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updated 8:08 AM UTC, Apr 24, 2018
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CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने किया खारिज

नई दिल्ली/सुप्रीम कोर्ट के मुख्यन्यायधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ सात विपक्षी दलों के महाभियोग प्रस्ताव को राज्यसभा के सभापति और उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने आज खारिज  कर दिया। कानूनी सलाह के बाद नायडू ने यह फैसला लिया है। बता दें कि महाभियोग पर फैसला लेने से पहले उपराष्ट्रपति ने एटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल और कई अन्य विधि विशेषज्ञों से बातचीत की।

 

वेंकैया नायडू ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि चीफ जस्टिस के खिलाफ लाया गया ये महाभियोग ना ही उचित है और न ही अपेक्षित। इस प्रकार का प्रस्ताव लाते हुए हर पहलू को ध्यान में रखना चाहिए। इस खत पर सभी कानूनी सलाह लेने के बाद ही मैं इस प्रस्ताव को खारिज करता हूं।

 

शुक्रवार को कांग्रेस सहित 7 विपक्षी दलों ने राज्यसभा के सभापति नायडू को चीफ जस्टिस मिश्रा के खिलाफ कदाचार का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरु करने के लिए नोटिस दिया गया था।

 

सीजेआई के खिलाफ प्रस्ताव लाने के कारण कांग्रेस औऱ बीजेपी के बीच आरोप- प्रत्यारोप शुरु हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सीजेआई दीपक मिश्रा पर महाभियोग की मांग को लेकर राज्यसभा के सभापति के समक्ष नोटिस लाने को महा मुर्खता बताया है। नकवी ने कहा कि ऐसा प्रस्ताव लाना कांग्रेस की महामुर्खता है। जैसा कि कहते हैं, ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’, उसी तरह कांग्रेस की ‘विनाश काले पप्पू बुद्धि है’।

 

पांच आधार पर महाभियोग-

1.मुख्य न्यायधीश के पद के अनुरुप आचरण न होना, प्रसाद ऐजुकेशन ट्रस्ट में फायदा उठाने का आरोप। इसमें मुख्य न्यायधीश का नाम आने के बाद सघन जांच की जरुरत।

 

2.प्रसाद ऐजुकेशन ट्रस्ट का सामना जब सीजेआई के सामने आया तो उन्होंने सीजेआई ने न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया को किनारे कर दिया।

 

3.बैंक डेटिंग का आरोप।

 

4.जमीन का अधिग्रहण करना, फर्जी एफीडेविट लगाना और सुप्रीम कोर्ट जज बनने के बाद 2013 में जमीन को सरेंडर करना।

 

5.कई संवेदनशील मामलों को चुनिंदा बेंच को देना।     

 

 

लोया केस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जज लोया की मौत की नहीं होगी SIT जांच

लोया की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी वाली की जांच वाली मांग की याचिका को ठुकरा दिया। साथ ही याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका में कोई दम नहीं है। कोर्ट को इस याचिका में कोई तर्क नही मिल पाया है। यही वजह है कि इस स्वतंत्र जांच वाली याचिका को कोर्ट ने ठुकरा दिया है। चीफ जस्टिस दिपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच ने फैसला सुनाया है। बता दें कि कोर्ट को तय करना था कि लोया की मौत की जांच SIT से कराई जाए या नहीं।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजों के बयान पर हम संदेह नही कर सकते। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक लड़ाई मैदान में की जानी चाहिए कोर्ट में नही। कोर्ट ने माना है कि जज लोया की मौत प्राकृतिक है। कोर्ट ने कहा है कि जनहित याचिका का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

 

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा-

-जस्टिस लोया की मौत प्राकृतिक थी।

-सुप्रीम कोर्ट ने PIL के दुरुपयोग की आलोचना की।

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि PIL का दुरुपयोग चिंता का विषय है।

-याचिकाकर्ता का उद्देश्य जजों को बदनाम करना है।

-यह न्यायपालिका पर सीधा हमला है।

-राजनैतिक प्रतिद्वंद्विताओं को लोकतंत्र में ही सुलझाना होगा।

-PIL शरारती उद्देश्य से दाखिल की गई, यह एक अपराधिक अवमानना है।

-हम उन न्यायिक अधिकारियों के बयानों पर संदेह नही कर सकते, जो जज लोया के साथ थे।

-ये याचिका अपराधिक अवमानना के समान

 

