,200 किलोमीटर (36%) प्रमुख नदियां और करीब 485 किलोमीटर (3%) नहरें हैं जो यांत्रिक जहाजों की आवाजाही के लिए अनुकूल हैं। अंतर्देशीय जलमार्ग अपनी परिचालन लागत कुशलता (60-80% प्रति टन किलोमीटर कम), कम पर्यावरणीय प्रभाव, सुविधाजनक अंतरसंक्रियता और भूमि अधिग्रहण एवं बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित कुछ मुद्दों के कारण रेल एवं सड़क परिवहन के मुकाबले कहीं अधिक फायदेमंद है। वर्तमान में केवल 4,500 किलोमीटर अंतर्देशीय जलमार्ग का व्यावसायिक रूप से उपयोग किया जा रहा है और भारत में 1% से भी कम घरेलू कार्गो की ढुलाई जलमार्ग के जरिये होता है।

 

अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन के विकास एवं परिचालन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016 के तहत इस क्षमता के दोहन के लिए काम काम कर रहा है। भारत के तटवर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सरकार ने मार्च 2015 में 'सागरमाला कार्यक्रम' शुरू किया था और भारत के तटवर्ती क्षेत्रों के व्‍यापक विकास के लिए इसके तहत राष्‍ट्रीय परिप्रेक्ष्‍य योजना (एनपीपी) तैयार की जा रही है।

 

रोल-ऑन व रोल-ऑफ ('आरओ-आरओ') जलमार्ग परियोजनाओं में रो-रो जहाज/नौकाएं शामिल होती हैं जिन्‍हें कारों, ट्रकों, सेमी-ट्रेलर ट्रकों, ट्रेलरों और रेलरोड कारों जैसे पहिये वाले कार्गो की ढुलाई के लिए डिजाइन किया जाता है जिन्‍हें उनके पहियों पर चलाते हुए अथवा किसी प्‍लेटफॉर्म वाहन के जरिये जहाजों पर चढ़ाया अथवा उतारा जाता है। इसमें संबंधित पोर्ट टर्मिनल और संबंधित कनेक्टिविटी बुनियादी ढांचे के साथ जेट्टीज (घाट या सेतु) भी शामिल होते हैं। यात्री जेट्टीज का इस्‍तेमाल पूरी तरह से यात्रियों के नौकायन के लिए किया जाता है लेकिन रो-रो जेट्टीज इस तरीके से निर्मित होते हैं अथवा उनमें किनारा आधारित रैंप होते हैं ताकि बंदरगाह पर जहाजों में माल की लदान एवं उठाव कुशलता से किया जा सके। गुजरात में रो-रो परियोजना दो टर्मिनल के बीच 100 तक वाहनों (कार, बस और ट्रक) और 250 यात्रियों को ले जाने में समर्थ होगी। ऐतिहासिक तौर पर सीमित विकल्‍प उपलब्‍ध होने के कारण इस क्षेत्र में सड़क परिवहन में अक्‍सर काफी भीड़ और जाम का सामना करना पड़ता है। साथ ही रो-रो फेरी ऑपरेटर ने जो किराये का प्रस्‍ताव दिया है वह प्रचलित बस किराये के बराबर है। इसलिए इस सुविधा से इस क्षेत्र के यात्रियों को बहुप्रतीक्षित राहत मिल जाएगी।

 

भारत में असम, गुजरात, कर्नाटक महाराष्‍ट्र और केरल में विभिन्‍न रो-रो परियोजनाओं में भौगोलिक दृष्टि से प्रतिकूल भारत के आंतरिक इलाकों में आवाजाही के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्‍हें जलमार्ग से जोड़कर इस विषमता को व्‍यापक फायदे में बदला जा सकता है।

 

भारत में इस प्रकार की अधिकतर रो-रो परियोजनाओं को राज्‍य सरकार द्वारा परिचालन एवं रखरखाव के साथ ईपीसी मोड अथवा निजी कंसेस्‍नायर द्वारा निर्माण और परिचालन एवं रखरखाव के साथ सार्वजनिक निजी भागीदारी (डीबीएफओटी) मोड के तहत लागू की गई हैं। हाल में ऐसी एक परियोजना महाराष्‍ट्र में शुरू की गई है।

