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updated 6:53 PM UTC, Jan 16, 2018
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काेयला घाेटाले में पूर्व CM मधुकाेड़ा काे सजा आज

झारखंड के बहुचर्चित काेयला घाेटाले में पूर्व सीएम मधुकाेड़ा काे बुधवार काे दोषी ठहराया.आज ब्रहस्पतिवार काे मधुकाेड़ा काे सजा का एेलान किया जायेगा। मधुकाेड़ा पर अपने पद का दुरूपयाेग करने आैर धाेखाधड़ी का आराेप लगा है।बुधवार काे दिल्ली की cbi काेर्ट में यह आराेप साबित हाे गये।

 

दिल्ली की स्पेशल काेर्ट cbi ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधुकाेड़ा के अलावा पूर्व काेयला सचिव एचसी गुप्ता,झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव अशाेक कुमार बसु आैर एक अन्य काे अपराधिक साजिस आैर सेक्सन-120बी,420आैर धारा 409 के तहत दाषी ठहराया।

 

गाैरतलब है कि इस ब्लाॅक का अांवटन काेलकाता स्थित बिनी आयरन आैर visul स्टील उधाेग लिमिटेड काे किया गया था.यह मामला झारखंड में राजहरा उत्तरी काेयला ब्लाॅक में अनियमितता से जुड़ा हुआ है।

 

पूर्व cm ब्यूराेक्रेट पर आराेप है कि उन्हाेंने काेयला ब्लाॅक के आवंटन के लिए पारदर्शी प्रकिया का पालन नहीं किया आैर जिसके चलते करदाताआें के कराेड़ाें रूपये का बंदरबाट काे गया। पूर्व काेयला सचिव गुप्ता पर कम से कम आठ मामले दर्ज है। दिल्ली काेर्ट ने कहा काेड़ा,बसु आैर दाे ब्यूराक्रेट ने काॅल ब्लाॅक आवंटन में visul काे मुनाफा पहुंचाने का काम किया है। हालांकि सभी आराेपी इन आराेपाें काे बेबुनियाद करार दे रहे है।

 

झारखंड में अधिकारियों की लापरवाही, धनबाद में कूडे वाली गाडी से उठाया शव

धनबाद।आर्थिक तंगी और भूख से मौत के  मामले के आरोप में घिरे धनबाद जिला प्रशासन ने एक और मानवता को शर्मशार कर देने वाले वारदात को अंजाम दिया है । इस बार धनबाद जिला प्रशासन की लापरवाही एक जिन्दा इंसान के बदले एक मृत शव के साथ देखने को मिला है।

 

आर्थिक तंगी और भूख से मौत के मुँह में समाए धनबाद के बैदनाथ दास के मामले से धनबाद जिला प्रशासन अभी उबरने की कोशिश ही कर रही थी की एक और इंसानियत को शर्मशार कर देने वाले मामले ने उन्हें एक बार फिर से कटघरे में ला खड़ा किया है । दरअसल इस बार लापरवाही जिन्दा इंसान के साथ नहीं, बल्कि एक मृत शव के साथ बरता गया ।

 

ये एक इंसान का मृत शव है जिसे धनबाद नगर निगम के सफाई कर्मी कचड़े वाले वाहन में भेड़-बकरी की तरह लाद कर ले जा रहे है । दरअसल ये धनबाद नगर निगम का 14 नंबर वार्ड का भूली मोड़ का इलाका है, यहाँ पिछले 24 घंटो से एक 74 वर्षीय व्रिद्ध महिला का मृत शव पड़ा था । महिला इस इलाके में भीख मांग कर अपना गुजर बसर करती थी, मौत के 24 घंटे बाद स्थानीय लोगो के सुचना देने पर जिला प्रशासन ने एम्बलेंस की जगह एक कचरा ढोने वाला वाहन और शव को उठाने के लिए स्वास्थ्य कर्मी की जगह कचरा उठाने वाले नगर निगम के कर्मियो को भेजा गया और इन्होंने अपनी आदत के ही अनुरूप मृत वृद्ध महिला के शव के साथ वर्ताव भी किया ।