पहले क्या था कोर्ट का बयान-

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि ये मामला गंभीर है और एक जज की मौत हुई है। मामले को गंभीरता से देख रहें हैं और समझ रहें हैं। इस दौरान अगर कोई संदिग्ध तथ्य सामने आया तो कोर्ट इस  मामले की जांच के आदेश देगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के लिए ये बाध्यकारी है। हम इस मामले में लोकस पर नहीं जा रहें है। चीफ जस्टीस ने दोहराया कि पहल् ही हम इस मामले को गंभीरता से ले रहें हैं।

 

महाराष्ट्र सरकार ने जताया था विरोध

सीबीआई जज बीएच लोया की मौत की स्वतंत्र जांच को लेकर दाखिल याचिका पर महाराष्ट्र सरकार ने जांच का विरोध किया था। महाराष्ट्र सरकार की और से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को जजों को संरक्षण देना चाहिए। ये कोई आम पर्यावरण का मामला नही है। जिसकी जांच के आदेश या नोटिश जारी किया गया हो। ये हत्या का मामला है और क्या इस मामले मे चार जजों से संदिग्ध की तरह पूछताछ की जाएगी। ऐसे में वो लोग क्या सोचेंगे जिनके मामलों का फैसला इन जजों ने किया है। सुप्रीम कोर्ट को निचली अदालत के जजों को संरक्षण देना चाहिए।

 

महाराष्ट्र सरकार की और से पेश मुकुल रोहतगी ने कहा कि ये याचिका न्यायपालिका को स्केंडलाइज करने के लिए की गई है। ये राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश है। सिर्फ इसलिए की ये सत्तारुढ़ पार्टी के अध्यक्ष है इसलिए आरोप लगाया जा रहा है, प्रेस कॉफ्रेंस की जा रही है। अमित शाह के आपराधिक मामले में आरोपमुक्त करने को इस मौत से लिंक किया जा रहा है। उनकी मौत के पीछे कोई रहस्य नही है। इसकी आगे जांच की कोई आवश्यकता नहींं है।

 

हालांकि लोया की मौत 30 नवंबर 2014 की रात हुई और तीन साल तक इस पर किसी ने ऊंगली तक नही उठाई। ये सारे सवाल कारवां की नवंबर 2017 की खबर के बाद उठाए गएं। जबकि याचिकाकर्ता ने इसके तथ्यों की सत्यता की जांच नही की। 29 नवंबर से ही लोया के साथ मौजूद 4 जजों ने अपने बयान दिए हैं और वो उनके मौत के वक्त भी उनके साथ मौजूद थे। उन्होंने शव को एंबुलेंस के जरिए लातूर भेजा था। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक जिन चार जजों के नाम है उनके बयान पर भरोसा नही करने की कोई वजह नही है। इनके बयान पर भरोसा करना होगा। अगर कोर्ट इनके बयान पर विश्वास नहीं करती है और जांच के आदेश है तो इन चार जजों को ही सह साजिशकर्ता बनना पड़ेगा। जज की मौत दिल के दौरे से हुई है। और 4 जजों के बयान पर भरोसा न करने की कोई वजह नही है। याचिका को भारी जुर्माने के साथ खारिज किया जाए।

 

कौन है याचिकर्ता?

कांग्रेसी नेता तहसीन पूनावाला, महाराष्ट्र के पत्रकार बीएस लोने, बांबे लॉयर्स एसोसिएशन सहित अन्य द्ववारा विशेष जज बीएच लोया की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिकाएं दाखिल की गई।

 

क्या है पूरा मामला?

दरअसल 2005 में सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कोसर बी को गुजरात पुलिस ने हैदराबाद से अगवा किया। आरोप लगाया गया कि दोनों को फर्जी मुठभेड़ में मार डाला गया। शेख के साथ तुलसीराम प्रजापति को भी 2006 में गुजरात पुलिस द्वारा मार दिया गया। उसे सोहराबुद्दीन मुठभेड़ का गवाह माना जा रहा था। 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल को महाराष्ट्र में ट्रांसफर कर दिया और 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और शेख के केस को एक साथ जोड़ दिया।

 

शुरुवात में जज जेटी उत्पत केस की सुनवाई कर रहें थे। लेकिन आरोपी अमित शाह के पेश न होने पर नाराजगी जाहिर करने पर अचानक उनका तबादला कर दिया गया। फिर केस की सुनवाई जज बीएच लोया ने की  औऱ 1 दिसंबर 2014 में नागपुर में उनकी मौत हो गई। उस वक्त लोया दोस्त की बेटी की शादी में शामिल होने नागपुर गए थे। और 4 अन्य जजों के साथ नागपुर के रवि भवन में ठहरे थे। हालांकि बाद में अमित शाह को इस केस से आरोपमुक्त कर दिया गया था।     

 

  

मक्का मस्जिद केस में फैसला आने के बाद आखिर क्यों जज ने दिया इस्तिफा?