 

वस्तुओं के मूल्य निर्धारण में वैश्विक प्रतिस्‍पर्धा और विभिन क्षेत्रों में सामाजिक एवं आर्थिक समृद्धि लाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह जरूरी है कि सरकार कई स्तर वाली परिवहन की एकीकृत एवं कुशल व्‍यवस्‍था विकसित करे जिनमें से प्रत्येक स्‍तर को जीवंत एवं कुशल तरीके से विकसित करने की आवश्‍यकता है। परिवहन का ऐसा ही एक स्‍तर जलमार्ग है।

 

जल आधारित परिवहन में निवेश की एक प्रमुख विशेषता यह है कि कई भूमि आधारित परिवहन व्‍यवस्‍था, जिसमें जटिल भूमि अधिग्रहण, मार्ग के अधिकार, पुनर्वास एवं अन्‍य मुद्दों से निपटने की आवश्‍यकता होती है, के विपतरीत जल अधारित परिवहन परियोजना प्रस्‍ताव अपेक्षाकृत सरल कदम है। यह कई कानूनी, नियामकीय, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों से भी मुक्‍त है जो आमतौर पर अन्य परिवहन परियोजनाओं को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी-डीबीएफओटी मॉडल के तहत फेरी ऑपरेटरों से बर्थिंग शुल्क और टर्मिनल पर पार्किंग राजस्व भी प्राप्त होगा। भारत में बुनियादी ढांचे का अभाव और समग्र आबादी एवं आर्थिक विकास में कमी के कारण रो-रो परियोजना से 10% से अधिक की एक परियोजना आईआरआर सृजित होती है और इसलिए यह एकल स्तर पर आर्थिक रूप से व्यवहार्य है। हालांकि इन परियोजनाओं में व्‍यापक गुणक प्रभाव मौजूद होते हैं और इसलिए इसे आर्थिक एवं सामाजिक विकास दर के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यही कारण है कि राज्‍य सरकारों ने पीपीपी-डीबीएफओटी मॉडल के तहत निजी भागीदारों को नई रो-रो परियोजनाएं आबंटित करने पर विचार कर सकती हैं जबकि मौजूदा चालू परियोजनाओं को पीपीपी-रिवर्स-बीओटी मॉडल के तहत आवंटित किया जा सकता है। उपयुक्‍त पीपीपी मॉडल के तहत सरकार स्‍वामित्‍व और अहम राष्‍ट्रीय बुनियादी ढांचे पर नियंत्रण बरकरार रख सकती हैं जबकि दूसरी ओर इससे सरकार पर वित्तीय बोझ को भी हल्‍का किया जा सकता है और परिसंपत्ति की परिचालन कुशलता में भी सुधार लाया जा सकता है। नई परियोजनाओं में टर्मिनल का निर्माण सरकार द्वारा करने की आवश्‍यकता है ताकि परिचालन को निजी क्षेत्र के लिए वाणिज्यिक रूप से व्‍यवहार्य बनाया जा सके।

 

रो-रो सेवाओं को रेलवे में भी भारतीय रेल द्वारा लागू करने की योजना बनाई गई है। भारतीय रेल ने कार्गो वाहनों के लिए बिहार में और पेट्रो उत्‍पादों के लिए त्रिपुरा में रो-रो सेवाएं शुरू की है। कुल मिलाकर सरकार इन सभी रो-रो परियोजनाओं के लिए एक साथ योजना बना रही है और इस निवेश के लिए उचित मात्रा में यातायात होने के बाद एक मजबूत पुल अवसंरचना के प्रावधान के लिए भी खुद को तैयार कर रही है।

 

