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updated 12:34 PM UTC, Jun 23, 2017
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सुपर 30 का रिकाॅर्ड इस साल भी कायम 30 में से 30 छात्र IIT JEE में सफल

पटना: गणितज्ञ आनंद कुमार के सुपर 30 ने एक बार फिर से एक रिकॉर्ड बनाया है क्योंकि 30 में से 30 उम्मीदवारों ने आईआईटी-जेईई एडवांस्ड परीक्षाओं में सफल हुए है, जिसके परिणाम रविवार को घोषित किए गए थे।गौरतब है कि सुपर 30 पिछले 15 सालों से गरीब व वंचित वर्गों के छात्रों को मुफ्त कोचिंग के साथ रहने खाने जैसी सभी सुविधाएं मुफ्त प्रदान करता है।

 

सुपर 30 संस्थापक ने कहा "मुझे खुशी है कि इस साल सभी 30 उम्मीदवारों ने आईआईटी-जेईई में सफलता प्राप्त की है अब सुपर 30 को एक बहुत जरूरी विस्तार देने का समय आ गया है। अब हम देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों को चुनने के लिए टेस्ट आयोजित करेंगे।जिसका विवरण वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। शुरुआत के 15 वर्षों में, सुपर 30 ने 450 उम्मीदवारों में से 396 विद्यार्थियों को आईआईटी में भेजने में कामयाबी हासिल कर ली है।

 

गौैरतलब है कि सुपर 30 के 30 छात्रों जिन्होंने प्रतिष्ठित आईआईटी-जेईई एडवांस 2017 को पास किया है, उनके अभिभावक भूमिहीन किसान, अंडा विक्रेता, बेरोजगार पिता के वारिस हैं। परिणामों के बाद मीडिया के लोगों से बात करते हुए, कुमार ने सुपर 30 की सफलता की कहानी को अपने छात्रों के कड़ी मेहनत और धीरज के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि देश में अपने प्रसिद्ध 'सुपर 30' का विस्तार करने का यह समय है।

 

कई प्रेरणादायक कहानियां हैं जो हर बार की तरह सुपर 30 कोचिंग इंस्टीट्यूट से इस साल भी निकली हैं। चाहे वो बेरोजगार पिता के बेटे केविन हों, या सड़क के अंडा विक्रेता के बेटे अरबाज एक खेत के मजदूर के बेटे अर्जुन या भूमिहीन किसान के बेटे अभिषेक सब की कहानी एक जैसी है, इन सभी ने गरीबी और कष्टों की कड़ी बाधाओं को दूर कर आईआईटी में एडमीशन पाकर जो सफलता पाई है वो उनके जैसे कई अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं।

 

केल्विन के पिता दीपक बेरोजगार हैं वह लोगों को योग सिखाता है, लेकिन उनकी कमाई दोनों के लिए पर्याप्त नहीं है। लेकिन दीपक को पता था कि गरीबी के जीवन से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका शिक्षा ही है। आज केल्विन के खुशी के आँसू नही रुक रहे क्योंकि वह गणितज्ञ आनंद कुमार के साथ बैठा है।

 

तो अरबाज के पिता बिहार के बिहारशरीफ़ जिले में अंडे बेचते हैं लेकिन उसने गरीबी से हिम्मत नही हारी उसमें शिक्षा के माध्यम से हमेशा अपने जीवन को बेहतर बनाने की लगन थी अरबाज ने बताया कि "आनंद सर ने मुझे मेरी क्षमताओं के बारे में बताया जिससे मेरे अंदर आत्मविश्वास बढा। और अब, मेरे पिता को खराब मौसम पर अंडे नही बेचने पड़ेगें।

लालू के कहने पर साथ आए अखिलेश और मायावती, यहाँ करेंगे एक साथ रैली

पटना: बिहार में जदयू और कांग्रेस के साथ महागठबंधन कर बीजेपी को रोकने में कामयाब हुए राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अब 2019 लोकचुनाव से पहले अखिलेश यादव और मायावती की दोस्ती कराने की तैयारी में हैं। आगामी अगस्त में पटना में होने वाली राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव की रैली में मंच साझा कर नयी संभावनाओं की इबारत लिखती नजर आएंगी।

 