2007 के हैदराबाद मक्का मस्जिद बम ब्लास्ट को लेकर सोमवार को NIA की कोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने पर्याप्त सबूत न होने पर आसिमानंद समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। लेकिन इस मामले में फैसला सुनाने वाले के.रवींद्र रेड्डी ने कुछ ही देर बाद अपना इस्तिफा दे दिया। जिसने हर किसी को चौका दिया।

 

वहीं इस मामले में एक और चौका देने वाला सच सामने आया है। बताया जा रहा है कि हैदराबाद बंजारा हिल्स के निवासी कृष्ण रेड्डी ने हैदराबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने जज रविंद्र रेड्डी के खिलाफ एक शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जज रेड्डी ने जल्दबाजी में जमीन कब्जे के मामले में एक आरोपी को बेल दी थी। याचिकाकर्ता ने इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

 

इस मामले में याचिकाकर्ता टी.श्रीरंगा राव ने बताया कि ये शिकायत करीब 3 महीने पहले दायर की गई थी। जिसके बाद हाईकोर्ट के जीफ जस्टिस ने जस्टिस रेड्डी के खिलाफ सतर्कता जांच के आदेश दिए थे। ये जांच अभी भी जारी है। उन्होंने बताया कि अगर जज के पास इस्तिफा देने के कोई कारण होते तो वह वॉलेंटियर रिटायरमेंट लेते और सभी सुविधाओं का लाभ ले सकते थे। लेकिन उन्होंने इस्तिफा दिया है तो उन्हें रिटायरमेंट के बाद की कोई सुविधा नही मिलेगी।

 

कृष्णा रेड्डी के मुताबिक एक आदमी बंजारा हिल्स में प्रॉपर्टी के नाम पर उन्हें 150 करोड़ का चूना लगा रहा था। जिसके बाद उस आदमी ने जज रवींद्र रेड्डी के सामने अग्रीम जमानत की अपील की थी। कृष्ण रेड्डी द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार उस दौरान जज रेड्डी कोर्ट नम्बर 9 में दो दिनों 4 और 5 दिसंबर के दौरान इंचार्ज थे। शिकायत में बताया गया कि इस केस की सुनवाई 5 दिसंबर को की गई और उसी दिन उसे बेल दे दी गई।

 

शिकायत में कहा गया कि मेरे अनुसार मेट्रोपोलिटियन सेशन जज सुनवाई के अगले दिन ही अपना फैसला सुना सकते हैं। लेकिन जज ने उसी दिन फैसला सुनाया। जिसके आधार पर मैंने कहा कि यह मामला काफी गंभीर है। उन्होंने शिकायत में कहा कि ऐसा लग रहा था कि वे बेल का फैसला देने में काफी जल्दबाजी में थे। इसी आधार पर उन्होंने शिकायत की थी और जांच की मांग की थी।

 

आपको बता दें कि पिछले कुछ महीनों में ही हैदराबाद में लोअर कोर्ट के तीन जजों को गिरफ्तार किया गया है। अभी ये जज भ्रष्टाचार के आरोप के बाद न्यायिक हिरासत में है। गौरतलब है कि इस फैसले के बाद जज ने जिस तरह इस्तिफा दिया उसके बाद लगातार राजनीतिक टिप्पणियां आ रही हैं।  

कठुआ मामले पर आरोपियों ने नारको टेस्ट करने की मांग

कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ हुए सामूहिक बलात्कार मामलें में आरोपी आठ लोगों ने खुद को बेकसूर बताते हुए जिला और सत्र न्यायधीश से नारको टेस्ट कराने का अनुरोध किया है। इस पूरे मामलें में से सात आरोपियों को जिला और सत्र न्यायधीश संजय गुप्ता की अदालत के समक्ष पेश किया गया। जिन्होंने स्टेट क्राइम ब्रांच से उन्हें आरोप की प्रतियां देने को कहा है।

 

बता दें कि इस मामले की अगली तरीख 28 अप्रैल तय की गई है। यही नही वारदात  में आठवां आरोपी नाबालिग है। जिसमें मुख्य न्यायलय मजिस्ट्रेट के लिए अर्जी की है, जिस पर 26 अप्रैल को सुनवाई होगी।