लॉजिस्टिक परफॉर्मेंस इंडेक्स (एलपीआई) पर नवीनतम वर्ल्‍ड बैंक रिपोर्ट 2016 में भारत अब 35वें स्‍थान पर पहुंच चुका है जो 2014 के आरंभ में प्रकाशित पिछली रिपोर्ट में 54वें स्‍थान पर रहा था। इसके एलपीआई रैंकिंग में सुधार के लिए विभिन्‍न माध्यमों के तहत एकीकृत गतिशीलता के प्रावधानों को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही बेहतर मानक के साथ इंजीनियरिंग परामर्श सेवाएं लेने और परियोजना के कार्यान्‍वयन के लिए उपयुक्‍त मॉडल चुनने का भी प्रस्‍ताव है ताकि हितधारकों के बीच जोखिम और लाभ को बांटा जा सके। इसके साथ ही सरकार देश भर में परिवहन परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन कुशलता में सुधार लाने में समर्थ होगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस योजना के शुभारंभ के अवसर पर कहा भी है कि इससे बंदरगाह समृद्धि के प्रवेश द्वार बनेंगे और पेट्रोल व डीजल के आयात पर भारत की निर्भरता घटेगी और भारत को विकास की एक नई राह पर अग्रसर होगा। इससे एक करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर मुहैया कराए जा सकेंगे और पर्यटन एवं परिवहन क्षेत्र में नये आयाम खुलेंगे।

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* लेखक नीति आयोग के सीईओ हैं। लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं।



दीपावली में उल्लुओं की माँग, 1 लाख तक पहुँची कीमत

नयी दिल्ली। दीपावली का त्यौहार आते ही पुरे देश में दीपों की जगमगाहट बढ़ जाती है लेकिन कोई है जिसकी परेशानिया बढ़ जाती है और जान मुश्किल में पद जाती है और वो है उल्लू .... कहते हैं कि उल्लू लक्ष्मी जी का वाहन है इसीलिए ये पूजा भी जाता है लेकिन दीपावली पर तांत्रिक लोग उल्लू का इस्तेमाल तंत्र विद्या के लिए करते हैं और इसी के लिए इसका शिकार किया जाता है। वैसे तो खुले बाजार में उल्लू को खरीदना बेचना दोनों जुर्म है लेकिन अभी भी इसका व्यापार बड़े पैमाने पर हो रहा है और दीपावली तक आते  आते ये व्यापार लाखो में पहुच जाता है।

 

दीपावली पर अचानक उल्लू की मांग बढ़ जाती है शिकारी उल्लू की डिमांड आते ही इसको पकड़ने के लिए जंगल में निकाल पड़ते है शिकारी बताते है की वो एक उल्लू का 10 हजार से लेकर 50 हजार तक वसूलते हैं कभी कभी 1 लाख तक मिल जाता है। जैसा ग्राहक वैसे पैसे और ये पैसे उल्लू पकड़ने के कम और उसे पकड़ने के रिस्क के ज्यादा है।  दीपावली आते ही उल्लू की मांग अचानक बढ़ जाती है और इसके मुख्य खरीदार होते है तांत्रिक। वो तांत्रिक जो उल्लू को तंत्र मन्त्र की साधना में इस्तेमाल करते हैं।

 

शिकारी आर्डर पर उल्लू पकड़ते है और पार्टी को दे देते है  .. शिकारी वीरान जगहों और जंगलो में जाकर उल्लुओ की तलाश करते हैं  .. खासकर रात में उल्लुओ की तलाश की जाती है। बकायदा उल्लुओ को पकड़ने के लिए फंदे लगाए जाते हैं। इतना ही नहीं ये शिकारी लकड़ी  पर एक ख़ास केमिकल लगाते हैं जिसके जरिये उल्लू उस लकड़ी से चिपक जाता है। सबसे ज्यादा मांग भूरे उल्लू की होती है उसके बाद सफेद और काले की। इसलिए उसके दाम भी अमूमन दूसरे उल्लुओ से ज्यादा होते हैं  .. बहरहाल ऐसे में दीवाली पर एक बार फिर बेचारे उल्लुओ की शामत आयी हुई है।