 

वही इस मामले में वार्ड के पार्षद और पुलिस अधिकारी इस कार्य को महिला के शव के साथ सम्मान जनक कार्य बतला रहे है, जबकि नगर आयुक्त मामले कि जांच की बात कह रहे है ।

 

नगर आयुक्त धनबाद ने कहा कि मामले की जानकारी मिली हैं कि निगम की गाड़ी से लोड कर ले जाया गया । मामले की जांच कर रहे हैं ।

आर्थिक तंगी और भूख से झारखंड में 3 दिन में हुई 2 मौतें

सत्येन्द्र कुमार/राँची। झारखंड के धनबाद में भूख से मौत का एक और मामला सामने आया हैं। आर्थिक तंगी की वजह से व्यक्ति अपना पेट की आग शांत नही कर पा रहा था और अंत में पेट की आग ने उसकी जान ले ली। मामला धनबाद के कतरास  के कुमारजोरी पँचायत का है जहाँ पासीटांड निवासी 56 वर्षीय महेंद्र रविदास की मौत भूख से हो गई यही नही उसका छोटा बेटा भी  बीमारी और भूख से जूझ रहा है।

 

बड़े बेटे पिछले बर्ष बीमारी से मौत हुई थी ।पिता यह सोचकर सदमे में था कि  छोटा बेटे के इलाज कैसे होगा क्या करूँ कुछ समाजमे नही आ रहा था । घर की माली स्थिति भी ठीक नही हैं । जूता पोलिश करके कितना कमा लेंगे । घर में देखने वाला कोई नही हैं । सदमे में महेंद्र की मौत हो गई । मोके पर इलाके के विधायक ने पहुँच कर अश्वासन देकर चले गए ।

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जिला प्रशासन ने सबको मृतक की लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमाॅर्टम के लिए भेज दिया है। लेकिन प्रशासन को यह नजर नही आया कि एक ओर बेटा जो मौत से लड़ रहा हैं उसका इलाज कैसे होगा ।  मौके पर पहुँचे बाघमारा विधायक दल्लू महतो , sdm , के अलावा आला अधिकारी ने उसे इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाना जरूरी नही समझा ।आसपास के लोगो की मदद से कुछ चंदा कर महेंद्र की ओर उसके बेटे की इलाज किया गया लेकिन महेंद्र मौत के मुँह में समा गए ।

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"हाथी सबका साथी" कार्यक्रम में बताया गया हाथी और इंसान के बीच द्वंद से बचने का तरीका

सजल मधु/धरमजयगढ़। वन्यजीवों के साथ मिलकर औऱ उनके साथ सामंजस्य बिठाकर रहने के गुर सिखाने के लिए भारत सरकार हर वर्ष अक्टूबर माह में वन्य जीव सप्ताह का आयोजन करती है। पूरे भारत में सरकार और विभिन्न् संस्थाएं इसका आयोजन करती हैं और लोगों को वन्यजीवों की अहमियत बनाते हुए उनसे प्रेम करने का पाठ पढाती हैं। इसी कडी में छत्तीसगढ के ग्राम क्रोधा में 2 अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर हाथी सबका साथी कार्यक्रम का आगाज़ किया गया,जिसमे ग्रामीणों को हाथी से बचने का उपाय, हाथी को छेडने से होने के नुकसान को वीडियो दिखा कर लोंगो को समझाया गया।

 

इस आम सभा के माध्यम से क्षेत्र में बढ़ते हाँथियों से होनी वाली जनहानि तथा हो रहे हाथियों की मौत जैसे गंभीर मसले को लेकर लोगो में जागरूकता फैलाने कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  सैकड़ों के तादाद गाँववासी और वनअधिकीरी मौजूद रहे सभा में प्रोजेक्टर से चलचित्र के जरिये सभी ग्रामवासियों को हाथियों के रहन सहन के बारे में बताया गया।