 

क्या है पूरा मामला    

गौरतलब है कि अल्पसंख्यक घुमंतू समुदाय की एक बच्ची का कथित तौर पर अपहरण कर उसे कठुआ जिले के एक गांव के छोटे से मंदिर में एक हफ्ते तक रखा गया है। इस दौरान उसे बेहोश रखा गया और मारने से पहले उसका यौन उत्पीड़न किया गया। यह मामला जनवरी 2018 का है। क्राइम ब्रांच द्वारा दायर आरोप पत्र के मुताबिक बच्ची की हत्या, अपहरण और बलात्कार अल्पसंख्यक घुमंतू समुदाय को क्षेत्र से हटाने के लिए रची गई एक सोची समझी साजिश थी। नाबालिग के लिए एक अलग आरोप पत्र दायर किया गया है।

 

आरोपियों के वकील ने क्राइम ब्रांच द्वारा 9 अप्रैल को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर आरोप पत्र की प्रति मांगी है। सत्र न्यायलय में संक्षिप्त सुनवाई के बाद सातों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल में स्थानांतरित कर दिया गया।

 

बच्ची से कथित तौर पर बार-बार दुष्कर्म के आरोपी पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया ने मीडिया को बताया कि वह नारको परीक्षण और सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। जैसे ही अदालत के अंदर सुनवाई शुरू हुई वैसे ही राम की बेटी मधु शर्मा ने बाहर प्रदर्शन शुरु कर दिया और मामले में सीबीआई जांच की मांग की।

 

कठुआ अदालत परिसर में 9 अप्रैल को हुए तनाव के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। दरअसल 9 अप्रैल को यहां स्थानीय बार एसोसिएशन ने क्राइम ब्रांच को कथित तौर पर आरोप पत्र दायर नहीं करने दिया गया था।       



कांकणी हिरण मामला- सलमान खान को मिली जमानत, 7 मई को होगी अगली सुनवाई

कांकणी हिरण मामले में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान को 20 साल बाद सजा सुनाई गई थी। लेकिन दो दिन के भीतर उन्हें जमानत मिल गई। सेशन जज रविंद्र कुमार जोशी ने आज दोपहर 3 बजे 25-25 हजार के मुचलके पर सलमान खान को रिहा होने का आदेश दिया गया।  

 

उम्मीद है कि शाम 5 बजे तक जमानत की सारी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। और सलमान रिहा कर दिए जाएंगे। लेकिन वह अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकते हैं। बता दें कि सलमान खान को हिरण शिकार मामले में 5 साल की सजा सुनाई गई है।  

 

कोर्ट रुम में ऐसा क्या हुआ

सलमान खान के वकील महेश बोड़ा ने कहा कि कि 20 साल से जारी इस केस में सलमान हमेशा जमानत पर रहें। उन्होंने हमेशा कोर्ट के आज्ञा का पालन किया। जब भी उन्हें बुलाया गया वे हाजिर हुए। ऐसे में उन्हें जमानत दी जाए।

 

इस पर सरकारी वकील पोकराम ने कहा है कि गवाहों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ है कि सलमान ने गोली मारकर हिरण का शिकार किया। इसी आधार पर उन्हें ट्रायल कोर्ट ने दोषी करार दिया था। ऐसे में उन्हें जमानत नही दी जानी चाहिए।

 

वहीं विश्नोई समाज के वकील महिपाल विश्नोई ने कहा कि सलमान के खिलाफ आरोप साबित हो चुका है। ऐसे में उन्हें जमानत देने के बजाय जेल में रखने के मामले में सुनवाई जल्द करनी चाहिए। सबूतों के आधार पर उन्हें आगे भी दोषी माना जाएगा।    

 

सलमान के वकील को अंडरवर्लड डॉन से मिली धमकी

सलमान खान के वकील महेश बोड़ा ने दावा किया है कि उन्हें अंडरवर्लड डॉन रवि पुजारी से धमकी मिल रही है। बोड़ा ने बताया कि गुरुवार को इंटरनेट कॉलिंग आई। लेकिन उन्होंने कॉल नही उठाया जिसके बाद 8 से 10 मैसेज मिल गए। रवि पुजारी के मैसेज में लिखा था कि ‘सलमान का केस छोड़ दो वरना मार देंगे’। उन्होंने पुलिस को शिकायत कर दी और पुलिस को इसका ब्यौरा सौंप दिया।