एक और रेल हादसा-पैसेंजर ट्रेन का इंजन पटरी से उतरा

बहराइच। बहराइच रेलवे स्टेशन से नेपालगंज रोड रेलवे स्टेशन तक पैसेंजर टे्रनों का संचालन होता है। मंगलवार रात नौ बजे बहराइच रेलवे स्टेशन से नेपालगंजरोड रेलवे स्टेशन के लिए पैसेंजर ट्रेन का इंजन बदला जा रहा था। इसी दौरान पैडमैन की गलती से इंजन चार नंबर लाइन पर चली गई। चार नंबर लाइन चालू हालत में न होने के कारण इंजन पटरी से नीचे उतर गई। बड़ा हादसा होते-होते बच गया। लापरवाही की जांच रेलवे अधिकारियों ने शुरू कर दी है। वहीं दूसरे इंजन से ट्रेन को नेपालगंज के लिए रवाना किया गया।

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गोंडा-मैलानी प्रखंड पर बहराइच से गोंडा के मध्य आमान परिवर्तन का कार्य चल रहा है। इससे बहराइच रेलवे स्टेशन से ही नेपालगंजरोड, पीलीभीत तथा मैलानी के लिए ट्रेनों का संचालन होता है। मंगलवार रात नौ बजे नेपालगंज जाने वाली ट्रेन का इंजन बदलकर आगे के भाग में जोड़ने के लिए उसे स्टेशन पर लगाया जा रहा था। स्टेशन पर तैनात पैडमैन ने स्टेशन के चार नंबर लाइन पर इंजन ले जाने का आदेश दे दिया। इंजन चार नंबर पर जाने लगी। कुछ दूर जाते ही इंजन पटरी से नीचे उतर गई। इससे अफरा-तफरी बन गई। रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे। दूसरा इंजन मंगाकर पैसेंजर ट्रेन को रात ११ बजे नेपालगंज रेलवे स्टेशन के लिए रवाना किया गया।

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वहीं स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में घंटो बैठे यात्रियों को सुकून महसूस हुआ। रेलवे कर्मचारियों के लापरवाही की जांच रेलवे विभाग ने शुरू कर दिया है। प्रथम दृष्टया पैडमैन की लापरवाही का मामला सामने आ रहा है।

कई वर्षो से बंद है चार नंबर लाइन

 

गोंडा-मैलानी प्रखंड पर स्थित बहराइच रेलवे स्टेशन का चार नंबर लाइन लगभग पांच वर्षों से बंद है। लेकिन मंगलवार रात को इंजन बदलने के लिए पैडमैन ने चार नंबर लाइन को क्लीयर कर दिया। जिससे इंजन पटरी से उतर गई। वहीं बड़ा हादसा होते-होते बचा।

 

इस्लामिक स्टेट ने ली लंदन हमले की जिम्मेदारी

लंदन। इस्लामिक स्टेट ने ब्रिटेन ने शुक्रवार को ट्रेन में हुए बम ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली है। जिसके बाद लंदन में खतरे के स्तर को देखते हुई सरकार ने सुरक्षा के इंतजामों के बढ़ा दिया है और सैनिकों को महत्वपूर्ण स्थलों पर तैनात किया है।इस्लामिक स्टेट के द्वारा लंदन अंडरग्राउंड ट्रेन में बम विस्फोट होने के बाद कम से कम 29 लोगों को घायल हुए थे। छह महीने में ब्रिटेन में पांचवीं बार हुए आतंकवादी हमले में ट्रेन में हुए धमाके के बाद यात्रियों को चोटें आईं।

 

दक्षिण-पश्चिम लंदन के पर्सन्स ग्रीन स्टेशन पर हुए विस्फोट के 12 घंटे बाद, प्रधान मंत्री थेरेसा ने घोषणा की कि राष्ट्रीय खतरे का स्तर "गंभीर" के रूप में उठाया जाएगा, जिसका अर्थ है कि एक अन्य हमले का खतरा भी हो सकता है।बम विस्फोट से अब तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन आतंकवाद विरोधी पुलिस प्रमुख मार्क रॉली ने कहा कि जांच प्रगति पर है और हम संदिग्धों का पीछा कर रहे हैं।