राजद की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अशोक सिंह ने बताया कि एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी मुखिया मायावती ने आगामी 27 अगस्त को पटना में आयोजित होने वाली लालू की रैली में शिरकत पर रजामंदी दे दी है। राजद प्रमुख लालू ने इन दोनों नेताओं को इस रैली में शामिल होने के लिये हाल में फोन भी किया था। सिंह ने बताया कि एसपी संस्थापक मुलायम सिंह यादव को भी रैली में लाने की कोशिशें की जा रही हैं।

 

 

बता दें की सपा और बसपा के एक मंच पर साथ आने को राजनीतिक हलकों में सूबे की राजनीति के एक नये दौर के उभार के रूप में देखा जा रहा है। खासकर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों करारी शिकस्त ने इन दोनों दलों को साथ आने के बारे में सोचने पर मजबूर किया है।

बिहार में नहीं मिली रंगदारी तो लड़की को जिंदा दफना दिया, फिर हुआ कुछ ऐसा...

बिहार: 1 लाख कि रंगदारी न देने कि वजह से लडकी को जिन्दा दफना दिया। मामला बिहार के समस्तीपुर जिले का है। यहां के कुछ दंबगों जमीन विवाद के चलते एक लड़की के जमीन में जिंदा दफनाने की कोशिश की। उन्होंने ट्रैक्टर की ट्रॉली में लदी मिट्टी इस लड़की के ऊपर लाकर उड़ेल दी। लड़की का पूरा शरीर मिट्टी से दब गया था सिर्फ उसका सिर दिखाई दे रहा था, जिसके बाद पास के कुछ लोगों ने उसे मिट्टी से बाहर निकाल कर बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरो ने उसे दरभंगा मेडिकल अस्पताल रेफर कर दिया।

लडकी कि माँ का कहना कि दबंगों ने रंगदारी मांगी थी हमने देने से मना कर दिया तो उन्होंने मेरी बेटी को जिन्दा दफ़नाने कि कोसिस की है।

पुलिस ने पीड़िता की मां के बयान के बाद छानबीन शुरू कर दी। दो लोगों को हिरासत में भी लिया गया है, जिनसे पुलिस पुछताछ कर रही है।

बड़ा खुलासा: जानिए चूहों ने कैसे पी 9 लाख लीटर शराब

पटना: बिहार में जहां पिछले 1 साल से पूरी तरह से शराबबंदी लागू है, वहां अब आम आदमी नहीं बल्कि चूहे शराबी हो गए हैं। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पूर्ण शराबबंदी के फैसले के दौरान राज्य में लाखों लीटर शराब जब्त की गई। अब खबर ये आ रही है कि जब्त की गई शराब की खेप मालखाने में रखे-रखे चूहे गटक गए। करीब 9 लाख लीटर शराब मालखाने से चूहों द्वारा गटके जाने का मामला सामने आया है।

 

बिहार में पूर्ण शराब बंदी के मद्देनजर सघन अभियान के दौरान राज्य में जब्त के बाद पुलिस मालखाने में रखी करीब 9 लाख लीटर से अधिक शराब को चूहों द्वारा गटक जाने का मामला प्रकाश में आया है।

 

 

सूत्रों के अनुसार मीडिया कि रिपोर्ट्स के आधार पर बिहार पुलिस मुख्यालय ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक एस के सिंघल ने बताया कि पटना क्षेत्र के पुलिस महानिदेशक को मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

चंपारण में सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष में गांधी और गांव पर चर्चा

देश भर में मनाए जा रहे चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के दौरान अनोखा कार्यक्रम बिहार के चंपारण में ही आयोजित हुआ। 15 अप्रैल को पूर्वी चंपारण के एक छोटे से गांव फुलवरिया में लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन किया गया। किसी गांव में लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन अपने-आप में बेहद खास बात थी। फुलवरिया गांव जिले के सुगौली प्रखंड में है और आज़ादी की लड़ाई में इस गांव के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शायद यही वजह है कि गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की।

 

कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे यूपी के पूर्व डीजीपी और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी विभूति नारायण राय ने इस कार्यक्रम को बापू के सपनों का कार्यक्रम बताया। राय ने कहा कि बापू ने गांवों को समृद्ध बनाने के जो रास्ते सुझाए ये कार्यक्रम उसी रास्ते पर एक यात्रा है। श्री राय देश के जाने-माने स्तंभकार और लेखक भी हैं। गांव के लोगों के बीच पहुंचे देश के बड़े लेखक-पत्रकारों में अरविंद मोहन भी शामिल थे। इस मौक़े पर अरविंद मोहन की लिखी तीन किताबों का विमोचन भी हुआ। तीनों किताबें चंपारण सत्याग्रह पर लिखी गईं हैं।