 

एडवोकेट हस्तीमल सारस्वत को भी 3 इंटरनेशनल कॉल आई। उन्होंने ने भी कॉल अटेंड नही किया। एडवोकेट हस्तीमल के मुताबिक शुक्रवार को जब कॉल की जांच की तो वे पाकिस्तान के नंबर थे। हस्तीमल ने बताया की पिछले साल भी रवि पुजारी ने धमकी दी थी।

 

कांकणी में बीते रात क्या हुआ था हिरण के साथ

1 अक्टूबर 1998 की रात जब सलमान और उनके साथियों ने जोधपुर के पास कांकणी गांव में संरक्षित वन प्राणी दो काले हिरण का शिकार किया था। गांव वालों ने गोली की आवाज सुनकर उनका पिछा भी किया था। इनमें से कई लोगों ने उन्हें मौके पर देखा था और हिरणों के शव को फोरेस्ट डिपार्टमेंट में भेज दिए थे। इस मामले में सलमान गोली चलाने के आरोपी बन गए।

 

शिकार से जुड़े बाकी के दोनों केस में इकलौता चश्मदीद हरीश दुलानी था, उसने भी बयान बदल लिए थे। उसने सलमान के अलावा दूसरे कलाकारों को पहचानने से इनकार कर दिया था। दूसरा कमजोर पक्ष यह भी था कि उसमें हिरणों के शव नहीं मिले थे।

 

दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुई थी पुष्टि

कांकाणी केस में पहली रिपोर्ट डॉ. नेपालिया की थी। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक, एक हिरण की मौत दम घुटने से और दूसरे हिरण की मौत गड‌्ढे में गिर जाने और श्वानों के खाने से हुई थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह रिपोर्ट सही नहीं थी। क्योंकि इसमें गन इंजरी की बात नहीं थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बैठाया गया। बोर्ड ने दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दोनों काले हिरणों की मौत की वजह गन शॉट इंजरी ही बताई गई।

 

शिकार मामले में अबतक सलमान पर कितने केस?

शिकार मामले में सलमान पर कुल चार केस थे। तीन हिरणों के शिकार के और चौथा आर्म्स एक्ट का। दरअसल तब सलमान के कमरे से उनकी निजी पिस्टल और राइफल बरामद की गई थीं। जिनके लाइसेंस की लिमिट खत्म हो चुकी थी।

 

सलमान ने कब किया था शिकार?

सलमान पर जोधपुर के घोड़ा फार्म हाउस और भवाद गांव में 27-28 सितंबर 1998 की रात हिरणों का शिकार करने का आरोप लगा। फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान सलमान और उनके साथियों ने 1 और 2 अक्टूबर, 1998 की रात जोधपुर के पास कांकाणी गांव में दो काले हिरणों के शिकार का आरोप था। आर्म्स एक्ट में एडिशनल केस लगने की वजह से यह मामला जुलाई 2012 तक पेंडिंग रहा।

 

पिछले 20 साल में 18 दिन, सलमान ने काटे जेल

हिरण शिकार के 3 मामलों में सलमान पुलिस और ज्यूडिशियल कस्टडी में 18 दिन जेल में रह चुके हैं। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने 12 अक्टूबर 1998 को हिरासत में लिया था। वे 17 अक्टूबर तक जेल में रहे। घोड़ा फार्म मामले में 10 अप्रैल 2006 को सलमान को लोअर कोर्ट ने 5 साल की सजा सुनाई। 15 अप्रैल तक जेल में रहे। सेशन कोर्ट ने इस सजा की पुष्टि की। तब 26 से 31 अगस्त 2007 तक सलमान जेल में रहे।

  

कमला चट्टोपध्याय की 115वीं जयंती पर गूगल बना डूडल


कमलादेवी चट्टोपध्याय की 115वीं जयंती पर आज गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें याद कर रहा है। डूडल में कमलादेवी के किए गए कामों के झलक को दिखाया गया है। कमलादेवी ने आजादी के बाद रंगमंच में नई जान फूंकने में भूमिका निभाई है। आज भारत में परफार्मिंग आर्ट से जुड़े कई संस्थान कमलादेवी के विजन का ही नतीजा है। जिसमें नेशनल स्कूल और ड्रामा, संगीत नाटक एकेडमी, सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज इंपोरियम और क्राफ्ट काउंसिल ऑफ इंडिया शामिल है।