 

इससे पहले मई में मैनचेस्टर में एक कॉन्सर्ट में बम विस्फोट हुआ था जिसकी जिम्मेदारी आईएस ने लिया था। शुक्रवार को एक बयान में आईएस ने कहा है कि एक "टुकड़ी" ने शुक्रवार को लंदन में हमला किया था।

 

ट्विटर उपयोगकर्ता @ र्रिग्ज ने ट्रेन में एक सफेद बाल्टी के स्वाद के चित्र पोस्ट किए और वर्णित किया कि कैसे एक "आग का गोला गाड़ी में दिखा और हम खुले दरवाजे से कूद गए" एक 51 वर्षीय शिक्षक सैली फाउल्डिंग ने कहा लोग एक-दूसरे पर पड़ रहे थे भगदड मच गई थी।

 

फोरेंसिक वैज्ञानिकों द्वारा बम के अवशेषों की जांच की जा रही है।ब्रिटिश मीडिया ने बताया कि यह टाइमर था लेकिन पूरी तरह से विस्फोट करने में असफल रहा।

WhatsApp पर इस्लाम का मजाक उडाने पर पाक कोर्ट ने ईसाई व्यक्ति को दिया मृत्युदंड

लाहौर-पूर्वी पाकिस्तान के एक अदालत ने 35 वर्षीय नदीम जेम्स नाम के व्यक्ति को ईशनिंदा करने के जुर्म में मौत की सजा सुनाई है। व्यक्ति पर आरोप है कि उसने अपने व्हाट्सएप ग्रुप से पैगम्बर मोहम्मद पर हास्यास्पद सामग्री साझा की थी। यह संदेश अपने मुस्लिम दोस्त को भेजा था जिसने यह मैसेज भेजने पर उसकी शिकायत कर दी थी।मैसेज सामने आने के बाद उग्र भीड़ ने जेम्स को घेरकर मारने की कोशिश की लेकिन वो बच निकला और बाद में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।  जेम्स को जुलाई 2016 में गिरफ्तार किया गया था।

 

गौरतलब है कि ईशनिन्दा मुस्लिम बहुसंख्यक पाकिस्तान में एक आपराधिक कृत्य माना जाता है, और पैगंबर का अपमान करने पर मृत्युदंड का प्रावधान है। जेम्स के वकील वकील रियाज अंजुम का कहना है कि उनके मुवक्किल फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे।

 

इससे पहले पिछले साल अप्रैल में पाकिस्तान भर में बड़े पैमाने पर आक्रोश था जब धर्म के बारे में एक छात्रावास के बहस के बाद छात्र मशहल खान को विश्वविद्यालय में मार डाला गया था।

 

हत्या के सिलसिले में पुलिस ने 20 से अधिक छात्रों और कुछ संकाय सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से, संसद ने ईशनिंदा कानूनों के लिए सुरक्षा उपायों को शामिल करने पर विचार किया है।

 

एक रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार 1990 के बाद से अब तक पाकिस्तान में ईशनिंदा करने के कथित आरोपों पर कम से कम 67 हत्याएं हो चुकी हैं। अदालत के एक अधिकारी ने बताया कि जेम्स मसीह को मृत्युदंड के साथ ही 3,00000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

लंदन में अंडरग्राउंड ट्रेन में धमाका कई घायल

लंदन की भूमिगत ट्रेन में शुक्रवार की सुबह पार्सन्स ग्रीन स्टेशन पर धमाका हुआ है जिससे कई यात्रियों के घायल होने की खबर है। ब्रिटिस आॅनलाइन मीडिया के अनुसार पुलिस ने पश्चिम लंदन में पार्सन्स ग्रीन स्टेशन पर हुई विस्फोट की पुष्टि कर दी है। अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और जाँच जारी है।

 