 

चम्पारण सत्याग्रह के सहयोगी और चम्पारण सत्याग्रह की कहानी को सस्ता साहित्य मंडल ने प्रकाशित किया है जबकि प्रयोग चम्पारण ज्ञानपीठ प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। मौके पर अरविंद मोहन ने कहा कि चंपारण के किसानों को एक बार फिर नील की खेती शुरू करनी चाहिए, इस बार ये खेती खुद के मुनाफे के लिए होगी न कि अंग्रेजों के मुनाफे के लिए। वरिष्ठ पत्रकार और प्रभात खबर अखबार के संस्थापक संपादक एस एन विनोद ने चंपारण सत्याग्रह के इतिहास को याद किया। इस मौके पर ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व डायरेक्टर जनरल और देश के जाने-माने कवि लक्ष्मी शंकर बाजपेई ने कहा कि अगर ये कार्यक्रम नहीं होता तो उन्हें सत्याग्रह भूमि पर आने का मौक़ा नहीं मिलता। गांव में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में स्थानीय सांसद डॉ संजय जायसवाल भी शामिल हुए और उन्होंने कहा कि इस किस्म के आयोजन का गांवो में होना निश्चित तौर पर बहुत ही सराहनीय प्रयास है।

 

कार्यक्रम का आयोजन भोर ट्रस्ट नाम की एक संस्था ने किया था। इस मौके पर गांधी की चंपारण यात्रा से जुड़ी एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया। भोर लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजक और वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा ने कहा कि चंपारण में गांधी का आंदोलन ये साबित करता है कि जुर्म के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन करके भी गुलामी से मुक्ति पाई जा सकती है। समारोह में पंचायत प्रतिनिधियों और गांधी से जुड़े सवालों का जवाब देने वाले गांव के करीब 50 स्कूली बच्चों को भी सम्मानित किया गया।

बिहार में रामनवमी पर देवी-देवताओं के पोस्टर फाडे! नवादा में कर्फ्यू जैसा माहौल

बिहार: बिहार के नवादा जिले में बुधवार को राम नवमी के अवसर पर कुछ लोगों द्वारा शहर में लगाए गए हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर फाड़ दिए। जिसके बाद विवाद होने से शहर में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। शहर के कोने-कोने पर प्रशासन की कड़ी नजर है। शहर में कर्फ्यू जैसे हालात हैं, जिसे देखते हुए पुलिस बल को तैनात कर दिया गया। नवादा में राम नवमी के अवसर पर कुछ शरारती तत्वों ने जमकर मनमानी की। राम नवमी के जुलूस के दौरान गाड़ियों के शीशे तोड़ने और दुकानों को लूटने की कोशिश की गई।


जिसको देखते हुए पुलिस प्रशासन कड़क हुई और लोगों को गिरफ्तार भी किया। जिसके बाद से पुलिस ने हालत नियंत्रण में किये। नवादा में पहले भी राम नवमी के अवसर पर विवाद हुए हैं और प्रशासन हमेशा राम नवमी के अवसर पर काफी सतर्कता बरतती है।

सीतापुर में स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर पर हो रहा मजाक

गौरव शर्मा/सीतापुर देश में प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही प्रदेश में सफाई व्यवस्था को लेकर संजीदा हो लेकिन शायद सीतापुर जनपद के स्वस्थ्य अधिकारी उनकी इस संजीदगी से कोई सरोकार नहीं रखते है , और शायद तभी जिला अस्पताल में गंदगी का ढेर लगा है , आवारा जानवर मरीजो के कमरों में चहल कदमी करते नजर आते है। लेकिन इन सब पर यहाँ का स्वास्थ्य महकमा आँखे बंद कर मौन क्यों बैठा है ? यह एक सोंचनीय विषय है।