कमलादेवी को उनके किए गए कामों के लिए 1955 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया और 1987 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। कमलादेवी 1966 में सामुदायिक नेतृत्व के लिए रमन मैगसेसे पुरस्कार से भी सम्मानित की जा चुकी हैं।

कमलादेवी का कर्नाटक में हुआ था जन्म

कमलादेवी का जन्म 3 अप्रैल 1903 में कर्नाटक के मंगलौर में जन्म हुआ था। उनके पिता मंगलोर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर थे। कमलादेवी सिर्फ 7 साल की थी तभी उनके पिता चल बसे थे। कमलादेवी की 14 साल की उम्र में ही शादी कर दी गई थी। लेकिन 2 साल बाद ही उनके पति कृष्ण राव की भी मौत हो गई थी। वहीं चेन्नई के क्वीन मैरिज कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात सरोजनी नायडू की छोटी बहन से हुई और उन्होंने कमलादेवी की मुलाकात अपने भाई हरेंद्र नाथ चट्टोपध्याय से कराई। और फिर इस दौरान दोस्ती बढ़ी और शादी के बंधन में दोनों बंध गए। विधवा-विवाह और जाति बिरादरी से अलग विवाह करने के वजह से आलोचना की शिकार भी हुई। लेकिन इसकी उन्होंने कोई भी परवाह नही की।

आजादी के आंदोलन में कूदी

कमलादेवी पति हरेंद्रनाथ के साथ लंदन चली गई थी। लेकिन जब 1923 में गांधीजी के असहयोग आंदोलन के बारे में उन्हें पता चला तो वह भारत वापस आ गई। और आजादी के आंदोलन में कूद गई। उन्होंने गांधीजी के नमक सत्यग्रह में भी हिस्सा लिया था। हालांकि उनका हरेंद्रनाथ से तलाक हो गया था। आजादी के बाद देश का विभाजन हो गया था। और शरणार्थियों को बसाने के लिए जगह की तलाश थी। उसी समय कमलादेवी ने गांधीजी की इजाजत लेकर टाउनशिप बनाने का जिम्मा लिया। इस दौरान फरीदाबाद सामने आया जहां 50,000 शरणार्थियों को रहने की जगह मिली।

कमलादेवी ने कई फिल्में किए और किताबें भी लिखीं

कमलादेवी 2 साइलेंट फिल्मों में नजर आई थीं। इसमें से एक कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की पहली सेटेलाइट फिल्म थी। इस फिल्म का नाम था मृच्छकटिकाजो कि 1931 में आई। लेकिन लंबे वक्त के बाद वे एक बार फिर तानसेनफिल्म में के.एल सेहगल और खुर्शीद के साथ नजर आई। इसके बाद कमलादेवी ने शंकर पार्वती (1943) और धन्ना भगत’ (1945) जैसी फिल्में भी की। यही नहीं कमलादेवी ने कई किताबें भी लिखी। जिसमें अंतराष्ट्रीय संबंधो जापान-कमजोरियां और शक्ति अंकल सैम अमपायर और वॉर टाउन चाइना भी शामिल है। 29 अक्टूबर 1988 में कमलादेवी का निधन हुआ।        

SC/ST एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन, 6 राज्यों में असर, धारा 144 लागू

अनुसूचित जाति/ जनजाति को लेकर हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित और आदिवासी संगठन ने आज देशभर में भारत बंद का एलान घोषित किया है। एससी एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ दलित संगठन देशभर में प्रदर्शन कर रहें हैं।

कई जगहें ट्रेनें रोकी गई हैं। इसके अलावा कुछ शहरों में झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एससी/एसटी एक्ट में कई बदलाव हुए थे। हालांकि सरकार इस मामले पर दोबारा विचार करने के लिए याचिका दाखिल कर दी है।

कई राज्यों में लगा कर्फ्यू  

मध्य प्रदेश के मुरैना में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई। हिंसा के उग्र होने के वजह से यहां कर्फ्यू लगा दिया गया है। मुरैना में बंद समर्थको ने बस स्टेंड, बैरियर चौराहे पर पथराव किया। इस दौरान कई वाहनों में भी तोड़-फोड़ की गई। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। पुलिस ने किसी भी तरह प्रदर्शनकारियों को रोका तो मुरैना रेलवे स्टेशन पर उपद्रव शुरु हो गया। बंद समर्थको ने पटरियों पर डेरा जमा लिया जिसके वजह से ट्रेनों की आवाजाही रुक गई।