ब्रिटिश मीडिया के अनुसार पार्सन्स ग्रीन स्टेशन पर धमाके के बाद ट्रेन सर्विस को स्थगित कर दिया गया है। चश्मदीदों के अनुसार सुबह 8.20 पर धमाका हुआ जिकसे बाद ट्रेन में आग और धुआँ फैल गया किसी को कुछ समझ नही आया और लोग बदहवास इधर उधर भागने लगे। कई यात्रियों को गंभीर चोटें आई हैं। खबरों के मुताबिक धमाका ट्रेन में रखे एक कंटेनर मेंहुआ था।

धर्म वह पवित्र अनुष्ठान है जिससे चेतना का शुद्धिकरण होता - डॉ जगदीश गाँधी

लखनऊ की ऐतिहासिक धरती पर 11 सितम्बर 1893 को शिकागो में स्वामी विवेकानन्द द्वारा विश्व धर्म सभा में दिये गये ऐतिहासिक शब्द जहां सर्वधर्म सम्भाव एवं मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगे वहीं ष्भारत विश्व मानव कल्याण की अगुवाई भी करेगाष् साथ ही विश्व धर्म सभा में मानवता की रक्षा का जो संकल्प पारित हुआ था उस संकल्प को भी अब भारत पूर्ण करते हुए विश्व नेतृत्व करेगा। आज जहाँ विश्व की कुछ शक्तियां जातिए धर्मए भाषाए क्षेत्र पर आधारित अमानवीय सोच से ग्रस्त हैं वहीं व्यक्ति अपनी भौतिक संसाधनों की अतृप्त आकांक्षाओं से त्रस्त

है इस प्रकार सम्पूर्ण मानवता विविध दुःखों एवं समस्याओं से पीड़ित है इस समस्या की मुक्ति के लिए 11 सितम्बर 1893 को शिकागो ;अमेरिकाद्ध में विश्व धर्म सभा का आयोजन हुआ था।

 