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स्वास्थ्य विभाग एक ऐसा महत्वपूर्ण स्थान है , जहा पर सफाई व्यवस्था दुरुस्त होना अत्यंतया  लाजिमी माना जाता है। कारण स्पस्ट है की गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीज को साफ़ सुथरे माहौल में उचित इलाज उपलब्ध कराया जा सके। लेकिन उत्तर प्रदेश के जनपद सीतापुर के  जिला अस्पताल में ऐसा कुछ बिलकुल भी देखने को नहीं मिलेगा। अस्पताल में निरीक्षण के दौरान जब हमने सबसे संवेदनशील यूनिट बर्न विभाग का रुख किया। बर्न विभाग परिसर की दीवार के चारो और कूड़े का अम्बार लगा हुआ था , जिसकी बदबू से सांस लेना भी मुश्किल था। यूनिट के अन्दर का माहौल देख कर तो ऐसा लगा जैसे यहाँ मरीज सी ज्यादा आवारा कुत्तो ने जगह जमा रक्खी हो. ऐसे में ये अंदाजा लगाना आसान नहीं था की जिला अस्पताल के अधिकारी बीमारियों के इलाज में जुटे है या बीमारियों को दावत देने में।

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अस्पताल परिसार में व्याप्त गंदगी के बाबत जब जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ए.के.गौतम से बात की गयी तो उन्होंने बड़ी ही सरलता से कहा की अब जिला अस्पताल में एकत्र होने वाला कूड़ा आम कूड़े से अलग है इसलिए बदबू होना आम है । कूड़ा हटाया जाता है लेकिन दो से तीन दिनों में संवेदनशील यूनिट बर्न विभाग के पास खुले में कूड़े की भरमार होने से यहाँ के मरीज कितना सुरक्षित है , इस बात का जवाब भी बड़ी ही सरलता से कोई भी आम आदमी दे सकता है।

 

गौरतलब बात ये है की जब स्वास्थय विभाग से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी सफाई व्यवस्था के प्रति इतने उदासीन है तो फिर एक आम नागरिक से हम सफाई जागरूकता के लिए कितनी उम्मीदे लगा सकते है।

राजगीर में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का उद्घाटन

संस्कृति मंत्रालय तथा डीम्ड यूनिवर्सिटी नव नालंदा महावीर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय “अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन” का आज उद्घाटन हुआ। बिहार के राजगीर इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कांफ्रेंस में बौद्ध धर्म गुरू दलाई लामा तथा संस्कृति तथा पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षुओं द्वारा मंगला पथ का मंत्रोच्चारण भी किया गया।

अपने उद्घाटन संबोधन के दौरान दलाई लामा ने कहा कि सभी धार्मिक पंरपराओं की सच्चाई एक है जो कभी बदल नहीं सकती। इससे देश के साथ-साथ विश्व को भी प्यार और करुणा के माध्यम से शांति प्राप्त करने में मदद मिलेगी जो बौद्ध धर्म का प्रमुख सूत्र है। उन्होंने कहा कि हमें न केवल बुद्ध और उनकी शिक्षाओं के बारे में पढ़ना चाहिए बल्कि इसका अपने जीवन में प्रयोग और अनुभव भी लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंसा की तरह करुणा भी मानव का एक बुनियादी स्वभाव है। उन्होंने भावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि हमारे अंदर जो नकारात्मक भावनाएं पैदा होती हैं उससे हम पीडित और बीमार हो जाते हैं। इसलिए हमें विपश्यना योग के माध्यम से मन को शुद्ध करना चाहिए।

डॉ. महेश शर्मा ने अपने भाषण में कहा कि नालंदा की पवित्र भूमि पर आने पर उन्हें अत्यधिक प्रसन्नता हुई है। उऩ्होंने कहा कि बुद्ध से संबंधित इस तरह के अधिकांश पवित्र स्थान उत्तर प्रदेश या बिहार में स्थित हैं। उन्होंने विश्व के सभी कोनों से आए हुए मेहमानों का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन सही मायने में भविष्य के लिए कुछ संदेश जरूर देगा।

2017 के पहले संसद सत्र में मिलेगा भोजपुरी को संवैधानिक भाषा का दर्जा

नयी दिल्ली। भोजपुरी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कर संवैधानिक भाषा बनाने का फैसला लिया गया है। संसद के अगले सत्र में सरकार लोगों को यह तोहफा दे देगी। भोजपुरी के साथ ही राजस्थानी और भोटी को भी संविधान की 8वीं सूची में शामिल किया जाएगा।राजस्थानी, भोजपुरी और भोटी देश के बाहर भी बोली जाती हैं। गौरतलब है कि कि 38 भाषाएं आठवीं अनुसूची में आना चाहती हैं।