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हाथी कैसे रहता है कब विचरण करता है ।हाथी किस स्थिति में लोगो पर हमला करता है। हाथी कब आक्रमक हो जाता है, हाथी से अपना बचाव कैसे करें जैसे महत्वपूर्ण टिप्स के साथ तमाम विषयों पर बहुत ही सुगम तरीके से लोगो को बताया और समझाया गया । एक तरह से हाथी से दुरी बनाकर प्रेम करने का सलिखा सिखाया गया साथ ही एहतियात की दृष्ठि से जंगल में हाँथी का फ़ोटो न खीचना व् उससे दूर रहना लोगो को बताया गया।

 

जब क्षेत्र में हाथियों का झुंड मौजूद हो तो उससे छेड़छाड़ न करें इससे हाथी विचलित हो जाता है और हमला कर देता है। खेत के पास किसी तरह की करंट प्रवाहित वायर न लगाए उससे हाँथी की मौत होने की प्रबल संभावना बन रहती है, क्योंकि  बीते समय में क्षेत्र में करंट से हाँथियों की मौते हो चुकी है। इत्यादि अच्छे गुरो के साथ सुरक्षा के उपाय भी बताए गए । सभी उपाय और सुझाव को सभा में मौजूद तमाम लोगों ने चितमन से सुना और समझा , हाथी हमारा धरोहर है इसकी रक्षा करें, अंत में विभाग ने लोगों से अपील की सभी इस विषम परिस्थिति से निपटने हर संभव वन विभाग की मदद करें है । ।

 

डी.एफ.ओ.प्रणय मिश्रा ने लगभग एक घंटे तक ग्रामीणों से हाथियों के बारे में चर्चा करते हुए हाथी के व्यवहार से जुडे सभी पहलुओं की जानकारी देकर ग्रामीणों को अवगत कराया गया।डीएफओ प्रणय मिश्रा ने वीडियो के मध्यम से ग्रामीणों को 6 रेंज से आए ग्रामीण और  फाॅरेस्ट रेंजर्स को हाथी और इंसान के बीच द्वन्द को कम करने का तरीक़ा बताया।

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इस मौके पर क्षेत्रीय विधायक लालजीत सिंह राठिया ने हाथी सबका साथी कार्यक्रम के आगाज़ गांधी जी की पूजा अर्चना कर ज्योति जलाकर उदघाटन करते हुए कहा कि हाथी सबका साथी कार्यक्रम सराहानीय है तथा ग्रामीणों को दिखये गए वीडियो को ध्यान में रखते हुए इसका पालन करने को कहा। उन्होंने कहा कि मनुष्य और हाथी का द्वन्द हमारी समझदारी से कम हो सकता है। विधायक लालजीत रथिया द्वारा हाथियों से मरने वाले को मुआवज़ा बढ़ाने का माँग डीएफ़ओ और गाँव वाले के सामने खुले मंच पर माँग रखा गया। Dfo और विधायक ने हाथी सबका साथी के टीम सजल मधु और सत्येन्द्र कुमार के द्वारा कार्यक्रम को सराहा और आगे साथ मिलकर हाथी और इंसानो के बीच द्वन्द को रोकने पर काम करेंगे।

 

वहीं जनपद अध्यक्ष श्रीमती कन्या कुमारी राठिया ने कहा की हाथी सबका साथी कार्यक्रम सभी हाथी प्रभावित गांव में विभाग के साथ मिल कर कार्य करे ताकि आम लोंगो को इस कार्यक्रम का फायदा मिल सके।इस अवसर पर वन मंडल अधिकारी डॉ प्रणय मिश्रा,क्षेत्रीय बिधायक लालजीत सिंह राठिया,डॉ खुर्शीद खान,जनपद अध्यक्ष श्रीमति कन्या कुमारी राठिया,सरपंच श्रीमतिअमर कुँवर राठिया,छाल रेंजर एस के दुबे,धरमजयगढ़ रेजर अन्थोनी, विभाग के कर्मचारी सहित हजारो ग्रामीण इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