इस विश्व धर्म सभा में महान भारतीय यशस्वी मनीषी स्वामी विवेकानन्द के विश्व प्रसिद्ध शब्द विश्व में गूंजें कि ष्ष्भारत ने संसार को सहिष्णुता तथा सभी धर्मों को मान्यता प्रदान करने की शिक्षा दी है हम लोग सब धर्मों के प्रति केवल सहिष्णुता में ही विश्वास नहीं करते वरन् समस्त धर्मों को सच्चा मानकर ग्रहण करते हैं। मुझे ऐसे देश का व्यक्ति होने का अभिमान हैए जिसने इस पृथ्वी की समस्त पीड़ित और शरणागत जातियों तथा विभिन्न धर्मों के बहिष्कृत मतावलम्बियों को आश्रय दिया।ष्ष्आज पुनः लखनऊ ;भारतद्ध की ऐतिहासिक धरती पर यह शब्द सर्वधर्म सम्भाव एवं मानव कल्याण के रूप में गूजें जिससे जहां विश्व मानव कल्याण व निःस्वार्थ सेवा का मार्ग प्रशस्त हुआ वहीं ष्ष्भारतष्ष् विश्व मानव कल्याण के लक्ष्य की पूर्ति की अगुवाई भी करेगा। कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए रामकृष्ण मिशन लखनऊ के वरिष्ठ सन्यासी स्वामी धर्मग्यानन्द ने कहा कि आज विश्व को स्वामी विवेकानन्द के विचारों की बहुत जरूरत है स्वामी विवेकानन्द ने विश्व को मानवता एवं शान्ति का संदेश दिया है। मुख्य अतिथि कौशल किशोर सांसद ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द के मार्ग पर चलकर जहां हम मानवता को दुखों से मुक्त कर सकते हैं वहीं हम स्वर्णिम भारत का निर्माण कर सकते हैं स्वामी विवेकानन्द ने धर्म के नाम पर संकुचित सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता एवं मानव कल्याण का संदेश दिया है। आज आर्थिक असमान्ता सम्पूर्ण मानवता के लिए अभिशाप है। मुख्यवक्ता डा0 जगदीश गांधी ने कहा कि धर्म केवल एक है और ईश्वर एक है धर्म के नाम पर नफरत एवं अमानवीय कृत्य मानवता के लिए अत्यन्त दुखदायी है एवं यह धर्म का रास्ता नहीं है। डॉ गाँधी ने कहा कि आज धर्म के जिस रूप को प्रचारित एवं व्याख्यायित किया जा रहा है उससे बचने की जरूरत है। मूलतः धर्म संप्रदाय नहीं है। जिंदगी में हमें जो धारण करना चाहिएए वही धर्म है। नैतिक मूल्यों का आचरण ही धर्म है। धर्म वह पवित्र अनुष्ठान है जिससे चेतना का शुद्धिकरण होता है। धर्म वह तत्व है जिसके आचरण से व्यक्ति अपने जीवन को चरितार्थ कर पाता है। यह मनुष्य में मानवीय गुणों के विकास की प्रभावना हैए सार्वभौम चेतना का सत्संकल्प है। मध्ययुग में विकसित धर्म एवं दर्शन के परम्परागत स्वरूप एवं धारणाओं के प्रति आज के व्यक्ति की आस्था कम होती जा रही है।यहाँ हिन्दू धर्म के अगणित रूपों और संप्रदायों के अतिरिक्तए बौद्धए जैनए सिक्खए इस्लामए ईसाईए यहूदी आदि धर्मों की विविधता का भी एक सांस्कृतिक समायोजन देखने को मिलता है।जो की कम होती आस्था के बीच भी हमको बचाए हुए है विशिष्ट अतिथि अभिनन्दन पाठक उर्फ नन्दन मोदी ने कहा कि आज इस विश्व धर्म संसद के माध्यम से जो संदेश मानव कल्याण का दिया जा रहा है एवं सभी धर्मों की एकता का दिया जा रहा है वह प्रशंसनीय है। महन्त स्वामी विद्या चैतन्य ने कहा कि आज सम्पूर्ण मानवता कराह रही है धर्म मार्ग से ही इसका निराकरण होगा राम कथा वाचक आनन्द महाराज ने कार्यक्रम की प्रशांसा करते हुए कहा कि आज यह विश्व धर्म संसद पूरी दुनिया के लिए मानवता का संदेश है एवं स्वामी विवेकानन्द के सपनों को साकार करने के पथ पर दूसरा कदम है। भन्ते सुमन रतन ने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी धर्मों के अनुयायी एक होकर मानवता के पथ पर आगे बढ़े। ज्ञानी हरिवन्दर सिंह ने कहा कि सिख धर्म का कारवां सभी धर्मों के मानव कल्याण के लक्ष्य को पूर्ण करने में सदैव सहयोग करता है हम मानवता की मशाल बुझने नहीं देगें। मौलाना सुफियान निजामी ने अपने सम्बोधन में कहा कि इस्लाम ने सदैव शांती व मानवता का संदेश दिया है। इंजीनियर राजेश चन्द्रा ने भगवान बुद्ध के मानवीय धम्म को विस्तृत रूप से प्रस्तुत कर मानवता का संदेश दिया। मीडिया फोटो ग्राफर क्लाब के अध्यक्ष एसण्एमण्पारी ने कहा कि मानव कल्याण का यह करवां निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है जो शीघ्र ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगा। मानव कल्याण सेवा धर्म के संस्थापक एम इकबाल ने कहा कि मानवता के उत्कर्ष के महान् मकसद के लिए आपका सहयोग उल्लेखनीय है इस दिशा में आपका कदम न केवल मानवता के इतिहास को गौरवशाली बनायेगा बल्कि विश्व मानवता की एकता और अखण्डता के लिए आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शक संदेश है। राष्ट्रीय किसान मंच के अध्यक्ष शेखर दीक्षितए वीरेन्द्र पाण्डेयए सरस्वती प्रसाद रावतए जगजीवन प्रसादए आर0बी0 राॅव मतलूब अहमद आदि ने सम्बोधित किया सभा में मानव कल्याण के लिए कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया तथा विश्व धर्म संसद में मानव कल्याण का प्रस्ताव पारित किया गया। सभा का सचालन केपी चैधरी ने किया।

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