दिल्ली में राजमार्ग हुए ठप

दिल्ली एनसीआर में भारत बंद ने हिंसा का रुप ले लिया है। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की झड़प हुई। इससे निपटने के लिए पुलिस ने हलके बल का प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों ने एनएच-24 और दिल्ली देहरादून हाइवे समेत कई राजमार्ग पर जाम लगा दिया। इससे कई राजमार्ग पर कई यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गए है।

गुजरात में भी भारत बंद का दिखा असर

अनुसूचित जाति और जनजाति के विरोध में गुजरात में सड़को पर महिलाएं उतरी है। कई जगहों पर वाहनों पर भी आग लगा दी गई है।

बिहार में रेल और यातायात प्रभावित

बिहार में यह भारत बंद असरदार दिख रहा है। बिहार से पंजाब जाने वाली ट्रेन को रोक दिया गया है। बंद समर्थकों ने पटना व हाजीपुर के बीच उत्तर व दक्षिण बिहार की लाइफलाइन महात्मा गांधी सेतु को जाम कर दिया है। इस बंद को राजद सपा, कांग्रेस और सरद यादव का समर्थन मिला है।

बता दें कि राजस्थान,पंजाब,हरियाणा और झारखंड में भी असर दिखा है। अम्बुलेंस की सेवाओं में भी रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही पुलिस पर पथराव किए जा रहें हैं।

    

जम्मू कश्मीर: अनंतनाग और शोपिया मुठभेड़ में 12 आतंकी ढेर, 3 जवान शहीद


जम्मू कश्मीर के अनंतनाग और शोपिया में हुए मुठभेड़ में आज तीन आतंकवाद निरोधक अभियानों में 12 आतंकवादियों को मार गिराया गया। लेकिन आतंकियों से लड़ते वक्त सेना के 3 जवान शहीद हो गए। और 4 आम नागरिकों को भी जान गवानी पड़ी। ये अभियान कल रात दो जिलों में सरु किए गए थे जो आज शाम तक जारी रहा। अधिकारियों के मुताबिक अनंतनाग के दयालगाम में एक आतंकवादी मारा गया और एक अन्य को गिरफ्तार किया गया। जबकि द्रगाद में 7 आतंकवादी मारे गए।

शोपिया जिले के काचदुरु क्षेत्र में 4 आतंकवादियों को मार गिराया गया। 12 आतंकवादियों में से 4 की पहचान कर ली गई है। और यह सभी स्थानीय निवासी है। काचदुरु क्षेत्र में सेना के 3 जवान शहीद हो गए। और 3 नागरिक भी मारे गए हैं जबकि एक नागरिक भी आतंकवादियों के साथ मारा गया। इस नागरिक के घर पर ये आतंकवाद छिपे हुए थे।

कानून और व्यवस्था की स्थिति और अलगाववादी संगठनों के बंद होने के मद्देनजर को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने श्रीनगर के 7 पुलिस थानों और दक्षिण कश्मीर के इलाकों में पाबंदिया लगाई गई हैं। इसके अलावा सैयद अली शाह गिलानी, मीर वाइज उमर फारुक, यासीन मलिक समेत अलगाववादी नेताओं को नजरबंद किया गया है।

पुलिस महानिरीक्षक एस पी पाणि के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के पुलिस ने सेना और सीआरपीएफ के साथ मिलकर अच्छा काम किया है। आधिकारियों के मुताबिक सुरक्षाबलों के इस अभियान के कारण हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर तैयबा को करारा जवाब मिला है।

अवंतिपुरा के विक्टर फोर्स मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एस पी वैद्ध ने कहा कि कश्मीर घाटी में हाल ही में आतंकवादियों के खिलाफ यह सबसे बड़ी कार्रवाई है।  

 

 

 

 

   

CBSE पेपर लीक मामला, दिल्ली पुलिस रात भर की छापेमारी की कार्रवाई

नई दिल्ली/ बुधवार को सीबीएसइ की 10वें के गणित और 12वें के अर्थशास्त्र पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली पुलिस रात भर छापेमारी की कार्रवाई की। छापेमारी की ये कार्रवाई दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के कई इलाकों में की है। इसके साथ ही दिल्ली के कोचिंग सेंटरों में भी छापेमारी की गई है।

सूत्रों के मुताबिक पुलिस को दी शिकायत में कहा गया था कि उसे 23 मार्च को शिकायत मिली थी। जिसमें आरोपी का भी नाम सामने आया था। पुलिस इस मामले में लगभग 25 लोगों से पुछताछ कर चुकी है। कहा जा रहा है कि पुलिस जल्द इस मामले में अहम खुलासा कर सकती है।