 

लेकिन पीएम को बताया गया कि तीन भाषाएं ऐसी हैं जिन्हें देश के बाहर मान्यता हासिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान इस ओर तब गया, जब वह भूटान यात्रा पर गए थे। वहां भोटी भाषा बोली जा रही थी।मालूम हो कि भोजपुरी सूरीनाम, मॉरिशस, त्रिनिदाद और फिजी की मान्यता प्राप्त भाषा है, जबकि राजस्थानी भाषा को नेपाल में मान्यता मिली हुई है।


पीएम को बताया गया है कि यह भाषा आपके देश में भी बोली जाती है। इस पर उन्होंने और जानकारी चाही है कि ऐसी कौन सी भाषाएं हैं जो देश के बाहर भी बोली जाती हैं।

नोटबंदी के विरोध में लालू पडे अकेले नही बचा कोई "चारा"

आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव नोटबंदी के खिलाफ मोर्चेबंदी में अब भी लगे हैं...जबकि उनके साथ बिहार की सरकार चला रहे सीएम नीतीश कुमार अलग राह पर हैं...उनका स्टैंड नोटबंदी पर क्लीयर है...इस मसले पर केन्द्र का समर्थन करने के बाद उनके बड़े भाई नाराज हैं....लेकिन आरजेडी कह रही है कि 28 दिसम्बर के महाधरने में नीतीश उनके साथ हैं...शायद ये कहकर आरजेडी समर्थन को लेकर उनपर दबाव बना रही है... शराबबंदी पर माइलेज लेने के बाद नीतीश के लिए, आरजेडी की जिद पर झुकना थोड़ा मुश्किल है... कशमकश की स्थिति है नीतीश के लिए... ऐसे में नीतीश की परेशानी बढ़ाने के सिवा कुछ नहीं कर रहे लालू... लालू को लगता है कि जनता का उन्हें समर्थन मिलेगा...लेकिन अन्दरखाने में आरजेडी भी टूटी लगती है...कि इस मसले पर जनता का समर्थन उन्हें मिलने जा रहा है...पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी ने इसकी झलक दिखा भी दी है...

 

ऐसे में आशंका है कि आरजेडी को मुंह की खानी पड़ेगी.. सरकार में हैं, इसलिए सड़क- रेल रोक नहीं सकते...अराजक स्थिति पैदा होते फिर देर नहीं लगेगी...इसलिए अपनी सरकार की जगहंसाई से भी बचना है...इसलिए महाधरना देंगे...रथ रवाना कर दिया गया है... हरी झंडी के साथ टेम्पो पर कुछ पोस्टर साटकर ...टेम्पो जहां जहां घूमेगी...वहां-वहां कुछ देर के लिए अटेंशन भले ही 'क्रियेट' कर ले...लेकिन 'क्रियेशन' हो ही जाएगा...उम्मीद इसकी कम ही है...

 

बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष मंगल पांडेय और गिरिराज सिंह कह चुके हैं कि लालू के पास अब कोई चारा नहीं है...राजनीति का...मुद्दा है नहीं...इसलिए वो नोटबंदी पर अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए प्रदर्शन पर उतरे हैं...

 

लालू का स्टैंड अपनी जगह ठीक हो सकता है...लेकिन स्टैंड पर वो खुद कितने खरे उतरते हैं वो 28 दिसम्बर को साफ हो जाएगा...बहरहाल, एटीएम और बैंकों पर जो अफरातफरी का माहौल था...वो अब नहीं दिखती...भ्रष्टाचार के मारे लोग अब शांत हैं...नोटबंदी का समर्थन कर रहे हैं...लेकिन शायद राजनीति का तकादा है कि मुद्दा है नहीं फिर भी मुद्दा बनाओ...मुद्दे में भले ही माद्दा न हो...मुंह जरूर चिढ़ाओ....

 

जिन्दाबाद और इनकलाब का नारा लगाने भर से न नोटबंदी खत्म हो जाएगी...न कोई पहाड़ टूट जाएगा...ये लालू भी जानते हैं... लेकिन बिहार में अकलियतों और गरीबों की राजनीति करने वाले लालू को मुद्दा लपकना भी आता है...लपेटना भी...ये उसकी बानगी दिखती है...

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