एनएच 02 चौड़ीकरण मुआवजा भुगतान में अनियमितता, केन्दीय परिवहन मंत्रालय ने लिया संज्ञान

झारखंड से होकर गुजरे एनएच 02 के सिक्स लेन चौड़ीकरण प्रक्रिया में अनियमितता को लेकर  सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार को पत्र लिखा गया है। पत्र झारखंड हजारीबाग विनोबा भावे विश्वविद्यालय के लॉ के छात्र व बरही निवासी संजय मेहता ने लिखा है।

पत्र में उन्होंने मुआवजा प्रक्रिया में व्यापक अनियमितता को लेकर शिकायत की थी। मंत्रालय को 09 अगस्त 2017 को लिखे गए पत्र में उन्होंने कहा था कि झारखंड से गुजरे एनएच 02 के सिक्स लेन चौड़ीकरण के मुआवजा भुगतान प्रक्रिया में जमीन मालिकों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि पदाधिकारियों द्वारा व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया गया है।पत्र में लिखा था कि झारखंड के हजारीबाग , गिरिडीह , बोकारो एवं धनबाद जिले से गुजरी एनएच 02 के सिक्स लेन चौड़ीकरण में संबंधित जिले के प्रभावित भू - स्वामियों को सम्पति के अनुपात में उचित मुआवजा नहीं प्रदान किया गया है।

संजय मेहता के इस शिकायत पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार ने संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने इस बाबत  सत्येंद्र कुमार , महाप्रबंधक एवं परियोजना निदेशक,  धनबाद को जवाब तलब किया है। एनएच 02 चौड़ीकरण में जिन लोगो को मुआवजा की राशि प्राप्त हो चुकी है उनके मुआवजा से दस प्रतिशत  की टीडीएस राशि काटी गयी है। टीडीएस कटौती के बाद रिटर्न फाइल करने के लिए फॉर्म 16 भी भू - स्वमियों को जारी कर दिया गया है लेकिन टीडीएस कटौती को फॉर्म 26 में अपडेट नहीं किया गया है।

फॉर्म 26 में 10 प्रतिशत  टीडीएस कटौती का जिक्र नहीं होने के कारण रैयतों की करोड़ों की राशि फँस गयी है. रैयत टीडीएस का रिटर्न दाखिल नहीं कर पा रहे हैं। टीडीएस रिटर्न फाइल करने की समय सीमा निश्चित होती है।नियमानुसार समय सीमा बीत जाने के बाद टीडीएस का रिटर्न फाइल मान्य नहीं होता है। ऐसे में रैयत अपनी राशि को लेकर चिंतित हैं। हजारीबाग जिले के प्रभावित लोगों की इस समस्या को लेकर 10 अगस्त 2017 को संजय मेहता ने हजारीबाग उपायुक्त रविशंकर शुक्ला से मुलाकात कर पूरी समस्या को रखा था. उपायुक्त ने इस संदर्भ में हजारीबाग के अतिरिक्त भू - अर्जन पदाधिकारी को आदेश भी दिया था। समस्या के समाधान की बात कही गयी थी लेकिन अबतक इस समस्या का समाधान नहीं किया गया है।

इस संदर्भ में छात्र संजय मेहता ने कहा की विस्थापित भू - स्वामियों के साथ गलत किया जा रहा है। एनएच 02 फोर लेन चौड़ीकरण में रैयत एक बार विस्थापित हो चुके हैं। दूसरी बार सिक्स लेन चौड़ीकरण में पुनः विस्थापित हो रहे हैं। ऐसे में सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी लेकिन रैयतों की समस्या को सभी लोगो ने दरकिनार कर दिया है। रैयत ऑफिस के चक्कर लगाकर परेशान हैं। उनकी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है। सही मुआवजा और हक दिलाने का प्रयास जारी है। मंत्रालय के संज्ञान लेने से न्याय की उम्मीद जगी है।

 

नीरज सिंह हत्याकांड: बेजोड़ और बेमिसाल छवि वाले नेता पर 50 से ज्यादा फ़ायर गई चार जाने