बता दें कि पेपर लीक मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने क्राइम ब्रांच का एक विशेष जांच दल गठित किया है। विशेष पुलिस आयुक्त आरपी उपाध्याय के मुताबिक एसआईटी का नेतृत्व संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार कर रहें हैं। जांच करने वाले एसआईटी में डीसीपी और एएसपी के पुलिसकर्मी शामिल है।

दिल्ली पुलिस को दी गई शिकायत में सीबीएसइ ने कहा है कि उसके पास 23 मार्च को फैक्स के जरिए पेपर लीक की जानकारी मिली थी। इसके साथ ही फैक्स के जरिए ही बताया गया था कि इसके पीछे विक्की नाम के शख्स का हाथ है। यह शख्स कोचिंग सेंटर चलाता है।

अब सीबीएसइ अपने शिकायत में राजेंद्र नगर के स्कूलों को भी पेपर लीक में आरोपी बनाया है। बताया गया है कि पहले पेपर लीक की शिकायत सीबीएसइ के रिजनल ऑफिस दिल्ली में की गई। जिसकी एक कॉपी बाद में दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर सुनिल यादव के वॉट्सएप नम्बर पर फॉरवर्ड की गई।

बताया जा रहा है कि इसके बाद 26 मार्च 2018 को बिना पते लिफाफा रोज एवन्यू स्थित सीबीएसइ के एकेडमिक यूनिट में डिलीवर हुआ। इस लिफाफे में 12वीं क्लास के इकनॉमिक्स विषय के हाथ से लिखे 4 पेपर जवाबों के साथ रखे थे।

वहीं आज सुबह तिमारपुर स्थित दफ्तर के बाहर छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए कहा कि सीबीएसइ कोई भी परीक्षा दोबारा नहीं करवाएं या फिर सारे विषय की परीक्षा दोबार करवाए। इसके साथ ही ‘we want justice’ के नारे भी लगाए।      

CBSE पेपर लीक मामला, पीएम मोदी ने जताई नाराजगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीबीएसइ पेपर लीक के मामले में दुख जताया हैं। उन्होंने सीबीएसइ मामले को लेकर सख्त कार्रवाई करने के लिए आदेश दिए हैं। वहीं केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने भी दुख जताते हुए कहा कि आरोपीयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रकाश जावेड़कर ने छात्रों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि आगे से सारी परीक्षाएं लीक प्रूफ होगीं। इसके साथ ही कहा कि पीपर लीक को लेकर पुलिस अहम जांच पर है। लिहाजा जांच को लेकर वह ज्यादा नही बोलेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ हिस्सो में वॉट्सऐप में पेपर लीक हुआ था। इस मामले को लेकर हमने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है।

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि परीक्षाएं देशभर में आयोजित हुईं लेकिन दिल्ली के कुछ स्कूलों से ही पेपर लीक की खबरें आईं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब पेपरों के वितरण के वक्त सुरक्षा को पहले से ज्यादा सख्त किया जाएगा। जावड़ेकर ने कहा कि उन्हें छात्रों और अभिभावकों की परेशानियों का अंदाजा है। उन्होंने कहा, 'मैं छात्रों और अभिभावकों को आश्वस्त करता हूं कि आगे से पेपर लीक नहीं होंगे।

जावड़ेकर ने कहा कि अगले साल से प्रफेशनल भर्ती परीक्षाओं के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनेगी। ताकि पेपर लीक प्रूफ हों। इस बीच सीबीएसइ पेपर लीक के बाद दिल्ली पुलिस भी हरकत में आ गई है और आला अधिकारियों ने इस मसले पर बैठक की है। पेपर लीक मुद्दे को लेकर दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर और स्पेशल कमिश्नर ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की है।

इस बीच पेपर लीक मामला बढ़ता देख अब बोर्ड ने गणित और अर्थशास्त्र का पेपर फिर से कराने का फैसला किया है। अभी ये जानकारी नहीं दी गई है कि पेपर किस दिन कराए जाएंगे। बोर्ड दसवीं कक्षा के गणित के पेपर और 12वीं कक्षा के अर्थशास्त्र का पेपर दोबारा करवाएगा। आरोप लगे हैं कि ये दोनों पेपर लीक हो गए थे। इस वजह से इन्हें दोबारा कराने का फैसला लिया गया है।

    

 

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