झारखंड के धनबाद में मंगलवार शाम हुए पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। बदमाशों ने तकरीबन 50 राउंड गोलियां चलाईं थी। बताया जा रहा है कि नीरज सिंह को 17 गोलियां मारी गईं थीं। इसमें गाड़ी के सामने से 26 गोलियां दागी गईं। हत्यारों की मंशा किसी भी प्रकार नीरज को बचने नहीं देने की नहीं थी। गाड़ी की दूसरी ओर से भी गोली दागी गई। इस खूनी खेल को धनबाद का सबसे बड़ा गैंगवार माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार नीरज सामने की सीट पर ही बैठे थे और उन्हें 17 से ज्यादा गोलियां लगी हैं। फायरिंग के बाद परिजन नीरज सिंह को सेंट्रल अस्पताल ले गए, साथ के लोगों को पीएमसीएच लाया गया। पीएमसीएच में डॉक्टरों ने घोल्टू, अशोक और मुन्ना तिवारी को मृत घोषित कर दिया। इन तीनों की मौत भी घटनास्थल पर ही हो चुकी थी।

मुन्ना और अशोक, नीरज के बहुत विश्वसनीय थे। अशोक उनके निजी सचिव थे। पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की अपनी राजनीतिक पहचान थी। नीरज सिंह झरिया से भाजपा विधायक संजीव सिंह के चेचरे भाई थे. वह धनबाद विधानसभा से चुनाव भी लड़ चुके हैं। सिंह मैंशन में तनाव के कारण झरिया विधायक संजीव सिंह एवं नीरज सिंह के बीच राजनीतिक खींचतान भी चल रही थी। इसी वजह से दोनों भाइयों में हमेशा टकराव बना रहता था।

नीरज सिंह के बारे कुछ ख़ास बातें

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कांग्रेस नेता नीरज सिंह के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपनी जमीन खुद तैयार कि थी, अर्थात उन्होंने खुद अपने बलबूते पर अपनी पहचान कायम कि थी। नीरज सिंह के व्यक्तित्व के बारे में बात कि जाये तो हर वक्त मुस्कुराता चेहरा, दोनों हाथ जोड़कर कर सभी का अभिवादन, बिना संकोच बड़ों का पैर छूना, हर किसी से प्यार से मिलना, छोटे-बड़े सभी आयोजनों में उपस्थिति आदि गुणों ने नीरज सिंह को धनबाद कोयलांचल का सबसे लोकप्रिय युवा नेता बना दिया था। महज सात वर्षों में नीरज ने कोयलांचल की राजनीति में जो लोकप्रियता हासिल की, उसके लिए दो ही शब्द हो सकते हैं-बेजोड़ व बेमिसाल। नीरज कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे, लेकिन उनकी लोकप्रियता पार्टी लाइन से ऊपर उठ चुकी थी।


धनबाद की घटना पर सीएम रघुवर दास नाराज हैं। उन्होंने डीजीपी को धनबाद में सुरक्षा कड़ी करने के दिए निर्देश। घटना के बाद डीजीपी ने एसआईटी का गठन किया हैं। एडीजी सीआईडी अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में CID की टीम धनबाद रवाना।

इटली की अतिथि ग्रेको लावरा हजारीबाग के डोड़वा गांव में

ईटली की रोम युनिवर्सिटी की छात्रा ग्रेको लावरा इन दिनों हजारीबाग के कटकमसांडी प्रखंड अंतर्गत डोड़वा गांव में है। वह गांव के मूल निवासी एवं युवा ब्लॉगर संजय मेहता के विशेष आमंत्रण पर डोड़वा  पधारी है। ग्रेको लावरा आदिवासियों के ग्राम्य जीवन स्तर को नजदीक से समझने में रूचि रखने वाली एक छात्रा है। वर्तमान में वे आदिवासी जीवनषैली की वेदना और कठिनाइयों को नजदीक से जानने की कोशिश कर रही हैं।

 

क्या है डोड़वा रेसीडेंसी ?

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डोड़वा रेसीडेंसी संजय मेहता द्वारा शुरू किया गया एक रेसीडेंसियल कार्यक्रम है। इसके माध्यम से ग्राम्य जीवन स्तर , आदिवासी जीवन शैली , गांवों के परंपरागत रीति-रिवाज को नजदीक से जानने एवं समझने की कोशिश की जा रही है। इस रेसीडेंसी में देश - विदेश से वैसे अतिथियों को आमंत्रित किया जाएगा जो ग्राम्य जीवन स्तर के विकास के लिए अपने-अपने स्तर से रचनात्मक एवं ज़मीनी कार्य कर रहे हैं। इस क्षेत्र में रूचि रखने वालों को यह रेसीडेंसियल कार्यक्रम निःशुल्क अवसर उपलब्ध कराएगा। संजय मेहता  द्वारा इस कार्यक्रम की शुरूआत बिना किसी सरकारी सहायता के व्यक्तिगत तौर पर की गई है। ग्रेको लावरा इस रेसीडेंसी की पहली अतिथि है। डोडवा रेसीडेंसी के बारे में बताते हुए संजय मेहता ने कहा कि यह अनोखा कार्यक्रम इस मायने में भी खास है कि जो भी अतिथि हमारे यहां विदेश से पधारेंगे वे अतिथि नहीं बल्कि एक घरेलू सदस्य होंगे। उन्हें रेसीडेंसी में गांव के मौलिक जीवन स्तर के बीच समय बिताना होगा साथ ही भोजन भी गांव की शैली में ही करना होगा। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि जो भी इस विषय को समझने की कोशिश करें उन्हें विषय की सत्यता और भावनात्मकता से अंदर तक जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि यह एक ऐसा प्रयास है जिसके माध्यम से गांव की संस्कृति को दूसरे देशों से परिचय कराना है।

 

 

क्या है रेसीडेंसी का लक्ष्य ?

 

रेसीडेंसी के रचनात्मक प्रयासों के माध्यम से आदिवासियों एवं ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी। अतिथि अपने अनुभवों को लिखेंगे। उनके अनुभवों एवं विचारों के आधार पर एक बेहतर कार्ययोजना तैयार करने का लक्ष्य है। रिसर्च के माध्यम से रेसीडेंसी देश - विदेश के लोगों से जुड़कर कार्य  करेगा।

 

कौन हैं संजय मेहता

 

 

हजारीबाग जिला निवासी 23 वर्षीय युवा संजय मेहता राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ काम कर चुके हैं। लॉ की पढ़ाई के कारण फिलहाल राजनीतिक प्रबंधन के काम से दूर हैं। पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्कोत्तर किया है। वर्तमान में युनिवर्सिटी लॉ कॉलेज,हजारीबाग के छात्र हैं। ‘अपनी दरिया’नाम से ब्लॉग लिखते हैं। ऑल इंडिया लेखन प्रतियोगिता  में इन्हें 2012 में मुंबई में सम्मानित किया जा चुका है। आदिवासी एवं ग्राम्य जीवन स्तर के उत्थान के लिए लगातार प्रयासरत हैं। आदिवासियों पर रिसर्च कर रहे हैं। सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए लगातार नवीन पहल करने के लिए प्रयासरत हैं।

 

झारखंड: रघुवर कहे हम ‘वीर’, अर्जुन चला रहे तीर

झारखंड: रघुवर कहे हम ‘वीर’, अर्जुन चला रहे तीर -संजय मेहता

झारखंड में भारतीय जनता पार्टी में सब ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी में गुटबाजी शिखर पर है। पार्टी नेतृत्व के लाख प्रयास के बाद भी गुटबाजी कम होती नहीं दिख रही है। राज्य में मुख्यमंत्री रघुवर दास की कार्यशैली से भाजपा के ही कई नेता खफा हैं। पार्टी के कई विधायक भी सरकार के कामकाज के रवैये से नाराज हैं। राज्य में भाजपा के पहली पंक्ति के नेता माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी वर्तमान सरकार के मुखिया से नाराज चल रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व को भी पार्टी के भीतरघात की पूरी खबर है।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी के प्रकरण से भी पार्टी की किरकिरी हो चुकी है। ज्ञात हो कि भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी के पुत्र ने नाबालिग लडकी से विवाह कर लिया था। इस प्रकरण में नाबालिग का विवाह कराने के आरोप में ताला मरांडी एवं उनके पुत्र पर पुलिस द्वारा मामला दर्ज कर लिया गया था। जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अंदरखाने से यह भी खबर है कि कई पुराने नेता नए अध्यक्ष के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं। पार्टी में अलग - अलग नेताओं की अपनी - अपनी लॉबी चल रही है। राज्य में सीएनटी/एसपीटी विधेयक में संशोधन को लेकर भी पार्टी में दो फाड है। कुछ दिनों पूर्व अर्जुन मुंडा ने सीएनटी/एसपीटी संशोधन विधेयक पर मुख्यमंत्री रघुवर दास को खुला पत्र लिख दिया था और उन्हें चेताया था कि संशोधित विधेयक का प्रारूप जन विरोधी है। अर्जुन मुंडा ने मीडिया में भी सीएनटी/एसपीटी को लेकर अपनी नाराजगी जतायी थी। लेकिन रघुवर दास के द्वारा उनके विचार को तवज्जो नहीं दी गयी।

नए साल में एक जनवरी के दिन जब मुख्यमंत्री रघुवर दास अर्जुन मुंडा के क्षेत्र सरायकेला में खरसांवा गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहूंचे तो उनपर जुते बरसाए गए और जमकर विरोध किया गया। एक जनवरी के दिन अर्जुन मुंडा भी शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि देने पहूंचे थे लेकिन बीजेपी के नेता होने के बावजूद अर्जुन मुंडा का विरोध ग्रामीणों ने नहीं किया। बाद में यह कहा गया कि विरोध झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा किया गया था लेकिन राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि रघुवर दास ने अर्जुन मुंडा के पत्र को सम्मान नहीं दिया जिसके परिणामस्वरूप अर्जुन मुंडा गुट ने इस घटना को अंजाम दिया। फिलहाल अंदर - अंदर ही रघुवर और अर्जुन मुंडा का खेमा एक दूसरे के खिलाफ काम कर रहा है।

 

अर्जुन मुंडा द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के बाद मीडिया के माध्यम से रघुवर दास ने कहा था कि ‘‘मैं किसी से डरता नहीं यदि जरूरत पड़ी तो विधेयक में और संशोधन किया जाएगा।’’ रघुवर दास के इस बयान ने भीतरघात की आग में घी डाल दिया। इससे पूर्व कोल्हान क्षेत्र में रघुवर दास के खिलाफ पोस्टरबाजी भी की गयी थी। गुटबाजी की लड़ाई अब जुते तक पहूंच चुकी है। वहीं अन्य दलों के नेता इसपर चुटकी ले रहे हैं। पार्टी का हित चाहने वाले नेताओं का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी के अंदर की गुटबाजी से राज्य में एक गलत संदेश जा रहा है। वहीं आम लोगों , बुद्धिजीवियों का मानना है कि राजनैतिक भीतरघात व आपसी वैमनस्यता के चलते राज्य में विकास के कार्य बाधित हो रहे हैं। भाजपा को इन पहलुओं पर विचार करने की जरूरत है।

मां के लिए अंडा चुराने वाले इस बच्चे की कहानी रुला देगी आपको!

गोड्डा,झारखंड के गोड्डा के पांडूबथान में एक बच्चे को पता नहीं कि मदर्स डे क्या होता है। लेकिन कक्षा तीन में पढने वाला अमित कोडा को इतना जरूर पता है कि उसकी अपनी बीमार मां के लिए अंडा खाना जरूरी है,पर सवाल है कि रीढ़ तोड़ देने वाली गरीबी और उस पर से टीबी से ग्रसित उसकी मां को पौष्टिक आहार के रूप में अंडा कहां से मिलेगा। जबकि डॉक्टर का कहना था कि उसकी मां के लिए अंडा जरूरी है,अमित को एक तरकीब सूझी,उसने हर सोमवार,बुधवार और शुक्रवार को स्कूल में मिड-डे मील में मिलने वाले अंडे को छिपाकर लाता और अपनी बीमार मां को खिलाता।वर्ग तीन में पढ़ने वाले इस बच्चे को एक ही चिंता सता रही है कि किसी भी तरह अंडा खाकर उसकी मां को टीबी जैसे बीमारी से निजात मिले और उसे मां की ममता की छांव निरंतर मिलता रहे।

अमित कोडा का कहना है कि अगर उसकी मां ही नहीं रही तो उसे रोज स्कूल कौन भेजेगा? अमित का कहना है कि जब मेरी मां स्वस्थ्य हो जायेगी तो मैं अंडा खाने लगुंगा।जबकि उसकी मां आधा अंडा उसे खिलाने की जिद्द करती है,पर अमित अपनी मां की बात टालकर पूरा अंडा अपनी मां को खिलाता है। बच्चे का कहना है कि जहां पैसे के खातिर उसे प्रतिदिन खाना नसीब नहीं होता तो वो अंडा कहां से लायेगा।अमित पांच भाई-बहन है जिसमें चार बहनें हैं।अमित की मां सावित्री डॉट्स के माध्यम से टीबी की दवा खा रही है।

सन 2000 में झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।तकरीबन 14 वर्षों तक झारखंड को आदिवासी सीएम ही मिला,बावजूद झारखंड में आदिवासियों की हालत दयनीय बनी हुई है।यहां अभी भी आदिवासी भूखे मरने की कगार पर हैं। बता दें कि गोड्डा से सांसद बीजेपी के निशीकांत दुबे है,जो अपने क्षेत्र में विकास और कार्यों का बखान करते नहीं थकते,लेकिन उन्हीके संसदीय क्षेत्र गोड्डा में एक आदिवासी की मर्मस्पर्शी घटना कुछ और ही बयां कर रही है।

उज़्बेकिस्तान से पदक जीत कर मिर्ज़ापुर लौटने पर निधि का जोरदार स्वागत

मिर्ज़ापुर की अन्तर्राष्ट्रीय पॉवरलिफ्टिंग  खिलाड़ी निधि सिंह पटेल  ने एक बार फिर से पॉवरलिफ्टिंग में  विदेश की धरती पर रजत पदक जीत कर  भारतीय तिरंगा लहराया देश का नाम रोशन किया।उज़्बेकिस्तान से  पदक जीत कर आज मिर्ज़ापुर लौटने पर निधि का जोरदार स्वागत किया गया इस दौरान रेलवे स्टेशन पर सैकड़ो की संख्या में पहुचे खेल प्रेमी ने  निधि के स्वागत फूलमालाओं और ढोल नगाड़े से स्वागत किया है ।

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निधि ने उजबेकिस्तान में  14 अक्टूबर  से 20 अक्टूबर  2016 तक आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय एशिया बेन्च प्रेस पावरलिफ्टिगं चैम्पियनशिप के 57 किलोग्राम भार वर्ग में अपने प्रतिद्वंद्वियों से कड़ा मुकाबला करते हुए निधि सिंह पटेल ने  87.5 किलो भार उठा कर रजत पदक पर कब्जा जमाया ।इस दौरान  निधि ने बहुत ही कड़ा   मुकाबला करते हुए बहुत ही मामुली अंकों से कजाकिस्तान की सेलिवा इरिना के गोल्ड से चूक  गई। कजाकिस्तान की  सेलिवा इरिना ने 105. 98 अंक के साथ गोल्ड, वहीं निधि सिंह पटेल ने 105.32 अंक के साथ भारत की झोली में रजत पदक डाल दिया। वहीं कजाकिस्तान की कुरिशेवाओल्गा ने 87.69 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रही।

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